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02 novembre वकीलों को सतत् प्रशिक्षण देने वाले देश के प्रथम संस्थान का उद्धाटनवकीलों को सतत् प्रशिक्षण देने वाले देश के प्रथम संस्थान का उद्धाटन अच्छे अधिवक्ता के लिये केवल कानून की उपाधि ही नहीं व्यवहारिक ज्ञान भी जरूरी- पूर्व न्यायमूर्ति श्री मिश्रा नये कानूनी प्रावधानों से संस्थान अधिवक्ताओं को अपडेट रखेगा- श्री पटनायक ग्वालियर 31 अक्टूबर 09। वकीलों को सतत शिक्षण एवं प्रशिक्षण देने वाला देश का प्रथम एडवोकेट्स कॉन्टीन्यूइंग लीगल एज्युकेशन इंस्टीटयूट का उद्धाटन आज यहां सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं लीगल एज्युकेशन कमेटी वार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमेन श्री ए. पी. मिश्रा ने किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री ए के. पटनायक, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री अरूण मिश्रा, खण्डपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री सुभाष सम्वत्सर, वार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमेन श्री एस एन पी. सिन्हा, राज्य वार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रामेश्वर नीखरा, ग्वालियर वार काउंसिल के अध्यक्ष श्री डी के. कटारे, जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए के. मिश्रा तथा उच्च न्यायालय ग्वालियर खण्डपीठ के न्यायमूर्तिगण व जिला न्यायालय के न्यायाधीशगण, स्टेट व जिला वार काउंसिल के सदस्यगण, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी व पुलिस अधीक्षक श्री ए. सांई मनोहर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं अधिवक्तागण मौजूद थे। संस्थान के शुभारंभ समारोह के अवसर पर आयोजित कानूनविदों की महती सभा को संबोधित करते हुए सुप्रीप कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति श्री ए पी. मिश्रा ने कहा कि अच्छे अधिवक्ता के लिये केवल कानून की उपाधि ही पर्याप्त नहीं होती अपितु व्यवहारिक पक्ष का ज्ञान, नैतिकता तथा न्यायालय के शिष्टाचार का पालन अति आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान विभिन्न कोर्सेस के माध्यम से अधिवक्ताओं में इन जरूरतों की पूर्ति करेगा तथा पूरे राष्ट्र के लिये यह अनुकरणीय सिध्द होगा। श्री मिश्रा ने कहा मध्य प्रदेश के बाद अन्य राज्यो में भी इस तरह के संस्थान स्थापित किये जायेंगे। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्री मिश्रा ने वकीलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वकीलों का समाज के प्रति गुरूतर दायित्व रहा है। उन्होंने कहा आजकल जब विश्व के सभी देशों में आतंकवादी व अन्य आपराधिक गतिविधियाँ बढ़ रहीं हैं। भ्रष्टाचार और नैतिक पतन के साथ-साथ लोगों में व्यवसायिकता हावी हो रही है। सभी तरह के व्यवसायों में गिरावट आई है। इन परिस्थितियों का सामना करने के लिये वकीलों को आगे आना होगा। श्री मिश्रा ने कहा देश की आजादी की लड़ाई और विश्व के अन्य देशों में वकीलों ने समय-समय पर समाज का नेतृत्व कर रचनात्मक दिशायें दी हैं। उन्होंने कहा व्यक्ति की जब इच्छायें पूरी होती हैं, तो उसमें लालच पैदा होता है और जब इच्छायें पूरी नहीं होती तब व्यक्ति को गुस्सा आता है। यह दोनों ही स्थितियाँ ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब समाजबाद व पूँजीवाद दोनों ही नाकाम हो रहे हैं, हमें इससे आगे की सोचनी होगी। साथ ही युवा अधिवक्ताओं में नैतिकता व आध्यत्मिकता के बीज रोपने होंगे। श्री मिश्रा ने बदलते कानूनी परिवेश के लिये अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण व शोध कार्य पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का ध्यान केवल धन संग्रह पर न हो। श्री मिश्रा ने कहा ''लॉयर शुड नॉट वी लायर'' अर्थात अधिवक्ता झूठ का वक्ता न हो। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायायधीश श्री ए के. पटनायक ने इस संस्थान की स्थापना की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के अधिकारियों के प्रशिक्षण की तो पूर्व से ही व्यवस्था थी अब इस संस्थान के माध्यम से वकीलों के शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था भी हो गई है, इससे न्यायिक प्रक्रिया में गुणात्मक सुधार होगा। संस्थान में युवा अधिवक्ताओं के लिये फाउंडेशन कोर्स व वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिये रिफ्रेशर कोर्स चलाये जायेंगे। साथ ही विशिष्ट कानूनी विषयों पर केन्द्रित शॉर्ट कोर्स भी प्रारंभ किये जायेंगे उन्होनें कहा पर्यावर्णीय संबंधी सोच में बदलाव के साथ सूचना व प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में काफी तरक्की हुई है। सायवर लॉ जैसे नये कानूनी क्षेत्र भी खुले हैं। ऐसे में 10-15 साल की वकालत का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ वकील भी इस संस्थान के माध्यम से अद्यतन नियम कानूनों से वाकिफ हो सकेंगे। इस तरह की सुचारू व्यवस्था अमेरिका में है। जहां हर पाँच साल पर अधिवक्ता को न केवल रिफ्रेशर कोर्स से गुरजना पड़ता है, अपितु इन कोर्सों को अच्छें नंबरों से उत्तीर्ण भी करना होता है। हमारे यहां भी अमेरिका की तर्ज पर एक्रेडेशन सिस्टम लागू करने पर विचार किया जा रहा है। वार काउंसिंल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री सिन्हा ने ग्वालियर में इस संस्थान की स्थापना की पहल करने के लिये प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अन्य राज्यों के लिये प्रेरणादायी तो है ही वल्कि आंखें खोलने वाला है। इस संस्थान के योगदान से वार के साथ बैंच भी मजबूत होगी। स्टेट वार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रामेश्वर नीखरा ने कहा कि तहसील व निचले स्तर पर काम करने वाले वकीलों की दक्षता में वृध्दि करने में भी यह संस्थान सहयक होगा। कार्यक्रम के अंत में उच्च न्यायालय ग्वालियर खण्डपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री सुभाष सम्वत्सर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। स्टेट वार काउंसिल ऑफ मध्य प्रदेश के सदस्य श्री प्रेम सिंह भदौरिया ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस संस्थान के लिये स्टेट वार काउंसिल द्वारा दस लाख रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसी तरह राज्य सभा सांसद श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने सांसद निधि से पाँच लाख रूपये संस्थान को प्रदान किये हैं। वार काउंसिल के सदस्य एवं उनके पुत्र श्री प्रबल प्रताप सिंह सोलंकी ने उनकी ओर से पाँच लाख रूपये की राशि का ड्राफ्ट समारोह में प्रदान किया। संस्थान के संचालन के लिये सी जे. की अध्यक्षता में समिति एडवोकेट्स कॉन्टीन्यूइंग लीगल एज्युकेशन इंस्टीटयूट के सफल संचालन के लिये प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री ए के. पटनायक की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री आर एस.गर्ग, प्रदेश सरकार के विधि मंत्री, चेयरमेन वार काउंसिल ऑफ इंडिया व स्टेट वार काउंसिल के चेयरमेन, हाईकोर्ट वार जबलपुर, इंदौर व ग्वालियर के अध्यक्ष, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, राज्य शासन के विधि सचिव, ज्युडीशियल ऑफिसर ट्रेंनिंग सेंटर जबलपुर के संचालक व स्टेट वार काउंसिल के सचिव शामिल हैं। समिति में इसके अलावा तीन सदस्यों को मुख्य न्यायाधीश द्वारा मनोनीत किया गया है। जिनमें सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री ए पी. मिश्रा, उच्च न्यायालय ग्वालियर खण्डपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री सुभाष सम्वत्सर तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए के. मिश्रा शामिल हैं।
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