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30 marzo

लोकसभा निर्वाचन 2009 पहले दिन 5 नामांकन पत्र दाखिल

लोकसभा निर्वाचन 2009 पहले दिन 5 नामांकन पत्र दाखिल

भोपाल : 28 मार्च, 2009

मध्यप्रदेश के 13 लोकसभा क्षेत्रों के लिये आज जारी की गई अधिसूचना के साथ ही नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला शुरू हो गया है। आज पहले दिन 4 लोकसभा क्षेत्रों में कुल 5 नामांकन दाखिल किये गये।

भोपाल लोकसभा क्षेत्र के लिये श्री कैलाश जोशी (भाजपा) और श्री अशोक सिंह (बसपा) ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किये। सीधी लोकसभा क्षेत्र के लिये श्री मदनमोहन (निर्दलीय), बैतूल लोकसभा क्षेत्र के लिये श्री कल्लू सिंह उइके (जीएमएस) और होशंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के लिये श्री मदन थापक (सपा) ने नामांकन पत्र दाखिल किये।

शेष 9 लोकसभा क्षेत्रों के लिये आज कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया। इनमें खजुराहो, सतना, रीवा, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा और विदिशा शामिल हैं।

 

लोकसभा निर्वाचन 2009 उम्मीदवारों के नामांकन के साथ दिये जाने वाले शपथ पत्र साफ सुथरे हों

लोकसभा निर्वाचन 2009 उम्मीदवारों के नामांकन के साथ दिये जाने वाले शपथ पत्र साफ सुथरे हों

भोपाल : 25 मार्च, 2009

चुनाव आयोग ने निर्देश दिये है कि लोक सभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र के साथ जमा किये जाने वाले दोनों शपथ पत्रों में प्रविष्टियां साफ सुथरी हों। बेहतर तो यह होगा कि ये शपथ पत्र टाइप किये गये हों। बहरहाल, यदि हाथ से भी लिखे गये हों, तो इनकी लिखाई स्पष्ट पढ़ने योग्य होनी चाहिए।

इसके अलावा, किसी भी कालम को खाली नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यदि किसी मद में कोई जानकारी नहीं दी जानी हो तो उसके सामने 'निरंक' अथवा 'लागू नहीं' लिखना चाहिए।

आयोग को ऐसी शिकायतें मिलती रही हैैं कि अनके उम्मीदवार शपथ पत्र में जो जानकारी देते हैं वह स्पष्ट पढ़ने में नहीं आती और कुछ कालमों को तो खाली छोड़ दिया जाता है। इस संबंध में रिटर्निंग अफसरों सहित सभी संबंधितों तथा राजनैतिक दलों को निर्देश भेज दिये गये हैं।

 

भोपाल संसदीय क्षेत्र से पहले दिन दो नामांकन पत्र दाखिल (लोकसभा निर्वाचन 2009)

भोपाल संसदीय क्षेत्र से पहले दिन दो नामांकन पत्र दाखिल (लोकसभा निर्वाचन 2009)

लोकसभा निर्वाचन 2009 के लिए भोपाल संसदीय क्षेत्र से नामांकन पत्र भरने के पहले दिन आज जिला निर्वाचन अधिकारी श्री शिव शेखर शुक्ला के समक्ष दो उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। इन दो उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में श्री कैलाश जोशी और बहुजन समाज पार्टी के श्री अशोक सिंह ने नामांकन पत्र दाखिल किया।

 

29 marzo

पाठय पुस्तक वितरण की कार्ययोजना : निगम मुख्यालय में कंट्रोल रुम स्थापित

पाठय पुस्तक वितरण की कार्ययोजना : निगम मुख्यालय में कंट्रोल रुम स्थापित

भोपाल 27 मार्च 09। मध्यप्रदेश में यह पहला वर्ष है जब शासकीय एवं मध्यप्रदेश का स्कूली पाठयक्रम संचालित करने वाले स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र एक जुलाई की अपेक्षा एक अप्रेल, 2009 से प्रारंभ हो रहा है। नवीन शैक्षणिक सत्र में सुचारु अध्यापन व्यवस्था को दृष्टिगत रख मध्यप्रदेश पाठय पुस्तक निगम ने सत्र के प्रथम दिवस ही प्रदेश के नौनिहालों को पाठय पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये समयबध्द कार्य योजना तैयार की है।

सत्र के शुरआती माह में विद्यार्थियों की औसत 75 से 80 प्रतिशत रहती आयी उपस्थिति के आधार पर पाठय पुस्तक निगम के द्वारा इस वर्ष 30 मार्च तक कम से कम 75 प्रतिशत पुस्तकों के सेट्स विकास खंड स्तर पहुंचाने का लक्ष्य के अनुरुप ये पुस्तकें निगम के संबंधित डिपो द्वारा वितरित की जा चुकी हैं। वांछित पुस्तक संख्या के अनुसार शेष पुस्तकें डिपों में भंडारित हो गयी हैं जो कि अप्रेल के प्रथम सप्ताह में विकास खंड वार दर्ज संख्या के अनुपात में स्कूलों तक पहुंचायी जायेंगी। विकास खंड कार्यालयों में उपलब्ध पुस्तकें 25 मार्च तक संकुल स्तर पर तदुपरांत वहां से एक अप्रेल के पूर्व शालाओं तक पहुंचाने हेतु जिला परियोजना समन्वयक द्वारा समयबध्द योजना के तहत सभी जिलों में कार्य कियाजा रहा है।

इस नवीन शिक्षा सत्र 2009-10 के लिये कक्षा एक से 12 तक लगभग 7 करोड़ 70 लाख पुस्तकों की आवश्यकता आंकलित की गयी है जिसमें से लगभग 6 करोड़ 50 लाख पुस्तकों का मुद्रण कार्य 25 मार्च, 2009 तक पूर्ण किया जा चुका है। कक्षा एक से 8 तक की पुस्तकों के वितरण की समस्त व्यवस्थायें पूर्ण हो चुकी हैं। होली एवं रंगपंचमी के त्यौहारी माहौल में मुद्रण कामगारों के सामूहिक अवकाश एवं अनेक स्थानों पर परिवहन में गतिरोध के बावजूद कक्ष 9 से 12 की अधिकांश पुस्तकें वितरित करने की तैयारी की जा चुकी है। इन कक्षाओं की कुछ पुस्तकों के मुद्रण व पहुंच में थोड़ा विलम्ब संभावित है। जिसमें कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान, कक्षा 10 वीं की हिन्दी विशिष्ट, गणित एवं सामाजिक विज्ञान तथा कक्षा 11 की इंग्लिश रीडर शामिल हैं। ये पुस्तकें अप्रेल के प्रथम सप्ताह तक उपलब्ध हो सकेंगी। शालाओं की सुचारु अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था की दृष्टि से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अधिकतर पुस्तकों को राज्य शिक्षा केन्द्र की वेबसाइट http://www.ssa.mp.govt.in/circulars.htm पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी वेबसाइट पर समस्त पुस्तकों की जिलेवार आवश्यकता एवं प्रतिदिन वितरण की स्थिति भी उपलब्ध रहेगी। योजना के तहत लगभग 3 करोड़ 12 लाख एवं खुले बाजार हेतु लगभग 34 लाख किताबें उपलब्ध करायी जाना हैं। वहीं माध्यमिक कक्षाओं हेतु लगभग 2 करोड़ 30 लाख पुस्तकें नि:शुल्क वितरण के लिये तथा लगभग 36 लाख पुस्तकें खुले बाजार हेतु वांछित हैं। हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों हेतु नि:शुल्क वितरण की दृष्टि से लगभग एक करोड़ 15 लाख से अधिक तथा खुले बाजार के लिये 45 लाख से अधिक किताबें उपलब्ध कराया जाना लक्षित है।

मध्यप्रदेश पाठय पुस्तक निगम द्वारा समयबध्द योजना के तहत वांछित पुस्तकों की उपलब्धता की दृष्टि से समस्त जिला परियोजना समन्वयकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से योजनाबध्द कार्य किया जा रहा है। साथ ही संभाग स्तर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संभागीय संयुक्त संचालकों से भी पुस्तक वितरण के दैनिक पर्यवेक्षण की जवाबदारी सौंपी गयी हैं। पाठय पुस्तकों के समयबध्द मुद्रण एवं शालाओं तक सुव्यवस्थित पहुंच की दृष्टि से मुद्रकों, परिवहनकर्ताओं, पाठय पुस्तक निगम के क्षेत्रीय डिपो, जिला शिक्षा अधिकारियों तथा जिला परियोजना समन्वयकों के मध्य समन्वय तथा सम विषयक समस्याओं के समाधान के लिये पाठय पुस्तक निगम द्वारा अपने भोपाल स्थित मुख्यालय में एक कंट्रोल रुम भी स्थापित किया गया है। पाठय पुस्तक वितरण से जुड़े व्यक्ति कंट्रोल रुम में दूरभाष क्रमांक 0755-2557640 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

लोकसभा निर्वाचन-2009 : श्रमिकों को मतदान के दिन अवकाश मिलेगा

लोकसभा निर्वाचन-2009 : श्रमिकों को मतदान के दिन अवकाश मिलेगा

भोपाल 27 मार्च 09। प्रदेश के कारखानों में कार्यरत मजदूर आगामी लोकसभा निर्वाचन में अपने मताधिकार का सुविधाजनक ढंग से प्रयोग कर सकें इसके लिए श्रमायुक्त ने सभी कारखाना मालिकों और प्रबंधकों से मतदान के दिन कारखाने में साप्ताहिक अवकाश घोषित करने को कहा है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्यप्रदेश के 29 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के लिए निर्वाचन कार्यक्रम घोषित किया गया है। तद्नुसार 13 संसदीय क्षेत्रों में 23 अप्रैल और 16 संसदीय क्षेत्रों में 30 अप्रैल, 2009 को मतदान संपन्न होंगे।

श्रमायुक्त द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि राज्य के कारखानों में कार्यरत कामगारों को लोकसभा निर्वाचन में मताधिकार का उपयोग करने की सुविधा देने की दृष्टि से समस्त कारखानों के अधिभोगीगणों एवं प्रबंधकों से यह अपेक्षा की जाती है, कि वे अपने-अपने क्षेत्र अनुसार लोकसभा निर्वाचन के दिन अर्थात जहां प्रथम चरण में मतदान होना है वहां 23 अप्रैल 2009 को एवं जहाँ द्वितीय चरण में मतदान होना है वहाँ 30 अप्रैल 2009 को कामगारों के लिये कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 52 के तहत मतदान के दिन साप्ताहिक अवकाश घोषित करें। इससे कामगार अपने मताधिकार का उपयोग सुविधाजनक एवं निर्बाध रूप से कर सकेंगे।

ऐसे कारखाने जो सप्ताह में सातों दिन कार्य करते हैं, वे प्रथम एवं द्वितीय पाली के श्रमिकों को मतदान हेतु दो-दो घण्टे की सुविधा देंगे। अर्थात प्रथम पाली नियमित समय से दो घण्टे पूर्व बन्द की जायेगी एवं दूसरी पाली निर्धारित समय से दो घण्टे पश्चात प्रारंभ की जायेगी, ताकि कामगारों को मतदान करने में कठिनाई न हो। इसी तरह ऐसे कारखाने जो निरन्तरित प्रक्रिया (कंटीनियुस प्रोसेस) की श्रेणी में आते हैं, वे श्रमिकों को उनके देय वेतन में किसी प्रकार की क्षति न पहुँचाते हुए बारी-बारी से मतदान करने की सुविधा दें।

इसी प्रकार दुकान एवं वाणिज्य संस्थानों के नियोजकों से भी यह अपेक्षा है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के कामगारों को मतदान के लिए सुविधा देने की दृष्टि से मध्यप्रदेश दुकान का संस्थान अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत निर्धारित दिन छुट्टी#अवकाश न रखकर उसके स्थान पर लोकसभा निर्वाचन के दिन अर्थात जहाँ प्रथम चरण में मतदान होना है वहां 23 अप्रैल, 2009 (गुरूवार) एवं जहाँ द्वितीय चरण में मतदान होना है वहाँ 30 अप्रैल, 2009 (गुरूवार) को छुट्टी#अवकाश देंगे।

 

अनूप संग प्रियंका और अनुराग संग राधा पाण्‍डेय के विवाह पंजीयन के आवेदनों पर आपत्ति मांगी गई

अनूप संग प्रियंका और अनुराग संग राधा पाण्‍डेय के विवाह पंजीयन के आवेदनों पर आपत्ति मांगी गई

ग्वालियर 26 मार्च 09। विवाह अधिकारी एवं अपर कलेक्टर जिला ग्वालियर द्वारा विवाह पंजीयन के दो आवेदनों के सम्बन्ध में सर्वसाधारण को सूचित कर तीस दिवस के अन्दर लिखित अथवा मौखिक आपत्ति मांगी गई है।

       प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 शक्ति बिहार ग्वालियर निवासी श्री अनूप शुक्ला पुत्र श्री विनयदत्त शुक्ला एवं ए -25 विनय नगर सेक्टर न 4 ग्वालियर निवासी प्रियंका दीक्षित पुत्री श्री दिनेश कुमार दीक्षित द्वारा संयुक्त आवेदन प्रस्तुत कर विवाह पंजीयन करने हेतु अनुरोध किया है। आवेदन के अनुसार इन दोनों की शादी 8 मार्च 2007 को केशर बाग रेस कोर्स रोड जिला ग्वालियर में सम्पन्न हुई थी। उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम 1954 की धारा 15 के अन्तर्गत समस्त शर्ते पूरी करने का भी शपथ पत्र दिया है। शपथ पत्र में कहा गया है कि पक्षकारों का परस्पर विवाह हो चुका है और वह पति पत्नि की तरह रह रहे हैं। किसी भी पक्षकार के एक से अधिक पति या पत्नी रजिस्ट्रीकरण के समय जीवित नहीं है वह जड़ या पागल नहीं है। 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं। पक्षकारों में प्रतिषिध्द कोटि की नातेदारी नहीं है।

      इसी प्रकार विशेष विवाह अधिनियम 1954 की धारा 15 के अन्तर्गत श्री अनुराग गौड़ पुत्र श्री प्रकाशनारायण गौड़ निवासी गौर नर्सिंग होम खुर्जेवाला मोहल्ला लश्कर ग्वालियर एवं राधा पाण्डेय पुत्री श्री अखिलेश पाण्डेय निवासी लाइन न. 2 मकान नं. 188-189 विरला नगर ग्वालियर द्वारा संयुक्त आवेदन देकर विवाह पंजीयन की मांग की है। आवेदन के अनुसार इन दोनों की शादी 2 नवम्बर 06 के होटल शुभम् वृन्दावन जिला मथुरा उत्तर प्रदेश में सम्पन्न हुई थी। पक्षकारों द्वारा अधिनियम की धारा 15 के अन्तर्गत शर्तें पूरी करने का शपथ पत्र दिया है।

       अपर कलेक्टर द्वारा विज्ञप्ति जारी कर उक्त विवाहों के सम्बन्ध में सर्वसाधारण को सूचित किया है कि यदि कोई आपत्ति हो तो विज्ञप्ति प्रकाशित के 30 दिन पूर्व लिखित या मौखिक रूप से स्वयं उपस्थित होकर या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से कार्यालय समय में प्रस्तुत की जा सकती हैं।

 

इर्थेन्द्र दुबे और नीलम तिर्की का विशेष विवाह अधिनियम के तहत आवेदन

इर्थेन्द्र दुबे और नीलम तिर्की का विशेष विवाह अधिनियम के तहत आवेदन

ग्वालियर 26 मार्च 09। विशेष विवाह अधिनियम 1954 के प्रावधानों के अन्तर्गत विवाह अधिकारी एवं अपर कलेक्टर श्री वेद प्रकाश के समक्ष एक आवेदक द्वारा धारा 5 में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है। विवाह अधिकारी ने अवगत कराया है कि यदि किसी भी व्यक्ति को विवाह के संबंध में किसी प्रकार की कोई शिकायत या आपत्ति हो तो वह इस संबंध में समाचार प्रकाशन दिनांक से 30 दिवस के अन्दर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। निर्धारित तिथि तक कोई शिकायत या आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो यह विवाह अनुष्ठापित करवा कर विवाह प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया जायेगा।

      विवाह अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री इर्थेन्द्र प्रताप दुबे पुत्र स्व. रामभरोसे दुबे आयु 31 वर्ष निवासी ग्राम जारगा पो. बंधोली थाना उटीला ग्वालियर एवं नीलम तिर्की पुत्री श्री डोमन्कि तिर्की  कुमार उम्र 29 वर्ष निवासी गांधी नगर पी. 45/3 डिफेन्स कालोनी ग्वालियर के द्वारा आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है।

 

24 marzo

मलेरिया से बचाव के रामबाण उपाय, इलाज से बचाव बेहतर होता है

मलेरिया से बचाव के रामबाण उपाय, इलाज से बचाव बेहतर होता है

मादा एलाफिलीज से फैलता है जानलेवा मलेरिया

ग्वालियर 24 मार्च 09। मलेरिया एक संक्रामक रोग है। यह रोग एक सूक्ष्म जीवाणु की वजह से होता है, जिसे मलेरिया परजीवी कहते हैं। इस बीमारी मे ठंड लगकर बुखार आता है एवं पसीना होकर बुखार उतर जाता है। जब मलेरिया के रोगी को मादा एनॉफिलीज मच्छर काटती है, तब रक्त के साथ मलेरिया के परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और अपनी संख्या में वृध्दि करने लगजाते हैं। यह संक्रमित मादा मच्छर जब एक स्वस्थ व्यक्ति को काटती है, तब मलेरिया के परजीवी स्वस्थ मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं एवं परजीवी के विकास और संख्या में वृध्दि होने लगती है। संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 14 दिन के बाद मलेरिया के लक्षण दिखाई देते हैं व मनुष्य बीमार हो जाता है।

       मलेरिया के रोगी को तेज बुखार आता है और ठंड लगती है, जी मचलता है, उल्टी होती है, सिरदर्द होता है, जो धीरे-धीरे तेज होता जाता है। यह बुखार 102 से 106 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचजाता है। मरीज को कभी-कभी बेहोशी भी आ जाती है। मलेरिया से मरीज के खून में न केवल कमी आती है, बल्कि उसमें कमजोरी भी आ जाती है तथा जिगर और तिल्ली भी बढ़ जाती है। समय उपचार न मिलने पर मलेरिया जानलेवा भी हो सकता है। मलेरियाजन्य एनीमिया से गर्भवती महिलाओं का गर्भपात भी हो सकता है।

       मादा एनाफिलीज मच्छर अपने अण्डे रूके हुए पानी जैसे पोखर, तालाब, झील के किनारे, कुएं, नदी, नाले, टंकी आदि में देते हैं। ये अण्डे छोटे होते हैं और पानी की सतह पर तैरते रहते हैं। सामान्यत: पानी के किनारे पर पौधे व घास उगी होती है, जहां अण्डों व लार्वा को रूकने का स्थान मिलता है। अण्डे देने के 24 से 48 घण्टे बाद अण्डे से लार्वा निकलते हैं, ये लार्वा 5 से 6 दिन में प्यूपा में परिवर्तित हो जाते हैं, जो पानी में डुबकी लगाते रहते हैं। प्यूपा से 2 से 3 दिन में वयस्क मच्छर बनकर उड़जाता है। वयस्क मच्छर सतह से 45 डिग्री कोण पर विश्राम करता है। इस प्रकार अण्डे से मच्छर बनने में 9 से 11 दिन का समय लगता है। पानी की सतह में इनके शत्रु गम्बूशिया मछली होते हैं, जो इनको अण्डा, लार्वा, प्यूपा अवस्था में ही खा जाते हैं।

       मच्छर छत पर रखी पानी की खुली टंकी, बेकार फेंके हुए टायर में जमा पानी, कूलर में, किचन गार्डन में रूके हुए पानी में, सजावट के लिये बने फव्वारों में, गमले व फूलदान में, टूट बर्तन, मटके, कुल्हड़, गमले, बिना ढके वर्तन में पैदा होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में हैण्डपंप के आसपास रूके हुए पानी में, प्रयोग में न आने वाले पानी में, पशुओं के पानी पीने वाले के हौद में, खुरों की छाप में जमा पानी में, धान के खेतों के पानी में, घरों के आसपास एक सप्ताह से अधिक तक रूके हुए पानी में, वर्षा ऋतु में पेड़ों के खोखल और छेदों में रूके हुए पानी में, घास से घिरे तालाब या दलदली जगह में, नालियों के ठहरे हुए पानी में, नहरों में रूके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं।

       मलेरिया से बचने का रामबाण उपाय यह है कि रात को सोते समय मच्छरदानी जरूर लगायें, अपने घरों में खिड़की और दरवाजों में मच्छरप्रूफ जालियां जरूर लगवायें, नारियल व सरसों के तेल में नीम का तेल मिलाकर या मच्छर भगाने वाले क्रीम को शरीर के खुले हिस्से में लेप करें, शरीर पर ऐसे कपड़े पहनें, जिससे पूरा शरीर ढक जाये। इसके अलावा मलेरिया से बचाव करने के लिये छत पर रखी पानी की टंकी को ढंक दें। टूटे-फूटे बर्तन पानी जमा  होने दें, कूलर का पानी हर सप्ताह बदलते रहें, घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें, तालाबों में लार्वा भच्छी गम्बूशिया मछली डालें। यह मछली स्वास्थ्य विभाग मुफ्त में देता है।

       मलेरिया का बुखार आने पर खून की जांच अवश्य करायें। इसके अलावा एक साल के बच्चे को क्लोरोक्विन की आधी गोली दूध के साथ पिलायें, बड़े बच्चों को एक गोली तथा वयस्क को दो से 4 गोली प्रतिदिन खिलाने से मलेरिया ठीक हो सकता है। इसके अलावा आजकल दवायुक्त मच्छरदानी भी बाजार में मिलती है, जिससे मच्छर पास नहीं आते गर्भवती माताओं और बच्चों को मलेरिया से बचाने का विशेष उपाय करना चाहिए।

            मच्छरों से डेंगू बुखार और फाइलेरिया (हाथीपांव) की बीमारी भी हो सकती है। देश में हर साल सैकड़ों लोग मलेरिया के शिकार हो जाते हैं। फायलेरिया या हाथी पांव की बीमारी क्यूलेक्स नामक मच्छर से होती है। ठीक ही कहा गया है कि ''इलाज से बचाव अच्छा होता है।''

 

लोकसभा निर्वाचन 2009 बूथ लेवल अधिकारियों तथा एजेन्टों की बैठक का तीसरा चरण 28-29 मार्च को

लोकसभा निर्वाचन 2009 बूथ लेवल अधिकारियों तथा एजेन्टों की बैठक का  तीसरा चरण 28-29 मार्च को

 

भोपाल : 23 मार्च, 2009

मतदान केन्द्र स्तर पर निर्वाचन नामावलियों के पुनरीक्षण और दावा एवं आपत्तियों से संबंधित कार्य चल रहा है। इनके निराकरण के संबंध में बूथ लेवल अधिकारियों तथा बूथ लेवल एजेन्टों की बैठक का तीसरा चरण आगामी 28 और 29 मार्च को होगा। पूर्व में इनके बीच बैठकों के दो चरण विगत 17-18 जनवरी और 21-22 फरवरी को सम्पन्न हो चुके हैं।

मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर मतदान एजेन्टों की तर्ज पर बूथ लेवल एजेन्टों की नियुक्ति की गई है। इन बैठकों के माध्यम से मतदाता सूचियों में यथासंभव सही जानकारी तथा विवरण सुनिश्चित होगा।

सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के अधिकृत बूथ लेवल एजेन्टों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्धारित तिथि पर उनके लिए निर्धारित मतदान केन्द्र पर उपस्थित हो। बूथ लेवल अधिकारी बूथ लेवल एजेन्टों के साथ मतदाता सूची के प्रारूप को पढ़कर उनमें सुधार आदि को चिन्हित करेंगे जिससे कि त्रुटिरहित मतदाता सूचियां तैयार की जा सकें।

 

 

 

लोकसभा निर्वाचन 2009 वल्नरेबिलिटी मैपिंग के संबंध में चुनाव आयोग के नये निर्देश

लोकसभा निर्वाचन 2009 ल्नरेबिलिटी मैपिंग के संबंध में चुनाव आयोग के नये निर्देश

वल्नरेबिलिटी मैपिंग के होंगे तीन चरण

जातिगत, राजनैतिक प्रभुत्व के द्वारा मतदाताओं पर दबाव बनाने वालों पर होगी कार्यवाही

 

भोपाल : 23 मार्च, 2009

भारत निर्वाचन आयोग ने क्रिटिकल मतदान केन्द्रों एवं वल्नरेबिलिटी मैपिंग के संबंध में नये निर्देश जारी किये हैं। इन नए निर्देशों के तारतम्य में वल्नरेबिलिटी मैपिंग की कार्यवाही तीन चरणों में पूर्ण की जायेगी। पहले चरण में गांव#मजरे#टोले#पारे#मोहल्लें तथा जातिगत या राजनैतिक प्रभुत्व के जरिये दबाव के कारण वाले वोटर्स सेग्मेन्ट का चयन किया जायेगा। दूसरे चरण में ऐसे व्यक्तियों का चयन होगा, जिनके कारण वल्नरेबल एरिया प्रभावित हुआ है अथवा जो वोटर्स को धमकी देकर उनमें भय पैदा करते हैं। तीसरे चरण में ऐसे व्यक्तियों की गतिविधियों के लिए उठाए गये प्रतिबंधात्मक कदम एवं निवारक कार्यवाही प्रारंभ की जायेगी। साथ ही उक्त कार्यवाही की तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जायेगी।

पहले चरण का कार्य प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के लिये जारी होने वाली अधिसूचना के पूर्व होगा। यदि किसी जिले अथवा लोकसभा क्षेत्र में कोई गांव#मजरे#टोले#पारे#मोहल्लें आदि वल्नरेबिल क्षेत्र के रूप में नहीं पाया गया तो संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी अपने अधीनस्थ टीमों, थाना, ब्लाक स्तरीय टीम एवं सब डिवीजनल स्तर की टीम से उस संबंध में प्रमाण-पत्र लेंगे। उक्त प्रमाण-पत्र को अंतिम रूप से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को प्रस्तुत करेंगे कि उनके जिले के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में कोई गांव, हेमलेट या वोटर सेग्मेंट उपलब्ध#चिन्हित नहीं है। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा उक्त प्रमाण-पत्र अधिसूचना जारी होने के तीन दिन के भीतर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को अनिवार्यत: प्रस्तुत किया जायेगा।

दूसरे चरण की कार्यवाही में वल्नरेबल क्षेत्र बनाने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के नाम, पते का विवरण मतदान केन्द्रवार, गांव#मजरे#टोले#पारे#मोहल्लें सहित तैयार होगा। इन व्यवधानकर्ताओं के चयन करने की कार्यवाही भी अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं। इसके पश्चात जिला दण्डाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक प्रतिबंधात्मक#निवारक कार्यवाही करेंगे। इसके साथ ही उच्च स्तर के अधिकारी संबंधित क्षेत्र में लोगों को विश्वास दिलाने के लिए वल्नरेबल क्षेत्र#गांवों का भ्रमण भी करेंगे। जिसमें वे बैठकें लेकर व्यवधान उत्पन्न करने वाले तत्वों को चेतवानी देने के साथ ही पृथक से कार्यवाही भी करायेंगे। यह कार्यवाही प्रभावशील तरीके से करने के निर्देश जिला कलेक्टरों एवं जिला निर्वाचन अधिकारी#पुलिस अधीक्षकों को दिये गये हैं। साथ ही व्यवधान उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर तथा एक अधिकारी को संबंधित थाना स्तर पर कानून एवं व्यवस्था तथा शांतिपूर्वक चुनाव कराने के लिए नामांकित करने के भी निर्देश दिये गये हैं। वल्नरेबल क्षेत्र के लिये जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का पदनाम एवं फोन#मोबाइल नंबर वल्नरेबल मैपिंग प्रपत्र में अंकित करने को भी कहा गया है।

इस कार्यवाही के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से की गई कार्यवाही का तथ्यात्मक प्रतिवेदन मतदान की तिथि से कम से कम 5 दिन पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को प्रस्तुत करेंगे। मध्यप्रदेश में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिये यह तिथि 18 अप्रैल तथा 30 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिये 25 अप्रैल होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी केन्द्रीय प्रेक्षकों के उनके क्षेत्र में आने पर वल्नरेबिलिटी संबंधी कार्यवाही की रिपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध करायेंगे। आयोग ने वल्नरेबिलिटी मैपिंग के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को अत्यंत सावधानी बरतने के निर्देश दिये हैं, ताकि किसी प्रकार का विरोध उत्पन्न न हो।

 

लोकसभा निर्वाचन 2009 बिजली बिलों पर मुख्यमंत्री के फोटो का मामला चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से सतर्क रहने को कहा

लोकसभा निर्वाचन 2009 बिजली बिलों पर मुख्यमंत्री के फोटो का मामला चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से सतर्क रहने को कहा

चुनाव आचार संहिता लागू रहने के दौरान एक विद्युत कंपनी द्वारा मुख्यमंत्री के फोटो वाले बिजली बिल वितरित किये जाने के संबंध में अखबारों में छपी खबर का संज्ञान लेकर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इसकी जाँच करवाई गयी।

चुनाव आयोग ने इस संबंध में म.प्र. शासन के ऊर्जा विभाग से वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को कहा था। विभाग ने आयोग को बताया कि एक विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मुख्यमंत्री के फोटो वाले बिजली बिल चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले जारी किये गये थे और 2 मार्च, 2009 को संहिता लागू होने के बाद भी वे जारी होते रहे।

आयोग ने पूरे मामले पर विचार कर कहा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री के फोटो वाले बिजली बिल जारी होने से रोकने का दायित्व राज्य सरकार का है। इस प्रकार, संबंधित विभाग आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित नहीं कर सका। लिहाजा, आयोग ने भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार को सतर्क रहने को कहा है।

 

23 marzo

जनता की जेब कतरने के आधुनिक एवं नायाब तरींके

जनता की जेब कतरने के आधुनिक एवं नायाब तरींके

निर्मल रानी

163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा, फोन-09729229728 

 

       दुनिया इस समय आर्थिक मंदी की भीषण चपेट में है। कहा जा रहा है कि विश्व को इस प्रकार की आर्थिक मंदी से पहले कभी रूबरू नहीं होना पड़ा। दुनिया के अनेक देशों को आर्थिक सहायता पहुंचाने वाला तथा विश्व का सबसे समृद्ध समझा जाने वाला अमेरिका भी इन दिनों आर्थिक मंदी की सबसे अधिक मार झेल रहा है। अमेरिका में कई नामी-गिरामी बैंक तथा बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपना दम तोड़ चुकी हैं। विश्व के कई प्रसिद्ध उद्योगपति तथा पूंजीपति अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते देखे जा रहे हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता नंजर आने लगा है। कहीं नौकरियों में छंटनी के समाचार प्राप्त हो रहे हैं तो कहीं तन्ख्वाहें घटाई जा रही हैं। आर्थिक मंदी की मार झेल रहे संस्थान किसी भी प्रकार से अपने ंखर्चों पर अंकुश लगाने की जुगत में लगे हैं। ंजाहिर है ऐसे वातावरण में प्रत्येक सरकारी व ंगैर सरकारी कंपनियों की यही कोशिश है कि किसी भी प्रकार अपने संस्थान को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने हेतु धन उगाही के अधिक से अधिक रास्ते तलाश किए जाएं। और इन्हीं रास्तों पर चलते हुए अनेक कम्पनियों द्वारा जनता से धन उगाही के कुछ ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं जो ंकतई तौर पर अनैतिक, ंगैर ंजिम्मेदाराना तथा शरारतपूर्ण हैं। यह सरकार में बैठे ंजिम्मेदार लोगों का ंफंर्ज है कि उसके प्रतिनिधि आम जनता की जेबों पर डाका डालने के कुछ निजी कम्पनियों के प्रयासों से उन्हें बचाए।

              उदाहरण के तौर पर मोबाईल ंफोन के वर्तमान युग में उपभोक्ता को मोबाईल संबंधी अनेकों चक्रव्यूह में फंसाकर मोबाईल धारक से जबरन पैसे वसूलने की सफल कोशिशें की जाती हैं। जैसे कई कम्पनियों की ओर से अपने ही किसी प्रॉडक्ट को बेचने या उसके संबंध में रिझाने के लिए उपभोक्ता को अनचाही कॉल की जाती है। यदि आपने अपने संचार क्षेत्र के भीतर कंपनी द्वारा की गई उस कॉल को ग्रहण किया फिर तो आपका केवल ंकीमती समय ही गया। और यदि आप उस समय अपने मोबाईल के साथ रोमिंग में हैं फिर तो आपको कंपनी की किसी भी बकवास, लालच अथवा ऑंफर को सुनने के लिए कंपनी को अपने ंकीमती समय के साथ-साथ रोमिंग शुल्क के रूप में धन भी देना पड़ेगा। मात्र मोबाईल क्षेत्र में ही दी जाने वाली सुविधा के नाम पर ग्राहकों से धन उगाहने के सैकड़ों तरींके अपनाए जा रहे हैं। इनमें जहां कई तरींके शौंक पूरा करने वाले कहे जा सकते हैं, वहीं कई तरींके ऐसे भी हैं जो पूरी तरह से फूहड़पन तथा अनैतिकता से भरपूर हैं। जैसे रिंगटोन, हैलो टयून तथा कॉलर टोन आदि का बिकना तो शौंक पूरा करने की श्रेणी में गिना जा सकता है। परन्तु आशिंकी माशूंकी की बातें करने के ऑंफर देना या इसके लिए प्रोत्साहित करना, गर्लफ्रेंड या ब्वायफ्रेंड ढूंढना, सोना जीतो या कार जीतो जैसे लालचपूर्ण ऑंफर दिखाकर उपभोक्तओं में जुआ खेलने की प्रवृत्ति को पैदा करना आदि तमाम ठगीपूर्ण योजनाओं को आंखिर किस नंजरिए से देखा जाना चाहिए। कभी यह निजी कम्पनियां धार्मिक त्यौहारों के अवसर पर अपने उपभोक्ताओं को अनचाही कॉल या अनचाहे संदेशों के माध्यम से उन्हें भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने का प्रयास करती हैं तो कभी वैलेंटाईन्ंज डे जैसे अवसरों को भुनाने की कोशिश की जाती है। कभी ज्योतिष के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब खंगालने की कोशिश की जाती है तो कभी क्रिकेट के घंटे दो घंटे पहले के स्कोर बताकर क्रिकेट प्रेमी उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाला जाता है। इस प्रकार के और न जाने कितने ऐसे प्रयास किए जाते हैं जिनके द्वारा कि साधारण अथवा ंगरीब उपभोक्ता की जेब से जबरन अथवा लालचवश पैसे वसूले जा सकें। ऐसी गुमराह करने वाली योजनाएं कमोबेश पूरे भारतवर्ष में अधिकांश निजी मोबाईल कम्पनियों द्वारा चलाई जा रही हैं जिससे उपभोक्ताओं को सचेत रहने की ंजरूरत है।

              आर्थिक मंदी के इस दौर में निजी कम्पनियों द्वारा और भी कई चौंकाने वाले ऑंफर उपभोक्ताओं को दिए जा रहे हैं। इनमें कई ऑंफर तो ऐसे हैं जिनसे कि उपभोक्ता चाहते हुए भी बच नहीं पाता। और आंखिरकार लालच में फंस ही जाता है। मिसाल के तौर पर अपने ही देश में सक्रिय ंफ्यूचर ग्रुप की एक   रिटेल दुकानदारी की प्रसिद्ध श्रृंखला बिग बांजार द्वारा उपभोक्ताओं को अपने घर का कोई भी कबाड़ घर से निकाल कर बिग बांजार तक पहुंचाने का लोकलुभावना ऑंफर दिया जा रहा है। ऑंफर के प्रचार का तरींका इसके योजनाकारों ने ऐसा बनाया है कि चतुर से चतुर उपभोक्ता भी बिग बांजार द्वारा रचे गए इस मायाजाल में फंसने को कम से कम एक बार तो ंजरूर मजबूर हो रहा है। उदाहरणतय: रद्दी कांगंज को ही ले लें। यदि आप बांजार में किसी कबाड़ी की दुकान पर रद्दी बेचने जाएं तो अधिक से अधिक 6, 7, या फिर 8 रुपए प्रति किलो के भाव से ही आप अपनी रद्दी, चाहे वे अंखबार हों अथवा कापी किताब, कुछ भी बेच सकेंगे। परन्तु बिग बांजार का प्रस्ताव है कि वे 25 रुपए प्रति किलो के दर से रद्दी का ंखरीददार है। ंजाहिर है कोई भी व्यक्ति 4 गुणा रेट पर ही अपनी रद्दी बेचना चाहेगा। इसी प्रकार पुराने कपड़े की ंकीमत सौ रुपए किलो से लेकर 200 रुपए किलो तक रखी गई है। यहां तक कि आपके घर का कोई ऐसा सामान जो कबाड़ी भी ंखरीदने से इन्कार कर दे, उसे भी अच्छे दामों पर ंखरीदने के लिए बिग बांजार तैयार बैठा है। ंफर्नीचर, फ्रिज, टीवी, बर्तन, लोहा, लकड़ी, गत्ता, टायर, रबड़, प्लास्टिक कुछ भी ले आईए बिग बांजार को सब कुछ स्वीकार्य है।

              देखा गया कि तथाकथित संभ्रान्त लोग अपने घर का तमाम कबाड़ गठरियों में बांधकर अपनी कारों में भरकर यहां तक कि कारों की छतों पर रखकर तथा डिग्गियों में भरकर बिग बांजार की ओर निकल पड़े। इस अंदांज में कि मानो पूरा का पूरा शहर बिग बांजार को ही लूट लेने पर उतारु हो गया हो। परन्तु आपका कबाड़ तौलने के बाद आपको उसकी ंकीमत के रूप में नंकद धनराशि नहीं दी जाती। इसके बदले आपको बिग बांजार की ओर से दिए जाते हैं, कबाड़ की ंकीमत के बराबर के कुछ कूपन। यानि यदि आपका कबाड़ एक हंजार रुपए ंकीमत का था तो आपको एक हंजार रुपए मूल्य के कूपन थमा दिए जाएंगे। यह कूपन सौ रुपए वाले दस, 50 रुपए ंकीमत वाले 20 अथवा 10 रुपए ंकीमत के 100 कूपन भी हो सकते हैं। उपभोक्ता अपना कबाड़ इन चतुर बुद्धि योजनाकारां के गुर्गों के हाथों में सौंपकर तथा उसके बदले में कांगंज के कूपन प्राप्त कर पूरी तरह से इनकी गिरंफ्त में आ जाता है। फिर उपभोक्तओं को उसी लेन-देन स्थल पर समझाया जाता है कि इस कूपन के बदले में आप बिग बांजार से शॉपिंग कर सकते हैं। मगर रुकिए जनाब। इतनी आसानी से बिग बांजार वाले आपको कूपन की ंकीमत के बदले उस ंकीमत का सामान कहां देने वाले हैं। आपके हाथों में जो कूपन दिए गए हैं, उसकी ंकीमत मात्र 25 प्रतिशत आंकी जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आपने एक हंजार मूल्य का सामान बिग बांजार से ंखरीदा है तो आपको सात सौ पचास रुपए तो अपनी जेब से भरने होंगे जबकि केवल ढाई सौ रुपए के ही कूपन स्वीकार किए जा सकते हैं।

              मगर अभी भी ठहरिए जनाब। उपभोक्ताओं को ठगने का तथा उसकी जेब पर जबरन डाका डालने का यह अभियान अभी भी पूरा नहीं हुआ है। बिग बांजार के योजनाकारों ने शॉपिंग मॉल में उपलब्ध सभी वस्तुओं की ंखरीद पर कूपन को अधिकृत नहीं किया है। केवल उनके द्वारा निर्धारित की गई वस्तुओं की ंखरीद पर ही आप कूपन का प्रयोग मात्र 25 प्रतिशत राशि के रूप में कर सकते हैं। यदि आप मॉल पहुंच गए हैं तथा उनकी सूची से अलग का कोई सामान ंखरीद रहे हैं तो जनाबेआली आपको शत् प्रतिशत भुगतान अपनी जेब से ही करना पड़ेगा। बात अगर यहीं ख़त्म हो जाती फिर भी कुछ ंगनीमत था। परन्तु ऐसा नहीं है। यह तथाकथित 25 प्रतिशत ंकीमत रखने वाले कूपन भी यदि आपने कूपन प्राप्त करने के मात्र 10 दिनों के भीतर प्रयोग नहीं किए तो इसकी वह ंकीमत भी जाती रहेगी जो आपको मिलने की संभावना थी। क्योंकि योजनाकारों ने इसकी समय सीमा भी निर्धारित कर रखी है। अर्थात् बिग बांजार को न केवल आपके घर का कबाड़ चाहिए बल्कि उसके साथ-साथ 75 प्रतिशत की नंकद धनराशि भी चाहिए और वह भी यथाशीघ्र।

              सोचने का विषय है कि मंदी व मंहगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को इस प्रकार की निजी कम्पनियों द्वारा कैसी-कैसी लोकलुभावनी तथा गुमराह करने वाली मक्कारीपूर्ण योजनाओं में फंसाया जा रहा है। सरकार आम जनता को निजी कम्पनियों के इन हथकंडों से बचाने के लिए कोई उपाय करेगी भी या नहीं यह भी संदेहपूर्ण है। क्योंकि हो सकता है सरकार की नंजरों में निजी कम्पनियों के हितों का ध्यान रखना आम उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने से कहीं अधिक ंजरूरी भी हो। अत: आम जनता को स्वयं जागना होगा, जागरूक होना होगा, दूसरों को जगाना व जागरूक करना होगा ताकि आम लोग लालचवश निजी कम्पनियों के इन या इन जैसे अन्य लुभावने ऑंफंर्ज के झांसे में न आने पाएं।   निर्मल रानी

 

कांग्रेस नेताओं के इस्‍तीफों का तांता, नराज नेताओं ने लगाया दलितों पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप

कांग्रेस नेताओं के इस्‍तीफों का तांता, नराज नेताओं ने लगाया दलितों पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप

मुरैना 23 मार्च 09, कॉंग्रेस के दलित व पिछड़े वर्ग के नेताओं के इस्‍तीफे लगातार जारी हैं, कल एक ही दिन में तीन प्रमुख नेताओं के इस्‍तीफे के बाद कांग्रेस में सन्‍नाटा छा गया है , साथ ही म.प्र. में कॉंग्रेस द्वारा चलायी जा रही चुनावी सोशल इंजीनियरींग ब्राह्मण पिछड़ा वर्ग संयुक्‍तीकरण पहले ही कदम पर ध्‍वस्‍त हो गयी है, ज्ञातव्‍य है नाराज ब्राह्मण पहले ही बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम चुके हैं ।

ऐसे में पिछड़े वर्ग के इने गिने नेताओं के बल पर सोशल इंजीनियर की कवायद कर रही कांग्रेस पहले मुकाम पर ही खेत हो गयी है ।

उल्‍लेखनीय है कि पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में कांग्रेस केन्‍द्रीय राज्‍यमंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को और ब्राह्मण को आकर्षित करने के लिये सुरेश पचौरी को अगुआ बना कर नये समीकरण बनाने में जुटी थी ।

उल्‍लेखनीय होगा कि इस समय ब्राह्मणों का 60- 66 फीसदी वोट बहुजन समाज पार्टी को और 15- 18 फीसदी वोट भाजपा तथा शेष वोट अनियंत्रित व दिशा हीन है, इसी शेष वोट को अपने पाले में लेने की कवायद कांग्रेस पिछले एक साल से म.प्र. में कर रही थी, लेकिन ब्राह्मणों में पचौरी प्रभावहीन ही रहे और सिंधिया के ही क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की नाराजी और इस्‍तीफों ने नये कयासों को जन्‍म दे दिया है ।

कल इस्‍तीफा देने वालों में तीन प्रमुख नेता (श्‍यामवीर प्रजापति, डॉ रामसुमन सिंह पूर्व विधायक, और मोहन सिंह गुर्जर) हैं । सभी नेताओं ने दलितों व पिछड़ों की कॉंग्रेस में उपेक्षा व अपमान का आरोप लगाया है ।

 

राजनैतिक प्रचार और रैली के लिए शिक्षा परिसरों का उपयोग नहीं

राजनैतिक प्रचार और रैली के लिए शिक्षा परिसरों का उपयोग नहीं

भोपाल : 21 मार्च, 2009

आगामी लोकसभा चुनावों के लिए कोई भी राजनैतिक दल या व्यक्ति शिक्षण संस्थाओं और उनके मैदानों का उपयोग प्रचार तथा रैली के लिए नहीं कर सकेगा। चुनाव आयोग ने इस संबंध में सख्त हिदायत दी है। इनमें सरकारी अनुदान प्राप्त तथा निजी शिक्षण संस्थाएं भी शामिल है।

इसके आलावा, रैलियों तथा जुलूस में झंडे, बैनर, कट आउट वगैरह का उपयोग स्थानीय कानून और प्रतिबंधात्मक आदेशों के अनुसार होगा। ऐसे जुलूस में राजनैतिक दल अथवा उम्मीदवार द्वारा उपलब्ध कराई गयी टोपियां, मास्क, गमछे आदि तो पहने जा सकेगें, लेकिन इनमें साड़ियों, शट्र्स आदि का वितरण नहीं होगा।

 

लोकसभा निर्वाचन 2009 : नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन लिए जायेंगे

लोकसभा निर्वाचन 2009 : नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन लिए जायेंगे

 

भोपाल : 20 मार्च, 2009

आगामी लोकसभा चुनाव के नामांकन की अंतिम तिथि को दोपहर 3 बजे तक मतदाता निर्वाचक नामावली में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दे सकते हैं। इस संबंध में आवेदन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दिया जा सकता है।

नियमों में प्रावधान है कि आवेदन प्राप्ति की तिथि से 7 दिवस तक नोटिस चस्पा किया जाता है। इसके बाद ही कार्यवाही होती है।

जिन लोकसभा क्षेत्रों में नामांकन की अंतिम तिथि 4 अप्रेल 2009 (मतदान 23 अप्रेल) है, उनके अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में 25 मार्च 2009 तक प्राप्त आवेदनों पर विचार किया जाएगा।

इसी तरह, जिन लोकसभा क्षेत्रों में नामांकन की अंतिम तिथि 9 अप्रेल 2009 (मतदान 30 अप्रेल) है, उनके अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में 30 मार्च 2009 तक प्राप्त आवेदनों पर विचार किया जाएगा।

इन तिथियों के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों का निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात निराकरण किया जायेगा। ऐसे आवेदकों को इस बात की सूचना भी दी जायेगी। नामावलियों की द्वितीय पूरक सूची का प्रकाशन उपरोक्त क्षेत्रों में क्रमश: 9 और 15 अप्रेल को किया जायेगा।

 

सौर शहरों का विकास

सौर शहरों का विकास

श्रीमती कल्पना पालकीवाला*

भारत के कई शहरों और कस्बों में विद्युत मांग में 15 प्रतिशत की वृध्दि हो रही है। तेजी से बढती ऌस मांग के परिणामस्वरूप, ज्यादातर शहर और कस्बे भारी विद्युत कटौती का सामना कर रहे हैं। इसलिए, ऊर्जा मांग का प्रबंध करना स्थानीय सरकारों और नगर निगमों के लिए एक प्राथमिक कार्य बन गया है। इसलिए, एक ऐसी कार्य योजना को विकसित किए जाने की आवश्यकता है जिससे ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और प्रणाली के माध्यमों को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन की अत्यधिक मात्रा में कमी लाने के अतिरिक्त पारंपरिक ऊर्जा खपत में कमी लायी जा सकती है। इसके अनुसार, न्न सौर शहरों का विकास न्न पर एक कार्यक्रम तैयार किया जा चुका है जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग हेतु नगर निगमों को अपने शहरों को सौर शहरों के तौर पर विकसित करने की तैयारी और एक कार्ययोजना के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करना है।

उद्देश्य

       इस कार्यक्रम के उद्देश्यों में शहरी स्थानीय निकायों को शहर स्तर पर ऊर्जा चुनौतियों से निबटने में सक्षम बनाना, निकायों को ढांचागत योजना प्रदान करना और उसमें मदद करना, वर्तमान ऊर्जा स्थिति, भविष्यगत की मांग और कार्य योजनाओं के निर्धारण सहित प्रमुख योजना की तैयारी करना, निकायों की क्षमता को बढाना और नागरिक समाज के सभी वर्गो के बीच जागरूकता जगाना, योजना प्रक्रिया में विभिन्न पणधारकों को शामिल करना और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालीन ऊर्जा विकल्पों के कार्यान्वयन की देखभाल करना शामिल है।

भौतिक लक्ष्य-

       11वीं योजनावधि में, कुल 60 शहरों को न्न सौर शहरों न्न के तौर पर विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। मंत्रालय द्वारा एक राज्य में कम से कम एक शहर से लेकर अधिकतम पाँच शहरों को मदद प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम में शामिल शहरों की जनसंख्या 5 लाख से ज्यादा और 50 लाख से कम होगी।

प्रमुख गतिविधियां-

       इस कार्यक्रम को मंत्रालय द्वारा स्वीकृत तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर मुख्य योजना की तैयारी के माध्यम से शहर स्तर पर दीर्घकालीन ऊर्जा को प्रदान करने में सामने आने वाली चुनौतियों को हल करने के आधार पर तैयार किया गया है। मुख्य योजना को संकेतात्मक दिशानिदेर्शो के अनुसार तैयार किया गया है जिससे अगले 10 वर्षो के लिए संपूर्ण और क्षेत्रवार ऊर्जा मांग और आपूर्ति प्रदान की जायेगी। इसके अलावा, यह शहर में ऊर्जा उपयोग और ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन के बारे में एक संपूर्ण क्षेत्रवार आधार व्यवस्था भी प्रदान करेगा। मुख्य योजना में ऊर्जा संरक्षण के वर्षवार लक्ष्य, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाऊस गैसों की कमी के साथ कार्य योजना के कार्यान्वयन को स्पष्ट रूप से सामने लाया जायेगा। वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों क्षेत्र के संदर्भ संगठनों से अनुदान के संभावित स्रोतों की पहचान की जाएगी। चयनित प्रतिनिधि, स्थानीय अनुसंधान और शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्थाएं, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, एसएनए आदि की प्रस्तुति के साथ अंतिम रूप देने से पूर्व, मुख्य योजना पर पणधारक सलाहकार कार्यशाला में विचार विमर्श किया जाएगा। मुख्य योजना में वर्तमान स्तर से 10 प्रतिशत तक की ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का न्यूनतम लक्ष्य रखा जाएगा।

        इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहर परिषद में  न्न सौर शहर प्रकोष्ठ न्न का गठन भी शामिल है जिसमें योजना और कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ प्रशासक और शहर अभियंता होगें। नगर निगम निकायों , स्थानीय अनुसंधान, शैक्षिक संस्थान, निवासी कल्याण संस्था, औद्योगिक और कॉरपोरेट संगठन, गैर सरकारी संगठन, राज्य क्षेत्रीय एजेन्सियां और अन्य संबंध्द पणधारकों की प्रस्तुति के साथ सलाहकार सहायता के लिए एक न्न सौर शहर पणधारक समिति का गठन किया जाएगा।

          विभिन्न पणधारकों जैसे नगर निगम निकायों , नगर निगम अधिकारियों, वास्तुकारोंअभियंताओं, भवननिर्माताओं, वित्तीय संस्थानों,गैर सरकारी संगठनों, तकनीकी संस्थानों, उत्पादक और आपूर्तिकर्ताओं, निवासी कल्याण संस्थाओं आदि के चयनित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, व्यापारिक बैठकें,  जागरूकता शिविर आदि  और भारत में अध्ययन यात्राओं का आयोजन करना।

       कार्बन वित्तपोषण के लिए प्रस्ताव तैयार करना तथा प्रिंट इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार एवं जनजागरूकता अभियान चलाना भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगा।

वित्तीय प्रावधान

       हर नगर या शहर के लिए 50 लाख रुपये तक का वित्तीय प्रावधान होगा। यह राशि उस शहर की जनसंख्या तथा संबंधित नगर परिषदप्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों पर निर्भर करेगी।

·                                 मास्टर प्लान बनाने हेतु एक साल के अंदर 10 लाख रुपये तक का अनुदान

·                                 पांच साल के दौरान क्रियान्वयन की निगरानी के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान

·                                 सौर सेल की स्थापना तथा पांच वर्षों तक उसकी क्रियाशीलता के लिए 10 लाख रुपये तक का प्रावधान

·                                 शेष पांच लाख रुपये पांच साल के अन्य प्रोत्साहन कार्यों के लिए

       इस मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों के प्रावधानों के मुताबिक विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण लगाने के लिए उपभोक्ता को पूंजीइंटरेस्ट सब्सिडी दी जाएगी। स्कीम प्रावधानों के अनुसार विभिन्न अन्य गतिविधियों के लिए भी सहायता दी जाएगी। सक्षमता वाले शहर के रूप में चिन्हित शहरों को सहायता में प्राथमिकता दी जाएगी। इन शहरों को इस मंत्रालय, आईआरईडीए तथा नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणोंप्रणालियों के इस्तेमाल को बढावा देने में जुटे अन्य संस्थानों द्वारा प्राथमिकता वाले माने जायेंगे। एसएनए भी अपने शहरों में विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणप्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय से उनकी विभिन्न स्कीमों के तहत सब्सिडी के जरिए ऊंचे लक्ष्य आवंटित करने का अनुरोध कर सकती है।

शहरों के चयन की कसौटी

       इस कार्यक्रम के तहत उच्च स्तर की कटिबध्दता तथा नेतृत्व कौशल वाले शहरों को उत्साहवर्ध्दन किया जाता है। मंत्रालय शहरों को चयन करते वक्त निम्नलिखित बातों पर ध्यान देती है। शहर की जनसंख्या, क्षेत्रीय अवस्था एवं क्षेत्र में महत्त्व, नवीकरणीय ऊर्जाओं को अपनाने में राजनीतिक एवं प्रशासनिक कटिबध्दता (सौर शहर कार्यक्रम में वर्णित गतिविधियां को क्रियान्वित करने के लिए नगर परिषदप्रशासन द्वारा पारित किया जाने वाला प्रस्ताव), ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने के लिए उठाये गये विनियामक कदम, शहरी गतिविधियों में ऊर्जा संरक्षण तथा नवीकरणीय ऊर्जा अपनाये जाने की क्षमता, नगर परिषदप्रशासननिजी विकार्सकत्ता, उद्योगआमलोगों द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढावा देने के लिए पहले ही उठाये कये गदम, आम लोगों को शामिल करने में तथा हितधारकों के साथ काम करने में शहरी स्थानीय निकाय का अनुभव तथा इस कार्यक्रम के तहत शुरू की गयी गतिविधियों को संसाधन तथा स्थायित्व प्रदान करने का इरादा।

प्रस्तावों की सुपुर्दगी तथा धनराशि जारी

       नगर परिषद द्वारा निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव राज्य नोडल एजेंसी के जरिए जमा किये जायेंगे। प्रस्तावों की मंत्रालय में जांच की जायेगी और इसके आधार पर, योजना के क्रियान्वयन पर सलाह मशविरा के लिए गठित स्वतंत्र पैनल द्वारा अनुशंसित सीएफए का 50 प्रतिशत मंजूर परियोजनाओं के लिए जारी किया जाएगा तथा बाकी राशि काम के निष्पादन तथा धनराशि के इस्तेमाल के आधार पर जारी की जाएगी।

पुरस्कार व्यवस्था

       चिन्हित सौर शहरों को वार्षिक पुरस्कार स्वरूप वैजयंतीप्रमाणपत्र प्रदान किये जाते हैं। नगर परिषदप्रशासन शहर को सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी प्रदान करता है और इसी आधार पर पुरस्कार दिये जाते हैं।

माडल सौर शहर

       अन्य शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित होने के लिए मंत्रालय उनके सम्मुख उदाहरण के तौर पर दो शहरों को सौर शहर के रूप में विकसित करेगा। इन मॉडल सौर शहरों में हरेक को इस स्कीम के तहत तैयार मास्टर प्लान कार्यान्वित करने के लिए मंत्रालय से अधिकतम साढे 9 क़रोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। मंत्रालय तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार व्यय का आधा-आधा हिस्सा वहन करेगी। धनराशि तब जारी की जायेगी जब मॉडल सौर शहर के रूप में विकसित किये जाने के लिए चिन्हित शहर अपना मास्टर प्लान जमा करेगा, इसके लिए उपरोक्त नियमानुसार अलग से मदद दी जायेगी। यदि शहर को माडल सौर शहर के रूप में विकसित करने के लिए 19 करोड़ रुपये की धनराशि मंत्रालय से साढे 9 क़रोड़ रुपये तथा संबंधित नगर निगमनगर प्रशासनराज्य सरकार से भी साढे 9 क़रोड़ रुपये) प्रर्याप्त नहीं होती है तो उक्त शहर इस धनराशि के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली लगाने के लिए मंत्रालय की अन्य मौजूदा योजनाओं से मदद ले सकता है जहां नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली उपकरण की संख्याक्षमता पर मौजूदा सीमा लागू नहीं है।

# उप निदेशक, पसूका, नई दिल्ली

 

छ: राष्ट्रीय दलों ने 2004 के आम चुनावों में 110 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया

छ: राष्ट्रीय दलों ने 2004 के आम चुनावों में 110 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया

वर्ष 2004 के आम चुनावों में महिलाएं अच्छी संख्या में भागीदारी करके  14वीं लोकसभा के लिए मैदान में उतरीं। महिला उम्मीदवारों की जीत का  प्रतिशत लगभग 12.68 था, जो पुरुष उम्मीदवारों की जीत के प्रतिशत 9.80 से अधिक था। चुनाव मैदान में कुल 355 महिलाएं उतरीं, जिनमें से 110 उम्मीदवार छ: राष्ट्रीय दलों (बीजेपी, बीएसपी,सीपीआई,सीपीएम, आईएनसी और एनसीपी) से थीं, जबकि राज्य के दलों से 66 उम्मीदवार थीं। अन्य महिला उम्मीदवारों में 62 पंजीकृत दलों (गैर-मान्यता) से और 117 निर्दलीय उम्मीदवार थीं।

       भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जहां 45 महिलाओं को मैदान में उतारा, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने 30 महिलाओं  को टिकट दिए। इनमें से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विजेता उम्मीदवारों की संख्या12 थी, जबकि पाँच महिलओं ने अपनी जमानत राशि गंवाई। भारतीय जनता पार्टी की 10 महिला उम्मीदवार निचले सदन तक पहुंचने में कामयाब हुई और तीन महिलाओं  ने अपनी जमानत राशि  गंवाई।

       अन्य राष्ट्रीय दलों में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने कुल 20 महिलाओं को उम्मीदवार बनया था जिनमें से केवल एक उम्मीदवार चुनाव जीत पाई, जबकि 16 ने अपनी जमानत राशि गंवाई। सीपीएम और सीपीआई ने क्रमश: आठ और दो महिलाओं को टिकट दिए जिनमें से एक-एक महिला चुनाव जीतने में कामयाब हुई। एनसीपी ने पाँच महिलाओं को टिकट दिए थे, जिनमें से दो विजयी हुईं और शेष तीन की जमानत राशि जब्त की गई।

       सर्वाधिक महिला उम्मीदवारों की संख्या को यदि राज्यवार देखा जाए तो 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश से 61 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी थीं, जिनमें से सात विजयी हुई और 37 ने अपनी जमानत गंवाई। पश्चिम बंगाल (42 सीट) में 34 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरीं किन्तु केवल चार ही विजयी हुईं और 24 ने जमानत राशि गंवाईं। महाराष्ट्र (48 सीट) में 29  महिलाएं उम्मीदवार बनीं, जिनमें से पाँच विजयी हुईं और 21 उम्मीदवारों ने जमानत राशि गंवाई।

 

 

21 marzo

डॉ. भागीरथ प्रसाद का कुलपति पद से इस्‍तीफा मंजूर, भिण्‍ड से चुनाव लड़ेगे

डॉ. भागीरथ प्रसाद का कुलपति पद से इस्‍तीफा मंजूर, भिण्‍ड से चुनाव लड़ेगे

भोपाल 20 मार्च 09। राज्यपाल एवं कुलाधिपति डॉ. बलराम जाखड़ ने आज देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलपति डॉ. भागीरथ प्रसाद का 19 मार्च 2009 को प्रस्तुत इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। कुलाधिपति ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के डॉ. राजकमल, प्रोफेसर कम्प्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस को नये कुलपति की नियुक्ति होने तक कुलपति का कार्य संपादित करने के लिए नामनिर्देशित किया है।

 

ग्वालियर-चंबल संभाग में सरसों की होती है 70 प्रतिशत पैदावार : कृषि उपज मण्डियों में सरसों की खरीदी-बिक्री तेज

ग्वालियर-चंबल संभाग में सरसों की होती है 70 प्रतिशत पैदावार : कृषि उपज मण्डियों में सरसों की खरीदी-बिक्री तेज

ग्वालियर 20 मार्च 09। ग्वालियर तथा चंबल संभाग की मण्डियों में सरसों की आवक तेज हो गई है। उल्लेखनीय है कि पूरे प्रदेश की 70 प्रतिशत सरसों ग्वालियर-चंबल संभाग में पैदा की जाती है। मध्य प्रदेश में 8 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई जाती है। वर्तमान में ग्वालियर की मुरार मण्डी में प्रतिदिन औसतन दस हजार बोरी तथा लक्ष्मीगंज मण्डी में ढ़ाई हजार बोरी सरसों आ रही है। संभाग में सर्वाधिक आवक श्योपुर मण्डी में औसतन 20 हजार बोरी प्रतिदिन है। दूसरे स्थान पर मुरैना में 15 हजार बोरी प्रतिदिन की आवक है। गोहद में भी आठ हजार बोरी सरसों प्रति दिन आर रही है। इन मण्डियों में अधिकतर आयल मिल वाले अथवा स्टाकिट सरसों की खरीद   कर रहे  हैं। कई खरीददार सरसों को खरीदते समय उसकी नमी की मात्रा का आंकलन के लिये मॉश्चराइजर मीटर का प्रयोग कर रहे हैं। वहीं वर्षों से इस कार्य से सम्बध्द खरीददार सरसों के दानों को मुंह में दबाकर उसकी आवाज और स्वाद से नमी का अपने तजुर्बे के आधार पर आंकलन कर दाम लगा देते हैं आमतौर पर दो हजार से कुछ ऊपर ही नीलामी छूट रही है।

शिवाजी उद्योग के लिये लक्ष्मीगंज मण्डी में सरसों खरीदने वाले मुनीम श्री मुरारी लाल ने बताया कि इस बार सरसों की अच्छी पैदावार हुई है। आवक गतवर्ष की तुलना में दुगुनी है और सरसों में तेल भी अच्छा है। गतवर्ष जहां एक क्विंटल से 36 किलो तेल ब-मुश्किल निकलता था वहीं इस बार 38 किलो से अधिक तेल मिल रहा है। अगर खली में बचने वाली तेल की मात्रा को भी शामिल करलें तो इसबार 41 प्रतिशत से अधिक तेल मिल रहा है। विगत दस सालों से सरसों की खरीदी में लगे हरीशंकर गुप्ता का भी कुछ ऐसा ही मानना था। उसने भी सरसों के कुछ दाने उठाकर चबाते हुए कहा कि खडंक सूखा माल है। अर्थात इसमें अधिकतम 6 प्रतिशत नमी होगी। श्री गुप्ता भी लक्ष्मीगंजी मण्डी में अपनी मिल के लिये खरीददारी करने आये थे।

       सरसों विक्रय करने आये ग्राम सुरैला के कृषक श्री जन्डेल सिंह ने बताया कि वह चौफरा सरसों बीज बोते हैं देशी खाद के साथ साथ डी ए पी. का प्रयोग करते हैं व जरूरत के अनुसार पानी देते हैं तब कहीं एक बीघे में 12 से 15 मन सरसों ले पाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बकरी की खाद गोबर की खाद से 3 गुना अधिक उपयोगी शिध्द होती है। ग्राम जखौदा थाना भंवरपुरा के कृषक श्री सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि वह एक वर्ष सरसों लेते हैं तो अगले वर्ष गेहूं बोते हैं। बीज वो अपनी पैदावार से बचाकर उपयोग करते हैं। इस वर्ष सरसों की अच्छी पैदावार से वे प्रसन्न हैं उनके गांव में ज्वार बाजरा और चना भी बोया जाता है। कीटनाशकों का वे कम ही प्रयोग करते हैं। कीट व्याधि होने पर ही वह कृषि विशेषज्ञों के पास जाते हैं अन्यथा परम्परागत कृषि ज्ञान ही उनके अधिक काम आता है।

       स्थानीय कृषि महाविद्यालय के शस्य विज्ञान विशेषज्ञ प्रो. आर. एल.राजपूत ने बताया कि इस क्षेत्र में सरसों की फसल एक मुख्य फसल है। कुछ किसान साल भर में सिर्फ अपने खेत में सिर्फ सरसों की फसल लेते हैं जबकि फसल चक्र अपनाकर और साल भर में दो फसल लेकर किसान दुगुना लाभ कमा सकते हैं। किसान उन्नत नस्ल के बीज ऊषा बोल्ड, ऊषा जयकिसान, रोहड़ी, आर एच 30 बीज का उपयोग कर किसान अधिक लाभ कका सकते है। प्रो. राजपूत ने बताया कि इस क्षेत्र के किसानों को मृदा परीक्षण कराकर संतुलित खाद और जैविक खाद का इस्तेमाल करके उत्पादन दुगुना कर सकते हैं। मृदा परीक्षण के 80 प्रतिशत मामलों में यह देखने में आया कि इस क्षेत्र की जमीन में गन्धक और जस्ते की कमी है। इस कमी को जैविक खाद और पोटास खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होने किसानों को सलाह दी कि वे सरसों की खेती करने के लिये किसानों को प्रति हैक्टेयर 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलो पोटास, 30 किलोग्राम गंधक इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा हर तीन साल बाद जिन्क सल्फेट का भी इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रो. राजपूत ने बताया कि सरसों की बोनी के लिये 5 किलोग्राम बीज प्रति हैक्‍टेयर की आवश्यकता होती है। इस बीज को फफूंदनाशक दवा एजेक्टोवेक्टर और पी एस बी. कल्चर 10 ग्राम प्रतिकिलो बीज के हिसाब उपचारित करने के बाद बीज बोना चाहिए। सरसों बोते समय जमीन में गंधक की कमी को पूरा करने के लिये सिंगर सुपर फास्फेट इस्तेमाल करना चाहिए। यदि सभव हो तो प्रति हेक्टेयर 10 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद भी इस्तेमाल करना चाहिए। इससे 25 प्रतिशत कम रासायनिक खाद की जरूरत पड़ेगी और कम लागत में ज्यादा उत्पादन होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को सरसों बोने के 40 दिन बाद पहली सिंचाई और बीज आते समय दूसरी सिंचाई कर देना चाहिए।

      प्रो. राजपूत ने बताया कि सरसों की फसल में खरपतवारनाशी के रूप में फ्लू-क्लोरेलिन का इस्तेमाल करना चाहिए। यह दवा एक किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर के मान से 600 लीटर पानी में घोलकर सरसों बोने से पूर्व खेत में छिड़काव करना चाहिए। सरसों माहूं नामक कीट से बचाव के लिये किसानों को मेटा सिस्टॉक अथवा डाय मिथोयेट नामक कीटनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए। यह दवा प्रति हेक्टेयर 10 मिली. 10 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। यह छिडकाव हर 15 दिन बाद करना चाहिए, इससे फसल उत्पादन बढ़ता है।

       प्रो. राजपूत ने बताया कि ग्वालियर-चंबंल सभाग में सरसों की खेती लगभग 5.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती हैं। यहां पर मुख्य रूप से लाहा, तोरिया और हावला 400  सरसों की खेती होती हैं। इसमें हावला 400 शंकर नस्ल की सरसों हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसके तेल में कड़ुवापन नहीं होता। इसके तेल की विदेशों में ज्यादा मांग हैं। इसकी खोज ''महिको'' नामक एक निजी कंपनी ने की है। उन्होने बताया कि सरसों में ब्लूकोसिलीनेट और इरोसिकएसिड के कारण झारपन पाया जाता है। इस झारपन युक्त तेल की मांग अरब देशों में ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन के लिये इस क्षेत्रं के प्रगतिशील किसान सरसों की ''तारामीरा'' प्रजाति का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा किसान उत्पादन बढ़ाने के लिये सनई और ढ़ैंचा और केंचुआ खाद का इस्तेमाल करके किसान फसल उत्पादन बढ़ा सकते हैं।

 

20 marzo

सीडीएम प्राधिकरण हाईटेक बना

सीडीएम प्राधिकरण हाईटेक बना

पर्यावरण और वन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सीडीएम प्राधिकरण ने आज एक नये वेबसाईट की शुरूआत करके ई-गवर्नेंस को लागू करने की दिशा में अगला कदम उठाया है । इस वेबसाईट के बल पर सीडीएम परियोजना के प्रस्तावक अपने-अपने कार्यालयों से  अपने आवेदन दाखिल करने और परियोजना संबंधी दस्तावेजों को सीधे तौर पर अपलोड करने में सक्षम होंगे । इसके बाद उनकी ओर से प्राधिकरण क पास परियोजना रिपोर्ट की प्रतियां दाखिल करना जरूरी नहीं होगा ।

       इस वेबसाईट का शुभारंभ करते हुए पर्यावरण और वन मंत्रालय में सचिव, श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कदम भारत में राष्ट्रीय सीडीएम प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को और भी अधिक सुसंगत बनाने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल है जिसे विश्व के एक अत्यंत प्रभावकारी और सकारात्मक राष्ट्रीय प्राधिकरणों में से एक के रूप में जाना जाता है । परियोजना रिपोर्टों के आन-लाईन अपलोडिंग के साथ परियोजना रिपोर्टों को लाने और ले जाने तथा अन्य कागजी कार्यों का बोझ भी कम होगा । ई-फाइलिंग को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य किया जाएगा । हालांकि परियोजना के प्रस्तावकों  को 30 सितम्बर, 2009 तक परियोजना रिपोर्टों की प्रतियां भी दाखिल करनी होंगी ।

            एनसीडीएमए का नया वेबसाईट  www.cdmindia.in  है । हालांकि पुराना वेबसाईट   www.cdmindia.nic.in   भी मौजूद है । टीप : यह नई वेबसाइट ग्‍वालियर टाइम्‍स द्वारा चेक की गयी यह अभी अण्‍डर कंस्‍ट्रक्‍शन है ।