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06 novembre

सड़कें ऊंची-मकान नीचे : यह कैसा विकास

सड़कें ऊंची-मकान नीचे : यह कैसा विकास

निर्मल रानी,  

163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा,  फोन-9729229728  

   हमारे देश में जब कभी भी आम आदमी को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के बारे में सरकारों द्धारा विचार किया जाता है उस समय बिजली,पानी और सड़क की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सर्वप्रथम कार्य करने का प्रयास किया जाता है। और देश के जिन क्षेत्रों में दुर्भाग्यवश बिजली,पानी व सड़क जैसी तीनों बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं,निश्वित रूप से ऐसे क्षेत्रों की गिनती पिछड़े या अति पिछड़े क्षेत्रों में की जाती है। आज पूरे देश में विकास का बिगुल बजता नंजर आ रहा है। देश के प्रगतिशील राज्यों की बातें तो क्या करनी देश के सबसे पिछड़े समझे जाने वाले बिहार,मध्यप्रदेश,उड़ीसा तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी अब विकास कार्यों के समाचार आने लगे हैं। जाहिर है जब इन पिछड़े कहे जाने वाले राज्यों में विकास की बयार बह रही है ऐसे में हरियाणा व पंजाब जैसे विकसित राज्य इस दौड़ से स्वयं को पीछे कहां रख सकते हैं। यहां भी विकास की गंगा बहाई जा रही है। और विकास के मार्ग पर चलते हुए सर्वप्रथम हरियाणा सहित पूरे देश के लगभग सभी राज्यों में आम आदमी के विकास की पहली सीढ़ी के रूप में नगरों,ंकस्बों,गावों व मोहल्लों व पंचायतों की सभी गलियों व सड़कों को पक्का व सीमेंटेड किए जाने का काम शुरु कर दिया गया है।

              इसमें कोई संदेह नहीं कि यातायात की सुचारु व्यवस्था देश व समाज के विकास की पहली व सबसे बड़ी जरूरत है। नि:संदेह हरियाणा जैसे राज्य में लगभग सभी ंजिलों के सभी वार्डों व तहसीलों,पंचायतों तथा ंकस्बों में जनसुविधाओं के मददेनंजर ज्यादातर गलियां पक्की सीमेंटेड बनवा दी गई हैं। इनमें तमाम इलाके तो ऐसे हैं जहां अब इन्हीं गलियों को दूसरी या तीसरी बार बनाया जा रहा है। आम आदमी बेशक इन पक्की सीमेंटेड गलियों का पूरा लाभ उठा रहा है। सुविधाजनक आवागमन होने के अतिरिक्त सपाट सीमेंटेड सड़कों पर चहलंकदमी करना अथवा तीव्र गति से वाहन चलाना बेशक ऐसी पक्की सीमेंटेड गलियों व सड़कों का एक आनन्ददायी पहलू है। परंतु इसी सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है जिसे न तो हम नंजरअंदांज कर सकते हैं और न ही इस पहलू को शासन,प्रशासन व सरकार द्वारा नंजरअंदांज किया जाना चाहिए।

              आबादी के बीच बनने वाली पक्की गलियां व सीमेंटेड सड़कें दरअसल जहां नवनिर्मित हुए ऊंचे मकानों में रहने वाले लोगों के लिए ंफिलहाल वरदान हो सकती हैं वहीं यही सीमेंटेड गलियां पुराने व धरती के सामान्य लेवल  पर बने मकानों के लिए अभिशाप साबित हो रही हैं। दरअसल हरियाणा में नगरपालिकाओं व पंचायतों द्वारा गलियों को पक्का करने के लिए उन्हें कांफी ऊंचा किया जा रहा है। गलियों को ऊंचा करवाना वास्तव में आम आदमी का न तो मंकसद है,न ध्येय है और न ही आम आदमी की इसमें कोई दिलचस्पी है। आम आदमी तो केवल  और  केवल बिना गडढे की सांफ-सुथरी,पक्की और मंजबूत गलियों व सड़कों पर चलने की चाहत  रखता है। परंतु विकास का आंखिर यह कैसा पहलू है कि यदि पहले से बनाई गई एक फुंट ऊंची सीमेंटेड सड़क या गली की मुरम्मत करने का टेंडर नगरपालिका,ज़िलापरिषद अथवा ग्राम पंचायत द्वारा मांगा जाता है उस समय इसी एक फुट ऊंची गली के ऊपर उतनी ही मोटी दूसरी परत को बिछाने की योजना पारित कर दी जाती है।

           इसका परिणाम यह होता है कि उन लगातार ऊंची होती जा रही गलियों के किनारे दोनाें ओर बने मकानों का लेवल इन नवनिर्मित सीमेंटड गलियों के लेवल से लगातार नीचे होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप बारिश का पानी आम आदमी के घरों में प्रवेश करने लग जाता है। बरसात का यह पानी केवल गंदा जल मात्र ही नहीं होता बल्कि यह पानी अपने साथ मलमूत्र के अतिरिक्त तमाम प्रकार की गंदगी आम लोगों के घरों में ले आता है। इसका भी दुष्परिणाम यह हो सकताहै कि ऐसे  प्रभावित परिवार किसी भयानक व संक्रामक बीमारी का शिकार हो जाएं। ऐसी असामयिक बीमारी को प्राकृतिक विपदा कहना भी ंकतई मुनासिब नहीं होगा। क्योंकि किसी मकान के आंगन के लेवल से ऊपर के लेवल पर सड़कों या गलियों का निर्माण करना मानवीय ंगलतियों का परिणाम है,प्रकृति का इसमें क्या दोष?

              इन सीमेंटेड गलियों को ऊंचा करने में सरकार अथवा संबन्धित अधिकारीगण आख़िर इतनी उत्सुकता व तेजी क्यों दिखाते हैं यह भी एक चिंतनीय एवं विचारणीय विषय है। सोचने की बात है कि जिस देश में तमाम क्षेत्रों में आंजादी के तीस,चालीस और पचास वर्षों बाद तक पक्की गलियोंव पक्की सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया था आज ऐसे ही तमाम इलाक़ों में तीन-चार या पांच वर्षों में ही दो-दो बार उन्ही गलियों को पक्का किया जा रहा है तथा उन गलियों की लगातार ऊंचाई भी बढ़ाई जा रही है। और इस प्रकार इन गलियों का लगातार ऊंचा होना पुराने बने मकानों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है।

                      इस प्रकार के निर्माण में धांधली व भ्रष्टाचार के पहलू से देश का कौन सा व्यक्ति वाकिंफ नहीं है? इन सीमेंटेड गलियों के निर्माण में भी धांधली व हेराफेरी का ंजबरदस्त बोलबाला है। हरियाणा में तो कई जगहों पर समाजसेवी जागरूक लोगों द्वारा ठेकेदार को उसकी मनमानी करने से रोका भी जा चुका है। इस आशय के समाचार कई बार टी वी चैनल्स तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हो चुके हैं। परंतु सरकार की ओर से अभी तक ठोस क़दम उठाए जाने अथवा इन सीमेंटेड गलियों के निर्माण से जुड़े भ्रष्टाचारी लोगों  के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने का संभवत:कोई भी समाचार नहीं मिला है। आख़िर आम जनता इस भ्रष्टाचारी नेटवर्क का कब तक और क्योंकर कोप भाजन बनती रहे? जनता, सड़कों व गलियों को पक्का होते तो देखना चाहती है। परंतु उन्हें एक ईंच भी ऊंचा किए जाने की ंकतई पक्षधर नहीं है।

                   कितना दुर्भाग्र्यपूण है कि सड़क व गली निर्माण की व्यवस्था से जुड़े लोग व अधिकारीगण केवल अपने बिल,टेंडर व पैमाइश के मददेनंजर गलियों की मोटाई को अधिक से अधिक ऊंचा करने व ऊंचा दिखाने की चेष्टा करते हैं। जबकि गलियों की इस मोटाई में भी सीमेंट व बजरी के मिक्सचर के अतिरिक्त ईंटे, रोड़े व मिटटी डाली जाती है। चंद पैसों की हेराफेरी की ख़ातिर प्रशासन ऐसी  निर्माण परियोजनाओं को तो अपनी स्वीकृति प्रदान  कर देता है जबकि एक आम आदमी जोकि निरंतर बढ़ती हुई मंहगाई के वर्तमान दौर में अपनी दो वक्त क़ी रोटी मुहैया करने में ही अपनी पूरी तांकत  झोंक देता है। अपनी नंजरों के  सामने अपना ही मकान डूबते देखकर उस व्यक्ति के मन में यह प्रश् अवश्य उठ खड़ा होता है कि मंहगाई के इस दौर में वह व्यक्ति अपना या अपने परिवार का पालन पोषण करे या बने बनाए मकान को तोड़कर केवल इसलिए नया मकान बनाने को मजबूर हो क्योंकि उसके मकान की बाहर की गली का लेवल ऊंचा हो गया है।

              जनता को तकलींफ पहुंचाने वाली ऐसी कष्टदायक योजनाओं को पूरी तरह ख़ारिज कर देना चाहिए तथा इनकी बांकायदा समीक्षा की जानी चाहिए कि आख़िर सरकार का मंकसद सड़कें पक्की करना है या सड़कें ऊंची करना?इस समूचे नेटवर्क में भ्रष्टाचार के सभी पहलुओं का भी पर्दाफाश किया जाना चाहिए। निर्मल रानी

 

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