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MADHYAPRADESH KI AWAZ मध्यप्रदेश की आवाजग्वालियर भिण्ड मुरैना और पन्ना के स्थानीय निवासीयों द्वारा प्रकाशित, ग्वालियर टाइम्स डॉट कॉम की आधिकारिक स्पेस |
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11月26日 शैक्षणिक त्रऽणशैक्षणिक त्रऽण राज्य सभा
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सभा को बताया कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की शिक्षा त्रऽण योजना के तहत सरकारी क्षेत्र के बैंकों का कार्य निष्पादन धनराशि और साथ ही खातों की संख्या की दृष्टि से शिक्षा त्रऽण में निरन्तर वृध्दि दर्शाता है । आईबीए के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च, 2009 की स्थिति के अनुसार सरकारी क्षेत्र के बैकों के शिक्षा त्रऽणों के तहत 16,03,385 खातों में कुल बकाया राशि 27,646 करोड़ रुपये है । 31 मार्च, 2008 को कुल बकाया त्रऽणों में वृध्दि निरपेक्ष और प्रतिशत की दृष्टि से क्रमश: 7,829 करोड़ रुपये और 39 प्रतिशत थी । इसी तरह, इसी अवधि के दौरान खातों की संख्या में 3,56,515 की वृध्दि हुई जिससे 29 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज हुई । इसके अतिरिक्त, पूरे देश में छात्रों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सरकारी क्षेत्र के बैकों को सलाह दी गयी है कि वे आन-लाइन व्यवस्था शुरू करें, आयुपरिचालन क्षेत्र के आधार पर त्रऽण आवेदन अस्वीकृत न करेंउन्हें अन्य बैंकोंशाखाओं को न भेजें । शिक्षा त्रऽण योजना के तहत सरकारी क्षेत्र के बैंकों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा वित्त मंत्री जी की तिमाही बैठकों में बैकों के मुख्य कार्यपालकों के साथ की जाती है ।
बैंको से ऋण की मासिक किस्त की गणनाबैंको से ऋण की मासिक किस्त की गणना राज्यसभा NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 केंद्रीय वित्ता राज्यमंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने ''ऋणदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता'' पर दिशानिर्देश जारी किये हैं जो बैंकों# वित्ताीय संस्थाओं#गैर-बैंकिंग वित्ताीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा अपने-अपने बोर्डों द्वारा विधिवत अपनाए जाने अपक्षित हैं। ये दिशानिर्देश, जिन्हें आवधिक तौर पर संशोधित किया जाता है, अन्य बातों के साथ-साथ, निर्धारित करते हैं कि ऋणकर्ता द्वारा मांगे गए ऋण की राशि पर ध्यान दिये बिना, ऋणों के सभी वर्गों के संबंध मं ऋण आवेदन प्रपत्र व्यापक होने चाहिए। इनमें, संसाधन के लिए देय शुल्क# प्रभार, यदि कोई हों, आवेदन स्वीकार नहीं किये जाने के मामले में प्रतिदेय ऐसे शुल्क की राशि, पूर्व-भुगतान विकल्प और अन्य कोई मामला जो ऋणकर्ता के हित को प्रभावित करता हो, के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे अन्य बैंकों के साथ एक अर्थपूर्ण तुलना की जा सके और ऋणकर्ता द्वारा संज्ञानपूर्वक निर्णय लिया जा सके। इसके अलावा, बैंको को परामर्श दिया जाता है कि वे ग्राहक को ''मूल्य में सब कुछ'' के बारे में जानकारी दें जिससे ग्राहक वित्ता के अन्य स्रोतों के साथ, प्रभारित दरों की तुलना कर सके। '' ऋण और अग्रिम-सांविधिक और अन्य नियंत्रण'' के संबंध में आरबीआई के 01 जुलाई, 2009 को दिशानिर्देशों के अनुसार, ऋणकर्ता को, ऋणकर्ता को, लिखित में और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित, अन्य बातों के साथ-साथ, निबंधन एवं शर्तें और ऋण सुविधाओं को शासित करने वाली अन्य चेतावनियां बतानी चाहिए। ऋण करार की प्रति और साथ में ऋण करार में उल्लिखित सभी संलग्नकों की एक प्रति, निरपवाद रूप से, ऋणों की संस्वीकृति# संवितरण के समय ऋणकर्ताओं को दी जानी चाहिएं। इसके अतिरिक्त, बैंक# वित्ताीय संस्थाएं# एनबीएफसी संगत कारकों जैसे कि निधियों की लागत, मार्जिन एवं जोखिम प्रीमियम, आदि को ध्यान में रखते हुए एक ब्याज़ दर मॉडल अपनाती है और ऋणों तथा अग्रिमों के लिए प्रभारित किये जाने वाले ब्याज़ की दर निर्धारित करती हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे चैकों का स्वीकार किया जानाक्षेत्रीय भाषाओं में लिखे चैकों का स्वीकार किया जाना
राज्यसभा
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 केंद्रीय वित्ता राज्यमंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 जुलाई, 2009 को जारी अपने मास्टर परियन में सभी अनुसूचित बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको को छोड़कर) को सलाह दी है कि सभी चैक फर्ॉम्स हिन्दी तथा अंग्रेजी में ही छापे जाएंगे। हालांकि उपभोक्ता हिन्दी, अंग्रेजी या किसी भी संबंधित क्षेत्रीय भाषा में इन चैकों को भर सकते हैं।
टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली विषय-वस्तुओं का विनियमनटेलीविजन पर दिखाई जाने वाली विषय-वस्तुओं का विनियमन
लोकसभा सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री श्री
सी.एम.जातुया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि समय-समय पर
इलेक्ट्रानिक मीडिया में हिंसा, अश्लीलता एवं
फूहड़ता के दृश्यों के खिलाफ कई संदर्भशिकायतें प्राप्त हुई हैं। लेकिन बढ रही
प्रवृत्ति को दर्शाने के संबंध में कोई औपचारिक अध्ययन जानकारी में नहीं आया है। http://pib.nic.in/archieve/others/2009/nov/h200911243239.pdf
विज्ञापनों की प्रामाणिकता का तंत्रविज्ञापनों की प्रामाणिकता का तंत्र NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009
लोकसभा
सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री श्री सी.एम.जातुया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिससे टेलीविजन पर प्रसारित विज्ञापन के दावों की जांच की जा सके। मौजूदा केबल टीवी नेटवर्क (विनयमन) अधिनिमय, 1995 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में ऐसे किसी तंत्र का प्रावधान नहीं है।
उन्होंने बताया कि सभी टीवी चैनलों को केबल नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत निर्धारित विज्ञापन संहिता के प्रावधानों का अनुपालन करना होता है। उक्त नियमों के नियम (7)(4) में प्रावधान है कि विज्ञापित माल एवं सेवाओं में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 में यथा-उल्लिखित कोई खामी या न्यूनता नहीं होगी।
11月25日 सचिव (आईएंडबी) ने फिल्म उद्योग के स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दियासचिव (आईएंडबी) ने फिल्म उद्योग के स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री रघु मेनन ने फिल्म उद्योग के पणधारकों (स्टॉक होल्डर्स) को आश्वस्त किया कि भारत सरकार फिल्म उद्योग और मीडिया उद्योग के संपूर्ण, स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का पूर्ण प्रयास करेगी । श्री मेनन गोवा में 40वें अन्तरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव के साथ-साथ आज भारतीय उद्योग संघ के सहयोग से पणजी में आयोजित इंडिया-दि बिग पिक्चर सम्मेलन को मुख्यरूप से सम्बोधित कर रहे थे । सचिव श्री रघु मेनन ने बताया कि घरेलू फिल्म व्यवसाय और आईपीआर विषय पर सम्मेलन में पूरे दिन चली बातचीत के मुद्दे भविष्य में दीर्घावधि तक अच्छे फल देने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया क्षेत्र 13 प्रतिशत वार्षिक की दर से विकास कर रहा है। 13 प्रतिशत की वार्षिक दर चक्रवृध्दि विकास के लिए काफी है, लेकिन पर्याप्त नहीं है । उन्होंने कहा कि उपयुक्त फलदायी उपायों साधनों और विषय सुधार तक पहुंचने के लिए उद्योग द्वारा झेली जा रही समस्याओं पर सच्ची अन्तरदृष्टि की आवश्यकता है । उन्होंने सूचित किया कि मनोरंजन उद्योग के लिए नकल (पायरेसी) सबसे बड़ा खतरा है और सरकार अपनी ओर से कानून लागू करने के लिए कदम उठा रही है । श्री रघु मेनन से सूचित किया कि दिल्ली में 5 दिसम्बर, 2009 को होने वाले निर्धारित सम्मेलन में पायरेसी के मुद्दे पर भी विस्तार से बातचीत होगी। सचिव महोदय ने कहा कि सरकार तो दंडात्मक कार्रवाई करेगी ही लेकिन मनोरंजन उद्योग को भी इसे रोकने के लिए कदम उठाने चाहिएं और लोगों को ऐसे उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए जागरूक करना चाहिए। भारतीय फिल्म और टेलीविजन निर्माता संघ लिमिटेड के अध्यक्ष श्री मनमोहन शेट्टी ने अपने विशेष सम्बोधन में कहा कि मीडिया उद्यमियों को औसत भारतीय परिवार के लिए सिनेमा देखने हेतु वहन करने योग्य खर्चे पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए मल्टीप्लेक्स टिकटों की लागत और कलाकारों के अनुबंध की राशि पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। गोवा के मुख्यमंत्री श्री दिगम्बर वी. कामत ने अपने उद्धाटन भाषण में अपनी ओर से फिल्म उद्योग को गोवा सरकार के पूर्ण सहयोग के लिए आश्वस्त किया।
ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक की सह अध्यक्षता करेंगेज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक की सह अध्यक्षता करेंगे NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 भारत-अजरबैजान व्यापारिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक सहयोग अंतर-सरकारी आयोग की 26 नवम्बर को पहली बैठक का कार्यक्रम है । भारतीय पक्ष की ओर से केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया सहअध्यक्ष होंगे, जबकि अजरबैजान पक्ष की ओर से वहां के पारिस्थितिकी एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री हुसैन्गुलु बाघिरोव इसके सह अध्यक्ष होंगे । बैठक के दौरान परस्पर व्यापार के अवसर, औद्योगिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, परिवहन, ऊर्जा, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यटन, पर्यावरण, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में परस्पर सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है । वित्तीय वर्ष 2008-09 के दौरान दोनों देशों के बीच 22 करोड़ 22 लाख 70 हजार डालर का व्यापार हुआ था । भारत से दवाइयां, मशीनरी एवं उपकरण , आभूषण कपास, ऊन आदि निर्यात हुआ और भारत ने कच्चे पेट्रोल एवं उसके उत्पाद, जैविक एवं अजैविक रसायन आदि आयात किया ।
लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट तथा एटीआर संसद के पटल पर रखी गईलिब्राहन आयोग की रिपोर्ट तथा एटीआर संसद के पटल पर रखी गई
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 गृहमंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने लिब्राहन अयोध्या आयोग की रिपोर्ट, कार्रवाई रिपोर्ट के साथ आज संसद के पटल पर रखी। इस रिपोर्ट के चारों खंडों के साथ कार्रवाई रिपोर्ट भी गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है। यह रिपोर्ट अब http://mha.nic.in/uniquepage.asp?ld Pk=571 पर उपलब्ध है। या लिब्राहन अयोध्या आयोग जांच रिपोर्ट को मंत्रालय की वेबसाइट पर ढूंढे। http://www.mha.nic.in ।
नक्सल प्रशिक्षण केन्द्रनक्सल प्रशिक्षण केन्द्र लोकसभा
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 गृह राज्य मंत्री श्री अजय माकन ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को बताया कि ऐसी कोई सूचना नहीं है जिससे यह प्रतीत हो कि नक्सलवादी और तमिल टाइगर कोई संयुक्त प्रशिक्षण केन्द्र चला रहे हैं। इस संबंध में कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है। तथापि, आतंकवाद, शस्त्र तस्करी आदि से निटपने में विधि प्रवर्तन एजेंसियों के बीच वृहत सहयोग के मुद्दे को पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय विचार विमर्श के दौरान उठाया जाता है।
नक्सली गतिविधियों का वित्तपोषणनक्सली गतिविधियों का वित्तपोषण NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 लोक सभा
गृह राज्य मंत्री श्री अजय माकन ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को बताया कि यह दर्शाने वाली कोई सूचना नहीं है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) विदेशों से धन प्राप्त कर रही है । नक्सलवादी मुख्यत: ठेकेदारों, व्यवसायियों से धन की जबरन वसूली करके, धन ऐंठकर तथा बैंकों को लूटकर धन एकत्र करते हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यह दर्शाने वाली कोई सूचना नहीं है कि नक्सलवादी झारखण्ड और बिहार सहित विभिन्न राज्यों में सैटेलाइट फोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं ।
पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधनपुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधन NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009 लोक सभा
गृह राज्य मंत्री श्री मुल्लापल्ली रामचन्द्रन ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को बताया कि राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने अपनी तीसरी रिपोर्ट में, अन्य बातों के साथ-साथ यह उल्लेख किया है कि पुलिस द्वारा की गयी गिरपऊतारियों में से ज्यादातर गिरपऊतारियां वस्तुत: अपराध की रोकथाम की दृष्टि से न्यायोचित नहीं हैं । उन्होंने बताया कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए वारंट के बगैर गिरपऊतार करने की पुलिस की शक्ति से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहित (क्ध्द. घ्.क्.) की धारा 41 को हाल ही में दण्ड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) विधेयक, 2008 के माध्यम से संशोधित किया गया है । संशोधित धारा 41 (1) के खण्ड (ख) में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति, जिसने कोई ऐसा संज्ञेय अपरोध किया है, जो सात वर्ष से कम अवधि के कारावास से दण्डनीय है, को युक्तियुक्त शिकायत अथवा विश्वसनीय जानकारी अथवा युक्तियुक्त संदेह के आधार पर गिरपऊतार किया जा सकता है और पुलिस अधिकारी को ऐसी गिरपऊतारी संबंधी कारणों को रिकार्ड करना होगा । उक्त अधिनियम के प्रावधानों को अभी लागू किया जाना है । उन्होंने बताया कि इसी बीच, भारत के विधि आयोग ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41(ख) में पुन: यह संशोधन करने की सिफारिश की है कि पुलिस अधिकारी धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के लिए ही नहीं बल्कि धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के कारणों को भी रिकार्ड करने के लिए बाध्य हो । तदनुसार, अन्य बातों के साथ-साथ संसद में एक ऐसा विधेयक पेश करने का प्रस्ताव है जिसमें विधि आयोग द्वारा की गयी सिफारिश की तर्ज पर दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41 (ख) में संशोधन का प्रस्ताव निहित हो ।
11月24日 चर्चे-चर्खे : ब्रम्हा बनाम मुन्ना - राकेश अचलचर्चे-चर्खे : ब्रम्हा बनाम मुन्ना - राकेश अचल लेखक ग्वालियर चम्बल क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक हैं खतरे मे सी एम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खतरे मे है। लगता है शनि की कोई महादशा उन्हे परेशान कर रही है। 10 नवंबर को ग्वालियर में सी एम का उड़न खटोला लेंडिंग के समय वायु सेना की दोजीषों से टकराते-टकराते बचा, वह तो ऐनन मौके पर एटीसी ने ''गो अराउण्ड'' कह कर सबकी जान बचाली। जानकारो का कहना है कि सी एम के घर जब से नोट गिनने की मशीन आई है उसी दिन से कुछ न कुछ अपशकुन हो रहे है। साधना मामी ही अब इसका कोई उपाय कर सकती है। शनि की प्रतिकृति घर में रखने की क्या जरूरत। मशीन का काम हाथो से भी हो सकता है।
किसी को सजा, किसी को मजा आई.ए.एस. श्रीमती अंजू बघेल को जिस तरह से जमीन घोटाले में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में निलंबित किया गया, उसी तरह के आरोपो से घिरे छोटे भैया को जमीन घोटालों की जांच का काम भी सौप दिया गया। छोटे भैया में कुछ तो खास है जो वे हर निजाम में ''इमाम'' की तरह पूछे परखे जाते है। दिग्गीराजा भी उन्हे ''नाक के बाल'' की, तरह सम्हाल कर रखते थे और मामा जी भी ऐसा ही कर रहे है। यानि शिव ने जो संपादा रावण को सौपी थी वही विभीषण को भी सौंप दी।
फिर नही गए पवन शर्मा सरकार किसी की भी हो, चलती आई.एस.एस. अफसरों की ही है। ग्वालियर के नगर निगम आयुक्त डा. पवन शर्मा ने दूसरी बार सरकारी आदेश को संशोधित कर यह बात एक बार फिर साबित कर दी। डा.पवन शर्मा को सरकार ने पहले बुरहानपुर का कलेक्टर पदस्थ किया, लेकिन वे नहीं गए। अबकी बार उन्हे सागर का कलेक्टर बनाया गया, लेकिन वे वहां भी नही गए। उनकी जगह शिवपुरी कलेक्टर को सागर भेजा गया। डा. शर्मा ग्वालियर में ही जमे है। जाहिर है कि पवन शर्मा के पास कोई तो जादुई चिराग का जिन्न है, जो बार-बार उनकी मुराद पूरी कर देता है और बेचारे शिवराज सिंह और उनके मुख्य सचिव राकेश साहनी टापते रह जाते है।
ब्रम्हा बनाम मुन्ना भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर यानि ''मुन्ना'' को उनके साथी-संगी अब ''ब्रम्हा'' कि तरह पूजने लगे है। पार्टी और सरकार के कई प्रस्तावो पर आखरी मुहर ब्रम्हा जी की ही लगती है। कम से कम मुन्ना के ग्रह नगर में तो यहीं मान्यता हैं स्थानीय निकाय चुनावों के लिए टिकटार्थी अपने-अपने नेता की गणेश परिक्रमा कर रहे है लेकिन उन्हे यही सलाह दी जा रही है कि यदि टिकिट चाहिए तो ''ब्रम्हा'' जी का ध्यान करो। सिध्दियां और मनोकामनाएं वही से पूरी होती है।
एम.पी. चाहिए या मेयर स्थानीय निकाय चुनाव के लिए जिन नगर निगमों में महापौर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुआ है, वहां टिकिट की पैरवी करने वालो से पार्टी से पार्टी के नेता, खासकर सत्तारूठ दल के नेता एक ही सवाल करते है कि आपको एम.पी.चाहिए या मेयर। एम.पी. अर्थात मेयर पति। धारणा यह है कि जहां भी महिला महापौर चुनी जाती है वहां ''सत्ता'' महिला महापौरों के पतियों के हाथ में होती है। अभी तक यह जमला पंचायतो में ही प्रचलित था लेकिन अब स्थानीय निकाय चुनाव भी इससे अछूते नहीं रहे।
मामी को ऑफर दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुनी गई श्रीमती मायासिंह को पार्टी के एक गुट ने ग्वालियर से महापौर का टिकिट ऑफर किया है ग्वालियर मे महापौर का पद पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। दुर्भाग्य से पार्टी के पास कोई सर्वमान्य उम्मीदवार नहीं है, ऐसे में कुछ लोगो को श्रीमती माया सिंह के पिछडे होने की याद आई मायासिंह को पार्टी के लोग सम्मान से मामी जी कहते है। मामी जी को जब यह प्रस्ताव मिला तो उन्होने हाथ खड़े कर दिए। वैसे मामी जी पिछली शताब्दी के नौ वे दशक मे उपमहापौर रह चुकी है।
टीसी की खोज म.प्र. सरकार को नया टी.सी., यानि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर खोजने में पसीना आ रहा है। प्रदेश मे लगातार चार साल ट्रासंपोर्ट कमिश्नर रहे एन के त्रिपाठी सी.आर.पी.एफ के महानिदेशक बनकर दिल्ली चले गए। उनके स्थान पर आने के एिल पी.एच.क्यू में बैठे तमाम पुलिस अफसरों ने टेण्डर डाले है लेकिन अभी तक लिफाफे नहीं खुल पाए है। इस शून्य काल में टी.सी. कहने को विभाग के सचिव है लेकिन टीसी का रूतबा गालिब कर रहे है डिप्टी टी.सी.। प्रवर्तन शाखा के डिप्टी टीसी इस समय फुलफार्म मे है। आगे नाथ न पीछे पगा। आपकों पता ही होगा कि ट्रासपोर्ट महकमा सरकार की कामधेनु है। इसे दोहने की कला केवल ट्राँसपोर्ट कमिश्नर को आती है।
नए सी.पी.आर. की खोज काम के बोझ से जमीन में घंसे जा रहे जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव को राहत देने के लिए अब उनके उत्तराधिकारी की गंभीरता से खोज की जा रही है। मनोज श्रीवास्तव ने सत्ता और संगठन की बेहतर सेवाएं कर अपने लिए नया मुकाम लगभग तय कर लिया है। उनके स्थान पर भोपाल के संभाग आयुक्त पुखराज मारू तथा संजय शुक्ला के नामों पर चर्चा हो रही है। मारू के पास हालांकि डिग्रियों का अंबार है लेकिनउनके साथ जुडे विवाद डिग्रियों पर भारी पड़ रहे है। ऐसे में संजय शुक्ला की संभावनाएं ज्यादा उज्जवल और प्रबल है। यह परिवर्तन किसी भी समय हो सकता है। निगम चुनावों का इससे कोई लेना देना नहीं है।
निदंक नियरे राखिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा की सेहत का राज क्या है? खोजा तो पता चला िकवे सदैव अपने निदंको को अपने नियर (पास) रखते है वह भी आगन मे कुटिया डलवा कर। पूर्व विधायक नरेंद्र निरथरे ने जल संसाधन मंत्री के रूप मे अनूप मिश्रा की थोक में शिकायतें की लेकिन मिश्रा जी से जैसे ही जिरथरे ने अपने भतीजे के लिए काम मांगा, स्वास्थ्यम मंत्री के रूप मे मिश्रा जी ने तत्काल बिरथरे के भतीजे को शिवपुरी मे स्वास्थ्य विभाग की दो इमारते बनाने का ठेका दिला दिया। मंत्री जी की इस दरियादिली की खबर पाकर पार्टी के नरियदिल नेता परेशान है। बेचारे मंत्री जी को घेर ही नही पा रहे।
जोशी बनाम जोशी जलसंसाधन विभाग में 307 करोड़ रूपए का घोटाला खुला सो अब घोटाले में लिप्त इंजीनियर अपने नेता यानि चीफ इंजीनियर जोशी को कोस रहे है। खबर है कि चीफ इंजीनियर जोशी ने हरसी बांध परियोजना में करोड़ो के टेण्डर लगाकर भुगतान कर दिया लेकिन विभाग के प्रमुख सचिव जोशी को कानी कौड़ी भी नही दी। जोशी ने जोशी से तकादा भी किया लेकिन रिटायर होने के बैठे चीफ इंजीनियर जोशी ने प्रमुख सचिव जोशी को ढेंगा दिखा दिया। इस पर पंडित जी को गुस्सा आया। उन्होने मामला ई.ओ.डब्लू को दे दिया। मुकदमा दर्ज होते ही तमाम इंजीनियर सस्पेंड हो गए अब उनकी तिजोरियां सोने की ईटें और नोटों के बंडल उगल रही है।
राकेश अचल
ग्राम गाता के विकलांग सतेन्द्र ने लिखी गौरव गाथाग्राम गाता के विकलांग सतेन्द्र ने लिखी गौरव गाथा नेशनल पेरा ओलंपिक स्वीमिंग वाटर पोलों चैम्पियनशिप में जीता कांस्य पदक भिण्ड 23 नवम्बर 2009 तहसील मेहगांव के ग्राम गाता के दोनो पैरों से विकलांग सतेन्द्र पुत्र ग्याराम जाटव 22 वर्ष ने भिण्ड जिले का नाम न सिर्फ प्रदेश में वरन राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश की ओर से कलकत्ता में 9 से 12 अक्टूबर तक सम्पन्न नेशनल पेरा ओलंपिक स्वीमिंग वाटर पोलों चैम्पियनशिप की 50मीटर फ्री स्टाइल तैराकी की एस-2श्रेणी में कांस्य पदक हासिल किया। ग्रामीण परिवेश के निर्धन परिवार में पले 22 वर्षीय सतेन्द्र वर्तमान में ग्वालियर स्थित एसएलपी कॉलेज मुरार में वायोलॉजी विषय से बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययन कर रहे है। उन्होंने बताया कि प्रदेश से उक्त प्रतियोगिता में 22 विकलांग खिलाडियों ने भाग लिया। तैराकी की प्रेरणा कहां से मिली के संबंध में उन्होंने बताया कि वे ग्राम की वैसली नदी में ग्रामीण बच्चों के साथ तैराना सीखे। तैराकी के गुणों को सीखने की ललक हेतु ग्वालियर के फिजीकल कॉलेज में शरदऋतु के उपरांत विशेषज्ञ गुरूजनों के मार्गदर्शन में अभ्यास कर स्वर्ण पदक हासिल करने के लक्ष्य के तहत अभ्यास करेगें।
11月23日 आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- राकेश अचलआसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा राकेश अचल (लेखक ग्वालियर चम्बल क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं ) महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है। भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है। मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है। दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है। विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया। मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी? वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है। दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा। मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है। बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की। संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है। मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ''महा-राष्ट्र'' नही रह जाएगा। महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें। आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके। समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ''महान भारत'' बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ''महाराष्ट्र'' का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)
Rakesh Achal
11月21日 दल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्गदल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग सम्मानीय देशवासियों, आज की दल तंत्रीय राजनीति ने देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखना प्रश्नांकित कर दिया है। समूचे देश में चारों तरफ देश का विद्यटन हो रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी अपनी सत्ता और संप्रभुता स्थापित करने में लगा है। जिसके लिये वह आये दिन दलवाद, जातिवाद, लिंगवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, आर्थिक सम्पन्नता/विपन्नता वाद आदि अनेकानेक वादों का जहर फैलाकर अपने अपने तरीके से अपने लक्ष्य को पाने के लिये अमर्यादित आचरण कर रहा है। यदि समय रहते जनतंत्र को बचाने का कोई कारगर उपचार नहीं हुआ तो देश से जंनतंत्र पूरी तरह मिट जावेगा। देश टुकड़े-टुकड़े हो जावेगा। आज का शोषित वर्ग और अधिक शोषित होगा तथा दल तंत्रीय राजनीति के पोषक, स्वंयभू बन जावेगें।
अभियान का किसी दल से या दल के प्रत्याशी से कोई विरोध नहीं है अपितु दल तंत्रीय शासन प्रणाली से विरोध है। दल का प्रत्याशी कहने को जनप्रतिनिधि होता है किन्तु व्यवहारिक सत्य यह है कि वह जनप्रतिनिधि के नाम वास्तविक तौर पर वह अपने दल का प्रतिनिधि होता है। उसकी निष्ठा पूर्णत: अपने दल के प्रति होती है। दल का प्रत्याशी देश, देश के संविधान, देश की जनता या क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति कतई वफादार नहीं होता। वह केवल अपने दल के प्रति ही वफादार रहता है। लोकसभा या विधानसभा में प्रस्तुत विषयों पर वह अपने दल के हितों के अधीन अपना वोट देता है न कि जनहित में। इस प्रकार जनहित, दलीय राजनीति में नष्ट हो जाता है। दल का प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 173 (क) अंतर्गत बारम्बार यह शपथ लेता है कि वह विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण रखेगा। किन्तु व्यवहार में वह इस शपथ को भूल जाता है और दलीय दल-दल में उलझ जाता है। इस सत्य का प्रमाण आये दिन सदन में सभी दलों द्वारा किये जा रहे आचरण से स्पष्ट प्रमाणित हो रहा है। कोई भी दल तथा उसके प्रतिनिधि स्परूप चुना गया प्रतिनिधि, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति न तो सच्ची श्रध्दा रखता है और न ही निष्ठा। जनता द्वारा चुनें गये ये सभी जनप्रतिनिधि, भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण न रखकर, केवल अपने-अपने दल की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये भारत के संविधान तथा उसके अंतर्गत निर्मित एवं स्थापित विधि के विपरीत प्राय: अविधिक आचरण कर सदनों को आये दिन शर्मसार करते रहते है। सभी राजनीतिक दलों का यह आचरण, जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्र की महत्ता को प्रतिस्थापित करने की ओर अग्रसर होना इंगित करता है। जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप-प्रत्यारोप एक दल, दूसरे दल पर आये दिन लगाता रहता है किन्तु रिश्वत लेने व देने के लिये निर्मित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत अपेक्षित कार्यवाही करने या कराने की पहल किसी भी दल द्वारा नहीं की जाती है। राजनीतिक दलों का यह आचरण भारत की जनता को यह संदेश देता हैं कि कोई भी दल भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा नहीं रखता है और न ही संसद द्वारा बनाये गये किसी कानून के अनुपालन में उनकी स्वयं की कोई रूचि ही है। भारत देश में संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का शासन है जो देश के प्रत्येक राजनीतिक दल, दल के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं नागरिक पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से प्रभावी है। किन्तु आये दिन देखने में यह आ रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का पालन नहीं करना चाहता है तथा संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून को कानून मानने के लिये तैयार नहीं है। प्रत्येक राजनीतिक दल स्वविचारित विचार को ही कानून की संज्ञा देकर, जनहित के नाम पर, अपने-अपने दलों की श्रेष्ठता व महत्ता को प्रतिष्ठित व प्रतिपादित करने के लिये आये दिन समूचे देश में हड़ताल, बाजार बंदी, चक्काजाम, तोड़-फोड़, लूटपाट, दंगाफसाद, धार्मिक उन्माद, बम विस्फोट आदि अनेकानेक भिन्न-भिन्न विद्यटनात्मक तथा हिंसात्मक तरीके अमल में लाते हुये राष्ट्रीय सम्पत्तियों को क्षति तथा देश की आम जनता को जन-धन की हानि पहुचाने जैसी गतिविधियों में संलग्न रहता है। दलबंदी के इस आचरण से देश में भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार और महगांई में आये दिन उत्तरोत्तर वृध्दि होती जा रही है। राजनीतिक दलों का यह आचरण जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्रीय राष्ट्र्र्र की स्थापना किये जाने का द्योतक है। इसलिये दलतंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान का दीप प्रज्वलित करना आज के समय की प्रासंगिकता है। दल तंत्र को भगाना और जनतंत्र को बचाना हमारे अभियान का लक्ष्य है। लक्ष्य प्राप्ति के चार कारक है 1. निष्ठा 2. श्रम 3. कर्म 4. साधना। यदि आप देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत है और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु संकल्पित, देश पर अपनी जान न्यौछावर करने हेतु तत्पर, किसी भी प्रकार के लालच से परे, निष्ठा के धनी, श्रम को समर्पित, कर्म के पुजारी और साधना के साधक है तो इस अभियान को गति प्रदान करने में अपना योगदान दे सकते है। दलतंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओं अभियान के दीप - प्रज्जवन का प्रथम चरण, हमारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुरैना विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना था। इस कार्य के लिये हमें किसी भी प्रकार के धनबल व बाहुबल की कतई दरकार नहीं रही। हमने सिर्फ मतदाता के जनमत समर्थन को शीर्ष प्राथमिकता दी। हम यह अच्छी तरह जानते है कि दलतंत्र का खात्मा धनबल या बाहुबल से नहीं किया जा सकता है। दल तंत्र का खात्मा केवल जनमत से ही हो सकता है। भारत देश के वासियों एवं मतदाताओं से अभियान की यह अपील है कि दलतंत्र को भगाकर जनतंत्र को बचाने के लिये भारत का प्रत्येक मतदाता भावी चुनावों (लोकसभा/विधानसभा/स्थानीय संस्थाओं के चुनाव) में अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट दलों के किसी भी प्रत्याशी को न देकर केवल निर्दलीय प्रत्याशियों को ही अपना वोट दे। एवं दल तंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान को सफल बनाने में अपनी महती भूमिका निर्वहन करें।
अपीलार्थी गोपाल दास गर्ग संयोजक दलतंत्र भगाओ- जनतंत्र बचाओ अभियान गणेशपुरा, मुरैना म0प्र 07532-227836
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