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21 septiembre ग्राम यात्रा-1: चम्बल के गाँवों में जान लेवा है भूख, कुपोषण और बीमारी, मरे सैकड़ों बिन भोजन बिन इलाज और दवा के - सरकारी दावे सरासर झूठग्राम यात्रा-1: चम्बल के गाँवों में जान लेवा है भूख, कुपोषण और बीमारी, मरे सैकड़ों बिन भोजन बिन इलाज और दवा के - सरकारी दावे सरासर झूठ ग्राम यात्रा ऑंखों देखी विशेष रपट भाग-1 नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' लेखक ने इस आलेख को लिखने से पूर्व कई गाँवों और ग्राम पंचायतों में रह कर रूक कर सब कुछ ऑंखों से देखा है यू तो अब काम की व्यस्तता से गाँवों की ओर जाना कम ही हो पाता है, लेकिन सरकारी बिजली कटौती की विशेष कृपा और अपनी ताई के निधन के कारण फिर एक अन्तराल बाद मुझे अपने गाँव जाना पड़ा ! मेरी ताईयों व ताऊओं की संख्या काफी लम्बी है, चूंकि कुटुम्ब व परिवार बड़ा है तो संख्या लम्बी ही होनी है ! किसी जमाने में हमारे इन ताऊ का आसपास के एरिया में बड़ा चलताड़ा था, उनके नाम की तूती बोलती थी और पत्ते भी उनके हुकुम से हिला करते थे ! समय चक्र के चलते गरीबी और लाचारी के साथ मजबूरीयों ने उन्हें कमजोर भी कर दिया और ताई के शोक में शामिल होने जब मैं अपने माता पिता और परिवार के साथ गाँव पहुँचा कुछ हैरत अंगेज व दिल व दिमाग को झकझाोर देने वाली बातों ने मेरे अंतस को हिला दिया ! अपने काम के वक्त में मैंने शायद हजारों गरीबों या मजबूरों की मदद की होगी लेंकिन अपने ही परिवार में घटी इस घटना और उसका पृष्ठ वृतान्त सुन कर मेरा हृदय काँप गया ! हालांकि मुझे यह सब वृतान्त कई कारण्ाों से पता नहीं लग पाया, और मैं सोचता रहा कि सारे शासन और प्रशासन को पता है कि मेरा गाँव कहाँ है, और वहाँ सब वैसे ही ठीक ठाक आटोमेटिक ही चल रहा होगा ! इसलिये अत्यधिक निश्चिन्तता और लापरवाही के साथ उदासीनता भी मैंने अपने गाँव और गाँव पंचायत के प्रति बरती ! लेकिन अपनी ताई (गरीब ताई ) की मृत्यु की पूरी दास्तान मैंने सुनी तो न केवल मैं चौंक गया बल्कि मुझे स्वत: ही अन्य लोगों की चिन्ता और परेशानी ने घेर लिया मैंने फिर सारे अपने कार्य छोड़ कर, गाँव और निवासीयों तथा आसपास के गाँवों की पड़ताल और खैर खबर लेना ही उचित समझा ! हालांकि सबसे सब प्रकार की बातें हुयीं, दुख तकलीफ, परेशानीयों की भी सरकारी व्यवस्थाओं और उसके फर्जीवाड़े की करम कहानी ऑंखों देखी, बिजली के हालात वहाँ रहकर वहीं देखे और महसूस किये, छोटी बातों से लेकर बड़ी बातों तक सब पर चर्चायें और विचार विमर्श हुये, राजनीतिक बाते भी हुयीं यानि कुल मिला कर सम्पूर्ण और समग्र यात्रा मेरी स्वर्गवासी ताई ने करवा दी, सबसे मिलवा दिया और सब कुछ ताजा करवा दिया ! सारी स्मृतियां तरोताजा कर ग्राम और पंचायत वासीयों के लिये उम्मीद के कई दिये जल गये, वे सदा ही मुझसे कुछ अधिक ही उम्मीदेंं रखते आये हैं ! सबने सब कुछ खुल कर कहा ! मैं उन साौभाग्यशालीयों में हूँ जिसे अपने गाँ, कुटुम्ब, परिवार और पंचायत का विशेष आशीष व स्नेह आजीवन प्राप्त होता रहा है, लेकिन अबकी बार मुझे स्वयं ही पर क्रोध आया कि पूरे साल डेढ़ साल बाद गाँव का चक्कर मारा, तब तक वहाँ बहुत कुछ उलट पुलट हो चुका था ! यद्यपि गाँव से सप्ताह या दो सप्ताह में कोई न कोई चक्कर मार ही जाता है, और मैं हल्की फुल्की खैर खबर लेकर अपने काम में जुटा रहता हूँ, अव्वल तो बिजली न रहने का भय रहता है, फिर फटाफट बहुत काम निपटा डालने की जल्दी सो मामूली खैरियत के बाद आगे अधिक चर्चा नहीं करने की इस आदत पर मुझे काफी रंज महसूस हुआ ! खैर किस्सा यूं हैं कि, ताई का निधन (हालांकि वे वृध्द थीं) गरीबी, भूख और बीमारी से हो गया ! मरते मरते ताई भूखीं मर गयीं, न भोजन न पानी ! बीमारी ने जान ली, इलाज चिकित्सा और दवायें नहीं मिलीं ! कई दिन लाचार बीमार और मजबूरी के चलते अभावों में ही तड़प तड़प कर ताई के प्राण निकल गये ! मेरे गाँव से ठीक चार खेत दूर यानि एक दो फर्लांग भर की दूरी पर निकट के ही गाँव में लगभग 30-35 साल पुराना प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र है, और अम्बाह तहसील नामक शहर की दूरी 4 किलो मीटर है यानि सवा कोस की दूरी पर है ! गाँव से लगभग आधा किलोमीटर दूर पहुँच मार्ग यानि पक्की सड़क भी है ! और गाँव में पढ़े लिखे लगभग सभी है यानि 90 फीसदी हैं ! गाँव के अन्य हालात तो इस रपट आलेख के अगले भागों में जिक्र में खुद ब खुद आयेंगें लेकिन खास बात ये है कि गाँव में असल बेहद गरीब परिवार लगभग 60 फीसदी है, और गरीबी रेखा में असल में अंकित परिवार केवल पाँच फीसदी हैं ! गरीबों के पास गरीबी रेखा में नाम लिखाने को पैसे नहीं हैं इसलिये न उनके नाम गरीबी रेखा में हैं, न और न सरकार उन्हें गरीब मानती है, वस्तुत: न उनके पास पहनने को कपड़े हैं, न खाने को रोटी और न रहने को मकान न इलाज या दवा के लिये पैसे ! ताई स्वर्गवासी होकर कई सवाल छोड़ गई, कई यक्ष प्रश्न दे गयी ! ताई की मौत एक किस्सा न बन कर रह जाये, अफसानों में खो न जाये इससे पहले ही ताई कई कथाओं को भी अपने अन्दर समेट ले गयी ! ताई की कहानी में मुंशी प्रेमचन्द की बूढ़ी काकी नामक कहानी की काकी या ताई भी शामिल है तो बागवान फिल्म के अमिताभ बच्चन और हेमामालिनी के बंटवारे का किस्सा भी शामिल है ! और सबसे बड़ी कहानी जो ताई छोड़ गयी वह सरकार की सच्चाई को चीख चीख कर बता गयी ! गरीबी, बीमारी, लाचारी, ग्रामीण जिन्दगी तथा जीवन मृत्यु के दरम्यां झेलते भारतीय जीवन और गाँवों में वृध्दों की दशा एवं खोखले सरकारी तमाशे का रंगमंच दिखा गयी ! इसके बाद कई ताईयों और ताऊओं से मिला, लगभग सबकी एक ही कहानी बस एक सी ही जिन्दगी और एक सी लाचारी, एक सी बीमारी, एक सा दुख ! कहीं कुछ भी फर्क नहीं , बस ताई चली गयी और वे अपने जाने की बाट जोह रहे हैं, न सरकार से उम्मीद न कोई शिकवा, मुकद्दर के लेख को ही सरकार माने बैठे लोगों को यह पता ही नहीं कि उन्हें क्या मदद कहाँ से और कैसे मिल सकती है, अधिकारी बने बैठे लोकसेवकों से सेवा कैसे ले सकते हैं ! शिकायत किसकी और कहाँ कर सकते हैं ! संयोगवश यूं ही अपनी आदत के चलते मैं कुछ सरकारी किताबें '' आगे आयें लाभ उठायें'' इस किताब में सरकारी योजनायें और उनसे फायदे उठाने के तरीके दिये हैं, और म.प्र. में शिवराज सिंह द्वारा अब तक आयोजित विभिन्न पंचायतों का विवरण देने वाली किताबों की पाँच छह प्रतियां यह सोच कर ले गया था, कि जो भी जरूरतमन्द होंगें मैं उनमें यह किताबे बाँट दूंगा ! लेकिन किताबों को देखते ही वहाँ मारामार शुरू हो गयी किताबे कम थीं और जरूरतमन्द ज्यादा सो सब उलझ पड़े कि यह उसे मिल जायें ! मैं उलझन में था कि ऐसी अवस्था में क्या किया जाये, फिर मैंने वैकल्पिक व्यवस्था कि भई कुछ लोग जो सबसे ज्यादा जरूरत मन्द हैं और जो दूसरों को भी रास्ता बतायें तथा दूसरों का भी भला करते हों वे लोग एक एक किताब ले लो ! बाद बकाया को मैं जब फिर आऊंगा तो सबको दूंगा ! अगर ऐसे बाँटी जाये ंतो दस बीस हजार किताबे तो अकेले मेरी पंचायत में ही बँट जायेंगीं और मेरे पास थीं ही कुल दस दस किताबे उनमें से आधी मैं पहले ही कहीं और दूसरे गाँव वालों को बाँट आया था, बची हुयी इधर ले आया था ! जैसे तैसे किसी को पंचायतों की किसी को आगे आये लाभ उठायें दे कर बकाया आश्वासन देकर मैंने अपना पिण्ड छुटाया ! लोग किताबे देख कर आश्चर्यचकित थे, उनमें लिखीं योजनाओं और जानकारीयों को पढ़ जान कर विस्फारित थे (बात केवल आठ दिन पुरानी है) ! उन्हें अभी तक पता ही नहीं था कि कौनसी योजनायें सरकार चला रही है, और उनसे कैसे फायदा उठाया जाता है ! सरकार क्या क्या उनके हित के फैसले ले रही है, क्याा क्या घोषणायें कर रही हैं ! अब जब उन्हें बुनियादी जानकारी ही नहीं है, तो सोचने वाली बात है कि फिर वे फायदा कैसे उठा सकते हैं, कैसे उसकी मानीटरिंग कर सकते हैं ! कैसा लोकतंत्र, कैसा आम आदमी का राज कैसी गरीब की सरकार ? गाँव में अखबार आजादी के 62 साल गुजरने के बाद भी आज तक नहीं पहुँचते, गाँव तो छोड़िये, ग्राम पंचायत तक नहीं पहुँचते ! गाँवों में बिजली है ही नहीं सो टी.वी कबाड़खानों या भुस रखने की जगह यानि भुसेरों में पड़ें चूहों के बिल में तब्दील हो गये हैं यानि गांवों में अब टी.वी नहीं देखा जाता ! अब बताओं कि संचार व सूचना से शून्य होकर सत्ररहवीं अठारहवीं शताब्दी के इन गाँव को को विकास की परिभाषा और आयाम आज तक छू ही नहीं सके ! गाँव वाले बताते हैं सूचना का अधिकार कभी किसी के मुँह सुना तो हैं पर पता नहीं ये क्या होता है, हमें नहीं पता इसका क्या फायदा है, हमें नहीं मालुम हमारी पंचायत में कौनसी योजनायें चल रहीं हैं, पंच और सरपंचों को भी नहीं मालुम , वे भी कुछ नहीं बताते ! क्या हमारे गाँव में भी सूचना का अधिकार चलता है, चलता है तो यह क्या होता है इसमें कितना अनुदान मिलता है, भैंस के लिये मिलता है कि बीज के लिये ! क्या सूचना का अधिकार योजना हमारी पंचायत में भी चलती है, चलती है तो इसका फार्म कैसे भरेगा और कित्ते पैसे मिलेंगें ! वगैरह वगैरह ! मैंने पूछा रोजगार गारण्टी योजना कैसी चल रही है ? गाँव वाले बोले ये कहाँ चलती है, दिल्ली या भोपाल में होगी ! जाको झां कितऊं अतो पतो नानें (इसका यहाँ कोई अता पता नहीं है) मैंने कहा अरे भई किसी के जॉब कार्ड तो बने होंगें, किसी को रोजगार तो मिला होगा ! गाँव वाले बोले जब झाां चलिई नाने रई तो का बतामें (जब यहाँ चल ही नहीं रही तो फिर क्या बतायें) मैंने कहा कि पंचायत सचिव आपको कुछ नहीं बताता, कोई आपके यहां सर्वे करने नहीं आया ! ग्रामीणों ने उत्तर दिया कि सेकेटटरी भजाय देतु हैं (सेक्रेट्री भगा देता है) झां कैसीऊ कोऊ वर्वे फर्वे नाने भई, भईअऊ होगी तो वैंसेई फर्जी भलेईं कर लई होगी के फिर जिनने (कुछ लोगों के नाम लेते हैं) फर्जी लिखवाय डारें होंगें जेई सारे दलाल हैं सिग गाम को पैसा मिल जुल के खाय जातें ! मैंने पूछा कि रोजगार गारण्टी का कोई काम यहाँ चल रहा है क्या ? या कभी चला है क्या ? ग्रामीणों ने कहा नानें झां ना कभऊं चलो ना चल रहो !
क्रमश: अगले अंक में जारी ......... 19 septiembre नि:शक्त कल्याण के लिए कार्य करने वालों को मिलेंगे महर्षि दधीचि पुरस्कारनि:शक्त कल्याण के लिए कार्य करने वालों को मिलेंगे महर्षि दधीचि पुरस्कार भोपाल : 15 सितम्बर, 2008 राज्य शासन ने नि:शक्तजनों के कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों, संस्थाओं को प्रतिवर्ष राज्यस्तरीय महर्षि दधीचि पुरस्कार देने का निर्णय लिया है। प्रदेश के श्रवणबाधित, दृष्टि बाधित, अस्थिबाधित, मन्दबुध्दि एवं विकंलागों के सामाजिक पुनर्वास तथा नि:शक्तजन के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं, संस्थाओं को उनकी वैयक्तिक सेवा और योगदान को प्रोत्साहित करने व मान्यता देने के उद्देश्य से उक्त पुरस्कार की स्थापना की गई है। पुरस्कार के लिए बने नियमों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। मध्यप्रदेश महर्षि दधीचि पुरस्कार नि:शक्तता की चार श्रेणियों, श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित, अस्थिबाधित तथा मानसिक मंदता के क्षेत्र में अलग-अलग दिया जायेगा। प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपये, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार रूपये तथा तृतीय पुरस्कार 25 हजार रूपये प्रशस्ति पत्र के साथ दिये जायेंगे। दधीचि पुरस्कार प्रतिवर्ष विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर दिये जायेंगे। पुरस्कारों का चयन राज्य सरकार द्वारा निर्धारित निर्णायक मंडल करेगा। शासन द्वारा पुरस्कारों के चयन के लिए प्रत्येक वर्ष मई माह में प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएगीं। प्रविष्टि समाज सेवी द्वारा या उसकी ओर से उनके सेवा कार्य से परिचित व्यक्ति अथवा संगठन द्वारा प्रस्तुत की जा सकेगी। एक बार प्रस्तुत की गई प्रविष्टि तीन वर्ष तक के लिए विचारणीय होगी, उन्हें बाद में नई प्रविष्टियां देना आवश्यक नहीं होगा। पुरस्कार के लिए निर्णायक मंडल ऐसे समाज सेवी/समाज सेवियों का चयन करेगा, जो मध्यप्रदेश में नि:शक्त कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत हो। नि:शक्त कल्याण के क्षेत्र में इस पुरस्कार के अलावा अन्य कोई पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी भी महर्षि दधीचि पुरस्कार के लिए प्रविष्टि भेजने के पात्र होगें। शासकीय एवं अर्ध्दशासकीय वेतनभोगी व्यक्ति पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होगें। समाज सेवा कार्य मध्यप्रदेश में निर्दिष्ट नि:शक्त कल्याण के क्षेत्र से ही संबंधित होना चाहिए। दधीचि पुरस्कार चूंकि समाजसेवी के समग्र योगदान के आधार पर दिया जायेगा, इसीलिए सेवा कार्य में ऐसे व्यक्ति के योगदान के संबंध में पर्याप्त प्रमाण होना चाहिए। साथ ही संबंधित क्षेत्र/वर्ग में उसका व्यापक प्रभाव परिलक्षित होना चाहिए। दधीचि पुरस्कार का राज्य स्तरीय अलंकरण समारोह प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस पर आयोजित होगा। समारोह में भाग लेने के लिए चयनित समाजसेवी/संस्थाओं के प्रतिनिधि को राज्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जायेगा।
मुरैना में इस साल तीन गुना ज्यादा गिरा पानी, औसत से अधिक एक हजार मि.मी. हुयी वर्षामुरैना में इस साल तीन गुना ज्यादा गिरा पानी, औसत से अधिक एक हजार मि.मी. हुयी वर्षा मुरैना 17 सितम्बर 08/ मुरैना जिले में 1 जून से अभी तक 975.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो गत वर्ष इसी अवधि में हुई 383.3 मि.मी. वर्षा से 591.9 मि.मी अधिक है । जिले में वार्षिक औसत वर्षा 706.9 मि.मी. से 268.3 मि.मी. अधिक वर्षा इस वर्ष अभी तक हो चुकी है । अधीक्षक भू- अभिलेख के अनुसार वर्षा मापी केन्द्र पोरसा में 1033.4 मि.मी., अम्बाह में 1221 मि.मी. , मुरैना में 860 मि.मी जौरा में 838 मि.मी. , कैलारस में 961.3 मि.मी. और सबलगढ़ में 938 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई ।
18 septiembre आतंकवाद की छाया में साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते भारतीय त्यौहारआतंकवाद की छाया में साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते भारतीय त्यौहार तनवीर जांफरी (सदस्य, हरियाणा साहित्य अकादमी, शासी परिषद) email: tanveerjafri1@gmail.com tanveerjafri58@gmail.com tanveerjafriamb@gmail.com 22402, नाहन हाऊस अम्बाला शहर। हरियाणा फोन : 0171-2535628 मो: 098962-19228
देश की राजधानी दिल्ली आतंकवादियों द्वारा किए गए सिलसिलेवार बम धमाकों से गत् 13 सितम्बर की सायम काल उस समय फिर दहल उठी जबकि मानवता के इन दुश्मनों ने राजधानी के तीन प्रमुख स्थानों कनॉट प्लेस, करोल बांग व ग्रेटर कैलाश में बम धमाके कर दो दर्जन से अधिक बेगुनाह लोगों की जान ले ली। इन धमाकों में लगभग 150 लोग बुरी तरह ंजख्मी भी हो गए। ऐसा ही जघन्य अपराध इन आतंकवादियों द्वारा गत् वर्ष भी त्यौहारों के इन्हीं अवसर पर किया गया था। हालांकि इन मानवता के दुश्मनों का मंकसद त्यौहारों के दिनों में देश में अशांति पैदा करना तथा साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना है। परन्तु इसके विपरीत उत्सव व त्यौहारों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध भारतवर्ष में इन दिनों विभिन्न सम्प्रदायों के त्यौहारों का सिलसिला पूरे हर्षोल्लास के साथ पूर्ववत जारी है। हिन्दू समुदाय के लोगों ने गत् दिनों अपने धार्मिक पर्व गणेश पूजा का आयोजन बड़े पैमाने पर पूरे श्रद्धा व उल्लास के साथ किया तो देश का मुस्लिम समुदाय भी पवित्र रमंजान के महीने रोंजा (व्रत) रखने में व्यस्त रहा। आगामी दिनों में भी भारत में दशहरा, दुर्गापूजा तथा ईद जैसे प्रमुख त्यौहार मनाए जाने की तैयारियां ंजोर शोर से चल रही हैं। अनेकता में एकता की विश्वव्यापी मिसाल पेश करने वाले इस देश में जहां प्रत्येक समुदायों के लिए उनके अपने त्यौहार धार्मिक महत्व से जुड़े होते हैं, वहीं यही त्यौहार साम्प्रदायिक सौहार्द्र एवं सर्वधर्म सम्भाव की भी ऐसी अनूठी मिसाल पेश करते हैं जिसका मुंकाबला शायद दुनिया का कोई भी देश नहीं कर सकता। इसमें आश्चर्य की बात यह है कि भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव की ऐसी मिसालें तब भी देखने को मिलती हैं जबकि आतंकवादी व साम्प्रदायिक शक्तियां अपने साम्प्रदायिक दुर्भाव फैलाने के नापाक मिशन में दिन-रात लगी हुई हैं। आईए लेते हैं भारतीय साम्प्रदायिक सौहार्द्र से जुड़ी हुई ऐसी ही कुछ घटनाओं का एक जायंजा। हरियाणा के बराड़ा ंकस्बे में जहां कि गत् वर्ष देश का सबसे ऊंचा रावण बनाए जाने का कीर्तिमान स्थापित किया गया था, वहीं स्थानीय रामलीला क्लब द्वारा इस वर्ष पुन: रावण की ऊंचाई को लेकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। क्लब के संस्थापक अध्यक्ष राणा तेजिन्द्र सिंह चौहान अपने सैकड़ों साथियों के साथ विश्व के सबसे ऊंचे रावण को बनाए जाने की तैयारी में गत् 3 माह से जुटे हुए हैं। इस परियोजना में उनका साथ देने के लिए आगरा से आया हुआ है मोहम्मद उस्मान का एक मुस्लिम परिवार। अपने घर से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय कर के मोहम्मद उस्मान अपनी पत्नी व बच्चों समेत गत् तीन माह से बराड़ा ंकस्बे में तेजिन्द्र सिंह चौहान के विशेष अतिथि के रूप में रह रहे हैं। मोहम्मद उस्मान की भी हार्दिक इच्छा है कि राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करने के बाद विश्व कीर्तिमान स्थापित करने में भी वे तेजिन्द्र चौहान के इस महत्वाकांक्षी मिशन में उनके सहयोगी बने रहें। इस विशालकाय रावण के निर्माण के दौरान पवित्र रमंजान का महीना भी गुंजरा। मोहम्मद उस्मान व उनका परिवार नियमित तौर पर रोंजा रखता है। उनके रोंजे की पूरी व्यवस्था बड़े ही आदर व आस्था के साथ तेजिन्द्र चौहान द्वारा की जाती है। इतना ही नहीं बल्कि रमंजान की शुरुआत में जब मोहम्मद उस्मान की पत्नी को ंकुरान शरींफ की ंजरूरत महसूस हुई तो चौहान द्वारा स्वयं बांजार जाकर धार्मिक पुस्तकों की दुकान से ंकुरान शरींफ मुहैया कराया गया तथा उनकी धार्मिक ंजरूरतों व इच्छाओं की पूर्ति की गई। स्वयं मोहम्मद उस्मान का यह मानना है कि तेजिन्द्र चौहान द्वारा निर्देशित रावण का निर्माण करने हेतु बराड़ा आने पर उन्हें जो मान-सम्मान व सत्कार मिलता है तथा यहां जिस धार्मिक स्वतंत्रता का उन्हें यहां एहसास होता है, वह एहसास शायद उन्हें अपने समुदाय के लोगों के साथ रहकर भी नहीं हो पाता। यही वजह है कि चौहान के निमंत्रण पर मोहम्मद उस्मान प्रत्येक वर्ष अपने सहयोगी मुस्लिम कारीगरों व अपने पूरे परिवार के साथ बराड़ा चले आते हैं। इस विषय पर तेजिन्द्र चौहान का कहना है कि वे मोहम्मद उस्मान व उनके परिजनों की धर्म संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति कर तथा उसमें भागीदार बनकर महंज अपनेर् कत्तव्यों का पालन करते हैं तथा 'अतिथि देवो भव' की भारतीय परम्परा का निर्वाहन करते हैं। चौहान का कहना है कि उनकी कोशिश है कि उनके कला निर्देशन व संरक्षण में मोहम्मद उस्मान के परिश्रम के परिणामस्वरूप तैयार होने वाले इस विशालकाय रावण का नाम गिनींज बुक ऑंफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो जाए। यदि ऐसा हो सका तो हरियाणा के बराड़ा ंकस्बे में इस वर्ष दशहरे पर तैयार किया जाने वाला रावण का पुतला न केवल ऊंचाई व भारी भरकमपन में विश्व कीर्तिमान स्थापित करेगा बल्कि भारतीय साम्प्रदायिक सौहार्द्र के क्षेत्र में भी यह अपनी अनूठी मिसाल स्वयं पेश करेगा। इसी प्रकार गणेश पूजा का त्यौहार भी प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी साम्प्रदायिक सद्भाव के अनूठे उदाहरण पेश कर रहा है। जहां भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध नायक सलमान ंखान प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणेश पूजा के अवसर पर भक्ति भाव में सराबोर नंजर आए, वहीं देश के कई हिस्सों में ऐसे गणेशोत्सव भी मनाए गए जिनकी अधिकांश व्यवस्था मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा की गई। इतना ही नहीं बल्कि दिल्ली में हुए बम धमाकों के बावजूद देश में गणेश पूजा के अनेकों आयोजन ऐसे भी हुए जिसमें मुसलमानों द्वारा गणेश प्रतिमा अपने घरों में स्थापित की गई तथा उनका पूजा पाठ किया गया। दिल्ली के धमाकों को साम्प्रदायिक सौहार्द्र पर बदनुमा दांग बताते हुए गणेश प्रतिमा विसर्जन में इसी वर्ष मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। एक और प्रसिद्ध ंफिल्म अभिनेता शाहरुंख ंखान भी हिन्दू व मुस्लिम धर्मों के लगभग सभी त्यौहार स्वयं बड़े जोश व उत्साह के साथ मनाते हैं। होली दिवाली तथा ईद बंकरीद जैसे सभी त्यौहारों को अपने परिजनों एवं मित्रों के साथ मनाकर वे सच्चे भारतीय होने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। ऐसा नहीं है कि सर्वधर्म सम्भाव या साम्प्रदायिक सौहार्द्र से ओत-प्रोत उक्त आयोजन केवल सम्पन्न व्यक्तियों अथवा प्रसिद्ध हस्तियों द्वारा ही किए जाते हैं। बल्कि ंगरीबी, बदहाली व बेबसी से जूझते हुए लोगों के मध्य भी ऐसी भावना भारत में देखी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर भारत के बिहार राज्य के 19 ंजिले इस वर्ष बिहार की कोसी नदी के तटबंध टूट जाने के कारण आई प्रलयकारी बाढ़ से प्रभावित हैं। इस बाढ़ के दौरान प्रभावित लोगों ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के एक दूसरे धर्म के लोगों को न केवल सहयोग व संरक्षण दिया बल्कि उनकी धार्मिक गतिविधियों में भी परस्पर सहयोगी रहे। अनेक स्थानों पर प्रलयकारी बाढ़ से शीघ्र निजात पाने के लिए पूजा पाठ करने व दुआएं आदि मांगने के सामूहिक तौर पर आयोजन किए गए। एक ही छत के नीचे हिन्दू समुदाय द्वारा भजन पूजन करने तथा मुसलमानों द्वारा नमांज पढ़कर ंखुदा से दुआ मांगने के नंजारे देखने को मिले। यही नहीं रमंजान के महीने में आई इस बाढ़ में मुस्लिम भाईयों के रोंजा रखने संबंधी ंजरूरतों को पूरा करने में भी हिन्दू समुदाय ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कई स्थानों पर तो हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा भी रमंजान में रोंजा (व्रत) रखे जाने के समाचार प्राप्त हुए हैं। भारत में तेंजी से फैलता जा रहा आतंकवाद तथा इन आतंकवादी घटनाओं में अधिकांशतय: मुस्लिम समुदाय के लोगों के सम्मिलित होने के समाचार तथा इसके जवाब में गुजरात राज्य की तंर्ज पर भारत की हिन्दुत्ववादी शक्तियों द्वारा किए जाने वाले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के घिनौने प्रयास और इन सबके बीच देश में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश करने वाली उपरोक्त घटनाएं यह समझ पाने के लिए कांफी हैं कि रामानन्द, कबीर, नानक, चिश्ती, ंखुसरु, साईं बाबा, ंफरीद व बुल्लेशाह की इस पावन धरती पर साम्प्रदायिक दुर्भावना फैलाने की साम्प्रदायिक शक्तियों अथवा आतंकवादियों द्वारा कितनी ही कोशिशें क्यों न की जाएं। किन्तु सन्तों व ंफंकीरों के इस देश में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उन्हें कोई भी आतंकवादी अथवा साम्प्रदायिक संगठन हिला नहीं सकता। तनवीर जांफरी देश की एकता व अखण्डता को चुनौती देने वाले ढोंगी नेताओं से सावधानदेश की एकता व अखण्डता को चुनौती देने वाले ढोंगी नेताओं से सावधान निर्मल रानी 163011, महावीर नगर, अम्बाला शहर,हरियाणा। फोन-09729229728 email: nirmalrani@gmail.com
दुनिया के किसी भी स्वच्छ लोकतंत्र में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' का अपना अलग ही महत्व होता है। जिस लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घुटने लग जाए, उसे लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाह शासन या अलोकतांत्रिक व्यवस्था का नाम दे दिया जाता है। देशवासी भली-भांति उस राजनैतिक घटनाक्रम से परिचित है जबकि 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी। इस दौरान जहां अन्य तमाम कड़े ंफैसले लिए गए थे, वहीं मीडिया को भी नियंत्रित रखने हेतु कई कड़े नियम लागू किए गए थे। हमारे देश में आपातकाल का विरोध करने वालों ने तत्कालीन सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने का आरोप लगाया था। इसका परिणाम यहां तक हुआ था कि आपातकाल लागू करने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व उनकी सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को स्वतंत्रता के पश्चात पहली बार भारतीय मतदाताओं ने सत्ता से बेदंखल कर दिया था। यही वह दौर था जबकि इंदिरा गांधी जैसी तेंज तर्रार, दूर दृष्टि रखने वाली महिला को एक तानाशाह शासक होने का प्रमाण पत्र भी उनके विरोधियों द्वारा जारी कर दिया गया था। क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भारत जैसे बहुभाषी व बहुआयामी देश में कारगर प्रतीत होता है। अभी पिछले दिनों अमरनाथ श्राईन बोर्ड को जम्मु-कश्मीर सरकार द्वारा आबंटित की गई मामूली सी ंजमीन के मुद्दे को लेकर 'अभिव्यक्ति' का बांजार ंखूब गर्म देखा गया। कहीं सीमा पार चले जाने की धमकियां सुनने को मिलीं तो कहीं अलगाववादी विचार रखने वाले नेताओं द्वारा इसे 1947 के विभाजन जैसा माहौल बताया जाने लगा। मतों के ध्रुवीकरण के मद्देनंजर न सिंर्फ घाटी के क्षेत्रीय नेताओं द्वारा बल्कि साम्प्रदायिकता की आग में अपनी राजनैतिक रोटी सेंकने वाले तथाकथित राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे ंजहर बोए जाने लगे जिसका नकारात्मक प्रभाव पूरे देश पर पड़ सकता था। परन्तु जैसा कि हमेशा होता आया है, भारत माता की रक्षा उसी ईश्वीरीय शक्ति ने की तथा अमरनाथ श्राईन बोर्ड की ंजमीन को लेकर लगी आग जोकि बुझती हुई प्रतीत नहीं हो रही थी आंखिरकार किसी समझौते पर पहुंचकर नियंत्रित हो गई। जबकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकार तथा सौदागर इस मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर इसे पूरी हवा देना चाह रहे थे। और कोई आश्चर्य नहीं कि आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान स्वयं को राष्ट्रवाद का स्वयंभू ठेकेदार समझने वाली देश की एक पार्टी इस मुद्दे का प्रयोग अभी भी अपने राजनैतिक हित साधने के लिए करे। उड़ीसा लगभग एक माह तक साम्प्रदायिकता की आग में जलता रहा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ही उस राज्य में ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराए जाने के आरोप हिन्दुत्ववादी संगठनों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। हिन्दू नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पश्चात उड़ीसा के कंधमाल क्षेत्र में हिंसा का तांडव शुरु हो गया था। हिन्दुत्ववादी संगठनों का आरोप था कि धर्म परिवर्तन को रोकने के मिशन में लगे लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पीछे उग्र ईसाई संगठनों का हाथ है। जबकि एक माओवादी संगठन द्वारा इस हत्या की ंजिम्मेदारी अपने ऊपर ली गई। इस प्रकरण में भी 'अभिव्यक्ति' का बांजार पूरी तरह गर्म रहा। हिन्दुत्ववाद के नाम पर ंजहर उगलने में महारत रखने वाले प्रवीण तोगड़िया ने कंधमाल जाकर अपनी 'विशेष स्वतंत्र अभिव्यक्ति' के माध्यम से वह गुल खिलाया कि सैकड़ों ंगरीब व बेगुनाह लोग जाने से मारे गए तथा अपने घरों से बेघर होकर शरणार्थी शिविरों में रहने के लिए मजबूर हो गए। इसी प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी अपने दूरगामी लक्ष्य व प्रतिक्रिया के मद्देनंजर माओवादियों द्वारा लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की ंजिम्मेदारी लेने को ंगलत करार दिया तथा ईसाई संगठनों पर ही उनकी हत्या करने का संदेह जताया। और अब भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई इसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दंश झेल रही है। 'अभिव्यक्ति' करने वाले हैं मुंबई के तथाकथित स्वयंभू स्वामी ठाकरे परिवार विशेषकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे। उनकी इस ंजहरीली अभिव्यक्ति के निशाने पर हैं उत्तर भारतीय विशेषकर उत्तर प्रदेश व बिहार के लोग। राज ठाकरे क्षेत्रवाद का ंजहर बोकर अपनी ंजहरीली अभिव्यक्ति के माध्यम से मराठों के दिल में उत्तर भारतीयों के प्रति नंफरत पैदा करना चाह रहे हैं। इसका कारण यह ंकतई नहीं है कि उन्हें मुम्बई या महाराष्ट्र से गहरा लगाव है बल्कि उनकी इस चाल का मंकसद बहुसंख्य मराठा मतों पर अपना अधिकार जमाना मात्र है। ठाकरे परिवार ने मराठों के कल्याण के लिए कोई अभूतपूर्व कार्य किया हो, ऐसा कुछ भी नहीं। मात्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में उत्तर भारतीयों को गालियां देकर ठाकरे परिवार के लोग मराठों के दिलों में अपनी जगह बनाने का प्रयास कर रहे हैं। राज ठाकरे की हरकतें तो देखते ही बन पड़ती हैं। सार्वजनिक रूप से वे जिसकी चाहते हैं नंकल उतारने लग जाते हैं, जिसकी चाहें वे बोली बोलने लग जाते हैं तो कभी किसी को गालियां देने लग जाते हैं। मुम्बई में दुकानदारों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों तथा कार्यालयों पर लगने वाले साईनबोर्ड किस भाषा में हों, इसकी इजांजत राज ठाकरे से लेनी पड़ेगी। मुम्बई में किसी कलाकार की ंफिल्म कब चलनी है और कब नहीं, यह भी राज ठाकरे की कृपादृष्टि पर ही निर्भर करता है। अपनी राजनैतिक हैसियत व अपने ंकद को नापे तोले बिना जिस कलाकार अथवा नेता को चाहें, राज ठाकरे क्षण भर में अपमानित कर सकते हैं। और यह सब मात्र 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के नाम पर खेले जाने वाले ंखतरनाक खेल हैं। गत् दिनों जब राज ठाकरे को उन जैसी रूखी भाषा में मुम्बई के संयुक्त पुलिस कमीश्र के एल प्रसाद द्वारा सांफ शब्दों में यह जवाब दिया गया कि 'मुम्बई किसी के बाप की नहीं है' तो राज ठाकरे तिलमिला उठे। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के 1982 बैच के आई पी एस अधिकारी प्रसाद द्वारा मुम्बई की ंकानून व्यवस्था के मद्देनंजर की गई यह 'अभिव्यक्ति' तो कोई इतनी ंगलत एवं कष्टदायक नहीं थी कि राज ठाकरे तिलमिला उठें। परन्तु राज ठाकरे को पुलिस कमीश्र प्रसाद का यह दो टूक बयान नहीं भाया। उन्होंने प्रसाद को नौकरी छोड़कर मैदान में आने की चुनौती दे डाली। इससे सांफ ंजाहिर होता है कि एक तथाकथित नेता होने के नाते राज ठाकरे को तो यह अधिकार है कि वे जब और जिसे चाहें और जिस भाषा में चाहें अपमानित कर दें। परन्तु ंकानून व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनंजर यदि एक पुलिस अधिकारी खरी-खरी सुना दे तो वह ठाकरे को ंकतई बर्दाश्त नहीं है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक महबूबा मुंफ्ती व राज ठाकरे जैसे और भी कई ऐसे नेता देखे जा सकते हैं जोकि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी न तो कोई पहचान रखते हैं, न ही उनकी राजनैतिक गतिविधियां यह दर्शाती हैं कि उनमें सम्पूर्ण राष्ट्र के प्रति कोई लगाव है। यदि हमें देश की एकता व अखण्डता को ंकायम रखना है तो ऐसी सीमित सोच रखने वाले स्वार्थी एवं ढोंगी नेताओं के राजनैतिक हथकंडों से हमें सावधान रहना होगा। हमें बड़ी सूक्ष्मता से इस बात पर नंजर रखनी होगी कि ऐसे नेता कब और क्या वक्तव्य दे रहे हैं और उनकी इस 'अभिव्यक्ति' के पीछे छुपा हुआ असली मंकसद क्या है? वह जो सुनाई दे रहा है और दिखाई नहीं दे रहा या फिर वास्तव में वह जो दिखाई बिल्कुल नहीं पड़ रहा अर्थात् सत्ता का सीधा रास्ता और वह भी नंफरत, दुर्भावना, दंगों व ंफसादों के रास्ते से होता हुआ। निर्मल रानी
कला अकादमी में ध्रुपद केन्द्र प्रारंभकला अकादमी में ध्रुपद केन्द्र प्रारंभ भोपाल : 14 सितम्बर, 2008
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ, संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद टैगोर मार्ग भोपाल में आज से ध्रुपद केन्द्र प्रारंभ हो गया है। केन्द्र के प्रारंभ के मौके पर संस्कृति सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव, संस्कृति संचालक श्री पवन श्रीवास्तव एवं नवनियुक्त गुरू पंड़ित अभय नारायण मलिक ने दीप प्रज्जवलित किया। भारतीय शास्त्रीय संगीत की अत्यंत प्राचीन विद्या ध्रुपद गायन के लिए विगत दो दशकों से कला अकादमी द्वारा ध्रुपद केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। इस केन्द्र में गुरू-शिष्य परम्परा में छात्रवृत्ति के तहत विद्यार्थियों को 4 वर्षीय प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें कलाकार बनने का सुअवसर उपलब्ध कराया जाता है। पूर्व में भोपाल के ध्रूपद केन्द्र में डागर घराने के विख्यात गायक उस्ताद जिया फरीदउद्दीन डागर गुरू के पद पर रहे। लगभग दो दशकों में उस्ताद जिया फरीउद्दीन डागर ने ध्रुपद गायन की परम्परा को जीवित रखने के लिए अथक प्रयास किय। जिसके फलस्वरूप दुर्लभ होती जा रही ध्रुपद शैली के अनेक कलाकार आज इस परम्परा को संरक्षित एवं सवंर्धित किये हुए है। अकादमी द्वारा संचालित ध्रुपद केन्द्र से अनेक विद्यार्थी ध्रुपद गायन का प्रशिक्षण प्राप्त कर अब संगीत जगत में अपना स्थान बना चुके हैं। इनमें उमाकांत गुन्देचा, रमाकांत गुन्द्रेचा (गुन्देचा बन्धु), उदय भवालकर, मनोज सराफ, अफजल हुसैन, सुश्री सोमबाला सातले, सुश्री सुरेखा कामले आदि ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने ने सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई हैं। अकादमी के निदेशक श्री अरूण पलनीटकर ने ध्रुव गायन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय शास्त्रीय गायन की इस गम्भीर गायन शैली के संरक्षण, संवर्धन और विस्तार के लिए कला अकादमी और संस्कृति विभाग कटिबध्द हैं। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि नये गुरू सुप्रसिध्द ध्रुपद गायक पण्डित अभय नारायण मलिक जी के मार्गदर्शन और शिष्यत्व में विद्यार्थी ध्रुपद गायन का प्रशिक्षण प्राप्त कर मध्यप्रदेश में इसका और विस्तार करेंगे।
छठवें वेतनमान के अंतर्गत बीस प्रतिशत अंतरिम राहत सितंबर के वेतन के साथ आदेश जारीछठवें वेतनमान के अंतर्गत बीस प्रतिशत अंतरिम राहत सितंबर के वेतन के साथ आदेश जारी भोपाल : 15 सितम्बर 2008
राज्य शासन के कर्मचारियों तथा अधिकारियों को छठवें वेतनमान के अंतर्गत बीस प्रतिशत अंतरिम राहत सितम्बर 2008 के वेतन के साथ जुड़कर मिलेगी। इस आशय के आदेश आज वित्त विभाग द्वारा जारी कर दिये गये। मूलवेतन तथा मंहगाई वेतन की 20 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के रुप में दी जाएगी। अंतरिम राहत की यह राशि न तो वेतन के रुप में समझी जाएगी और न ही भत्ते या मजदूरी के रुप में। तद्नुसार, यह राशि किसी भी सेवा लाभ अर्थात मकान किराया भत्ता, प्रतिपूर्ति भत्तों, वेतन नियमन, अवकाश नगदीकरण, पेंशन एवं ग्रेच्युटी आदि की संगणना करने के लिए नहीं गिनी जाएगी। अंतरिम राहत की राशि का समायोजन पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर से किया जाएगा। अंतरिम राहत की राशि वेतन मद से विकलनीय होगी।
लेटरल एन्ट्री टेस्ट 21 सितम्बर कोलेटरल एन्ट्री टेस्ट 21 सितम्बर को भोपाल : 15 सितम्बर, 2008 लेटरल एन्ट्री टेस्ट-2008 के सिलसिले में ली जाने वाली परीक्षा की तारीख 21 सितम्बर तय की गई है। मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मण्डल भोपाल द्वारा यह परीक्षा भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में ली जा रही है। इसमें कुल दो हजार 376 परीक्षार्थी बैठेंगे। पात्र उम्मीदवारों के प्रवेश पत्र भेजे जा चुके हैं। परीक्षार्थी व्यावसायिक परीक्षा मण्डल की वेबसाईट www.vyapam.nic.in से भी प्रवेश पत्र प्राप्त कर सीधे परीक्षा में बैठ सकेंगे।
16 septiembre विस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा के अंतर्गत ''आत्मा संदेश'' संबंधी बैठक सम्पन्नविस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा के अंतर्गत ''आत्मा संदेश'' संबंधी बैठक सम्पन्न भोपाल : 15 सितम्बर, 2008 विस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा के अन्तर्गत ''आत्मा संदेश'' के प्रकाशन के लिए संपादकीय मंडल की बैठक संचालक कृषि की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में माह अक्टूबर में प्रकाशित होने वाले ''आत्मा संदेश'' के संबंध में सुझाव दिए गए। इसमें रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलों के संबंध में प्रमुखता से जानकारी प्रकाशित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भोपाल में स्थापित देश के पहले किसान कॉल सेन्टर संबंधी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक आत्मा संदेश के माध्यम से पहुंचाई जाना चाहिये।
किसान काल सेन्टर का विस्तार समूचे प्रदेश में किया जायेगाकिसान काल सेन्टर का विस्तार समूचे प्रदेश में किया जायेगा भोपाल : 15 सितम्बर, 2008 किसानों की कृषि से संबंधित समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए और उन्हें विभागीय योजनाओं एवं संबंधित विभागों संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिये भोपाल में देश का पहला किसान काल सेन्टर प्रारंभ किया गया है। जिसका दूरभाष नम्बर 18002334433 है। इसको डायल कर भोपाल स्थित नियंत्रण केन्द्र के विशेषज्ञ से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह काल सेन्टर प्रात: 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। इसके माध्यम से पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर संबंधित विषय के विषय वस्तु विशेषज्ञ देंगे। इसका विस्तार प्रदेश के 313 विकासखण्ड स्तर तक किया जायेगा। इसके माध्यम से खेती की तकनीकी के अतिरिक्त प्रदेश के किसान उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन आदि से जुड़े प्रश्न भी पूछ सकते हैं। इस संबंध में सम्पन्न एक समीक्षा बैठक में संचालक कृषि श्री डी.एन. शर्मा ने बताया कि किसानों की समस्याओं का उत्तर देने के लिये विभिन्न विषयों में पी.एच.डी. विशेषज्ञों को रखा जायेगा। इसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों की मदद ली जायेगी। उन्हें प्रति काल के मान से भुगतान चेक द्वारा प्रतिमाह किया जायेगा। विभागीय स्तर पर किसान कॉल सेन्टर द्वारा दी जा रही सेवाओं का पर्यवेक्षण समय-समय पर किया जायेगा। इसके माध्यम से किसानों को नि:शुल्क दूरभाष से घर बैठे जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
नियमों की सही व्याख्या बहुत जरुरी भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री के.जी. बालकृष्णन द्वारा म.प्र. उच्च न्यायालय के नियमों का विमोचननियमों की सही व्याख्या बहुत जरुरी भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री के.जी. बालकृष्णन द्वारा म.प्र. उच्च न्यायालय के नियमों का विमोचन
भोपाल 14 सितम्बर , 2008
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री के.जी. बालकृष्णन ने कहा है कि नियम तो सामान्यत: ठीक होते हैं, वास्तविक महत्व उनकी सही व्याख्या का होता है। नियमों की सही व्याख्या न होने से अनेक विसंगतिपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और उनकी सही व्याख्या होने से सभी काम ठीक से होते हैं। न्यायमूर्ति श्री बालकृष्णन आज यहां नेशनल ज्युडिशियल अकादमी में म.प्र. उच्च न्यायालय के नियम 2008 का विमोचन करने के बाद मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री अनंग कुमार पटनायक सहित वरिष्ठ न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकवक्ता गण तथा बड़ी संख्या में विधिवेत्ता उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश श्री के.जी. बालकृष्णन ने इस अवसर पर म.प्र. उच्च न्यायालय नियम निर्माण समिति के सदस्यों को शाल पहनाकर उनका सम्मान किया। न्यायमूर्ति श्री बालकृष्णन ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि 72 वर्ष बाद म.प्र. उच्च न्यायालय के नये नियम बने हैं जिसमें कानून लंबा अनुभव रखने वाले न्यायाधीशों तथा वकीलों ने बहुत कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में विभिन्न उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने वाले अधिकारियों को इन नियमों के विषय में समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए जिससे कि वे नियमों का सही पालन सुनिश्चित कर सकें। साथ ही अभिभाषकों को भी नियमों की सही जानकारी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नये नियम बनने से कई मामलों में होने वाले अनावश्यक विलंब को दूर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पक्षकारों को भी नियमों के विषय में बता दिया जाना उचित होगा। इन नियमों में किसी भी प्रकार की विसंगति या त्रुटि सामने आने पर उन्हें दूर करने में कोई झिझक नहीं होगी। सारे नियम इतने स्पष्ट होने चाहिए कि कोई आलोचक भी उनकी गलत व्याख्या नहीं कर सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालय बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं और उनकी कार्यप्रणाली में यथावस्यक सुधार लाया जायगा। उन्होंने इन नियमों के निर्माण करने में उप समिति, प्रारुप समिति तथा नियम निर्माण समिति के सदस्यों द्वारा किए गए कड़े परिश्रम के लिए उन्हें बधाई दी और आशा व्यक्त की कि नये नियम बन जाने से म.प्र. उच्च न्यायालय के कामकाज में और सुधार आयेगा। म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री पटनायक ने नये नियमों की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि नागपुर उच्च न्यायालय के समय से चले आ रहे नियमों के कारण अनेक मामलों में कार्य करने में काफी कठिनाई महसूस की जा रही थी। कानून के क्षेत्र में नये आयाम जुड़ और संदर्भ जुड गए हैं और नियमों को नया रुप देने की बहुत जरुरत थी। उन्होंने बताया कि नियम निर्माण समिति को अपना कार्य करने में दो वर्ष का समय लगा और इसमें अधिवक्तओं से भी सुझाव प्राप्त किए गए। उन्होंने नियम निर्माण प्रक्रिया में महसूस की गई विभिन्न कठिनाईयों और समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए विस्तार से बताया कि उन्हें किस प्रकार दूर किया गया। नियम निर्माण समिति के सदस्यों को भारत के मुख्य न्यायाधीश ने शाल भेंटकर उनका सम्मान किया। उनमें न्यायमूर्ति सर्वश्री आर.एस. गर्ग, दीपक मिश्रा, ए.के. मिश्रा, एस.एच. झा, ए.एम् सप्रे, के.के. लाहोटी, एस.एस. संवत्सर, राधारमण मेनन, ए.के. सक्सेना, रवीश अग्रवाल, आर.एन. सिंह, आर.एन. शुक्ला, राजेन्द्र तिवारी, बी.एल. पवेचा, आदर्श मणि त्रिवेदी, टी.एस. रुबरा तथा ए.के. पटनायक शामिल हैं। समिति सचिव श्री सिरपुरकर का भी अभिनंदन किया गया। उप समिति के अध्यक्ष श्री ए.एम सप्रे ने नियम निर्माण प्रक्रिया के दौरान अपने अनुभवों पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्री राजेन्द्र तिवारी ने आभार व्यक्त किया। न्यायमूर्ति श्री ए.के. पटनायक ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप जलाया।
मुख्यमंत्री द्वारा श्री गणेश प्रतिमा का विसर्जनमुख्यमंत्री द्वारा श्री गणेश प्रतिमा का विसर्जन भोपाल : 14 सितम्बर, 2008 मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज सपरिवार स्थानीय प्रेमपुरा घाट पर मुख्यमंत्री निवास में प्रतिष्ठापित श्री गणेश प्रतिमा का गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच विसर्जन किया। इसके पहले श्री चौहान और धर्मपत्नी श्रीमती साधना चौहान ने घाट पर विधिवत पूजा-अर्चना कर श्री गणेश आरती का गायन किया। श्री चौहान के साथ दोनों पुत्र और परिजन थे।
संसाधनों की कमी की आड़ में रोगी को इलाज से इंकार नहीं किया जा सकता - भारत के मुख्य न्यायाधिपति जस्टिस श्री बालाकृष्णनसंसाधनों की कमी की आड़ में रोगी को इलाज से इंकार नहीं किया जा सकता - भारत के मुख्य न्यायाधिपति जस्टिस श्री बालाकृष्णन प्रतिबध्दता और संवेदनशीलता से ही कार्यक्रमों की सफलता निर्भर -म.प्र. के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री पटनायक ''स्वास्थ्य का अधिकार'' कार्यशाला का समापन
भोपाल : 14 सितम्बर 2008
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति जस्टिस श्री के.जी. बालाकृष्णन ने कहा है कि अस्पतालों में संसाधनों की कमी की आड़ में कोई भी सरकार रोगी को इलाज से मना नहीं कर सकती। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने एक विशेषज्ञ समिति से जांच करवाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने एवं विभिन्न अस्पतालों में ऐसी संवाद प्रणाली बनाने का सुझाव दिया था जिससे रोगियों को तत्परता से चिकित्सा उपकरण, एम्बुलेंस और डॉक्टर की सेवाएं उपलब्ध हो सकें। जस्टिस बालाकृष्णन ने यह बात आज यहां म.प्र. मानव अधिकार आयोग द्वारा आयोजित '' स्वास्थ्य के अधिकार'' कार्यशाला के समापन सत्र में कही। इस अवसर पर म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री ए.के. पटनायक, म.प्र. मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस श्री डी.एम. धर्माधिकारी, सर्वोच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश जस्टिस श्री पी.पी. नावलेकर, सदस्य द्वय जस्टिस श्री नारायण सिंह 'आजाद' और श्री विजय शुक्ल मुख्य रुप से उपस्थित थे। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि मानव अधिकारों की वैश्विक घोषणा में प्रत्येक व्यक्ति और उसके परिवार को अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन, वस्त्र, हवा, सामाजिक सेवाएं तथा चिकित्सा सुविधाएं देने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, बीमारी, अपंगता, वैधव्य, वृध्दावस्था और आजीविका की कमी की स्थिति में भी प्रत्येक मनुष्य को जीवन का अधिकार मिलता रहे उसके लिए उसका स्वास्थ्य अच्छा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर विभिन्न प्रकरणों में दिए अपने निर्णयों में मनुष्य के स्वास्थ्य के अधिकार को आवश्यक माना है। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक प्रकरण में दुर्घटना में घायल व्यक्ति के चिकित्सकीय- विधिक प्रकरण में कोई अस्पताल अथवा डॉक्टर पीड़ित का इलाज करने से इन्कार नहीं कर सकता, ऐसा फैसला दिया है। इलाज से इंकार करना चिकित्सा आचार संहिता का उल्लंघन होगा। न्यायालय ने माना है कि ऐसा इन्कार व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायालय के इस फैसले से अब लोगों को आपातकालीन चिकित्सा उपचार का अधिकार मिल गया है। श्री बालाकृष्णन ने अन्य प्रकरण का संदर्भ देते हुए कहा कि पारिश्रमिक लेकर किए गए रोग निदान और उपचार को अब उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में ले लिया गया है। पारिश्रमिक लेकर दी गई चिकित्सा सेवा में लापरवाही एवं कमी की स्थिति में भी डॉक्टर एवं चिकित्सा संस्था के विरुध्द कार्रवाई की जा सकती है। इस विधिक प्रावधान से भी रोगियों के हित का संरक्षण हो सकेगा। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि पिछले वर्षों में सरकारों ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काफी संसाधन जुटाए हैं, निजी क्षेत्र में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल खुलने लगे हैं, लेकिन ये सब सुविधाएं अभी तक केवल सम्पन्न वर्ग के लोगों को ही मिल रही हैं। सरकारों को ऐसे उपायों को भी अमल में लाना चाहिए जिससे गरीबों को भी इनका लाभ मिल सके। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि विगत दिनों प्रचार माध्यमों ने मानव अंगों के अवैध व्यापार की ओर ध्यान आकर्षित किया था। इसी प्रकार झोलाछाप डॉक्टरों और असुरक्षित परंपरागत दवाईयों के चलन की भी जानकारियाँ मिलती हैं। सरकारों को प्रशासनिक एवं विधिक प्रयास करके इन कमियों को दूर करने के प्रयत्न करने चाहिये। जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा कि आज अनेक संक्रामक बीमारियाँ एक से दूसरे देश में जाने लगी हैं। कुछ वर्ष पूर्व मैड काऊ, सार्स और एवियन फ्लू रोगों के फैलने का पता चला था। एच.आई.व्ही. / एड्स की विकरालता भी कम नहीं हो रही है। इस स्थिति में मानव अधिकार की घोषणा को कम करके नहीं ऑकना चाहिए। दूसरे देशों से आने वाली नई बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकारी, निजी और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग से चिकित्सा प्रौद्योगिकी, दवाईयां और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के अधिकार को वैश्विक स्तर पर सार्थक अधिकार के रुप में स्वीकार करना होगा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री ए.के. पटनायक ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार एक नई सोच है। श्री पटनायक ने कहा कि यह एक नैसर्गिक सिध्दांत है कि बिना अच्छे स्वास्थ्य के कोई भी व्यक्ति अच्छा जीवन नहीं जी सकता। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार के वैश्विक घोषणा में मनुष्य की स्वतंत्रता और गरिमा भी शामिल है। श्री पटनायक ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध विधिक प्रावधानों का उल्लेख किया। जस्टिस पटनायक ने कहा कि अस्पतालों द्वारा इलाज से इंकार करना मानव के जीवन के अधिकार का हनन है। उन्होंने बताया कि अच्छे स्वास्थ्य का स्वच्छ पर्यावरण से सीधा संबंध है। यदि आसपास का पर्यावरण साफ नहीं होगा तो लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं रह सकता। उन्होंने बताया कि मेरठ में एक पशुवध गृह के संबंध में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया था कि इस पशुवध गृह की स्थापना के कारण यदि पास में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है तो वहां इसकी स्थापना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्यक्रम तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसमें प्रतिबध्दता और संवेदनशीलता का भाव न हो। श्री पटनायक ने कहा कि सरकार को सतना में कुपोषण से हुई बच्चों की मृत्यु की ओर ध्यान देना चाहिए। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस श्री डी.एम. धर्माधिकारी ने कहा कि विलंबित और मंहगी न्याय प्रणाली तथा जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण बड़ी संख्या में लोग अब अपनी तकलीफों के निदान के लिए मानव अधिकार आयोग में आ रहे हैं। आयोग में इन तकलीफज़दा लोगों की मदद की यथा संभव कोशिश की जाती है। श्री धर्माधिकारी ने आयोग के प्रति राज्य सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयोग न केवल व्यक्तिगत शिकायतों के निराकरण की पहल करता है बल्कि मानव के अन्न, पेयजल और स्वास्थ्य जैसे मसलों पर भी व्यापक लोकहित को ध्यान में रखते हुए जनमानस बनाने के प्रयास कर रहा है। श्री धर्माधिकारी ने कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी आयोग द्वारा भेजे आवेदकों को बड़ी मदद की है। कतिपय मामलों में जहां आयोग की अनुशंसाओं को मान्य नहीं किया जाता, ऐसे मामले उच्च न्यायालय को संदर्भित करने हेतु विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजे जाते हैं। आयोग के आई.जी. श्री सुशोभन बॅनर्जी ने कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट किया। संचालन उप सचिव श्री विजय चन्द्र ने किया। इस अवसर पर डी.जी.पी. श्री एस.के. राउत, आयोग के प्रमुख सचिव डॉ. ए.एन. अस्थाना, लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री देवराज बिरदी, नेशनल ज्युडिशियल अकादमी के प्राध्यापक, प्रशिक्षु न्यायाधीश, जिला न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, गणमान्य नागरिक तथा राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
15 septiembre 81 हेडमास्टर बीईओ बनाए गए राज्य सरकार के फैसले पर अमल81 हेडमास्टर बीईओ बनाए गए राज्य सरकार के फैसले पर अमल राज्य सरकार के फैसले के मद्देनज़र माध्यमिक शालाओं के 81 प्रधानाध्यापकों को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के पद पर तरक्की दी गई है। इस सिलसिले में आदेश जारी कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की मंशा के मुताबिक शिक्षक समुदाय के लिए तरक्की के रास्ते खोलने की ख़ातिर मौजूदा विभागीय भर्ती और पदोन्नति नियमों में 21 मार्च 2007 को संशोधन किया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण आयुक्त की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुलाकर उपरोक्त प्रधानाध्यापकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गई। माध्यमिक शालाओं के इन प्रधानाध्यापकों का वेतनमान 5500-175-9000 रूपए था जो अब इनके विकासखंड शिक्षा अधिकारी बन जाने पर 6500-200-10500 रूपए हो गया है। इन नवनियुक्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के पदस्थापना स्थल भी निर्धारित किए गए हैं। आदेश के मुताबिक विकासखंड शिक्षा अधिकारी पर पदोन्नति के बाद श्रीमती के. खुरचानिया जबलपुर को सौंसर (छिंदवाड़ा), श्रीमती एस.मेहता जबलपुर को लांजी (जबलपुर), श्री आर.के. जैन जबलपुर को चिचली (नरसिंहपुर), श्रीमती के. बजाज जबलपुर को नरसिंहपुर, श्रीमती जी. गुप्ता जबलपुर को गोरेगाँव (नरसिंहपुर), श्री आर.पी. मिश्रा जबलपुर को मंझौली (जबलपुर), श्रीमती रामकुमारी चौहान छतरपुर को वारीगढ़ (छतरपुर), श्रीमती अरूणा दुबे रीवा को पोरसां (मुरैना), श्री कौशलेन्द्र नाथ पाठक रीवा को अटेर (भिण्ड), श्री आर.एस. राहंगडाले सिवनी को केवलारी (सिवनी), श्री गंगा प्रसाद पटेल रीवा को अशोकनगर, श्री भगवत प्रसाद शुक्ला रीवा को मुंगावली (अशोकनगर), श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह सतना को टिमरनी (हरदा), श्री रामेश्वर प्रसाद मिश्रा दमोह को बड़ौद (शाजापुर), श्री जिनेन्द्र कुमार जैन दमोह को जबेरा (दमोह), श्रीमती रामसखी मिश्रा सागर को सागर, श्री जी.सी. रावत सीहोर को ब्यावरा (राजगढ़), श्रीमती नजमा मंजूर भोपाल को बैरसिया (भोपाल), श्री आर.के सैनी रायसेन को औबेदुल्लागंज (रायसेन), श्री गोविन्द दास विश्वकर्मा दमोह को चंदेरी (अशोनगर), कुमारी कमल खरे छतरपुर को लोहड़ी (छतरपुर), श्रीमती सरस्वती मिश्रा छतरपुर को राजनगर (छतरपुर), श्री रमेशचंद्र जैन दमोह को राघौगढ़ (गुना), श्री एस.एस. यादव टीकमगढ़ को आरोन (गुना), श्री प्रकाश भाटी रतलाम को रतलाम, श्री मनोहर चीने रतलाम को आलोट (रतलाम), श्री सुरेन्द्र कोठारी रतलाम को विदिशा, श्री माणकलाल भटेवरा रतलाम को कुरवाई (विदिशा), श्री सुरेन्द्र सिंह पुरोहित रतलाम को लटेरी (विदिशा), श्री कैलाशचंद्र वैध उज्जैन को तराना (उज्जैन), श्री हुकुमसिंह चौहान उज्जैन को बड़नगर (उज्जैन), श्री कमलनयन चॉदनीवाला उज्जैन को महिदपुर (उज्जैन), श्री एम.अल्ताफ बैग मंदसौर को नीमच, श्री नरेन्द्र जैन इंदौर को टोकखुर्द (देवास), श्री भूपेन्द्र कुमार शाह उज्जैन को प्रभातपट्टन (बैतूल), श्री रमेशचन्द्र गायेल उज्जैन को आमला (बैतूल), श्रीमती राजकुमारी पटेल नरसिंहपुर को करेली (नरसिंहपुर), श्री रमेशचन्द्र सिंहल नीमच को भानपुरा (मंदसौर), श्री रमेशचंद्र उपाध्याय रतलाम को शुजालपुर (शाजापुर), श्रीमती कोकिला जैन सागर को रेहली (सागर), श्रीमती रामवती अहिरवार सागर को मालथौन (सागर), श्री जे.के जैन विदिशा को ग्यारसपुर (विदिशा), श्री जे.के. पुरोहित रायसेन को उदयपुरा (रायसेन), श्री एम.के. विजय राजगढ़ को नरसिंहगढ़ (राजगढ़), श्री जान मोहम्मद खां दतिया को भाण्डेर (दतिया), श्री राम प्रकाश सिंह सिकरवार मुरैना को मुरैना (मुरैना), श्री डी.पी. शर्मा मुरैना को जौरा (मुरैना), श्री राजकुमार बड़गैया जबलपुर को कटंगी (बालाघाट), श्री आर.सी. जैन सागर को रोन (भिण्ड), श्रीमती कृष्णा गोस्वामी सागर को बनखेड़ी (होशंगाबाद), श्री बृजेन्द्र कुमार खरे टीकमगढ़ को श्योपुर (श्योपुर), श्री गोविन्द प्रसाद शर्मा सतना को नटेरन (विदिशा), श्री आनंद प्रकाश तिवारी सतना को डबरा (ग्वालियर), श्री रामपति तिवारी रीवा को गंजबसौदा (विदिशा), श्री श्यामसुदंर शर्मा रीवा को अम्बाह (मुरैना), श्री रामप्रसाद चौहान इंदौर को खातेगांव (देवास), श्रीमती कौशिल्या देवी कटनी को पिपरिया (होशंगाबाद), श्री टी.एल. प्रजापति उमरिया को बाड़ी (रायसेन), श्री शिव भजन मांझी रीवा को पिछोर (शिवपुरी), श्री सूर्यदीन साकेत रीवा को पहाड़गंज (मुरैना), श्री मोती लाल साकेत रीवा को खनियाधाना (शिवपुरी), श्री समोधी प्रसाद साकेत रीवा को करेरा (शिवपुरी), श्री राजधर साकेत रीवा को केसली (सागर), श्री जगतपाल पासी सतना को लालबर्रा (बालाघाट), श्रीमती शीला पथरोल गुना को गुना, श्री प्रभात सिंह चौहान धार को बदनावर (धार), श्रीमती ग्यारसी बाई धार को खण्डवा, श्री पन्नालाल सोलकी इंदौर को सिवनी-मालवा (होशंगाबाद), श्री वाय.एस. चौहान खण्डवा को सोहागपुर (होशंगाबाद), श्री के.एस. बड़कड़े जबलपुर को सांईखेड़ा नरसिंहपुर, श्रीमती एस. सरवटे जबलपुर को जबलपुर, श्री मनोहर लाल साकेत सतना को जीरापुर (राजगढ़), श्री विसर्जन प्रसाद कोल रीवा को अजयगढ़ (पन्ना), श्री वंशधारी प्रसा पठारी उमरिया को खेरलांजी (बालाघाट), श्री लल्ला प्रसाद रैतवार रीवा को किरनापुर (बालाघाट), श्री रंगलाल वर्मा इंदौर को हरदा, श्री कन्हैया लाल कोल सतना को खिरकिया (हरदा), श्री पुरूषोत्तम सिंह सीधी को गुनौर (पन्ना), श्री एम.एस. ठाकुर सागर को खुरई (सागर) और श्री मांगीलाल डामर रतलाम को शाजापुर में पदस्थ किया गया है।
81 हेडमास्टर बीईओ बनाए गए राज्य सरकार के फैसले पर अमल81 हेडमास्टर बीईओ बनाए गए राज्य सरकार के फैसले पर अमल राज्य सरकार के फैसले के मद्देनज़र माध्यमिक शालाओं के 81 प्रधानाध्यापकों को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के पद पर तरक्की दी गई है। इस सिलसिले में आदेश जारी कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की मंशा के मुताबिक शिक्षक समुदाय के लिए तरक्की के रास्ते खोलने की ख़ातिर मौजूदा विभागीय भर्ती और पदोन्नति नियमों में 21 मार्च 2007 को संशोधन किया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण आयुक्त की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुलाकर उपरोक्त प्रधानाध्यापकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गई। माध्यमिक शालाओं के इन प्रधानाध्यापकों का वेतनमान 5500-175-9000 रूपए था जो अब इनके विकासखंड शिक्षा अधिकारी बन जाने पर 6500-200-10500 रूपए हो गया है। इन नवनियुक्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के पदस्थापना स्थल भी निर्धारित किए गए हैं। आदेश के मुताबिक विकासखंड शिक्षा अधिकारी पर पदोन्नति के बाद श्रीमती के. खुरचानिया जबलपुर को सौंसर (छिंदवाड़ा), श्रीमती एस.मेहता जबलपुर को लांजी (जबलपुर), श्री आर.के. जैन जबलपुर को चिचली (नरसिंहपुर), श्रीमती के. बजाज जबलपुर को नरसिंहपुर, श्रीमती जी. गुप्ता जबलपुर को गोरेगाँव (नरसिंहपुर), श्री आर.पी. मिश्रा जबलपुर को मंझौली (जबलपुर), श्रीमती रामकुमारी चौहान छतरपुर को वारीगढ़ (छतरपुर), श्रीमती अरूणा दुबे रीवा को पोरसां (मुरैना), श्री कौशलेन्द्र नाथ पाठक रीवा को अटेर (भिण्ड), श्री आर.एस. राहंगडाले सिवनी को केवलारी (सिवनी), श्री गंगा प्रसाद पटेल रीवा को अशोकनगर, श्री भगवत प्रसाद शुक्ला रीवा को मुंगावली (अशोकनगर), श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह सतना को टिमरनी (हरदा), श्री रामेश्वर प्रसाद मिश्रा दमोह को बड़ौद (शाजापुर), श्री जिनेन्द्र कुमार जैन दमोह को जबेरा (दमोह), श्रीमती रामसखी मिश्रा सागर को सागर, श्री जी.सी. रावत सीहोर को ब्यावरा (राजगढ़), श्रीमती नजमा मंजूर भोपाल को बैरसिया (भोपाल), श्री आर.के सैनी रायसेन को औबेदुल्लागंज (रायसेन), श्री गोविन्द दास विश्वकर्मा दमोह को चंदेरी (अशोनगर), कुमारी कमल खरे छतरपुर को लोहड़ी (छतरपुर), श्रीमती सरस्वती मिश्रा छतरपुर को राजनगर (छतरपुर), श्री रमेशचंद्र जैन दमोह को राघौगढ़ (गुना), श्री एस.एस. यादव टीकमगढ़ को आरोन (गुना), श्री प्रकाश भाटी रतलाम को रतलाम, श्री मनोहर चीने रतलाम को आलोट (रतलाम), श्री सुरेन्द्र कोठारी रतलाम को विदिशा, श्री माणकलाल भटेवरा रतलाम को कुरवाई (विदिशा), श्री सुरेन्द्र सिंह पुरोहित रतलाम को लटेरी (विदिशा), श्री कैलाशचंद्र वैध उज्जैन को तराना (उज्जैन), श्री हुकुमसिंह चौहान उज्जैन को बड़नगर (उज्जैन), श्री कमलनयन चॉदनीवाला उज्जैन को महिदपुर (उज्जैन), श्री एम.अल्ताफ बैग मंदसौर को नीमच, श्री नरेन्द्र जैन इंदौर को टोकखुर्द (देवास), श्री भूपेन्द्र कुमार शाह उज्जैन को प्रभातपट्टन (बैतूल), श्री रमेशचन्द्र गायेल उज्जैन को आमला (बैतूल), श्रीमती राजकुमारी पटेल नरसिंहपुर को करेली (नरसिंहपुर), श्री रमेशचन्द्र सिंहल नीमच को भानपुरा (मंदसौर), श्री रमेशचंद्र उपाध्याय रतलाम को शुजालपुर (शाजापुर), श्रीमती कोकिला जैन सागर को रेहली (सागर), श्रीमती रामवती अहिरवार सागर को मालथौन (सागर), श्री जे.के जैन विदिशा को ग्यारसपुर (विदिशा), श्री जे.के. पुरोहित रायसेन को उदयपुरा (रायसेन), श्री एम.के. विजय राजगढ़ को नरसिंहगढ़ (राजगढ़), श्री जान मोहम्मद खां दतिया को भाण्डेर (दतिया), श्री राम प्रकाश सिंह सिकरवार मुरैना को मुरैना (मुरैना), श्री डी.पी. शर्मा मुरैना को जौरा (मुरैना), श्री राजकुमार बड़गैया जबलपुर को कटंगी (बालाघाट), श्री आर.सी. जैन सागर को रोन (भिण्ड), श्रीमती कृष्णा गोस्वामी सागर को बनखेड़ी (होशंगाबाद), श्री बृजेन्द्र कुमार खरे टीकमगढ़ को श्योपुर (श्योपुर), श्री गोविन्द प्रसाद शर्मा सतना को नटेरन (विदिशा), श्री आनंद प्रकाश तिवारी सतना को डबरा (ग्वालियर), श्री रामपति तिवारी रीवा को गंजबसौदा (विदिशा), श्री श्यामसुदंर शर्मा रीवा को अम्बाह (मुरैना), श्री रामप्रसाद चौहान इंदौर को खातेगांव (देवास), श्रीमती कौशिल्या देवी कटनी को पिपरिया (होशंगाबाद), श्री टी.एल. प्रजापति उमरिया को बाड़ी (रायसेन), श्री शिव भजन मांझी रीवा को पिछोर (शिवपुरी), श्री सूर्यदीन साकेत रीवा को पहाड़गंज (मुरैना), श्री मोती लाल साकेत रीवा को खनियाधाना (शिवपुरी), श्री समोधी प्रसाद साकेत रीवा को करेरा (शिवपुरी), श्री राजधर साकेत रीवा को केसली (सागर), श्री जगतपाल पासी सतना को लालबर्रा (बालाघाट), श्रीमती शीला पथरोल गुना को गुना, श्री प्रभात सिंह चौहान धार को बदनावर (धार), श्रीमती ग्यारसी बाई धार को खण्डवा, श्री पन्नालाल सोलकी इंदौर को सिवनी-मालवा (होशंगाबाद), श्री वाय.एस. चौहान खण्डवा को सोहागपुर (होशंगाबाद), श्री के.एस. बड़कड़े जबलपुर को सांईखेड़ा नरसिंहपुर, श्रीमती एस. सरवटे जबलपुर को जबलपुर, श्री मनोहर लाल साकेत सतना को जीरापुर (राजगढ़), श्री विसर्जन प्रसाद कोल रीवा को अजयगढ़ (पन्ना), श्री वंशधारी प्रसा पठारी उमरिया को खेरलांजी (बालाघाट), श्री लल्ला प्रसाद रैतवार रीवा को किरनापुर (बालाघाट), श्री रंगलाल वर्मा इंदौर को हरदा, श्री कन्हैया लाल कोल सतना को खिरकिया (हरदा), श्री पुरूषोत्तम सिंह सीधी को गुनौर (पन्ना), श्री एम.एस. ठाकुर सागर को खुरई (सागर) और श्री मांगीलाल डामर रतलाम को शाजापुर में पदस्थ किया गया है।
09 septiembre 21वीं सदी के भारत का निर्माण स्कूलों में होगा : प्रधानमंत्री21वीं सदी के भारत का निर्माण स्कूलों में होगा : प्रधानमंत्री मद्रास विश्वविद्यालय की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री का भाषण प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह ने नवीनता के जरिए 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत का निर्माण हमारे शिक्षण संस्थानों की कक्षाओं के कमरों में होगा। इस अवसर पर दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ इस प्रकार है : ''इस महान विश्वविद्यालय की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में शामिल होकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। आज शिक्षक दिवस है। आज के दिन मद्रास विश्वविद्यालय के महान एवं विशिष्ट विद्यार्थी तथा शिक्षक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर हम शिक्षकों को सम्मानित करते हैं। मैंने स्वयं अपने व्यावसायिक जीवन की शुरूआत विश्वविद्यालय शिक्षक के रूप में की थी, इसलिए आज यहां उपस्थित होकर मैं और भी गौरवान्वित तथा प्रसन्नचित हूं। मद्रास विश्वविद्यालय अपने में बेजोड़ है और हमारे महान राष्ट्रीय संस्थानों में से एक है। राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न पाने वालों में सात विभूतियां मद्रास विश्वविद्यालय की देन रही हैं। आपने दो नोबेल पुरस्कार विजेता तैयार किए हैं। 1930 में नोबेल पुरस्कार पाने वाले सर सी वी रमन और 1983 में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर एस चन्द्रशेखर इसी विश्वविद्यालय से सम्बध्द थे। अबेल पुरस्कार पाने वाले श्री एस आर श्रीनिवास वर्धन भी चेन्नई से सम्बध्द रहे हैं और यह पुरस्कार भी गणित के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के समकक्ष है। आपके सैंकड़ों शिक्षक और विद्यार्थियों ने अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। आपके विश्वविद्यालय ने कई अन्य विश्वविद्यालयों जैसे आंध्र विश्वविद्यालय, उस्मानिया विश्वविद्यालय, मैसूर और केरल विश्वविद्यालयों के निर्माण में योगदान किया है। ये सभी तमिलनाडु राज्य के विशिष्ट विश्वविद्यालयों में शामिल हैं। मैं आज यहां उन सभी स्त्री-पुरूषों का अभिनंदन करता हूं जिन्होंने इस विश्वविद्यालय को ख्याति दिलाने में अपना योगदान किया है। पिछले वर्ष जब डॉ0 एस आर श्रीनिवास वर्धन को अबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, तो मैंने उन्हें पत्र लिखकर बधाई दी थी। यह पुरस्कार गणित में नॉबेल पुरस्कार के समकक्ष है। डॉ0 श्रीनिवास ने अपने विनम्र उत्तर में मुझे बताया था कि वे उस प्रारंभिक शिक्षा के ऋणी हैं जो उन्हें चेन्नई में स्कूल और कॉलेज स्तर पर मिली। इस प्रकार बीसवीं सदी के अनेक महान बुध्दिजीवी, अनेक वैज्ञानिक, अनेक प्रख्यात इंजीनियर, अर्थशास्त्री और अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले स्त्री-पुरूष मद्रास विश्वविद्यालय के बारे में ऐसा ही मानते हैं। वे बड़ी निष्ठा के साथ कहते हैं कि मद्रास विश्वविद्यालय ने उन्हें बनाया है। मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि विश्वविद्यालय एक महान क्षेत्र है जो हमें सत्य के लिए मानव मात्र की शाश्वत खोज का अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करता है। इसलिए विश्वविद्यालय को अनिवार्य रूप से एक उदार संस्थान होना चाहिए। मैं आधुनिक विश्वविद्यालय के बारे में अपने प्यारे प्रधानमंत्री स्व0 जवाहर लाल नेहरू की धारणा को अक्सर उध्दृत करता रहा हूं। एक बार फिर इसे दुहराता हूं। पंडित जी ने 1947 में कहा था: 'कोई भी विश्वविद्यालय मानवतावाद, सहिष्णुता, औचित्य, प्रगति, साहसिक विचारों और सत्य की खोज के लिए काम करता है। वह उच्चतर उद्देश्यों की दिशा में मानव जाति के मार्च को आगे बढ़ाता है। अगर विश्वविद्यालय समुचित रूप में अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, तो यह हमारे राष्ट्र और हमारे लोगों के प्रति एक नेक दायित्व का पालन है। किन्तु अगर शिक्षण के हमारे मंदिर स्वयं संकीर्ण कट्टरता और निहित स्वार्थों का केन्द्र बनेंगे तो कैसे राष्ट्र खुशहाल होगा या लोगों का स्तर कैसे उन्नत होगा ? भारतीय उपमहाद्वीप मानव सभ्यता के उदय के समय से ही शिक्षण की भूमि रहा है। इसने संस्कृत और तमिल जैसी महान और प्राचीन भाषाओं को जन्म दिया है। विज्ञान और गणित में शून्य तथा युग्मक (बाइनरी) प्रणाली जैसी महान अवधारणाओं का आविष्कार इसी धरती पर हुआ है। अनेक महान धर्मों का जन्म भी यहां हुआ, जो आज भी दुनिया भर में अपनाए जा रहे हैं। महान साहित्यकारों और कलाकारों का उदय भी इसी भारत भूमि पर हुआ। अगर हमारे पूर्वज शिक्षण की इस संस्कृति को पल्लवित एवं पुष्पित नहीं करते तो यह सब संभव नहीं था। अगर उस संस्कृति में कोई कमी थी, तो यह कि शिक्षा के अवसर हमारे सभी लोगों के लिए उपलब्ध नहीं थे। आज हम उस कमी को दूर करने की स्थिति में आ गए हैं। आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि लोकतांत्रिक भारत अपने सभी नागरिकों तक शिक्षा और प्रशिक्षण के अधिकार का विस्तार करने के प्रति वचनबध्द हैं। आज एक देश के रूप में हम इस लक्ष्य के प्रति कृत संकल्प हैं कि हमारे समाज के सभी वर्गों की पहुंच शिक्षा तक होनी चाहिए। हमारी सरकार ने लोगों की शिक्षा अधिकारिता और देश में शिक्षा के विकास के क्षेत्र में एक नए चरण की शुरूआत की है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में जो निवेश हम कर रहे हैं, उससे आने वाले समय में हमारे देश का काया पलट होगा। हम सिर्फ शैक्षिक अवसरों के मात्रात्मक विस्तार पर नहीं बल्कि गुणात्मक विकास पर भी ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य ऐसे भारत का निर्माण करना है जिसमें सभी बच्चे स्कूल में हो, सभी वयस्कों को विपणन योग्य कौशल में व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसर मिले और हमारे सभी बच्चों को बौध्दिक उत्कृष्टता के अवसर प्राप्त हों। इन सभी प्रयासों में हमें बालिका शिक्षा और महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। सोनिया जी ने सभी महिलाओं की साक्षरता को शैक्षिक प्रयासों का आधार बनाने की आवश्कता पर बल दिया है। उनका मानना है कि ऐसा करने से चौहुमुखी सामाजिक और आर्थिक विकास पर अधिकतम प्रभाव पड़ेगा। तमिलनाडू ने महिलाओं की अधिकारिता की दिशा में हमें मार्ग दिखाया है। मैं चाहता हूं कि शेष भारत तमिलनाडू से सबक लें। महिलाओं की साक्षरता और बालिकाओं की शिक्षा की दर तमिलनाडू में अत्यंत प्रभावशाली हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि विद्वान और राजनेता मुख्यमंत्री डॉक्टर के करूणानिधि के प्रेरक नेतृत्व में तमिलनाडू राज्य सामाजिक और आर्थिक विकास की नयी उपलब्धियां हासिल करेगा। मैं सभी राजनीतिक नेताओं से अपील करता हूं कि वे देश के विकास में शिक्षा की केन्द्रीय भूमिका को समझें। दुर्भाग्य से हमारे सार्वजनिक प्रयासों का बड़ा हिस्सा अक्सर अल्पकालीन बाहरी समस्याओं और वर्तमान में उपलब्ध तक पहुंच पर केन्द्रित रहता है। हम वृध्दि और विकास के सवालों तथा अपने लोगों के लिए अवसरों के बहु आयामी विस्तार की चुनौती पर अधिक ध्यान केन्द्रित नहीं करते। विस्तार ऐसा होना चाहिए जो मानकों और नतीजों के साथ समझौता न करें लेकिन सभी प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करे। विश्वविद्यालय को विद्वानों और शिक्षकों का केन्द्र कहा जाता है। आज के दिन मैं शिक्षा संस्थानों और वास्तव में वृहत् राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की केन्द्रीय भूमिका का स्मरण अवश्य कराना चाहूंगा। शिक्षक संचालक होता है। हमें अपने विश्वविद्यालय में सर्वोत्कृष्ट प्रतिभाओं को आकर्षित करने की आवश्यकता है, जैसा कुछ अन्य देश कर रहे हैं। हमें दुनिया भर से ऐसे शिक्षकों को आकर्षित करना होगा। हमें ऐसे तौर-तरीके अपनाने होंगे ताकि विदेश में रह रही प्रतिभाशाली भारतीय हमारे ज्ञान के संस्थानों में वापस आयें। मैं इस अवसर पर राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के अधिकारियों तथा इस सुंदर शहर चेन्नई को प्यार करने वालों को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने कुछ विश्वविद्यालय भवनों की पुरानी गरिमा बहाल रखने में योगदान किया है। अपने शहर और इसके ऐतिहासिक भवनों पर आपको जो गर्व है उससे देश के अन्य शहरों को प्रेरित होना चाहिए कि वे अपनी बहुमूल्य वास्तुकला विरासत की रक्षा करें। मैं इस अवसर पर आप सबको भावी प्रयासों में सफलता की कामना करता हूं। मैं चाहता हूं कि आप सभी समग्र और नवीन भारत के निर्माण में योगदान करें ताकि भारत एक बार फिर उभरती हुई वैश्विक राजनीति के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभरे। आज हमारा देश जिन रचनात्मक सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उससे आप सभी अवश्य रू-ब-रू हो रहे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप उत्कृष्टता को बढ़ावा दें क्योंकि हमारा राष्ट्र 21वीं सदी को भारतीय सदी बनाने के लिए आपकी रचनाशीलता पर निर्भर है। 21वीं सदी पर भारत के निर्माण हमारे शिक्षा संस्थानों की कक्षाओं के कमरों में होगा और उससे भारत और विश्व दोनों का पुननिर्माण होगा। मैं आपके प्रयासों में आपकी सफलता की कामना करता हूं।
राष्ट्रपति ने शिक्षक समुदाय से ज्यादा पेशेवर रवैया, प्रतिबध्दता और समर्पण दिखाने का आह्वान कियाराष्ट्रपति ने शिक्षक समुदाय से ज्यादा पेशेवर रवैया, प्रतिबध्दता और समर्पण दिखाने का आह्वान किया राष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार वितरित किए हमारे जीवन को आकार देने और निर्देशित करने में शिक्षकों की महती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने कहा कि 'शिक्षक हमारी शिक्षा पध्दति के हृदय में हैं। शिक्षकों की शिक्षा का पुनरूध्दार तथा शिक्षण व्यवसाय के प्रति आदर को प्रोत्साहित किये बिना शिक्षा से संबंधित हमारी चुनौतियों से निबटने का कोई उचित तरीका नहीं है।' विज्ञान भवन में आज शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार-2007 देते हुए श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक वही है जो ज्ञान को इस तरह से बांटे जिससे कि विषय की बुनियादी बाते विद्यार्थियों के दिमाग में घुलमिल जाये। राष्ट्रपति ने कहा कि एक बढिया शिक्षक अच्छे से पढाता है, परंतु एक श्रेष्ठ शिक्षक विद्यार्थी में मानवीय मूल्यों को इस तरह से डालता है जो जीवन भर दिशानिर्देशक की तरह याद रहता है। श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने यह भी कहा कि हम सदियों से जिस ज्ञानयुक्त समाज में रह रहे हैं भारत को उसका भी लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिये ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो सक्षम, अन्वेषी तथा कार्य की बेहतर पध्दति की तलाश के बारे में सोचने वाले हों। एक शिक्षक प्रशिक्षुओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से ज्ञान के निर्माण की सुविधा विकसित कर सकता है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी ऐसी सोच है कि शिक्षा पध्दति में बदलाव के लिये शिक्षक समुदाय को बेहतर पेशेवर रवैया, प्रतिबध्दता और समर्पण दिखाना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए केन्द्रीय विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता राज्य मंत्री श्री एम.ए.ए.फातमी ने देश में शिक्षा का स्तर बढाने के लिए भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में प्रकाश डाला तथा पूरे भारत में सभी संभव तरीके से इसके प्रसार के बारे में बताया। उन्होंने शिक्षक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि न सिर्फ विद्यार्थी बल्कि हमारा पूरा समाज देश की निस्वार्थ सेवा करने वाले हमारे शिक्षकों का सम्मान करता है। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती डी.पुरनदेश्वरी देवी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। प्रतिभाशाली विद्यालय शिक्षकों को सार्वजनिक मान्यता देने के लिये भारत के राष्ट्रपति द्वारा हर साल 5 सितम्बर को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं। इस साल कुल मिलाकर 320 शिक्षकों को नामांकित किया गया है। इनमें से 82 महिला शिक्षिका हैं। 9 शिक्षकों को संस्कृत श्रेणी में तथा 5 को मदरसा में पढाने के लिये नामांकित किया गया है। 13 शिक्षक विशेष वर्ग से चुने गये हैं यानि इनमें वे शिक्षक आते हैं जो या तो विकलांग हैं या फिर सम्मिलित शिक्षा को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पुरस्कार के अंतर्गत चांदी का एक पदक, 25 हजार रूपये और प्रमाण पत्र जाता है। राष्ट्रपति का पूरा अभिभाषण इस प्रकार है- हमारे द्वितीय राष्ट्रपति डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृणन की जयंती भारत में हर वर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनायी जाती है। इस दिन हम महान विद्वान और शिक्षाविद तथा इस महान पेशे का सम्मान करते हैं। इस अवसर पर हम शिक्षकों की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना भी करते हैं। इस दिन, हम राष्ट्र के अपने उन शिक्षकों को नमन करते हैं जो वर्ष दर वर्ष शहरों, नगरों, गाँवों और धूल भरे रेगिस्तानों, तटीय क्षेत्रों और हमारे उच्च पर्वतों पर स्थित स्कूलों में कष्ट सहकर विद्यार्थियों को पढाते हैं। मैं प्रशंसनीय और निष्ठापूर्ण कार्यों के लिए पुरस्कार विजेता सभी शिक्षकों को बधाई देती हूँ। शताब्दियों से भारत शिक्षण और विद्वतापूर्ण परम्परा वाली सभ्यता के रूप में जाना जाता है। हजारों वर्ष पूर्व जब विश्व के अन्य हिस्सों में व्यवस्थित शिक्षा के महत्व को लोग जानते भी नहीं थे, उस समय हमारे गुरूकुलों में शिक्षक छोटे बच्चों को ज्ञान देने के साथ-साथ उनकी मनोवृत्ति, अभिरुचि और योग्यता का अवलोकन करते थे। हमारी परम्परा में शिक्षकों को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि वे विद्यार्थियों को अज्ञान के अंधेरे से निकाल ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और साथ ही उन्हें आजीविका कमाने में सहायक कुशलताओं मे भी निपुण बनाते हैं। हजारों वर्ष पूर्व भी हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली न केवल अपने समय से बहुत आगे थी बल्कि हमारे विश्वविद्यालयों की ख्याति भी पूरी दुनिया में फैली हुई थी। पाश्चात्य जगत में विश्वविद्यालयों की स्थापना से शताब्दियों पहले ही नालंदा, विक्रमशिला और नागार्जुनकोण्डा जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा के ऐसे केन्द्र थे, जिनमें विदेशों से विद्यार्थी पढने क़े लिए आया करते थे। शिक्षा की इस महान परंपरा को जारी रखना अब हमारी जिम्मेदारी है। हमारे शिक्षक अक्सर बेहद विषम परिस्थितियों में रहकर यह जिम्मेदारी निभाते हैं। वे नई पीढी क़ो दुनिया से मुकाबला करने के लिए तैयार करके, व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की अमूल्य सेवा करते हैं। हम सभी को याद रखना चाहिए कि शिक्षा नैतिक मूल्य प्रदान करने वाला ऐसा माध्यम है, जो सामाजिक बदलाव लाता है। वह शिक्षक ही होता है जो बाहरी दुनिया का परिचय करवाता है और युवा विद्यार्थियों के विचारों को सँवारता है। निस्संदेह श्रेठ शिक्षक इस प्रकार से ज्ञान प्रदान करता है कि विषयों की बुनियादी बातें विद्यार्थियों के मन की गहराई में बैठ जाती हैं। एक अच्छा शिक्षक अच्छी तरह पढाता है लेकिन एक बेहतर शिक्षक बच्चों में ऐसे मानवतावादी मूल्यों का संचार करता है जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करते रहते हैं। ये मूल्य कौन से हैं ? मेरा मानना है कि वे हैं, ईमानदार बनना और ईमानदारी से काम करना, माता-पिता, बुजुर्गों और सभी का सम्मान करना तथा यह सीखना कि प्रत्येक व्यक्ति के अलग-अलग विचार होते हैं और विचारों की इस भिन्नता को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए। यदि यहाँ उपस्थित सभी शिक्षक अपने विद्यार्थियों में इन सिध्दान्तों को डाल दें तो हम सहनशीलता की भावना और अनेकता में एकता के बीच फलफूल रहे अपने लोकतंत्र और राष्ट्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक लम्बा कदम बढा सकते हैं। यह तभी संभव है जब सच्चे अर्थों में विकसित मानवीय मूल्यों से युक्त पीढी हमारे राष्ट्र को ताकतवर बनाए। भारत को वर्तमान ज्ञानपूर्ण समाज का लाभ उठाना चाहिए। इसके लिए ऐसे लोगों की जरूरत है जो योग्य हों, नवान्वेषी हों और जो कामकाज के बेहतर और उन्नत तरीके ढूंढने की आकांक्षा रखते हों। एक शिक्षक विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के जरिए ज्ञान हासिल करने के काम को आसान बना सकता है, जैसा कि एक पुरानी कहावत में विद्यार्थी कहता है: मुझसे कहोगे तो मैं भूल जाऊँगा, मुझे दिखाओगे तो शायद मैं याद रखूँ, मुझे शामिल करोगे तो मैं समझ जाऊँगा। सक्रिय भागीदारी में जिज्ञासा, खोज, वाद-विवाद, प्रयोग और ऐसा चिन्तन शामिल होता है जिससे विचार पैदा होते हैं, जो बाद में व्यवहार में उतारे जाते हैं। निरंतर सीखने वाला शिक्षक उस दीपक की भांति होता है जिसकी लौ दूसरों को भी प्रदीप्त करती रहता है। डब्ल्यू.वी.यीट्स ने सही कहा है, न्नशिक्षा पानी भरना नहीं है बल्कि एक आग को सुलगाना है । न्न एक शिक्षक को युवा मन में इस प्रकार से जिज्ञासा जगानी चाहिए कि उसमें जीवनभर ज्ञान हासिल करने की भूख पैदा हो और वह दुनिया को और सौहार्दपूर्ण स्थान बनाने की अभिलाषा से भर जाए । इसके अलावा, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में निरंतर बढ रही स्पध्र्दा का सामना करने के लिए नई पीढी क़ो शिक्षा द्वारा पूरी तरह लैस करना चाहिए और उन्हें जीवन की सबसे निचले स्तर की सच्चाइयों से वाकिफ करवाना चाहिए ताकि वे सहृदय बनें और कमजोर वर्गों के अपने भाई-बंधुओं के लिए उनके मन में सहानुभूति पैदा हो । शिक्षक, शिक्षा प्रणाली का केन्द्र होते हैं। शिक्षकों के ज्ञान को पुन: सशक्त बनाने और शिक्षण कार्य के प्रति सम्मान पैदा किए बिना शैक्षिक चुनौतियों से निपटने का और कोई व्यावहारिक उपाय नहीं है । गांधी जी ने ठीक कहा है, न्न विद्यार्थियों और शिक्षकों - दोनों के मस्तिष्क को अवरूध्द नहीं करना चाहिए । न्न शिक्षकों का कौशल बढाने के लिए निरंतर प्रयास किया जाना चाहिए । मुझे बताया गया है कि 11वीं योजना में शिक्षक ज्ञान के ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इन प्रयासों का पूरी तरह अमल में लाना चाहिए । सरकार ने, संसाधनों के आदान-प्रदान और सहयोगी अनुसंधान को बढावा देने के लिए, इलैक्ट्रोनिक डिजिटल ब्रॉडबैंड नेटवर्क के जरिए सभी ज्ञानपूर्ण संस्थाओं को आपस में जोड़ने हेतु राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की एक महत्वपूर्ण सिफारिश को भी स्वीकार कर लिया है । इसी प्रकार, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने शिक्षकों और शिक्षा प्रशासकों के कौशल विकास के अवसर उपलब्ध करवाए हैं । आज, मैंने शिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल का शुभारंभ किया है । इसका मकसद ज्ञान अर्जित करने, सर्वोत्तम प्रयोगों और अनुभवों को आपस में बांटने और शिक्षकों के मजबूत नेटवर्क के निर्माण के लिए एक मंच प्रदान करना है । मैं शिक्षकों का आह्वान करती हूं कि वे अपने अध्यापन कौशल और पध्दति को नवीनतम बनाने के लिए इस पोर्टल का सार्थक इस्तेमाल करें । शिक्षकों के शिक्षा कार्यक्रमों में सुधार लाने और उन्हें मजबूत बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में उत्तम शिक्षा उपलब्ध करवाने की भी जरूरत है । हमारे ग्रामीण विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं और गुणी अध्यापकों की अनुपलब्धता रहती है । मुझे खुशी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नवोदय विद्यालय ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं । इसके अलावा, रिहायशी इलाकों की कमजोर वर्ग की कन्याओं को उत्तम शिक्षा प्रदान करने के लिए शैक्षिक तौर से पिछड़े प्रखंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना की गयी है । सर्व शिक्षा अभियान, सबके लिए प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है, इसमें पिछड़े वर्गों के बच्चों की शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है । अनेक प्रयासों के फलस्वरूप, पढार्ऌ बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में काफी कमी आई है । शिक्षा की गुणवत्ता सुधारते हुए माध्यमिक विद्यालयों के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान नामक एक कार्यक्रम आरम्भ किया जा रहा है । शिक्षकों के ज्ञान में सुधार और क्षमता निर्माण सहित अनेक प्रयासों के जरिए आसपास के स्कूलों की गुणवत्ता में तेजी लाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में, कम से कम एक विद्यालय की स्थापना करते हुए, 6000 नए उच्च गुणवत्ता वाले मॉडल स्कूल खोलने की योजना है । सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों से हमारे स्कूलों का शिक्षा और शिक्षण माहौल बदलने की संभावना है । संचार माध्यमों विशेषकर कम्प्यूटर और टेलीविजन के लगातार इस्तेमाल से स्कूलों और घरों में आपसी बातचीत के इलेक्ट्रोनिक माहौल का निर्माण होगा । इसके लिए स्पध्र्दात्मक और व्यक्तिगत शिक्षण के स्थान पर सहकारी और सहयोगी शिक्षण की जरूरत पड़ेगी । भविष्य में कक्षाएं सहयोग, सृजन, अन्वेषण और समाधान पर आधारित होंगी । मुझे उम्मीद है कि हमारा शिक्षण समुदाय शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने के लिए अधिक दक्षता, निष्ठा और समर्पण से कार्य करेगा । शिक्षण, केवल पाठ तैयार करना या सामूहिक परिणाम हासिल करने के लिए बनी बनाई जानकारी देना ही नहीं है । इसमें बच्चों में विचारशीलता पैदा करने और सीखे गए विषयों को आजमाने की प्रक्रिया भी शामिल होनी चाहिए । इसलिए, मैं चाहूंगी कि शिक्षकों को न्नसूचना न्न प्रदान करने की पारंपरिक भूमिका के स्थान के न्ननिष्कर्षक और न्न मार्गदर्शक न्न की भूमिका निभानी चाहिए। मैं यह भी कहना चाहूंगी कि वे यह भी सुनिश्चित करे कि विद्यार्थियों का विश्व-नागरिक बनाते समय हमारी महान सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे । एक बार फिर, मैं पुरस्कार विजेता शिक्षकों को अपनी बधाई और शिक्षक समुदाय को शुभकामनाएं देती हूं तथा उनके कार्यों के सफल होने की कामना करती हूं ।
06 septiembre सरकार की पिटाई और मराई मामले में 1014 लोगों पर मुकदमे 14 किरारों ने 40 को पीटा, मरणासन्न किया जिसमें 20 पुलिस वाले, प्रशासन का हैरत अंगेज केससरकार की पिटाई और मराई मामले में 1014 लोगों पर मुकदमे 14 किरारों ने 40 को पीटा, मरणासन्न किया जिसमें 20 पुलिस वाले, प्रशासन का हैरत अंगेज केस Narendra Singh Tomar “Anand” मुरैना 6 सितम्बर 08, आखिर भैस ने पूंछ उठाई और गोबर कर ही दिया । अरे गोबर क्या कर दिया पोंक (लूज मोशन) कर दिया । 4 सितम्बर में अंचल में हुये जनता बनाम सरकार संघर्ष में दोनो जन संग्रामों को सरकारी चश्में ने अपने नजरिये से नाप तौल लिया है । पहला मामला महाराजपुर के किरारों का है, यहॉं प्रलिस और प्रशासन की कुटाई पिटाई के साथ,द बंधक बनाने और मरणासन्न व अचेत करने तक कूटने पीटने का काण्ड हुआ सरकारी सूत्रान ने कहा था । यह भी कि बिजली चोरी हो रही थी । गॉंव में बिजली थी ही नहीं पर चोरी हो रही थी, खैर इस पर एक व्यंग्य लिखेंगें । दूसरी बात ये कि बीस बिजली वाले, बीस पुलिस वालों को लेकर चोर किसानों को पकड़ने और जेल में ठूंसने गये थे यानि कुल मिला कर अलीबाबा और 40 चोर यानि गब्बर बोले तो कित्ते आदमी थे, 40 थे पूरे 40 । अब गब्बर फिर पूछे कित्ते लोगों ने मारा, अब जवाब आया सरकारी कि 14 लोगों ने हुजूर । ससुरी हमारी पूरी जिन्दगी गणित पढ़ते पढ़ते बीत गयी, हमेशा टॉप किया, कभी गणित में 98 प्रतिशत से कम अंक नहीं आये, हमने जिन्दगी में कई दंगे देखे, कई फसाद भी देखे ससुरा ऐसा गणित आज हमारी समझ में नहीं आया कि 14 ग्रामीण किसान 40 सरकारी आदमीयों को कूट दें, पीट दें और बंधक बना लें तथा मरणासन्न तथा अचेत भी कर दें । भैया हमारे पल्ले तो नहीं पड़ा किसी के पल्ले पड़ जायेगा तो बता देना । पुलिस पर हथियार भी रहते हैं, ऊपर से बाहर से पुलिस बल भी पहुंचा, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस व बिजलीवालों सहित कुल मिला कर करीब 550 से ऊपर आदमी थे । फिर भी 14 निहत्थे ग्रामीण किसान 40 या 550 को कूट पीट दें, मेरे पल्ले नहीं पड़ी । मैं इंजीनियरिंग और एम.एससी करके वकील भी हूं, कानूनी तौर पर ऐसे केस पहले झटके में ही अदालत में उड़ जायेंगें यह मुझे पता है, क्योंकि प्रमुख आधारिक तथ्य सर्वथा अतार्किक व असंभाव्यता पर जुड़ा है । कोई भी चतुर वकील सिर्फ एक तर्क में ही बात खत्म करवा देगा । खैर महाराजपुर मामला आनन फानन में धोखे से कायम हो गया, पिटने वाले पिट गये, कुटने वाले कुट गये और मरणासन्न वाले अस्पताली मरघट की खटिया पर चित्त पड़े हैं । मुख्यमंत्री से किरारों के सम्बन्ध की बात अगर सरकार को पता नही लगती तो क्या होता, फिर ये होता नीचे दूसरा मामला उसी दिन का समान घटनाक्रम का देखिये, इसमें सरकार की खुपडि़या फोड़ दी, दांत तोड़ दिये और गाड़ी फूंक दी बताई गयी। महाराजपुर में प्रशासन मुख्यमंत्री के किरारों के सामने पोंक गया (लूज मोशन कर गया) वही बानमोर में एक हजार लोगों पर मामले लादे गये, (है मजे की बात् बानमोर घटनाक्रम में एक हजार लोगों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज किये गये हैं । साली समूची बानमोर को ही क्यों नहीं धर दिया एफ.आई.आर में साला सब संकट ही खत्म हो जाता । अब वे संघर्ष शान्त कर रहे थे कि एक हजार लोगों के मुखमण्डल चीन्ह रहे थे, राम जाने । एक हजार चीन्ह लिये हैं सैकड़ों थाने में बन्द कर पीट कूट डाले । सरकार खिसया खिसिया कर पोंक रहे हैं । पिटे कुटे आदमी अपने घर जाकर सिकाई कराते हैं, चोट पर मल्हम लगवाते हैं, और मालिशमत्ता करवा करू कर हड्डी पसली चेक कराते हैं । कहॉं यार हजार लोगों के मुख मण्डल पहचान पहचान कर ढ़ढ़ते फिर रहे हो, अब कुट पिट तो गये ही, हजारों को अदालत ले जाकर का करोगे । वैसे ही फोकट बरी हो जायेंगें । तुम खिसियाये फिर रहे हो, जनता तुम से ज्यादा खिसिया जायेगी, और अबकी बार मारेगी तो और ज्यादा मारेगी । साला चार दिन चम्बल का पानी लिये हो, तुम भी बदला बदला नर्राने लगे । पुलिस कायमी कराना, जेल में ठूंसना चम्बल में बदला नहीं माना जाता भइये । बदला लेना ही है तो, जनसेवा करो प्यारे, गरीब की फरियाद सुनो, मजबूर को सहारा दो, रोते के ऑंसू पोंछों । आत्मा शान्त हो जायेगी, चित्त में धीरज आ जायेगा । काहे काे चम्बल की धरती पर एक महाभारत और एक घमासान का शिलान्यास कर रहे हो, ससुरा मंत्रियों से सीख गये हो पत्थर गाड़ना और रिमोटी शिलान्यास । खैर ये वक्त बतायेगा कि क्या करना उचित था और आप क्या गलत कर बैठे । हमें बात जमी नहीं दोस्त, पब्लिक पर मुकदमे बाजी जमी नहीं, अपनी ऑंख का टैंट देखो, लोक सेवक हो, लोक सेवक बन जाओ, जनता तुम्हारी माई बाप और अन्नदाता है, इस पर इतना जुल्म न ढाओ कि अबकी बार दांत तोड़ने और सिर फोड़ने के बजाय कुछ और गंभीर कर डाले । जन आक्रोश को स्वीकार करो, समस्या सुलझ जायेगी । वरना और पिटोगे । जनता की सुनो, जनता की करो, जनता का हुक्म मानो, नेता मंत्री ससुरे चार दिना के हैं फिर अंधेरी रात है, अंध भक्ति अच्छों अच्छों को मरवा डालती है । क्या साला 14 ने 40 को कूटा 550 को खदेड़ा, बानमोर में एक हजार ने भभ्भर किया, बात कुछ हजम नहीं हो रही । पूरे मुरैना जिला को ही क्यों नहीं साला ठोक के बन्द कर देते । क्योंकि भैया हम ज्योतिषी भी हैं और ज्योतिष कहता है कि नहीं सुधरे तो और कुटोगे । जनता और सरकार का तीसरा संघर्ष बाल बाल टला दिमनी मेंजनता और सरकार का तीसरा संघर्ष बाल बाल टला दिमनी में मुरैना 5 सितम्बर 08, चम्बल घाटी के इतिहास में एक ही दिन में तीन जन आन्दोलन या सरकार विरूद्ध जनता संघर्ष का तीसरा हादसा राजपूत बाहुल्य क्षेत्र दिमनी में होते होते बाल बाल टल गया । यहॉं भी पुलिस, प्रशासन और जनता आमने सामने आ गयी । यदि यह हादसा हो जाता तो तीन जनसंघर्ष एक साथ होने पर गृहयुद्ध घोषित हो जाता । यह स्थिति इसलिये भी भयावह होती क्योंकि दिमनी क्षेत्र राजपूत बाहुल्य क्षेत्र है साथ ही दिमनी कस्बा अम्बाह तहसील का संवेदनशील इलाका है, जहॉं तोमर राजपूतों की विशाल बसाहट है । दिमनी में हुआ हादसा तत्काल अम्बाह, पोरसा, बुधारा होते हुये भिण्ड जिला में भसी तत्काल फैल जाता क्योंकि भिण्ड भदौरिया और कछवाहे राजपूतों का बाहुल्य प्रधान क्षेत्र है साथ ही मुरैना के तोमर राजपूत इनके रिश्तेदार हैं । उधर यह संघर्ष भिण्ड क्षेत्र में प्रवेश करता इधर मुरैना के नजदीक होने के कारण चम्बल के सम्भागीय मुख्यालय मुरैना शहर में भी स्वत: ही जन आन्दोलन भड़क जाता । जबकि निकट ही चन्द गज के फासले पर किरारों ने महाराजपुर में तथा बानमोर में समूची जनता ने जन संघर्ष छेड़ ही दिया था । जिसकी खबरें पलक झपकते ही आग की तरह फैल कर मुरैना में आ चुकीं थीं और महज एक दो घण्टे के भीतर सारी चम्बल में फैल चुकीं थीं । जनता में अन्दरूनी आक्रोश इस कदर व्याप्त है कि केवल वश ही नहीं चल रहा वरना सरे राह सरे आम कत्लेआम कभी भी शुरू हो सकता है । दिमनी का घटनाक्रम इस प्रकार है, अम्बाह के एस.डी.एम. श्री एस.एम. दौलतानी मुरैना के दोनो जनसंघर्ष काण्ड में भाग लेकर अम्बाह लौट रहे थे कि तभी वहॉं गणेश महोत्सव का जबरन चन्दा बटोरते कुछ भाजपाईयों ने एस.डी.एम. दौलतानी से भी चन्दा वसूलने उनकी गाड़ी को रोक लिया । इस पर दौलतानी ने चन्दा वसूली अवैध बताते हुये कुछ लोगों को दिमनी थाने में बन्द करा दिया । इस पर जनता भड़क उठी और सैकड़ों लोगों ने दिमनी थाना घेर लिया । एस.डी.एम. दौलतानी ने तत्काल ही सूझ बूझ का परिचय देते हुये गिरफ्तार किये युवकों को तत्काल बिना केस कायम किये छुड़वा दिया । जिस पर आक्रोशित भीड़ भी खुद ही वहॉं से हट गयी । वरना जरा और मामला बढ़ता तो तिकड़ी काण्ड हो लेता । 05 septiembre चम्बल में कोहराम, जनता सड़कों पर पुलिस, प्रशासन व जनता में जम कर संघर्षचम्बल में कोहराम, जनता सड़कों पर पुलिस, प्रशासन व जनता में जम कर संघर्ष गोलीयां चलीं एक मरा सैकड़ों घायल, पुलिस की गाड़ी फूंकी, साठ वाहन फोड़े चक्का जाम, पथराव और लठ्ठों से धुनी सरकार, प्रशासन व पुलिस के सिर फोड़े, दांत तोड़े
मुरैना 5 सितम्बर 08, कल जब महाराजपुर में पुलिस जनता और बिजली कर्मी संग्राम छिड़ा और अभी इसकी आग बुझ भी नहीं पायी थी कि अंचल के मुरैना जिला के बानमोर कस्बे में भारी उपद्रव हो गया । पॉंच छ: घण्टे तक चले इस उपद्रव मे जनता और पुलिस तथा प्रशासन के बीच जम कर संघर्ष, पथराव, गोलीबारी और लठियाई हुयी । जिसमें जनता ने पुलिस व प्रशासन को जम कर धुन दिया, पुलिस व प्रशासन की गाड़ीयां तोड़ फोड़ दीं वहीं पुलिस की एक गाड़ी को जला कर फूंक दिया । प्रशासन व पुलिस अधिकारीयों के दांत तोड़ दिये और सिर फोड़ दिये । भाजपा शासनकाल में यह जनता और सरकार के बीच मुरैना जिला का तीसरा संग्राम तथा एक ही दिन में दूसरा जनसंघर्ष था । यहॉं भी पुलिस और प्रशासन ही ठुका पिटा । उल्लेखनीय है कि कई कारणों से चम्बल की जनता सरकार और प्रशासन व पुलिस से नाक तक भरी बैठी है और किंचित भी मौका पाते ही जनता के गुस्से उबाल निकल पड़ता है । यदि हालात यही रहे तो आने वाले चुनावों में न केवल भाजपा की बुरी फजीहत होगी बल्कि कोई शक नहीं कि जगह जगह पिटाई ठुकाई भी हो । जनता व प्रशासन एवं पुलिस के बानमोर में हुये संघर्ष के बाद समूची चम्बल घाटी में फोन, मोबाइल एवं इण्टरनेट सेवायें सरकार ने ब्लॉक करवा दीं और मीडिया सैटलमेण्ट में देर रात तक सरकार और भाजपाई लगे रहे । बानमोर में यह घटनाक्रम तब घटित हुआ जब एक साइकिल सवार विद्यालय से पढ़ कर वापस घर लौट रहे स्कूली छात्र श्यामवीर पुत्र कमलेश धाकड़ किरार को एक ट्रक ने कुचल कर मार दिया । और ट्रक लेकर भाग गया । जिससे बानमोर में भारी जन आक्रोश फैल गया । गुस्साये लोगों ने, राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया ( इसी मार्ग पर युवक कुचला था तथा यह मार्ग बानमोर से होकर ही गुजरता है, यह मार्ग बानमोर से पहले तक ही बना है और आगे अधूरा पड़ा है ) चक्का जाम की खबर पर जनता को खदेड़ने पहुँचे पुलिस एवं प्रशासन को मय पुलिस दलबल के जनता ने पथराव, और लठियाई कर बुरी तरह धुन दिया । जनता की संख्या इतनी अधिक थी कि यदि कई जिलों का पुलिस बल भी आता तो कम पड़ जाता । मुरैना जिले के हर थाने से पुलिस तलब की गयी लेकिन पीट कूट कर भागने पर जनता ने मजबूर करदिया । मामला नियंत्रण से बाहर देख पुलिस ने अन्धाधुन्ध गोलीयां चलानीं शुरू कर दीं । जिससे मौके पर कई लोग घायल हो गये एक किशोर बच्चे के गोली लगने से घायल होने से गंभीर हालत हो गयी । जनता पर पुलिस की गोलीयां चलती देख बरबस ही लोगों को जलियांवाला काण्ड याद आ गया । पुलिस की अन्धाधुन्ध फायरिंग से जहां लोगों का गुस्सा और अधिक उबल पड़ा, वही पथराव तथा लठियाई और बढ़ गयी । जनता के सैकड़ों लोग (शायद हजारों) लोग चोटिल व घायल हो गये वही अनेक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारीयों के दांत टूट गये तथा सिर फूट गये । क्षेत्र के सारा मंजर रक्त रंजित एवं हृदय विदारक था वहीं चारों ओर मारो मारो, तथा कोहराम मचा था । पिटे कुटे पुलिस व प्रशासन ने गुरूवार देर रात तक बिजली बन्द करवा कर रखी वहीं खबरों के रिलीज पर रोक लगा कर रखी । पुलिस ने कई बेगुनाहो पर खबर लिखे जाने तक कई मामले लाद दिये हैं । घटना के दरम्यान जनता ने पुलिय का वाहन क्रमांक एम.पी.03 4139 जला कर फूंक दिया । साथ ही हाई वे से गुजर रही लगभग साठ सत्तर गाड़ीयों की पथराव एवं तोड़ फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया । पुलिस द्वारा इस घटना के सम्बन्ध में सैकड़ा लोगों को पकड़ कर थाने में बन्द कर पूछताछ के नाम पर बुरी तरह पीटा जा रहा है ।
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