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05 novembre अब पांच साल होगी राशनकार्ड की उम्रअब पांच साल होगी राशनकार्ड की उम्र कार्ड की हिफाजत उपभोक्ता की जिम्मेदारी, रिकार्ड रहेगा सेन्ट्रल डाटाबेस में, राशनकार्ड नहीं बनेगा पहचान का दस्तावेज, नए खाद्य नियंत्रण आदेश का प्रावधान Bhopal:Wednesday, November 4, 2009 सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की राज्य सरकार की कोशिश के दायरे में सारे संबंधित घटकों को शामिल किया गया है। यह तय कर दिया गया है राशनकार्ड भी किसी निहित स्वार्थ की कारस्तानी का जरिया नहीं बन पाएंगे। राशनकार्ड अब राज्य सरकारी की संपत्ति होंगे। नए खाद्य नियंत्रण आदेश में राशनकार्ड की उम्र पांच साल तय की गई है। लेकिन यह साफ किया गया है कि इसे बीच में भी किसी वैध कारण के चलते खारिज किया जा सकेगा। इस अवधि के बाद एक तयशुदा प्रक्रिया में खाद्य आयुक्त नए सिरे से इन कार्डों की जांच और सत्यापन के बाद इनका नवीनीकरण या नए कार्ड जारी करने की कार्रवाई कर सकेंगे। राशनकार्ड अब जिसे जारी किया जाएगा उसके अलावा अन्य किसी को इसका हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा। यही वजह है कि कार्डधारी को इसकी हिफाज़त खुद करनी होगी और नए आदेश में उसे इस कस्टडी के लिए अधिकृत कर जिम्मेदार बनाया गया है। अब राशनकार्ड पूरी तरह राज्य सरकार की संपत्ति होगा। राशनकार्डों के बारे में नए आदेश में एक और प्रमुख प्रावधान यह किया गया है कि अब किसी भी पहचान के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके चलते ये राशनकार्ड अब परिचय पत्र या पहचान सत्यापन के काम में नहीं लाए जा सकेंगे। राशनकार्ड जारी करने वाला अफसर जब कभी जरूरी समझे इनमें कोई संशोधन या परिवर्तन कर सकेगा और यही नहीं इन्हें रद्द भी कर सकेगा। अलबत्ता, इस कार्रवाई के पहले राशनकार्ड धारक को अपने बयान का मौका भी दिया जाएगा। यही अफसर जब कभी जरूरी हो संबंधित उपभोक्ता को अपना राशनकार्ड पेश करने के लिए कह सकेगा और उपभोक्ता इसके लिए बाध्य रहेगा। राशनकार्ड जारी करने में सख्ती नए खाद्य नियंत्रण आदेश के मुताबिक राशनकार्ड जारी करने की प्रक्रिया सख्त की गई है। अधिकृत अफसर को कार्ड के लिए प्राप्त प्रत्येक आवेदन पत्र की गहराई से पड़ताल करनी होगी। इसके लिए उसे रेण्डम जांच और सत्यापन का रास्ता अपनाना होगा। पूरी संतुष्टि के बाद यह राशनकार्ड जारी कर संबंधित उपभोक्ता के घर या निवास पर ही सुपुर्द किए जाएंगे। एक और अहम जिम्मेदारी इस अफसर की यह रहेगी कि उसे गरीबी रेखा की सर्वे सूची में से ऐसे हितग्राहियों के राशनकार्ड जारी नहीं जारी होने देना है जो उसकी सूचना या जानकारी के आधार पर प्रथम दृष्टया ही गरीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन नहीं करते हों। सेन्ट्रल डाटाबेस राशनकार्डों का अब सेन्ट्रल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है ताकि कहीं फर्जीबाड़ा हो ही नहीं। यह व्यवस्था भोपाल में खाद्य आयुक्त के जिम्मे की गई है।
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