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31 julio विकास के लिये साझा प्रयास जरूरी - मुख्य न्यायाधिपति श्री पटनायकविकास के लिये साझा प्रयास जरूरी - मुख्य न्यायाधिपति श्री पटनायक मुख्य न्यायाधिपति द्वारा जिला न्यायालय में पक्षकारों के बैठने के लिये लगी बैंचों का लोकार्पण, वृक्षोरोपण भी किया ग्वालियर 30 जुलाई 09। राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति, न्यायमूर्ति श्री ए के. पटनायक ने जिला न्यायालय परिसर में अभिभाषक संघ की पहल पर पक्षकारों के बैठने के लिये लागाईं गईं बैंचों का आज लोकार्पण किया। इससे पहले उन्होने जिला न्यायालय परिसर में अशोक का पौधा रोप कर वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी शिरकत की। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री आर के. गुप्ता, श्री सुभाष संवत्सर, श्री ए के. श्रीवास्तव, श्री एस के. गंगेले, श्री अभय एम. नायक, श्री एस एस. द्विवेदी, श्री बी एम. गुप्ता, श्री ए पी. श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति श्रीमती इन्द्राणी दत्ता, जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए के. मिश्रा , उच्च न्यायालय खण्डपीठ के रजिस्ट्रार श्री आर पी. वर्मा, जिला न्यायाधीश विजीलेंस श्री आई एस. श्रीवास्तव, सिविल जज श्री जे पी. राव व श्री आर के. गुप्ता, श्री आर पी. सोनी व जिला न्यायालय के रजिस्ट्रार श्री आर के. जैन सहित अन्य न्यायाधीशगण, अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री श्याम बिहारी मिश्र, अभिभाषक संघ के अध्यक्ष श्री डी के. कटारे व सचिव श्री राम विलाश शर्मा, जिला कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री ए. साँई मनोहर, मुख्य वनसंरक्षक श्री सिन्हा, वन संरक्षक श्रीमती समिता राजौरा तथा अभिभाषकगण मौजूद थे। मुख्य न्यायाधिपति श्री ए के. पटनायक ने ग्वालियर अभिभाषक संध द्वारा पक्षकारों को बैठने की सहूलियत देने के लिये बैंच लगाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि हम खुद सक्षम होकर ही विकास पथ पर आगे बढ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एवं जडीशियली के अपने सीमित संसाधन होते है अत: अभिभाषकों को अपनी अधोसंरचनागत जरूरतों की पूर्ति के लिये भी संयुक्त प्रयास करने चाहिये। श्री पटनायक ने कहा कि इस प्रकार की हर रचनात्मक पहल में जुडीशियली भी अपना पूर्ण सहयोग देगी। उन्होंने प्रदेश के अन्य जिलों के न्यायालयों में संयुक्त प्रयायों से हुए विकास कार्यों का उदाहरण भी दिया। मुख्य न्यायाधिपति ने कहा कि ग्वालियर में लायर्स ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की पहल अभिभाषक संघ करें, जुडीशियली भी इसमें अपना पूर्ण सहयोग देगी। उन्होंने कहा अभिभाषकगण संगठित होकर नेक काम के लिये संयुक्त प्रयास करेंगे तो काउन्सिल पर भी उनकी मांगें मानने के लिये दबाव बनेगा। श्री पटनायक ने कहा कि अभिभाषकगण साझा प्रयासों से अपना समूह बीमा करा सकते हैं और अपनी अन्य दिक्कतों का समाधान भी खुद कर सकते है। मुख्य न्यायाधिपति ने एडव्होकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट की मांग पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की स्वतत्रता में तत्समय महात्मागांधी, जवाहर लाल नेहरू व सुभाष चंद बोस आदि ने अपनी वकालत से अंग्रेजों को भी अपना लोहा मनवाया। अत: आज के भी एडव्होकेट्स भी संगठित होकर इतने सक्षम बनें, जिससे उन्होंने किसी प्रोटेक्शन एक्ट की जरूरत न रहे। मुख्य न्यायाधिपति ने वृक्षारोपण को आज की महती आवश्यकता निरूपित करते हुए कहा कि हरीतिमा से हमारे दिमाग व सम्पूर्ण जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अत: ग्वालियरवासी भी चारो तरफ पेड़ ही पेड़ लगाकर ग्वालियर को हरा भरा करने की मुहिम जारी रखें। उच्च न्यायालय ग्वालियर खण्डपीठ के पोर्टफोलियो न्यायाधिपति श्री सुभाष संवत्सर ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा काम केवल मुकदमों के निराकरण मे सहयोग करना भर नहीं है, अपितु हमारा दायित्व है कि हम पक्षकारों की सुविधाओं का भी ध्यान रखें। इस दिशा में ग्वालियर अभिभाषक संध ने सराहनीय पहल की है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए के. मिश्रा ने कहा कि नि:शक्त वृध्द एवं महिला पक्षकारों के लिये बैठने की सुविधा जुटाना इन सबके प्रति गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है। कार्यक्रम में अभिभाषक संध के अध्यक्ष श्री डी के. कटारे ने स्वागत उद्बोधन एवं अन्त में वरिष्ठ अभिभाषक श्री पुरूषोत्तम पाण्डेय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन अभिभाषक संघ के सचिव श्री रामविलाश शर्मा ने किया।
सेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा है जैविक खेती- आलेख, जे. पी. धौलपुरियासेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा है जैविक खेती ----------------------------- आलेख, जे. पी. धौलपुरिया, उप संचालक, जिला जन सम्पर्क कार्यालय, शहडोल म. प्र.
कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के कल्याण का सपना संजोकर दो साल पहले शुरू की गई जैविक खेती की योजना शहडोल जिले के ग्राम सेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा बन गई है। रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाने से सुर्खियों में आया सेमरिहा गांव पूरी तरह जैविक खेती का गांव बन गया है । रासायनिक खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति में हुई कमी और इस शक्ति को पुन: प्रदान करने के लिए भूमि में जैविक खेती ने गांव के सभी किसानों का ध्यान खींचा। रासायनिक खाद पर निर्भर खेती को सरकारी मदद से बने वर्मी टांकों से जैविक खाद का मिलना सुनिश्चित होने से सेमरिहा क्षेत्र किसानी हलकों में तेजी से उभरता चला गया । कृषि उत्पादकता वाले जिले के प्रमुख क्षेत्रों में जैविक खेती की बदौलत सेमरिहा क्षेत्र ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। जैविक खेती से जहां कृषि उत्पादन में आशातीत वृध्दि हुई और फसल चक्र में परिवर्तन आया, वहीं किसानों के घरों में आर्थिक सम्पन्नता आने से उनके जीवन में खुशहाली आई है । शहडोल से 90 कि. मी. दूर छत्तीसगढ़ सीमा के पास आदिवासी वाहुल्य सेमरिहा गांव में 75 लघु कृषकों के घर हैं । जिनके पास करीब 100 एकड़ कृषि भूमि है । यहां के किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर होने के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे । किसानों की माली हालत ठीक नहीं थी । वर्षा हो जाने से उनके खेतों में थोड़ा-बहुत जो अन्न हो जाता था, उससे और दिहाड़ी से वह अपनी आजीविका चला रहे थे । लिहाजा कृषि की बढ़ी लागत उनके लिए मुनाफे का सौदा नहीं थी । सेमरिहा की खेती वर्षा और रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक की बढ़ती कीमतों के कारण संकट की मार झेल रही थी, तब गांव के किसानों ने समस्या की जड़ को ही खत्म करने का फैसला लिया । उनका रासायनिक खेती से मोह भंग हो चुका था और वे इसकी खेती से दूर हो जाना चाहते थे। वहां के किसानें ने रासायनिक उर्वरक के वैकल्पिक स्त्रोत जैविक खाद के बारे में सुन रखा था और उन्होंने इसे आजमाने का फैसला लिया । कृषि विशेषज्ञों ने भी उन्हें समझाया कि कहने को तो रासायनिक खाद का इस्तेमाल उत्पादकता को बढ़ाता है, जबकि इसके उलट वह लम्बे दौर में मिट्टी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे उर्वरता के साथ-साथ उत्पादन स्तर में गिरावट आती है। उनका जैविक खेती का दौर 2007 में उस वक्त शुरू हुआ, जब उन्होंने जैव उर्वरक का उत्पादन लेना शुरू किया, जिसके लिए राज्य सरकार के कृषि विभाग ने सात किसानों के यहां वर्मी टांके बनवाए और उन्हें केंचुआ दिलाया । अहममोड़ उस समय आया, जब आजीविका परियोजना ने 17 किसानों के यहां और कृषि विभाग ने 18 किसानों के यहां और वर्मीटांके बनवाए तथा केंचुआ उपलब्ध कराए । इस साल आजीविका परियोजना ने 25 किसानों के यहां वायोगैस संयत्र भी लगवाए हैं । किसानों ने केंचुआ खाद का उत्पादन कर उसका अपने खेतों में इस्तेमाल करना जो शुरू किया कि असिंचित क्षेत्र होने के बावजूद उनका उत्पादन तीन गुना तक बढ़ गया, जिसके कारण जैविक खाद उनकी जरूरत बन गया । जो किसान इसका उत्पादन नहीं कर रहे थे, वे दूसरों से खरीदकर इसका अपने खेतों में इस्तेमाल करने लगे । कृषि विभाग के नुमाइन्दों ने सिंथेटिक उर्वरक के स्थान पर जैव उर्वरकों की ओर किसानों का रूख क्या मोड़ा कि पूरा सेमरिहा गांव ही जैविक खेती का गांव बन गया और वहां के काश्तकारों की तकदीर ही बदल गई । वे तीन फसलें लेने लगे । जिसमें से एक सब्जी की फसल भी शामिल है । जैविक खाद से उपजी उनकी सब्जी को बाजार में लोग हाथोंहाथ खरीद लेते हैं ।
गांव में आये इस बदलाव पर शहडोल के उप संचालक कृषि श्री के. एस. टेकाम कहते हैं,'' कृषि विभाग ने सेमरिहा गांव का शतप्रतिशत जैविक खेती के लिए चयन किया था । इसके लिए काश्तकारों के घरों में वर्मी टांकें बनवाए गए । '' गांव के काश्तकार श्री चन्द्रभान सिंह बताते हैं, '' पहले इतनी गरीबी थी कि घर में एक टाइम चूल्हा जलता था । गुजारे के लिए मजदूरी पर जाना पड़ता था । आज दोनों वक्त भोजन कर रहे हैं और जीवन अच्छी तरह बीत रहा है । '' वे जैविक खेती के फायदे कुछ यों बताते हैं,'' रासायनिक खाद से खरपतवार होते थे और जमीन कड़ी रहती थी और उपज भी कम आती थी तथा जमीन पानी भी अधिक सोखती थी । जैविक खेती से उत्पादन दो से तीन गुना बढ़ गया है । पानी कम लगता है, जमीन मुलायम हो गयी है तथा खरपतवार नहीं होता तथा जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है । रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर खर्च होने वाली राशि भी बच रही है।'' सेमरिहा के काश्तकार अपने खेतों में सिर्फ जैव उर्वरक ही इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि वे कीटनाशक के रूप में नीम की नीबोली और उसकी पत्ती, करंज की पत्ती, वेशरम की पत्ती या अकमन की पत्ती को सड़ाकर बनाए गए अर्क का भी इस्तेमाल करते हैं । इस तरह वहां के काश्तकार जैविक खेती युग में जी रहे हैं । सेमरिहा गांव के चारों ओर बनाए गए वर्मी टांके जैविक खेती की ओर बढ़े कदमों की याद दिलाते हैं । काश्तकार नई तकनीक अपनाकर उपलब्ध भूमि से प्रति इकाई कृषि उत्पादन में वृध्दि कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार का कृषि विभाग भी सक्रिय है ।
पर्यटन उद्योग हेतु प्रशिक्षण जनशक्तिपर्यटन उद्योग हेतु प्रशिक्षण जनशक्ति
राज्य सभा पर्यटन मंत्री कुमारी सैलजा ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि यह सच है कि आतिथ्य उद्योग में प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी है। स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (एसजेएसआरवाई) के तहत शहरी गरीब के बीच रोजगार संवर्धन हेतु कौशल प्रशिक्षण (स्टेप-अप) के घटक के अंतर्गत कौशल नप्रशिक्षण के लिए राज्यों संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता प्रदान की जाती है। स्टेप-अप का आशय विभिन्न सेवाओं, व्यवसाय तथा निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय कौशल एवं स्थानीय शिल्पकला में शहरी गरीब को प्रशिक्षण प्रदान करना है। युवाओं के बीच रोजगार योग्य कौशल तैयार करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम उन व्यक्तियों के लिए है, जो कि कम से कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण हैं और वे 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग में हैं। इस कार्यक्रम में 2 कोर्स प्रदान किए जा रहे हैं -- एक खान-पान सेवा में 6 सप्ताह की अवधि का है और दूसरा खाद्य उत्पादन से 8 सप्ताह की अवधि का है।
केन्द्र द्वारा संरक्षित 35 स्मारक जिनका कोई पता नहीं हैकेन्द्र द्वारा संरक्षित 35 स्मारक जिनका कोई पता नहीं है राज्य सभा योजना तथा संसदीय राज्य मंत्री श्री वी. नारायणसामी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 3675 केन्द्रीय संरक्षित स्मारकों में से 35 स्मारकों स्थलों का कोई पता नहीं है। मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि लुप्त होने का मामला प्रकाश में आया तथा इसके लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी नियत करना संभव नहीं है।
28 julio आत्मनिर्भरता ने आखिर बना ही दिया निर्धन महिलाओं को अपने परिवार का सहाराआत्मनिर्भरता ने आखिर बना ही दिया निर्धन महिलाओं को अपने परिवार का सहारा -------------------------------- शहडोल 27 जुलाई 2009. उन महिलाओं की पृष्ठभूमि मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में झगरहा गांव और उनके शुरूआती तंगहाल जीवन को देख कोई नहीं कह सकता था कि वे कभी सफल होंगी । आर्थिक अभावों और बिरादरी की आलोचना झेलने के बावजूद अपना मुकाम हासिल करने के लिए अपना जुनून बरकरार रखते हुए ये महिलाएं इनदिनों केंचुआ खाद से अपने सुनहरे भविष्य का तानाबाना बुनने में जुटी हैं । पहले झगरहा के बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाली इन दस महिलाओं का चेहरा घूंघट में और कदम घर की चौखट के अन्दर रहा करते थे । लेकिन इन महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में कम लागत में भरपूर उत्पादन लेने के मकसद से कृषि विभाग ने 2004 में इन दस सदस्यीय महिलाओं का कृष्णा स्वसहायता समूह बनवाया । समूह के जरिए इस तरह काम करना शुरू-शुरू में तो इनके पतियों को नहीं भाया और उन्होंने इनका विरोध किया । गांववालों को भी उनका घूंघट से चेहरा बाहर निकालकर यों आत्मनिर्भर होना रास नहीं आया । लेकिन महिलाओं के आगे उनकी एक नहीं चली और महिलाओं ने घर की चौखट के बाहर कदम रख ही दिए और घूंघट से चेहरा बाहर निकाल लिया । कृषि विभाग ने उन्हें केंचुआ खाद उत्पादन तथा मौसमी फसलें लेने का प्रशिक्षण दिलाया और उनके घरों में वर्मी टांके बनवाए तथा उन्हें केंचुआ उपलब्ध कराए । महिलाओं के दिन तब पलटे, जब उन्हें केंचुआ खाद से आमदनी होने लगी । जो पति कभी उनका विरोघ किया करते थे, फिर वही उनके सहयोगी बन गए और उनके काम में हाथ बंटाने लगे । वे दिन भी थे, जब उनके पतियों को परिवार की जरूरतों की पूर्ति के लिए साहूकारों की डयोढ़ी पर कर्ज लेने जाना पड़ता था और उन्हें कर्ज के भंवर में निरंतर गोते लगाते रहना पड़ता था । लेकिन अब उन्हें साहूकारों की जरूरत नहीं रही । अब वे महिलाएं अपने स्वसहायता समूह से ही कर्ज ले लेती हैं । उनकी गांठ में चार पैसे हो जाने से अब उनका परिवार अच्छी तरह खा-पी और पहन -ओढ़ रहा है । उन्होंने अपने मकान के पिछबाड़े के हिस्से को केंचुआ खाद इकाई में तब्दील कर दिया है । सरकारी मदद से शुरू हुआ उनका यह उपक्रम पारिवारिक कारोबार में तब्दील हो गया और वे हर माह तीन-चार क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन कर लेती हैं । वे केंचुआ खाद बेचने के साथ-साथ अपने पुरखों की खेती की थोड़ी-बहुत जमीन पर भी बचे खाद का इस्तेमाल कर लेती हैं । कृषि विभाग से सीखी उन्नत तकनीक से वे खेती भी कर रही हैं । कइयों के लिए उनकी सफलता चकरानेवाली हैं, क्योंकि समूह प्रति वर्ष केंचुआ खाद और केंचुओं की बिक्री से डेढ़-डेढ़ लाख रूपये कमा लेता हैं । समूह की हर माह नियमित बैठक होती है । गांववाले समूह की महिलाओं को केंचुआवाली बड़ी नेता कहकर संबोधित करने लगे हैं । ये महिलाएं समाज में बदलते मूल्यों और लोगों की संकुचित सोच के बावजूद अपनी मंजिल तलाशकर समाज को नई दिशा दे रही हैं । पारिवारिक या सामाजिक सरोकार निभाने में लिंग भेद आड़े नहीं आता । इस बात को इन महिलाओं ने सच कर दिखाया है । वे न केवल अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे रही हैं, बल्कि समाज की भलाई के बारे में भी सोच रही हैं । स्वरोजगार से आत्मनिर्भर होकर ये महिलाएं हर माह अच्छा खासा कमा लेती हैं । उनका केंचुआ खाद छत्तीसगढ़ तक जा रहा है । कुल मिलाकर उनका खाद और केंचुआ कई शहरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है । वे खाद की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देती हैं तथा उसकी कीमत भी कम रखी गई है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती राधा विश्वकर्मा अपने मोबाइल 9630892207 पर खाद का आर्डर बुक करती हैं । समूह की अध्यक्ष श्रीमती राधा विश्वकर्मा कहती हैं कि सरकार ने तो हमारी बुध्दि खोल दी, जो आज हम अपने पैरों पर खड़े हैं और बड़े-बड़े अधिकारियों से बातें कर लेते हैं । समूह की कोषाध्यक्ष श्रीमती रूकमणी बताती हैं कि समूह से हमारी जिन्दगी बदल गई । समूह की सचिव सुमन केवट पिछली परिस्थितियों को याद करके बताती हैं,'' पहले हमारे सामने बहुत मुसीबतें थी । अब जिन्दगी अच्छी तरह चल रही है ।'' कृषि विभाग के उप संचालक श्री के. एस. टेकाम कहते हैं कि समूह से जुड़ी महिलाओं को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के मकसद से पहल की गई है । विभाग ने इस गांव को गोद लिया था, जिससे उन्हें कम लागत में कृषि उत्पादन लेने का तकनीकी ज्ञान दिया जा सके । अपने मकसद में यह योजना कामयाब रही है । आज ये महिलाएं अपनी मेहनत के बलबूते रोजगार के लिए लालायित गांव की गरीब महिलाओं की प्रेरणास्त्रोत बनी हुई हैं । उनकी आमदनी से प्रेरित होकर गांव में महिलाओं के तीन स्वसहायता समूह और बन गए हैं । कृष्णा स्वसहायता समूह की महिलाएं अपने कारोबार को 10 लाख रूपये तक सालाना पहुंचाना चाहती हैं । सरकारी मदद से अपनी राह खुद बनाने वाली इन महिलाओं के लिए सफलता का मूलमंत्र संघर्ष है ।
27 julio सांसद श्री तोमर व लोक स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना कीं अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सुसज्जित 12 एम्बुलेंसग्वालियर जिले में आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा शुरू सांसद श्री तोमर व लोक स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्रा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना कीं अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सुसज्जित 12 एम्बुलेंस ग्वालियर 26 जुलाई 09। ग्वालियर जिला भी अत्याधुनिक आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा वाले जिलों में शमिल हो गया है। सांसद व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने आज जिला चिकित्सालय मुरार से 12 नई एम्बूलेंस के चालकों और पैरामेडिकल स्टाफ को एम्बूलेंस की चाबियां प्रदान कर एवं हरी झंडी दिखाकर जिले के लिये आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा (ई.एम.एस) का शुभारंभ किया। तोमर ने टोल फ्री 108 नंबर डायल कर इस सेवा से जुड़े अमले को धन्यावाद भी दिया। इससे पहले यह सेवा भोपाल व जबलपुर में शुरू हो चुकी है। गौरतलब है कि ये एम्बूलेंस विशेष डिजाइन में तैयार की गईं और अत्याधुनिक चिकित्सा अपकरणों से सुस्सजित हैं। टोल-फ्री नंबर 108 डायल करने पर तत्काल सड़क दुर्घटना, अग्नि दुर्घटना, मेडिकल ट्रामा- हार्ट अटेक- ब्रेन हेमरेज व प्रसव कालीन आकास्मिकता में मरीज की मदद के लिए एम्बुलेंस तत्काल पहुँचेंगी। जिला चिकित्सालय मुरार में आयोजित ई एम एस. के शुभारंभ समारोह में ग्वालियर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री धीर सिंह तोमर, पुलिस महानिरीक्षक श्री अरविन्द कुमार, जिला कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री ए. साँई मनोहर, संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थय सेवायें डॉ. एच एस. शर्मा व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्चना शिंगवेकर समेत अन्य संबंधित अधिकारी व नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सांसद व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के दृष्टिकोण से मध्यप्रदेश को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिये प्रदेश सरकार बड़ी शिद्दत के साथ प्रयासरत है, इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आये हैं। उन्होंने कहा गरीब पिछड़े और दूरस्थ अंचल में निवासरत लोगों तक चिकित्सा सुविधायें पहुँचाने के लिये प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयास सराहनीय हैं। इसी दिशा में सरकार ने आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा (ई.एम.एस) शुरू की है। इस सेवा के माध्यम से खासकर दुर्घटना पीड़ित लोगों को त्वरित चिकित्सीय मदद पहुँचाकर उनका जीवन बचाया जा सकेगा। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा व कानून व्यवस्था हर जनहितैषी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिये। प्रदेश सरकार ने इसी बात को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य को भी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। राज्य शासन ने जहां हर गरीब जरूरतमंद को बेहतर स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने के लिये योजनायें बनाईं हैं वहीं हाल ही में आपातकालीन प्रबंधन सेवा भी शुरू की है। उन्होंने कहा आरंभ में यह सेवा मेडीकल कॉलेज वाले शहरो में शुरू की गई है। यह सेवा भोपाल, ग्वालियर व जबलपुर में शुरू हो चुकी है और जल्द ही इंदौर एवं रीवा में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद इस सेवा का विस्तार इन चिकित्सा महाविद्यालयों के निकटवर्ती एक-एक जिले में किया जायेगा। बाद में शनै:-शनै: विस्तार कर सभी जिलों में यह सुविधा मुहैया करवायी जायेगी। श्री मिश्रा ने कहा पाँच वर्षों के भीतर प्रदेश में लगभग 850 एम्बुलेंस सभी जिलों में उपलब्ध हो जायेंगी। मौजूदा वर्ष में 100 एम्बुलैंस चयनित जिलों में संचालित हो जायेगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने बताया कि विभाग द्वारा आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा (ईएमएस) जी.वी.के.-ई.एम.आर.आई. के तकनीकी सहयोग से बिना नफा-नुकसान के आधार पर प्रारंभ की गई है। विभाग द्वारा कॉल सेंटर हेतु आवश्यक सॉफ्टवेयर और सुसज्जित एम्बूलेंस#उपकरणों और आवर्ती व्यय के लिये जी.वी.के.-आई.एम.आर.आई. की मध्यप्रदेश ईकाई को 16 करोड़ 60 लाख रूपये दिये जा चुके हैं। इसके अलावा सेवा के संचालन पर इस वर्ष 15 करोड़ रूपये भी राज्य शासन द्वारा वहन किये जायेंगे। टोल फ्री 108 डायल करने पर तत्काल पहुँचेगी एम्बुलेंस योजना के अंतर्गत 108 एक समग्र नि:शुल्क (टोल-फ्री) नंबर है, जिसे किसी भी मोबाईल#लैण्डलाइन से बिना कोड के डायल किया जा सकेगा।प्रत्येक एम्बूलेंस में चालक एवं आपातकालीन पैरा मेडिकल तकनीशियन (ई.एम.टी.) उपलब्ध रहेंगे, जो प्रभावित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार प्रदान करने हेतु प्रशिक्षित है। इस सुसज्जित एम्बूलेंस में आवश्यक जीवनरक्षक उपकरण, औषधियां, ऑक्सीजन व दुर्घटनाग्रस्त वाहन आदि से लोगों को वाहर निकालने वाली साम्ाग्री आदि भी उपलब्ध रहेंगी। एम्ब्ूलेंस के वाहन चालकों के पास मोबाईल फोन भी रहेगा। यह एम्बूलेंस जी.पी.एस.#जी.आय.एस. पध्दति का प्रयोग करते हुए उपयोग में लाई जायेंगी। इस पध्दति के उपयोग से किसी भी समय एम्बूलेंस की भौगोलिक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा तथा निकटतम उपलब्ध एम्बूलेंस को पीड़ित#प्रभावित व्यक्ति तक पहुंचने के लिए निर्देशित किया जा सकेगा। सामान्यत: नगरीय क्षेत्रों में एम्बूलेंस 18 से 20 मिनिट में एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 28 से 30 मिनिट में पहुंच सकेगी।
बारह स्थानों पर तैयार खड़ी रहेंगी एम्बुलेंस आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा (ई एम एस.) के तहत आईं एम्बुलैंस जिले में 12 स्थानों पर हर समय तैयार हालत में खड़ी रहेंगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्चना शिंगवेकर ने बताया कि ग्वालियर नगर में यह एम्बुलैंस हजीरा, गोले का मंदिर, बारादरी चौराहा, बहोड़ापुर पुरानी छावनी, विक्की फैक्ट्री के समीप, सिटी सेंटर स्थित फायर स्टेशन व बेला की बाबड़ी पर तैनात रहेंगी। जिले में इसके अलावा उटीला, चीनौर, टेकनपुर, भितरवार व घाटीगांव में एम्बुलैंस फिलहाल तैनात की गई हैं।
लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय ग्वालियरलक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय
v जयंत सिंह तोमर
v लेखक - लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय,ग्वालियर में व्याख्याता है ।
'बुंदेले हर बोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झाँसी वाली रानी थी ।' प्रसिध्द कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता की ये पंक्तियां सभी के मन में सन् 1857 की अमर बलिदानी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का ओजपूर्ण चित्र खींचती है। ग्वालियर में अंग्रेज फौज से लड़ते हुये देश की स्वतंत्रता की खातिर झांसी की रानी ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये । सौ वर्ष बाद जब स्वाधीन भारत ने प्रथम स्वाधीनता संग्राम का शताब्दी वर्ष मनाया तो यह तय किया गया कि ग्वालियर में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में एक शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किया जायेगा । ग्वालियर नगर के प्रथम महापौर पहाड़गढ़ के राजा पंचमसिंह की इस संस्था की स्थापना में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही । वे स्वयं एक अच्छे निशानेबाज थे । रियासत के दौर में जहां घुड़दौड़ व पोलो का मैदान था, वहीं इस संस्था की शुरूआत हुई । भारत के श्रेष्ठ शारीरिक शिक्षाविद् प्रो. पी एम जोसेफ इस संस्था के पहले प्रिंसिपल नियुक्त किये गये । शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में केवल पी.एम.जोसेफ ही हैं, जिन्हें पद्मश्री अलंकरण से नवाजा गया। इस संस्थान का प्रारंभ विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से सम्बध्द महाविद्यालय के रूप में हुआ । ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद सन् 1964 में यह उसके अन्तर्गत आ गया । राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखते हुये सन् 1973 में इसका नामकरण लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एलएनसीपीई) किया गया । सन् 1982 में ' स्वायत्तशासी ' संस्था का दर्जा हासिल करने के बाद सितम्बर 1995 में इसे सम विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 14 जनवरी 2009 को इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया । लक्ष्मीबाई रष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय में इस समय सात विभाग संचालित हैं। टीचर एज्यूकेशन विभाग में चार वर्षीय बैचलर आफ फिजीकल एज्यूकेशन (बीपीई) व दो वर्षीय पाठयक्रम मास्टर आफ फिजीकल एज्यूकेशन (एमपीई) संचालित है । रिसर्च डेवलपमेंट एंड एंडवांस्ड् स्ट्डीज डिपार्टमेंट में एम-फिल व पीएचडी की उपाधि प्रदान की जाती है । खेल प्रबंधन व खेल पत्रकारिता विभाग अपेक्षाकृत नया विभाग है । समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन व वेब माध्यमों में खेल पत्रकारिता के विस्तृत होते क्षेत्र को ध्यान में रखते हुये प्रशिक्षित खेल पत्रकार तैयार करने के लिये यहां खेल पत्रकारिता में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठयक्रम चलाया जा रहा है । ऐसा ही एक पाठयक्रम खेल प्रबंधन के क्षेत्र में भी संचालित है। प्रशिक्षण एवं दक्षता विभाग (कोचिंग एंव फिटनेस) क्रीड़ा प्रशिक्षण में पीजी डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करता है । युवा कार्यक्रम एवं खेल विभाग साहसिक खेल एवं पर्यटन प्रबंधन में (एकवर्षीय) स्नातकोत्तर पत्रोपाधि प्रदान करता है । स्वास्थ्य विज्ञान एवं योग विभाग, वैकल्पिक चिकित्सा, योग व फिटनेस मैनेजमेंट आदि विषयों में विभिन्न पाठयक्रम संचालित करता है । कम्प्यूटर विज्ञान एवं अनुप्रायोगिक सांख्यिकी विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी व सांख्यिकी के पाठयक्रम संचालित करता है । वर्तमान में कुलपति मेजर जनरल एस.एन मुखर्जी के कार्यकाल में इस राष्ट्रीय महत्व की संस्था की छवि में बहुत निखार आया है । उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है इस संस्थान का डीम्ड यूनीवर्सिटी से पूर्ण विश्वविद्यालय में तब्दील होना । इन्हीं के कार्यकाल में प्रथम प्रचार्य पीएम जोसेफ की स्मृति में एक खूबसूरत केन्द्रीय ग्रंथालय भी स्थापित हुआ है । शारीक्षिक शिक्षा व खेलकूद से संबंधित यह देश का एक मात्र ग्रंथालय है जिसे कम्प्यूटरीकृत कर अत्याधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है । एलएनयूपीई में सेना द्वारा प्रायोजित खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिये विशेष पाठयक्रम आयोजित किये जाते हैं । बकौल मेजर जनरल एस एन मुखर्जीं एलएनयूपीई लंबे समय तक एशिया की सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं में शुमार होती रही है । अब हम इसे विश्वस्तर की श्रेष्ठ संस्था बनाने के लिये युध्दस्तर पर प्रयासरत हैं । विस्तार देने के लिये हाल में गुवाहाटी व देहरादून में एलएनयूपीई के दो केन्द्र भी स्थापित किये गये हैं । ' गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानव में निरोगी काया को पहला सुख बताया है । कहा भी जाता है कि ' तंदुरूस्ती हजार नियामत' इसी आदर्श को धारण किये हुये एलएनयूपीई अब ' फिट पीपुल- फिट नेशन ' का मूलमंत्र देश के जनसाधारण के बीच ले जाने के लिये प्रयासरत है ।
एलएनयूपीई के सितारे लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय यों तो मूलरूप से खेल व शारीरिक शिक्षा के प्रशिक्षक तैयार करने का केन्द्र है, इसके बावजूद स्थापना के 52 वर्षों में यहां के कई शिक्षक व विद्यार्थियों ने खेल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां, पुरस्कारों के रूप में हासिल की हैं । इनमें से कुछ महत्वपूर्ण नाम इस प्रकार हैं:- नाम अवार्ड क्षेत्र 1-डा.पी एम जोसफ पद्मश्री शारीरिक शिक्षण 2- डा. अजमेर सिंह अर्जुन अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड 3- प्रो. करन सिंह द्रोणाचार्य अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड 4- कल्पना देवनाथ अर्जुन अवार्ड जिम्नास्टिक 5- ब्रिगेडियर लाभ सिंह अर्जुन अवार्ड ट्रैक एंड फील्ड 6- विजय सिंह चौहान अर्जुन अवार्ड डेलाथेलान
![]() 26 julio ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत और गौरव को बरकरार रखा जायेगा-मुख्यमंत्रीग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत और गौरव को बरकरार रखा जायेगा-मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री द्वारा साढ़े आठ करोड़ रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण ग्वालियर 25 जुलाई 09 । ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत और उसके पुराने गौरव को अक्षुण्ण बनाये रखने में प्रदेश सरकार कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ेगी । पिछले ढाई साल में ग्वालियर के विकास को जो उच्च आयाम दिये गये हैं उन्हें आगे भी बरकरार रखा जायेगा। विकास के लिये धन की कमी आड़े नहीं आने दी जायेगी । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान नगर को करीब साढ़े 8 करोड़ रूपये की विकास सौगतें देते हुये यह बात कही । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 2 करोड़ 10 लाख रूपये की लागत वाले ग्वालियर नगर की स्वर्ण रेखा नदी जल गुणवता उन्नयन योजना में निर्मित फूलबाग गुरूद्वारा फोरलेन पुल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने सवा करोड़ की लागत वाले काल्पी ब्रिज, 2 करोड़ 5 लाख रूपये लागत की दो प्रधानमंत्री सड़कें, एक करोड़ रूपये की लागत से निर्मित डा. भीमराव अम्बेडर कालेज के महिला छात्रावास, डेढ़ करोड़ रूपये की लागत वाले औद्योगिक अधोसंरचना विकास निगम का भवन, 34 लाख रूपये की लागत वाले रॉक्सी पुल और 20 लाख रूपये की लागत से स्थापित की गांधी रोड़ स्ट्रीट लाइट का भी लोकार्पण किया । समारोह की अध्यक्षता मुरैना के सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने की । इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, गृह राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, राज्यसभा सदस्यद्वय श्रीमती मायासिंह, श्री प्रभात झा, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर, गुरूद्वारा दाताबंदी छोड़ के संत बाबा सेवासिंह जी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्वालियर के विकास का जो सपना पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था उसे साकार करने के लिये समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद समाज के सहयोग के बिना विकास का सपना साकार नही हो सकता । सिख संगत द्वारा फूलबाग गुरूद्वारे के एक हिस्से को पुल निर्माण के लिये उपलब्ध कराई गई भूमि इसका एक सफल उदाहरण है । सिख संगत की इस पहल के बिना पुल का निर्माण संभव नहीं था। इसके लिये उन्होंने बाबा संत सेवासिंह और सिख संगत के प्रति आभार भी माना। मुख्यमंत्री के आग्रह पर बाबा संत सेवासिंह ने नगर के दो चौराहों उरवाई एवं फूलबाग के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी ली। ''मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपना उद्बोधन ''जो बोले सो निहाल'' ...... के साथ प्रारंभ किया । '' समारोह के अध्यक्ष सांसद श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान न केवल ग्वालियर अपितु पूरे प्रदेश को स्वर्णिम बनाने के लिये दृढ़संकल्पित हैं। मुख्यमंत्री ने ग्वालियर के विकास के लिये उदारतापूर्व सहयोग किया है, उनके निर्देशन में ग्वालियर नगर के विकास की जो अवधारणा तैयार की गई थी वह अब मूर्तरूप लेती जा रही है । नगर के अनेक मार्गों को सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाया गया है जो कभी आम नागरिकों के लिये परेशानी का सबब बने हुये थे । नगर के विकास की इस अवधारणा में स्वास्थ्य एवं उर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा का भी सराहनीय योगदान रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्वालियर को संगीत, कला, चिकित्सा, शिक्षा,कृषि के क्षेत्र में विशेष सौगातें देते हुये नगर के सौदर्यीकरण और आवागमन को सुगम बनाने के लिये राशि की कोई कमी नहीं आने दी । नगर निगम ग्वालियर द्वारा कचरा प्रबंधन के लिये उठाये गये कदम की भी श्री तोमर ने सराहना की । प्रदेश के स्वास्थ्य एवं ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि ग्वालियर में जो कार्य पिछले पचास वर्षों में नहीं हुये थे वे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पिछले ढाई सालों में कर आम जनता को विकास की अनेक सौगेतें दी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्वालियर के विकास का जो सपना संजोया था उसे पूरा करने के लिये प्रदेश सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है । आज जिन विकास कार्यों का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लोकार्पण किया उनकी ग्वालियर नगरवासी लम्बे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। श्री मिश्रा ने गुरूद्वारा पुल निर्माण में बाबा सेवासिंह जी और सिख संगत के सहयोग को अनुकरणीय बताया । प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्जवलित कर विभिन्न विकास कार्यों का रिमोट कन्ट्रोल से लोकार्पण किया । जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता श्री राजन श्रीवास्तव ने स्वर्ण रेखा नदी की जल गुणवत्ता उन्नयन योजना में निर्मित गुरूद्वारा फोर लेन पुल की तकनीकी जानकारी प्रस्तुत करते हुये अग्रिम कार्य योजना की जानकारी दी। इस अवसर पर सर्वश्री जयसिंह कुशवाह, जगदीश शर्मा, अभय चौधरी, अरूण तोमर, बज्जर सिंह गुर्जर, राकेश जादौन, ब्रिजेन्द्र सिंह जादौन भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन कार्यपालन यंत्री श्री आर डी त्यागी ने तथा संचालन सुश्री रूचि गांधी ने किया । इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारीगण उपस्थित थे ।
मुख्यमंत्री ने गुरूद्वारे में मत्था टेका मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फूलबाग गुरूद्वारा फोर लेन पुल का लोकार्पण करने के पूर्व गुरूद्वारे में जाकर श्रध्दापूर्वक मत्था टेका और ग्वालियर सहित प्रदेश की सुख समृध्दि और विकास के लिये प्रार्थना की । गुरूद्वारा सिख संगत द्वारा मुख्यमंत्री श्री चौहान सहित स्वास्थ्य एवं ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा एवं गृह राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री एवं मंत्रीद्वय गुरूद्वारे में हुई अरदास में भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में रोपा सप्तपर्णी का पौधामुख्यमंत्री ने पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में रोपा सप्तपर्णी का पौधा ग्वालियर 25 जुलाई 09। शनिवार को ग्वालियर वासियों को करोड़ों रूपये लागत के विकास कार्यों की सौगात देने पधारे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने प्रवास की शुरूआत वृक्षारोपण से की। मुख्यमंत्री, ग्वालियर विमानतल से सीधे चन्द्रबदनी नाके के समीप स्थित अम्बेडकर पॉलीटेक्निक महाविद्यालय परिसर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने यहां नवनिर्मित महिला छात्रावास परिसर में सप्तपर्णी (लार्जेस्टोमिया) का पौधा रोपा। श्री चौहान ने इस अवसर पर छात्रावास परिसर का फीता काटकर अवलोकन भी किया। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा, गृह एवं परिवहन राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह व राज्य सभा सांसद श्री प्रभात झा समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद थे। आज इस परिसर में शोभादार एवं फलदार प्रजातियों के एक हजार पौधे रोपे गये। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले में रोजगार गारण्टी योजना के तहत मटका पध्दति से कराये जा रहे वृक्षारोपण का प्रदर्शन भी यहां देखा। जिला कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि जिले में नरेगा के तहत हो रहे वृक्षारोपण के पौधों की सिंचाई के लिये रिक्शा टैंकर की व्यवस्था पंचायतों के माध्यम से कराई गई है। यह रिक्शा पंचायत की सम्पत्ति रहेंगे और रिक्शे के माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों को बारी बारी से रोजगार भी मिलेगा। संबंधित ग्राम पंचायत में 150 पौधे की सिंचाई के लिये एक रिक्शा टैंकर लगाया जा रहा है। उन्होंने मटका सिंचाई पध्दति के बारे में जानकारी दी कि इस पध्दति से पौधों को मटके में भरे पानी से बूंद बूंद कर सात दिन तक पानी मिलता रहता है।
ग्वालियर का इतिहास गौरवशाली रहा है- मुख्यमंत्री श्री चौहानग्वालियर का इतिहास गौरवशाली रहा है- मुख्यमंत्री श्री चौहानमुख्यमंत्री द्वारा''हमारा ग्वालियर'' पुस्तक का लोकार्पण ग्वालियर 25 जुलाई 09। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ग्वालियर सांस्कृतिक राजधानी रहा है तथा इसका इतिहास गौरवशाली है। उन्होंने कहा कि इस गौरवमयी इतिहास को सहेजकर हमें आने वाली पीढ़ी को सौंपना है। श्री चौहान ने यह बात आज यहां चैम्बर आफ कॉमर्स में आयोजित ''हमारा ग्वालियर'' नामक पुस्तक के लोकार्पण करते हुए कही। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व ऊर्जा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया व श्री प्रभात झा, नगर निगम के महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी , पुलिस अधीक्षक श्री ए. साँई मनोहर, भारत विकास परिषद के प्रो. मोहन कुमार माथुर, चैम्बर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री जी डी. लड्डा सहित नगर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संस्कृति,परंपरा, जीवन मूल्य ग्वालियर की पहचान रही है। साथ ही पुरातत्व, संगीत एवं कला की दृष्टि से भी ग्वालियर समृध्द रहा है। इसलिये यहां संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश सरकार द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि यह संगीत संम्राटों, संतों, क्रांतिकारियों की भूमि है। श्री चौहान ने कहा कि इतिहास केवल पढ़ने भर का विषय नहीं हैं, यह हमें प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा हम सभी को ''हमारा ग्वालियर'' जैसी इतिहास की पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिये, जिससे हम भी इतिहास रचने वाले बन सकें। उन्होंने कहा कि इतिहास पढ़कर हम जान सकते हैं कि साधारण परिवार में जन्मे लोग भी इतिहास रच सकते हैं। श्री चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि साधारण परिवार में जन्म लेकर वे भारतीय राजनीति के क्षितिज पर दैदीप्यमान नक्षत्र के समान छाये हुए हैं। उन्होंने ''हमारा ग्वालियर'' पुस्तक के बारे में कहा कि इसमें ग्वालियर अंचल के अनछुए पहलू शामिल हैं, इसलिये सभी इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। मुख्यमंत्री ने पुस्तक में ग्वालियर अंचल की सांस्कृतिक व पुरातात्विक विरासत सहित सभी बातों का समावेश करने के लिये पुस्तक के लेखक डॉ. अजय अग्निहोत्री को धन्यवाद दिया। सांसद श्री प्रभात झा ने कहा कि ''हमारा ग्वालियर'' पुस्तक शासकीय कर्मचारियों को भी रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देती है, क्योंकि पुस्तक के लेखक भी शासकीय सेवक हैं। आरंभ में पुस्तक के लेखक डॉ. अजय अग्निहोत्री का परिचय उनके गुरू प्रो. मोहनकुमार माथुर ने दिया। उन्होंने बताया कि उनकी अन्य कृतियां भी शीघ्र ही प्रकाशित हो रही हैं। इस अवसर पर प्रो. माथुर को मुख्यमंत्री ने शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। डॉ. अजय अग्निहोत्री द्वारा लिखित इस पुस्तक में ग्वालियर अंचल के इतिहास संस्कृति एवं कलात्मक गौरव का समावेश किया गया है। ग्वालियर की भौगौलिक स्थिति में स्थित अभेद्य ग्वालियर किले पर राजपूत एवं मुस्लिम राजवंशों की उपस्थिति दर्ज कराने से लेकर राजा मानसिंह तोमर के अद्वितीय शासनकाल के स्वर्णिम युग तक का सजीव उल्लेख किया गया है। सिंधिया राजवंश के दो सदियों के शासनकाल एवं ग्वालियर की सांस्कृतिक वैभवता तथा शिल्प स्थापत्य के उन्नत स्वरूप के इतिहास को बखूबी शब्दों में पिरोया गया है। ग्वालियर की प्रधान विशेषता इसका सांस्कृतिक वैभव है। ग्वालियर का इतिहास केवल युध्दों-अभियानों तथ सत्ता परिवर्तनों की तारीखों को समेटने वाला ऐतिहासिक विवरण भर नहीं रह गया है। सांस्कृतिक चेतना ने यहां के राजनीतिक इतिहास में रस का संचार किया है। आज के ग्वालियर की पहचान संस्कृति एंव कलाल्मक चेतना की दृष्टि से समृध्द नगर के रूप में स्थापित है। ग्वालियर की प्रसिध्दि की तरह उसकी समृध्दि भी अनेक आयाम लिये हुए हैं। इन विशेषताओं के साथ ग्वालियर की ऐतिहासिक परम्परा का उसकी विविध उपलब्धियों सहित विश्लेषण और चित्रण इस पुस्तक में है। हमारा ग्वालियर नामक पुस्तक लेखक के इतिहास बोध और नगर के प्रति गहरे लगाव की छाप छोड़ती है।
गरीबों के हितों पर ऑंच नहीं आने दी जायेगी - श्री चौहानगरीबों के हितों पर ऑंच नहीं आने दी जायेगी - श्री चौहान मुख्यमंत्री ने 576 हितग्राहियों को बाँटी आधा करोड़ रूपये की सहायता
ग्वालियर 25 जुलाई 09। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ग्वालियर में प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 576 हितग्राहियों को तकरीबन आधा करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता वितरित की। उन्होंने इस मौके पर पाँच लाख रूपये लागत के 100 हाथ ठेले व ढाई लाख रूपये लागत के 25 रिक्शे हितग्राहियों को सौंपे। सहायता वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दीन, दुखियों व गरीबों की सरकार है। इन्हीं सबको केन्द्र में रखकर सरकार ने कल्याणकारी योजनायें बनाईं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आर्थिक मदद देकर गरीबों को न केवल सक्षम बनाने के लिये प्रयासरत है बल्कि गरीबों की ताकत जागृत करने का प्रयास भी सरकार कर रही है, जिससे उनके हितों की कोई अनदेखी न कर सके। यहां डॉ. भगवत सहाय सभागार में आयोजित इस सहायता वितरण समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अनूप मिश्रा, सांसद श्री अशोक अर्गल, राज्य सभा सांसद श्री प्रभात झा, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री कौशल शर्मा, श्री अभय चौधरी व श्री बज्जर सिंह गुर्जर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संभाग आयुक्त डॉ. कोमल सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री अरविन्द कुमार, जिला कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी व पुलिस अधीक्षक श्री ए सांईं मनोहर तथा बड़ी संख्या में सहायता प्राप्त करने के लिये आये हितग्राही मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि घरेलू काम करने वाली महिलाओं अर्थात दूसरों के घरों में झाड़ू पौछा व वर्तन मांजने वाली महिलाओं के लिये भी प्रदेश सरकार जल्द ही पंचायत आयोजित करने जा रही है। सरकार इस पंचायत में घरों में काम करने वाली महिलाओं के सुझाव लेकर उनके कल्याण के लिये महत्वपूर्ण निर्णय लेगी। श्री चौहान ने कहा प्रदेश सरकार ने हाथ ठेला व रिक्शा चालक, मोची सहित छोटे-मोटे कामों से गुजारा करने वाले सभी तबके के लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा है। इस मकसद से भोपाल में सभी की पृथक-पृथक पंचायतें बुलाई गईं। हाथ ठेला व रिक्शा चालकों की पंचायत में सरकार ने निर्णय लिया था कि ये सभी अब किराये के हाथ ठेला व रिक्शा नहीं चलायेंगे। सरकार आर्थिक मदद देकर इन्हें हाथ ठेला व रिक्शा मुहैया करवायेगी। इसी कड़ी में आज ग्वालियर में हाथ ठेला व रिक्शे वितरित किये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा हाथ-ठेले वालों को अब विक्रय कर नहीं देना होगा। यह खर्चा या तो सरकार वहन करेगी अथवा इसे समाप्त कर दिया जायेगा। इस संबंध में सरकार जल्द ही निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा, भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल आदि के माध्यम से महिलाओं, श्रमिकों एवं अन्य गरीब जरूरतमंदों के कल्याण के लिये शुरू की गईं योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंनें कहा कि प्रदेश सरकार शहर में निवासरत किसी भी गरीब को उसकी झुग्गी से बेदखल नहीं होने देगी। सरकार ने इसके लिये मुख्यमंत्री आश्रय योजना शुरू की है, जिसके तहत हर झुग्गीवासी को उसकी झुग्गी का मालिकाना हक दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेटियाँ अब बोझ नहीं रहीं हैं। सरकार ने बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिये लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी महात्वाकांक्षी योजनायें शुरू की हैं। साथ ही नगरीय निकायों एवं पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उनकी राजनीति में भी भागीदारी सुनिश्चित की है। हितग्राहियों को सहायता वितरित करते समय मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिये कि सरकारी सहायता वितरण में पूरी निगरानी रखी जाये। हितग्राहियों के साथ अन्याय न होने पाये अर्थात उन्हें गुणवत्तायुक्त सामग्री सहित उन्हें स्वीकृत पूर्ण आर्थिक मदद मिल जाये। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी इस काम मे सहायता और निगरानी रखने की बात कही। डॉ. भगवत सहाय सभागार में आज आयोजित हुए विशाल सहायता वितरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार एवं हाथ ठेला व रिक्शा चालक कल्याण योजना के तहत 100 हितग्राहियों को पाँच लाख रूपये की लागत से हाथ ठेला व 25 हितग्राहियों को ढाई लाख रूपये लागत के रिक्शे प्रदान किये। इसी प्रकार नगर निगम की राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना में 10 लोगों को एक लाख रूपये , मुख्यमंत्री आश्रय योजना के तहत 32 लोगों को पट्टा वितरण, महिला बाल विकास विभाग की लाड़ली लक्ष्मी योजना में 308 बालिकाओं को 18 लाख 48 हजार रूपये की एन एस सी. प्रदान की। सामाजिक न्याय विभाग की नि:शक्त विवाह योजना में 5 हितग्राहियों को एक लाख 25 हजार, जनपद पंचायत मुरार की अनुग्रह राशि योजना में एक हितग्राही को एक लाख, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना में एक हितग्राही को 5 हजार की प्रसूति सहायता, मुख्यमंत्री भवन संनिर्माण मण्डल के एक हितग्राही को 5 हजार की प्रसूति सहायता एवं एक को 14 हजार 251 रूपये की चिकित्सा सहायता तथा मृत्यु की दशा में सहायता के तहत एक व्यक्ति को 20 हजार रूपये की राशि के चैक वितरित किये। साथ ही जनपद पंचायत घाटीगांव से आये 5 परिवारों को राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत 50 हजार, मुख्यमंत्री भवन संनिर्माण योजना में दो हितग्राहियों को दस हजार की प्रसूति सहायता, एक को अत्येष्टि राशि 22 हजार, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा बीमा योजना में 3 हितग्राहियों को करीबन 18 हजार की प्रसूति सहायता, कलेक्टर कार्यालय की सोलेसियम फण्ड योजनान्तर्गत 6 हितग्राहियों को एक लाख 12 हजार 500 रूपये तथा सहायक श्रमायुक्त की म प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल की योजना के तहत 57 हितग्राहियों को चार लाख 96 हजार 751 रूपये की राशि के चैक तथा अन्य योजनाओ के तहत सहायता राशि व किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये।
25 julio श्रमिक पुत्रियों की विवाह सहायता के लिए आठवीं कक्षा उत्तीर्ण बाध्यता समाप्तश्रमिक पुत्रियों की विवाह सहायता के लिए आठवीं कक्षा उत्तीर्ण बाध्यता समाप्त अब दो नहीं तीन पुत्रियों को मिलेगा योजना का लाभ, मेधावी छात्र पुरस्कार योजना का नाम बदला, श्रमिकों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिलाया जाएगा
Bhopal:Friday, July 24, 2009 मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल द्वारा श्रमिकों की पुत्रियों की विवाह सहायता योजना के लिए निर्धारित मापदण्डों में संशोधन किया गया है। वर्तमान में इस योजना का लाभ केवल उन्हीं श्रमिक पुत्रियों की मिलता है जो आठवीं कक्षार् उत्तीण कर चुकी हैं। इसके तहत संस्थानों में कार्यरत अकुशल, अर्ध्दकुशल अथवा कुशल श्रमिकों की 18 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों के विवाह के लिए पांच हजार रूपये की सहायता दी जाती है। इसके साथ ही अब इस योजना का लाभ दो की जगह तीन पुत्रियों तक मिल सकेगा। उपरोक्त निर्णय आज यहाँ अध्यक्ष, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल श्री मांगीलाल पोरवाल की अध्यक्षता में आयोजित मण्डल की 52वीं बैठक में लिया गया। अध्यक्ष, म.प्र. भवन एवं सन्निनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, श्री सुरेश शर्मा, पूर्व मंत्री श्रीमती अलका जैन, पद्मश्री श्री बनवारी लाल चौकसे, प्रमुख सचिव श्रम, श्री के.पी.सिंह सहित मण्डल के सदस्यों ने बैठक में भाग लिया।
मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की इस बैठक में प्रदेश के मजदूरों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मंडल द्वारा श्रमिकों के अध्ययनरत बच्चों के लिए संचालित मेधावी छात्रवृत्ति योजना का नाम बदलकर 'शिक्षा प्रोत्साहन पुरस्कार योजना' करने का निर्णय लिया गया। इससे इन बच्चों को शासन और संस्थानों द्वारा देय छात्रवृत्ति योजना का लाभ मिलने में दिक्कत नहीं आयेगी। बैठक में श्रमिकों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिलाकर, उन्हें रोजगार दिलाने का निर्णय भी लिया गया। प्रशिक्षण के उपरान्त प्रमाण-पत्र मिलने से इन कुशल, अर्ध्दकुशल मजदूरों को संस्थानों में काम मिलना आसान हो जाएगा। बैठक में बताया गया कि इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में माली, कुक जैसे 128 व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जाता है। श्रम विभाग इन ट्रेडों में श्रमिकों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार दिलाने पर विचार कर रहा है। बैठक में उत्कृष्ट नियोजकों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया। प्रदेश के ऐसे संस्थान और स्थापनाएं जो नियमित रूप से नियमानुसार अभिदाय एवं असंदत्त राशि दे रहे हैं और मंडल द्वारा संचालित विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। प्रति वर्ष ऐसे दस पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। इसी के साथ ही उत्तम श्रमिक पुरस्कार संख्या भी 10 से बढ़ाकर 15 करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में मंडल द्वारा प्रतिवर्ष दस पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। बैठक में सदस्यों के रूप में सचिव कल्याण आयुक्त श्री एस.एस. दीक्षित, उप श्रमायुक्त श्री आर.जी.पाण्डेय, सचिव फेडरेशन ऑफ एम.पी चेम्बर ऑफ कामर्स एंड इन्डस्ट्रीज, अध्यक्ष कवेलू उद्योग संघ श्री जितेन्द्र टाक, उद्योगपति श्री उल्लास वैद्य, प्रतिनिधि ओरियन्ट पेपर मिल्स अमलाई, श्रमिक प्रतिनिधि श्री सुल्तानसिंह शेखावत नागदा, महामंत्री भारतीय मजदूर संघ श्री भगवानदास गोंडाने, अध्यक्ष, म.प्र.इंटक श्री आर.डी त्रिपाठी, श्रीमती अनुसुइया मिश्रा, कामरेड वृषभान (एटक) अध्यक्ष, सीटू श्री राम बिलास गोस्वामी, महामंत्री म.प्र. बिजली कर्मचारी महासंघ श्री हेमन्त तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार श्री रामभुवन सिंह कुशवाह ने सदस्य के रूप में भाग लिया।
टूटने लगा है नरेन्द्र मोदी का तिलिस्मटूटने लगा है नरेन्द्र मोदी का तिलिस्म निर्मल रानी email: nirmalrani@gmail.com nirmalrani2000@yahoo.co.in nirmalrani2003@yahoo.com 163011, महावीर नगर, अम्बाला शहर,हरियाणा। फोन-98962-93341
लोकसभा के हाल में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के एक वर्ग द्वारा जिस प्रकार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में उछाला गया था, उससे कम से कम इस बात का अंदांजा तो लगाया ही जा सकता है कि भाजपा नरेन्द्र मोदी पर कितना भरोसा करती है। निश्चित रूप से 2002 में गुजरात में हुए साम्प्रदायिक दंगों के बाद नरेन्द्र मोदी भाजपा के एक आक्रामक एवं करिश्माई नेता के रूप में उभरे थे। खांटी हिन्दुत्व की विचारधारा के समर्थक भाजपा नेता, नरेन्द्र मोदी को भाजपा के भविष्य के रूप में देख रहे थे। परन्तु लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भाजपा के इस करिश्माई नेता का तिलिस्म अब टूटने लगा है। अत्याधिक आत्मविश्वास से भरे मोदी समर्थक जो कल तक उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री समझने जैसी ंगलतंफहमी का शिकार थे, वही लोग अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मोदी की गुजरात सरकार का भविष्य अब क्या होगा। वास्तव में नरेन्द्र मोदी की कथित लोकप्रियता पर ग्रहण लगना तो उसी समय शुरु हो या था जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नरेन्द्र मोदी के बिहार में चुनाव प्रचार में आने पर अपनी अनिच्छा ंजाहिर की थी। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाईटेड की बिहार में सहयोगी पार्टी होने के कारण भाजपा को मजबूरन नीतीश कुमार की बात माननी पड़ी थी तथा मोदी, नीतीश की इच्छा के विरुद्ध चुनाव प्रचार हेतु बिहार नहीं जा सके। इसका परिणाम भी बिहार के चुनाव परिणामों पर सकारात्मक पड़ा। इसके पश्चात जब कुल चुनाव परिणाम घोषित हुए, तब यह देखने को मिला कि भाजपा के इस ंफायरब्राण्ड नेता ने पूरे देश में जिन लगभग 200 संसदीय सीटों के लिए जनसभाएं की थीं, उनमें से भाजपा केवल 18 सीटों पर ही विजयी हो सकी। पूरे देश में मोदी के प्रचार के ंफायदे की बात ही क्या करनी। स्वयं उनके अपने राज्य गुजरात में भी भाजपा को वैसे नतीजे नहीं मिल सके जिसकी कि पार्टी उम्मीद लगाए बैठी थी। पार्टी में प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री लाल कृष्ण अडवाणी को राज्य की गांधीनगर सीट से पिछली बार की तुलना में कम वोट प्राप्त हुए तथा कुल विजयी मतों की संख्या भी पिछली बार से कांफी कम रही। पूरे गुजरात राज्य में भाजपा के पक्ष में हुए मतदान में लगभग 2 प्रतिशत मतों की गिरावट आई अर्थात् इन लोकसभा चुनावों में यह सांफ हो गया कि भाजपा के जो नेता मोदी से कुछ करिश्मा करने की आस पाले हुए थे, उन्हें मोदी की हंकींकत तथा जनता के मध्य मोदी के प्रति लगाव या दुराव का भली-भांति अंदांजा हो गया। चुनावों के बाद स्वयं मोदी मीडिया से यह कहते दिखाई दिए कि वह तो गुजरात के ही नेता बने रहने में संतुष्ट हैं। मीडिया ने स्वयं उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर निकलकर प्रचार करने हेतु बाध्य किया था। अर्थात् मोदी बैकंफुट पर जाते दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता के बजाए जब करारी हार का सामना करना पड़ा तो निश्चित रूप से पार्टी के नेताओं ने पार्टी की दुर्दशा के कारणों तथा उसके निवारण पर स्वाभाविक रूप से चर्चा, चिंतन तथा मंथन शुरु किया। इस मंथन में देखा गया कि महाराष्ट्र में भी पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में कम अच्छा था। यहां भी नंजर डाली गई तो नरेन्द्र मोदी को महाराष्ट्र में पार्टी के चुनाव इंचार्ज के रूप में पाया गया। पार्टी ने तत्काल नरेन्द्र मोदी के स्थान पर महाराष्ट्र के ही गोपीनाथ मुंडे को राज्य का प्रभारी बना दिया। इसे भी मोदी के टूटते तिलिस्म का ही एक हिस्सा कहा जा सकता है। पिछले दिनों गुजरात राज्य में ंजहरीली शराब पीने से लगभग 150 लोग काल की गोद में समा गए। पूर्ण श्राबबंदी वाले गुजरात राज्य में पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं परन्तु इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ मरना वास्तव में चिंता का विषय है। इस हादसे ने नरेन्द्र मोदी को परेशानी में डाल दिया है। मीडिया ने इस हादसे के बाद जब गहनता से मामले की पड़ताल की, उससे जो तथ्य सामने निकलकर आ रहे हैं, वे बड़े चौंकाने वाले हैं। कहा जा रहा है कि पूर्ण शराबबंदी वाले गांधी के इस गृहराज्य में शराब की कोई कमी नहीं है। कोई भी व्यक्ति घर बैठे जब चाहे अपनी मनपसंद ब्राण्ड की शराब मंगवा सकता है। देसी व कच्ची शराब बनाने का भी व्यापक नेटवर्क पूरे राज्य में सक्रिय है। अधिक पैसा कमाने की लालच में ंजहरीले रसायन की मिलावट का काम भी शराब मांफिया द्वारा शुरु किया जा चुका है जिसके परिणामस्वरूप इतना बड़ा हादसा गुजरात में देखना को मिला। कहा जा रहा है कि शराब के इस उत्पादन व पड़ोसी राज्यों से शराब तस्करी जैसे अवैध धंधे में शराब मांफिया की पुलिस तथा सत्तारूढ़ नेताओं से सीधे सांठगांठ है। यदि गुजरात के कांग्रेस नेताओं की बात मानी जाए तो शराब का यह पूरा नाजायंज धंधा भाजपा के लोग धनार्जन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के संरक्षण में उनके इशारे पर ही कर रहे हैं। यह आरोप कितना सही है और कितना ंगलत तथा ंजहरीली शराब प्रकरण के लिए मोदी सरकार व प्रशासन कितना ंजिम्मेदार है, यह भविष्य में गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों में ही पता चल सकेगा। परन्तु इतना ंजरूर है कि इस घटना से मोदी की साख को गहरा धक्का लगा है। नरेन्द्र मोदी के तिलिस्म को एक और करारा झटका उनके राज्य गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के मुख्य नगर जूनागढ़ में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव परिणामों से लगा है। यहां 51 सदस्यीय नगर पालिका में कांग्रेस को 26 सीटें प्राप्त हुई जबकि भाजपा को मात्र 21 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इन चुनावों में भाजपा ने कुछ नए प्रयोग भी किए थे। इसके अन्तर्गत कांग्रेस की तंर्ज पर भाजपा ने भी 30 वर्तमान सभासदों के टिकट काटकर उनके स्थान पर 24 नए तथा युवा चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा था। पार्टी ने इस बार जूनागढ़ में 5 मुस्लिम उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ाया था। परन्तु यह सभी उम्मीदवार कांग्रेस के उम्मीदवारों से बुरी तरह पराजित हुए। जूनागढ़ के स्थानीय निकाय के चुनाव परिणामों के विषय में भी विशेषकों का यह मानना है कि यहां भी नरेन्द्र मोदी का अहंकार तथा अत्याधिक आत्मविश्वास उन्हें ले डूबा। नरेन्द्र मोदी का नाम कुछ लोगों द्वारा भावी प्रधानमंत्री के तौर पर क्या उछाल दिया गया गोया मोदी स्वयं को एक ऐसा ंकद्दावर नेता समझने लगे कि उन्होंने जूनागढ़ नगरपालिका चुनावों में प्रचार हेतु जाने की ंजहमत ही गवारा नहीं की। पार्टी को अत्यधिक आत्मविश्वास था कि नरेन्द्र मोदी के नाम, उनके चित्र तथा उनके मुखौटों मात्र से ही वे जूनागढ़ निकायों का चुनाव जीत लेंगे। परन्तु आंखिरकार यहां भी मोदी का तिलिस्म चकनाचूर होते दिखाई दिया। मोदी के इस टूटते व बिखरते तिलिस्म को न तो संघ परिवार बचा पा रहा है, न ही वाईब्रेंट गुजरात। यहां तक कि लोकसभा चुनावों से पूर्व टाटा की नैनो कार जैसी देश की अतिमहत्वपूर्ण परियोजना को गुजरात में स्थापित कराने के बावजूद मोदी को जनता द्वारा कोई सकारात्मक संदेश नहीं दिया जा रहा है। हां यदि मोदी को आसमान पर चढ़ाने वाले अथवा देश का भावी प्रधानमंत्री बताने वाले कुछ लोग हैं तो वे या तो देश के कुछ इक्का-दुक्का उद्योगपति हैं जो या तो ंगलती से उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री बता चुके हैं अथवा किसी भूल या ंगलतंफहमी के चलते या फिर समय व अवसर की विवशता के कारण उन्हें ऐसा कहना पड़ा हो। परन्तु ऐसा भी संभव है कि यह उद्योगपति आज स्वयं अपने दिए गए बयानों पर पछता रहे हों। और या तो भाजपा के ही कुछ ऐसे लोग जो हमेशा ही आसमान से तारे तोड़कर लाने जैसे न जाने कौन-कौन से सपने देखते रहते हैं, वे मोदी को पार्टी या देश का भविष्य मान रहे हों। जहां तक देश की आम जनता व मतदाताओं का प्रश् है तो उसने तो मोदी के प्रति अपने रुंख का इंजहार कर ही दिया है तथा जूनागढ़ जैसे चुनाव परिणामों के माध्यम से करती ही जा रही है। अब देखना यह है कि अपने चिर-परिचित ंफायरब्राण्ड तेवर, अपनी आक्रामक शैली, शब्दबाण छोड़ने की उनक पारंपरिक कला आदि पर वे बरंकरार रहते हैं या फिर समय की नब्ंज को पहचानते हुए वर्तमान केंचुल को उतार फेंकने व नए केंचुल में जा बसने की जुगत भिड़ाते हैं, यह ंगौर करने योग्य होगा। जहां तक वर्तमान समय का प्रश् है तो इस समय तो निश्चित रूप से नरेन्द्र मोदी का तथाकथित करिश्माई तिलिस्म दिन-प्रतिदिन टूटता व बिखरता ही जा रहा है। और यह इबारत केवल जूनागढ़ या गुजरात शराब कांड से ही नहीं बल्कि स्वयं मोदी के चेहरे पर भी लिखी देखी जा सकती है। निर्मल रानी
कलाम की तलाशी: सुलगते सवालकलाम की तलाशी: सुलगते सवाल तनवीर जांफरी (सदस्य, हरियाणा साहित्य अकादमी, शासी परिषद) , email: tanveerjafri1@gmail.com tanveerjafri58@gmail.com tanveerjafriamb@gmail.com 163011, महावीर नगर, अम्बाला शहर। हरियाणा फोन : 0171-2535628 मो: 098962-19228
कौंटिनेंटल एयरलाईंज नामक अमेरिकी विमान कंपनी के सुरक्षाकर्मियों द्वारा गत् 21 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की उस समय गहन तलाशी ली गई जबकि वे अपनी अमेरिका यात्रा शुरु करने जा रहे थे। डॉ कलाम ने अपने चिर-परिचित विनम्र स्वभाव, उदारता व सहजता का परिचय देते हुए अमेरिकी सुरक्षा कंपनी द्वारा निर्देशित सभी सुरक्षा मापदंडों का पूरा पालन किया। जबकि दूसरी ओर इस अमेरिकी जांच कंपनी के कर्मचारियों ने पूर्व भारतीय राष्ट्रपति डॉ कलाम के प्रति पूरे अविश्वास का परिचय देते हुए उनकी साधारण या शायद उससे भी घटिया तरींके से तलाशी ली। कलाम के जूते उतरवाए गए तथा जूतों की ऐसे जांच की गई गोया इनमें कोई बम या मादक पदार्थ रखे गए हों। उनकी जेब, पर्स यहां तक कि मोबाईल तक की गहन जांच की गई। नि:संदेह डॉ कलाम इस समय आम भारतीयों के लिए सबसे महान आदर्श पुरुष हैं। वे एक महान वैज्ञानिक, मिसाईल मैन, भारत रत्न होने के साथ-साथ 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में भी देखे जाते हैं। अत: उनके साथ भारत की राजधानी में एक अमेरिकी विमानन कंपनी के सुरक्षाकर्मियों द्वारा तलाशी लिए जाने पर आम भारतीयों में क्रोध व उत्तेजना का पैदा होना निश्चित रूप से एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। ंखासतौर पर आम लोगों में यह जानकर अधिक ंगुस्सा पैदा हुआ है कि सुरक्षाकर्मियों ने डॉ कलाम का पूर्व भारतीय राष्ट्रपति के रूप में परिचय पाने के बावजूद ऐसा क्यों किया। कलाम के तलाशी प्रकरण को लेकर देश में अच्छी ंखासी बहस छिड़ गई है। यहां तक कि भारतीय संसद में भी इस विषय पर कांफी हंगामा हुआ है। इस प्रकरण को लेकर तरह-तरह के मत व्यक्त किए जा रहे हैं। हालांकि कौंटिनेंटल एयरलाईंज द्वारा इस विषय पर डॉ कलाम से मांफी मांगने की बात कहकर मामले को रंफा-दंफा करने की कोशिश की जा रही है। परन्तु आम भारतीय यह सवाल ंजरूर कर रहा है कि आंखिर डॉ कलाम की तलाशी सुरक्षा मापदंडों के तहत ली गई है या भारत को नीचा दिखाने का यह एक चिर-परिचित तरींका था। जब अमेरिकी सुरक्षा कंपनी अपने बचाव में यह बात कहती है कि उसने अपने सुरक्षा मापदंडों के अन्तर्गत ही डॉ कलाम की तलाशी ली तो भारतीय जनता को निश्चित रूप से इस कंपनी से यह पूछने का अधिकार है कि क्या यह कंपनी जॉर्ज बुश तथा बिल क्लिंटन जैसे अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपतियों की भी इसी प्रकार और इसी अंदांज से तलाशी ले चुकी है। यदि हां तो इस कंपनी को इसके प्रमाण देने होंगे। यदि यह कंपनी ऐसे प्रमाण उपलब्ध करा देती है तो निश्चित रूप से भारतीय नागरिक इस अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी कीर् कत्तव्य पालना के ंकायल हो जाएंगे। और यदि यह मापदंड बुश व क्लिंटन जैसे अमेरिका पूर्व राष्ट्रपतियों के अतिरिक्त अन्य अति विशिष्टि लोगों के लिए हैं तो नि:संदेह यह आपत्तिजनक है तथा भारत जैसा देश इसे अपनी तौहीन समझता है। कलाम के तलाशी प्रकरण को लेकर कुछ तकनीकी एवं विरोधाभासी ंखामियां भी दिखाई दे रही हैं। जैसे कि भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी की गई अति विशिष्ट लोगों की वह सूची जिसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जिन विशिष्ट लोगों को साधारण सुरक्षा दायरे से मुक्त रखा गया है, उनमें अन्य अतिविशिष्ट व्यक्तियों के अतिरिक्त भारत के पूर्व राष्ट्रपति भी शामिल हैं। जबकि कौंटिनेंटल एयरलाईंज को सुरक्षा देने वाली अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी की ओर से उसे मिलने वाली प्रोटोकॉल सूची में भारत के पूर्व राष्ट्रपति का नाम नहीं है। अब प्रश् यह है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी किस प्रोटोकॉल सूची का पालन करे। भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी प्रोटोकॉल सूची का या अपनी कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची का? 911 जैसे आतंकी हमले के बाद बुरी तरह से भयभीत अमेरिका अब इतना चौकस हो गया है कि उसे हर समय हर ओर से आतंकी हमले का भय सताए रहता है। शायद उसकी इसी ंजबरदस्त चौकसी का ही परिणाम है कि आतंकियों की तमाम सांजिशों के बावजूद 911 के बाद आज तक अमेरिका पर दूसरा कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। परन्तु इस चौकसी की आड़ में अन्य देशों के अतिविशिष्ट व्यक्तियों को अपमानित भी नहीं किया जाना चाहिए। 2003 में भी भारतीय रक्षा मंत्री जॉर्ज ंफर्नांडिस की अमेरिका में कपड़े उतरवाकर दो बार तलाशी ली गई थी। गत् वर्ष अक्तूबर में भारतीय लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने अपनी लंदन यात्रा केवल इसलिए रद्द कर दी थी क्योंकि हीथ्रो हवाईअड्डे पर उनकी तलाशी ली जानी थी। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को भी गत् वर्ष अपनी मॉस्को यात्रा के दौरान जांच दायरे से होकर गुंजरना पड़ा था। सवाल यह है कि जब भारत के अतिविशिष्ट व्यक्तियों पर दुनिया के स्वयं को असुरक्षित महसूस करने वाले देश विश्वास नहीं करते फिर आंखिर भारत सरकार भी सुरक्षा के वैसे ही कड़े मापदंड क्यों नहीं अपनाती? हमारे देश में भी भारतीय संसद आतंकियों का निशाना बन चुकी है। मुंबई हमलों के बाद और भी स्पष्ट हो गया कि देश का कोई भी अतिसुरक्षित अथवा संवेदनशील स्थान आतंकियों के निशाने से अछूता नहीं है। ऐसे में भारत को भी अपने सुरक्षा मापदंड वैसे ही कड़े कर देने चाहिए। फिर चाहे हमारे देश में हिलेरी क्लिंटन आएं या बिल क्लिंटन, हमें उनके साथ भी सुरक्षा के वही मापदंड अपनाने चाहिएं जोकि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी डॉ कलाम जैसे भारतीय नेताओं के साथ अपनाती है। भारतीय संसद में भी कलाम के तलाशी प्रकरण पर अच्छा ंखासा हंगामा हुआ। एक सांसद ने कलाम को राष्ट्र का गौरव बताते हुए उनके तलाशी प्रकरण को पूरे देश का अपमान बताया। वामपंथी सांसद सीताराम येचुरी ने तो सदन में सांफतौर से यह आरोप लगाया कि चूंकि उनके नाम के साथ 'अब्दुल' शब्द लगा था इसलिए उनकी तलाशी ली गई। येचुरी के कहने का मतलब सांफ था कि चूंकि डॉ कलाम मुस्लिम थे इसलिए शक की बिना पर अमेरिकी एजेंसियों ने उन्हें अपमानित किया। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने डॉ कलाम की तलाशी उनके नाम के परिणामस्वरूप ली अथवा यह उनका नियमित जांच तरींका था? यह अलग बात है। परन्तु इस बात से तो इन्कार किया ही नहीं जा सकता कि 911 के बाद अमेरिका में मुस्लिम समुदाय के लोगों को संदेह की नंजर से देखा जाने लगा है। भारत के कई अत्यन्त प्रतिष्ठित मुस्लिम विद्वानों को अमेरिका पहुंचने के बाद वहां के हवाईअड्डे से ही भारत वापस भेजा जा चुका है। ऐसी कई घटनाएं सुनी जा चुकी हैं जिनसे यह पता चलता है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां मुस्लिम नाम रखने वालों, इस्लामी तौर तरींके का पहनावा धारण करने वालों या दाढ़ी रखने वालों के साथ विशेष सुरक्षा उपाय अपनाती हैं तथा उनपर अपनी पैनी नंजर रखती हैं। अब यहां एक प्रश् यह भी है कि मुसलमानों को इस संदेहपूर्ण स्थिति तक पहुंचाने का ंजिम्मेदार कौन है? इस प्रकरण पर एक और अंतिम बात यह ंजरूर कहना चाहूंगा कि उपरोक्त सभी वास्तविकताओं के बावजूद यह भी एक बड़ी सच्चाई है कि हमारे नेता ऐसे मुद्दों की गहरी तलाश में रहते हैं जोकि उन्हें राजनीति करने का अवसर दे सकें। शायद इस मामले में भी कुछ ऐसा ही है। तलाशी प्रकरण ने स्वयं डॉ कलाम को शायद इतना आहत नहीं किया होगा जितना कि हमारे देश के कुछ नेता इस मामले से आहत दिखाई दिए हैं। नेताओं द्वारा ही डॉ कलाम की तलाशी पर विरोधस्वरूप जो शब्द अपनाए गए, उसमें इस घटना को देश का अपमान, भारतीय स्वाभिमान पर हमला, देश का अनादर, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का अपमान और न जाने क्या-क्या बताया गया। हमें याद रखना चाहिए कि भारत वह देश है जहां मान व अपमान की चिंता किए बिना क्या राष्ट्रपति तो क्या प्रधानमंत्री सभी पंक्तिबद्ध होकर मतदान करते हैं। डॉ मनमोहन सिंह जैसे भारतीय प्रधानमंत्री ने लाईन में खड़े होकर अपना ड्राइविंग लाईसेंस नवनीकरण करवाने में कोई अपमान महसूस नहीं किया। दरअसल देश और देशवासी स्वयं को उस समय अधिक अपमानित महसूस करते हैं, जब भारतीय नेता विदेशों में जाकर ंगरीबों से लूटा हुआ काला धन जमा कराते हैं। देश स्वयं को तब अधिक अपमानित महसूस करता है जब किसी राष्ट्रीय राजनैतिक दल का प्रमुख अथवा कोई केंद्रीय मंत्री रिश्वत की रंकम हाथों में लिए हुए कैमरे के सामने रंगेहाथों पकड़ा जाता है। देश उस समय अपनी तौहीन ंजरूर महसूस करता है, जब संसद भवन में सांसदों द्वारा नोट के बंडल उछाले जाते हैं। देश के लिए वह अधिक अपमानजनक घड़ी होती है जब कोई सांसद सदन में प्रश् पूछने के बदले रिश्वत वसूलता है। देश और देशवासी उस समय वास्तव में अपना सिर शर्म से झुका महसूस करते हैं जबकि भारतीय संसद में भ्रष्ट, चोर उचक्के, अपराधी तथा मांफिया चुनावों में विजयी होकर संसद की गरिमा पर धब्बा लगाते हैं। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को क्या कहा जाए, यह तो शायद अमेरिका की नीतियों में शामिल हैं कि वे स्वयं चाहे किसी पर विश्वास करें या न करें, परन्तु उनपर सबको विश्वास करना ही होगा। यदि अमेरिकी सोच ऐसी न होती तो वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की राजघाट स्थित समाधि पर अमेरिकी कुत्तों से तलाशी न करवाते। वैसे भी जब कभी भी कोई अमेरिकी विशिष्ट या अतिविशिष्ट व्यक्ति भारत आता है तो उसकी सुरक्षा की पूरी ंजिम्मेदारी भी अमेरिका स्वयं उठाता है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तो तीसरे घेरे में शामिल किया जाता है। विश्वास और अविश्वास के इस अंतर को बदलने के लिए ठोस ंकदम उठाने, भरपूर इच्छाशक्ति दिखाने तथा दुम हिलाने की प्रवृत्ति को त्यागने की सख्त जरूरत है। तनवीर जांफरी
राष्ट्रपति से अब करिये सीधी शिकायत, राष्ट्रपति भवन का हेल्पलाइन पोर्टल शुरूराष्ट्रपति से अब करिये सीधी शिकायत, राष्ट्रपति भवन का हेल्पलाइन पोर्टल शुरूयाहू हिन्दी से साभारJul 24, 07:37 pm नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। गांव, शहर, जिला, राज्य और केंद्र सरकार से मायूस होकर राष्ट्रपति के दर पर फरियाद लेकर पहुंचने वाले अपनी शिकायतों पर कार्रवाई कुछ जल्दी होने की उम्मीद कर सकते हैं। राष्ट्रपति भवन इन शिकायतों को आनलाइन प्रणाली के तहत तत्काल संबंधित राज्य व मंत्रालय को भेजेगा और इन पर हुई कार्रवाई की स्थिति पर लगातार नजर रखेगा। शिकायतकर्ता को भी उसकी शिकायत पर हो रही कार्रवाई की जानकारी आनलाइन मिल जाएगी। यह सब हेल्पलाइन पोर्टल http://helpline.rb.nic.in के जरिये होगा। राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने इस पोर्टल को लांच कर दिया है। पोर्टल पाटिल के राष्ट्रपति के तौर पर दो साल पूरा करने से एक दिन पहले जारी किया गया है। इस पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति सीधे शिकायत दर्ज कर सकेगा। इसका फायदा यह होगा कि राज्य सरकारों या केंद्र की राष्ट्रपति भवन के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायतों पर टालमटोल करना उनके लिए मुश्किल होगा। शिकायतकर्ता को संबंधित राज्य सरकार या केंद्र के संबंधित मंत्रालय या विभाग का ब्यौरा देकर शिकायत भेजनी होगी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को एक विशिष्ट नंबर मिल जाएगा। शिकायतकर्ता पोर्टल पर लागइन कर इस नंबर के जरिये यह जान सकेगा कि उसकी शिकायत पर क्या और किस स्तर पर कार्रवाई हुई। हर शिकायत को संबंधित राज्य सरकार या केंद्रीय मंत्रालय को भेजा जाएगा। उस पर कार्रवाई का ब्यौरा संबंधित सरकार या मंत्रालय देगा। राष्ट्रपति भवन का सचिवालय समय-समय पर कार्रवाई की स्थिति पूछेगा। यह पूरी प्रक्रिया आनलाइन होगी। इस प्रणाली से राष्ट्रपति को भी उन शिकायतों का जवाब देने में सहूलियत रहेगी, जिन पर कार्रवाई की जानकारी मांगी जाती है। राष्ट्रपति भवन को रोज करीब 750 शिकायतें मिलती हैं। इनमें 400 डाक, 300 ई-मेल और 50 फैक्स के जरिए पहुंचती हैं।
कमिश्नर द्वारा जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण, कलेक्टर ने चिकित्सकों की उपस्थिति पंजी जप्त कीकमिश्नर द्वारा जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण -------------------------- ओ.पी.डी. में पंजीयन हेतु अतिरिक्त कम्प्यूटर लगाने के निर्देश ------------------------------ कलेक्टर ने चिकित्सकों की उपस्थिति पंजी जप्त की ---------------------- शहडोल 24 जुलाई 2009. कमिश्नर शहडोल संभाग श्री अरूण तिवारी ने आज यहां जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण कर विभिन्न ब्यवस्थाओं का जायजा लिया । आपने ओ.पी.डी. में अव्यवस्थित पंजीयन व्यवस्था को व्यवस्थित करने हेतु, टोकन व्यवस्था लागू करने, कम्प्यूटरों की संख्या बढ़ाने, मरीजों के बैठने की व्यवस्था करने तथा जिला चिकित्सालय के अन्दर एवं परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के सिविल सर्जन को निर्देश दिये । कमिश्नर के भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री नीरज दुबे, सिविल सर्जन डा. उमेश नामदेव, टीकाकरण अधिकारी डा. टी. एन. चतुर्वेदी, डा. थारवानी तथा कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग श्री गुप्ता भी साथ थे । कमिश्नर श्री तिवारी ने जिला चिकित्सालय में ओ. पी. डी.,मेडिसिन वार्ड,सर्जरी वार्ड,प्रसूति वार्ड, आर्थोपेडिक्स वार्ड,एक्सरे कक्ष, नवजात शिशु कक्ष तथा बालशक्ति योजना के तहत संचालित एन. आर. सी. कार्यक्रम का निरीक्षणा किया । आपने अस्पताल में भर्ती होने वाले ऐसे मरीज जिनके दीनदयाल अन्त्योदय उपचार कार्ड बने हुए हैं, उन्हें अस्पताल से ही दवायें उपलव्ध कराने के निर्देश देते हुए चिकित्सकों को बाजार से दवाएं नहीं लिखने की हिदायत दी । इसके साथ ही मरीजों के वार्ड में भर्ती होने के साथ ही कार्ड में समस्त जानकारियों एवं उपलव्ध कराई गई दवाओं का संधारण करने के सिविल सर्जन को निर्देश दिये । कमिश्नर ने बाल शक्ति योजना के तहत संचालित एन. आर. सी. वार्ड का निरीक्षण किया । यहां ग्रेड तीन एवं ग्रेड चार में कुपोषित 17 बच्चे भर्ती पाये गये । आपने कुपोषित बच्चों को दी जाने वाली डाइट के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा रसोई कक्ष का भी निरीक्षण किया । कमिश्नर श्री तिवारी ने कुपोषित बच्चों को आवश्यक्तानुसार अस्पताल में भर्ती रखकर तब तक इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये जब तक कि वे सामान्य श्रेणी में न आ जायें । आपने बच्चों की माताओं को योजना के नियमानुसार 15 दिवस की मजदूरी का भुगतान चेक के माध्यम से करने एवं अस्पताल से छुट्टी देने के बाद भी नियमित रूप से फालोअप करने के निर्देश दिये । कलेक्टर श्री नीरज दुबे ने चिकित्सकों की उपस्थिति पंजी का निरीक्षण किया तथा यहां उपस्थित पंजी जप्त करते हुए अनुपस्थित अनुपस्थित पाए गए चिकित्सकों को कारण बताओं नोटिश जारी करने के निर्देश दिये । आपने जिले में सर्वेक्षित कुपोषित बच्चों की सूची ,महिला एवं बाल विकास से प्राप्त कर आपसी समन्वय बनाते हुए ग्रेडवार कुपोषित बच्चों को चिकित्सा सुविधा दिलाने के सिविल सर्जन को निर्देश दिये । उन्होने प्रसूतिवार्ड में भर्ती महिलाओं को बच्चे के जन्म के साथ ही मॉ का दूध पिलाने की समझाइश राउण्ड में आने वाले चिकित्सकों के माध्यम से दिलाने को कहा । निरीक्षण के समय डा0 सावित्री थारवानी, डा0 अशोक गौतम, डा0 रीना गौतम, डा0 मुकुंद चतुर्वेदी, डा0 राजेश पाण्डे, डा0 मनीष सिंह उपस्थित थे धान की मेडागास्कर विधि से बदली तकदीरधान की मेडागास्कर विधि से बदली तकदीर ------------------------- शहडोल 24 जुलाई 2009. अनुसूचित जनजाति वर्ग में अत्यन्त पिछड़े बैगा जनजाति समुदाय के निर्धन और एक मामूली- से किसान धनीराम ने जब 2008 में शहडोल जिले के बुढ़ार जनपद के बिरूहली गांव में अपने परिवार की चार एकड़ जमीन पर मेडागास्कर विधि से धान की खेती करने का फैसला किया, तो उन्हें जरा भी एहसास नहीं था कि वे न केवल स्वयं के लिए इस विधि से कई गुना अधिक उत्पादन लेने के रास्ते पर चल रहे हैं, बल्कि अन्य गांवों के तमाम किसानों के लिए भी ऐसी विधि की राह खोल रहे हैं और उनके लिए अधिक आमदनी की व्यवस्था कर रहे हैं । इसके पहले जब सत्ताइस वर्षीय धनीराम अपने परिवार के साथ परम्परागत तरीके से छिटुआ विधि से धान, अरहर और उड़द की फसल लेते थे, तो उन्होंने इसी विधि से कृषि जगत में अपना भविष्य बनाने की कल्पना की थी । उनके परिवार के पास नौ एकड़ चौवीस डिसमिल जमीन थी । परम्परागत तरीके से बोवाई करने से वे कम मात्रा में ही धान ले पाते थे, जो ले देकर किसी तरह उनके परिवार के सालभर के खाने के उपयोग मे आ पाता था । लेकिन एक कृषि अधिकारी के कम बीज, कम पानी और कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली मेडागास्कर यानि श्री विधि के प्रति जगाए अनुराग ने उनकी कैरियर संबंधी योजना को पलट दिया । कम उत्पादन देने वाली कृषि की परम्परागत विधि अपनाए रखने की जिन्दगी से उकताकर धनीराम ने 2008 में परम्परागत तरीका छोड़ दिया और उन्नत तकनीक की मेडागास्कर विधि से धान उत्पादन में कूद पड़े । उन्नत तकनीक से भरपूर उत्पादन और अधिक आमदनी के आकर्षण ने चार एकड़ के अपने पारिवारिक खेत में मेडागास्कर विधि से धान लगाने का उनका इरादा पुख्ता ही किया । कृषि विभाग ने उनके खेत के एक भूखण्ड पर इस विधि का प्रादर्शन डलवाया तथा अन्नपूर्णा योजना के तहत धान की हाई ब्रीड का डी.आर.एच.-775 नामक 12 किलोग्राम बीज उपलब्ध कराया । विभाग ने उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, कीटनाशक और खाद भी उपलब्ध कराया । मेडागास्कर तकनीक का इस्तेमाल करने से पहली बार में ही धनीराम ने 105 क्विंटल धान का उत्पादन लिया और उन्होंने एक लाख रूपये कमाए । इससे पहले उनका परिवार सालभर में घर में खाने लायक अन्न ही उगा पाता था । धनीराम को इस विधि में प्रबल संभावनाएं दिखीं । इस विध ने उनकी तकदीर बदल दी । उन्होंने उक्त राशि से खेत को ठीक कराया और खेत में ही एक मकान बना लिया । उन्होंने मोटर साइकिल खरीदने के लिए इसी राशि से धन मिलाया । आज गांव में उनका तेजी से फैलता मेडागास्कर का आधार उन्हें आशावादी बनाता है । उन्नत तकनीक से अचानक कई गुना अधिक उत्पादन लेने की खबर धीरे-धीरे बढ़ी और आसपास के कई गांवों में इस विधि के अपनाने से धान जगत में उफान आने के बाद धनीराम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा । सरकार ने इस विधि को और बढ़ावा दिया । उत्पादन को बढ़ाने के लिए धनीराम ने इस साल आठ एकड़ में मेडागास्कर विधि से धान की रोपाई की है । अपनी इस उपलब्धि पर धनीराम उत्साह से भरे हुए हैं । धनीराम कहते हैं, '' य हमरे खातिर बहुत बड़ी खुशी केर बात आइ जउने क हम बताय नहीं सकी , एक वहउ दिन रहा, जब हम छिटुआ धान बोबत रहेन जउने मा सालभर के खातिर खाइ का अन्न पैदा नहीं कई पावत रहेन '' । कृषि विभाग ने मेडागास्कर विधि को धनीराम के साथ-साथ कई अन्य किसानों के खेतों में भी आजमाया और वे सफलता की राह पर चल पड़े । वे इससे बेहतर किसी और तकनीक के बारे में नहीं सोच सकते । दिनोंदिन लोकप्रियता के शिखर को छू रही मेडागास्कर विधि के बारे में उप संचालक कृषि श्री के. एस. टेकाम कहते हैं, '' पारंपरिक धान की अपेक्षा मेडागास्कर पध्दति से धान की उपज में पचास से तीन सौ प्रतिशत तक अधिक उत्पादन लिया जा सकता है । ''
23 julio माइक्रोसॉफ्ट ने हॉटमेल की सेटिंग बदलीं, अब पॉप 3 सेवा शुरूमाइक्रोसॉफ्ट ने हॉटमेल की सेटिंग बदलीं, अब पॉप 3 सेवा शुरू मुरैना / ग्वालियर 23 जुलाई 09, माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज की निर्माता मशहूर साफ्टवेयर कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट ने जारी अपने संदेश में कहा है कि जो लोग माइक्रोसॉफ्ट का हॉटमेल ई मेल पता उपयोग कर रहे हैं वे अपनी सेटिंग्स बदल लें, तथा या तो लाइव मेल नाम की निशुल्क साफ्टवेयर फ्री में कंपनी की वेबसाइट से डाउनलोड कर लें या माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक 2003 या 2007 प्रयोग करें, और यदि आउटलुक एक्सप्रेस का उपयोग करते हैं तो आउटलुक एक्सप्रेस की सेटिंग बदल लें तथा उसे पॉप 3 एवं एस.एमटी.पी सेटिंग में बदल दें, अब हॉटमेल में पॉप 3 और एस.एम.टी.पी सुविधा उपलब्ध है ।
ई गवर्नेन्स: त्वरित गति से मिलेगा अब नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र , एन आई सी. ने विकसित की कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली, ग्वालियर म.प्र. का पहला जिलाई गवर्नेन्स: त्वरित गति से मिलेगा अब नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र , एन आई सी. ने विकसित की कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली, ग्वालियर म.प्र. का पहला जिला Gwalior now entered to E Governance Era With this new system now Gwalior District Administration entered into new era of E Governance. We congratulate to district Administration of Gwalior to initiate Public Services with electronic network in form of E Governance and now Gwalior is First district of state of Madhya Pradesh to use this system in such a way. Especially to District collector Gwalior Shri Aakash Tripathi and NIC team of Gwalior Municipal Corporation of Gwalior already initiated E Governance Practices. – Narendra Singh Tomar “Anand” ग्वालियर 22 जुलाई 09। नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र को त्वरित गति से देने के लिये यहां कलेक्ट्रोरेट स्थित एन आई सी. में एक कम्प्यूटराइज प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली को विकसित करने वाला ग्वालियर जिला प्रदेश में पहला जिला है। कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने आज इसका शुभारंभ किया। उन्होंने औपचारिक रूप से दो आवेदको को नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्रदाय किये। इन आवेदकों द्वारा दो दिन पूर्व ही एन ओ सी. के लिये आवेदन किया था। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री वेदप्रकाश, संयुक्त कलेक्टर श्री राजेश बाथम, कलेक्ट्रेट के अन्य अधिकारीगण एवं आवेदकगण उपस्थित थे। कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी के निर्देश पर एन आई सी. ग्वालियर ने एक ऐसा साफ्टवेयर विकसित किया है, जिसमें नजूल एन ओ सी. के आवेदनों का निराकरण त्वरित गति से हो सकेगा। इसमें शर्त यह है कि आवेदक को अपना आवेदन नगर निगम को देना होगा, जो नजूल कार्यालय को आयेगा। शेष जांच आदि की प्रक्रिया पूर्ववत रहेगी। नगर निगम के सिटी प्लानर एवं भवन अधिकारी के द्वारा नजूल अधिकारी को संबंधित भूमि के स्वामित्व की जानकारी हेतु पत्र भेजा जायेगा। पत्र के साथ आवेदक द्वारा प्रस्तुत समस्त दस्तावेज संलग्न करने होंगे। नजूल अधिकारी के द्वारा उक्त पत्र पर तत्काल कार्यवाही करते हुए एन आई सी. के सॉफ्टवेयर के माध्यम से डाटावेस से भूमि की स्थिति सीलिंग भूमियों को दृष्टिगत रखते हुए प्राप्त की जायेगी तथा दो दिवस के अंदर नगर निगम को प्रेषित की जायेगी। वर्तमान में नजूल क्षेत्र के 20 ग्रामों का डाटावेस तैयार हो चुका है, तथा शेष का कार्य प्रगति पर है। जिन ग्रामों का डाटावेस तैयार हो चुका है, उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र सॉफ्टवेयर द्वारा जारी होगा तथा जिन ग्रामों का डाटावेस तैयार नहीं हुआ है, उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र रीडर-2 नजूल अधिकारी द्वारा मिसिल बन्दोबस्त कार्यालय में उपलब्ध प्रतियों के साथ मिलान कराकर नगर निगम में भेजा जायेगा। आवादी के क्षेत्र के नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र की व्यवस्था पूर्वानुसार रहेगी। अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रतियां तहसीलदार नजूल एवं संबंधित राजस्व निरीक्षक नजूल तथा हल्का पटवारी को भी दी जायेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आवेदक उसी भूमि पर निर्माण कर रहा है, जिसके लिये अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यदि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है तो ऐसी स्थिति में अवैध निर्माण न हो उक्त राजस्व अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे।
एन ओ सी. तत्काल मिलेगीकलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि नजूल एन ओ सी. के लिये कम्प्यूटराइजड् प्रणाली विकसित हो जाने से नजूल एन ओ सी. चाहने वाले आवेदकों को अब कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा इसमें कोई विलम्ब भी नहीं होगा। साथ ही भ्रष्टाचार जैसी कोई शिकायत नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसमें 80 प्रतिशत समस्याओं का निराकरण त्वरित गति से होगा। श्री त्रिपाठी ने बताया कि नजूल द्वारा एन ओ सी. नगर निगम को सीधे भेजी जायेगी। जहाँ से आवेदकों को भवन निर्माण की अनुमति मिलेगी।
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में सूर्यग्रहण पर वन्यप्राणियों के व्यवहार का आंकलनवन विहार राष्ट्रीय उद्यान में सूर्यग्रहण पर वन्यप्राणियों के व्यवहार का आंकलन Bhopal:Wednesday, July 22, 2009
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में दिनांक 22 जुलाई, 09 को सदी के सबसे बड़े सूर्यग्रहण के अवसर पर विभिन्न वन्यप्राणियों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तन का आंकलन किया गया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन ने 360 वर्ष के अंतराल से पड़ने वाले इस पूर्ण सूर्यग्रहण के अवसर पर इसके प्रभाव से विभिन्न वन्यप्राणियों के व्यवहार में परिवर्तन हेतु अध्ययन करने का निर्णय लिया गया। इस हेतु वन विहार के सभी वन्यप्राणियों के व्यवहार आंकलन हेतु 23 स्थल चिन्हित किये गये। इन स्थलों पर इन वन्यप्राणियों के रख रखाव में पूर्व से ही लगे हुये कर्मचारियों को मॉनीटरिंग हेतु नियुक्त किया गया। वन्यप्राणियों के सामान्य व्यवहार का अध्ययन करने के लिये सभी कर्मचारियों को दिनांक 11 जुलाई 09 को प्रशिक्षण दिया गया। मॉनीटरिंग कार्य 15 जुलाई 09 से 21 जुलाई 09 तक प्रात: 5.30 से 7.30 बजे तक किया जाकर सभी वन्यप्राणियों के सामान्य व्यवहार की प्रविष्टि इस हेतु निर्धारित डाटाशीट में की गई। इस अध्ययन का उद्देश्य यह था कि सूर्य ग्रहण अवधि में इन वन्यप्राणियों के सामान्य व्यवहार की जानकारी प्राप्त हो सके, ताकि सूर्यग्रहण के दिन व्यवहार में होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म से परिवर्तन को भी ज्ञात किया जा सके। दिनांक 22 जुलाई 09 को सूर्य ग्रहण के दिन भी प्रात: 5.30 बजे से 7.30 बजे तक पुन: इन वन्यप्राणियों के व्यवहार का अध्ययन कर इसकी प्रविष्टि डाटाशीट में की गई। सूर्यग्रहण के दिन कुछ वन्यप्राणियों में इनके सामान्य दिनों के व्यवहार की तुलना में अंतर स्पष्ट परिलक्षित हुआ। वन्यप्राणीवार व्यवहार निम्न है –
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