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31 marzo बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोलबिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल अतर सिंह डण्डोतिया (तहसील संवाददाता) मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है । दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्स पता होते थे, और लोगों को अच्छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्ा गर्मी व मच्छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्हें अपदस्थ कर दिया था । आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्यादा है । वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्टलों मच्छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्द करने के वायदे और सत्ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्टे अबाध सप्लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।
बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोलबिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल अतर सिंह डण्डोतिया (तहसील संवाददाता) मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है । दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्स पता होते थे, और लोगों को अच्छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्ा गर्मी व मच्छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्हें अपदस्थ कर दिया था । आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्यादा है । वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्टलों मच्छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्द करने के वायदे और सत्ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्टे अबाध सप्लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।
बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोलबिजली जिसने बदली थी सरकार, इतिहास दोहरा रहा है फिर वही नजारा बच्चों की परीक्षा, भयानक गर्मी और कुण्टलों मच्छरों के बीच दिन भर और फिर देर रात तक बिजली गोल अतर सिंह डण्डोतिया (तहसील संवाददाता) मुरैना 31 मार्च 08, अब इसे आप क्या कहेंगे, इजनी बिजली तो उन्होंने भी नहीं कभी काटी जिनकी सरकार बदल दी गयी । यह वही बिजली कटौती है, जिसने सरकार बदल कर रातों रात प्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्ता से आउट कर दिग्विजय सिंह को अपदस्थ करा दिया था । दिग्विजय सिंह ने कभी इतनी बिजली नहीं काटी जितनी आज कट रही है । कल दिन भर बिजली गोल रहने के साथ आज रात एक बजे तक हर आधा घण्टे बीस मिनिट बाद एक एक घण्टे के लिये गोल होती रही, भीषण गर्मी भी है, मच्छर भी हैं, परीक्षायें भी चल रही हैं, लेकिन बिजली गोल है । दिग्विजय सिंह की बिजली कटौती में यह निर्धारित व घोषित थी और लोगों को पहले से बिजली कटौती के टाइमिंग्स पता होते थे, और लोगों को अच्छी तरह ज्ञात रहता था कि रात में कब कितने समय सोना है और कब कितने बजे छत व सड़कों पर टहलना है । भीषण्ा गर्मी व मच्छरों के बीच म.प्र. के लोगों की सन 2003 तक गुजरी रातें, म.प्र. के लोग कभी भूल नहीं पाये, हालांकि चुनाव से दो माह पहले प्रदेश में अपने आप बिजली आ गयी थी और बिजली चाक चौबन्द हो गयी थी लेकिन उसके बावजूद जनता ने उन्हें अपदस्थ कर दिया था । आज के हालात व दिग्विजय सिंह के समय के हालातों में फर्क केवल यही है, कि उस समय लोगों को पता होता था कि बिजली कब जायेगी और कब आयेगी, लेकिन अब पता नहीं होता कि कब जायेगी और कब आयेगी । तादाद ए कटौती पहले से आज ज्यादा है । वही भीषण गर्मी, वही छात्रों की परीक्षायें, वही कुण्टलों मच्छरों का हमला, वही जनता को न सुनने वाले भ्रष्ट अफसर सब कुछ वही, वही पुराने दृश्यों को दोहराते हुये इतिहास दोबारा दोहराया जा रहा है । बस फर्क केवल यही है कि केवल सरकारी पार्टी बदल गयी है । सन 2003 के चुनावों में महज तीन माह में बिजली चाक चौबन्द करने के वायदे और सत्ता में आने के बाद चार माह, छ माह फिर अठारह माह और फिर तीन साल में बिजली चौबीस घण्टे अबाध सप्लाई की घोषणा करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा आज की तारीख में तो आउटडेटेड हो ही गयी है, आगे की राम जाने बची खुची जनता जाने ।
28 marzo 430 किसानों को सूखा राहत राशि वितरित430 किसानों को सूखा राहत राशि वितरित ---------------------- पन्ना 27 मार्च- पवई तहसील के ग्राम कोठी, अधराडी, दमुइया, कढना, मझगंवा पहाड, बेलडाबर आदि ग्रामों के 430 किसानों को 4 लाख 52 हजार 995 रूपये के चैक खरीफ फसल के सूखा राहत राशि का वितरण गत दिवस विधायक पवई श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी सिंचाई, ग्राम पंचायत सचिव, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा बडी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।
पुलिया निर्माण हेतु 49 लाख रूपये स्वीकृतपुलिया निर्माण हेतु 49 लाख रूपये स्वीकृत ------------------- पन्ना 27 मार्च- बैकवर्ड रीजन ग्रांट फण्ड योजनान्तर्गत जनपद पंचायत गुनौर की ग्राम पंचायत श्यामरडाडा में लोहर गांव से श्यामरडाडा तक पक्की सडक एवं पुलिया निर्माण हेतु 48 लाख 81 हजार रूपये की स्वीकृति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा जारी की गई है। कार्य की एजेन्सी कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग पन्ना को बनाया गया है।
5500 रूपये की अनुदान राशि स्वीकृत5500 रूपये की अनुदान राशि स्वीकृत ------------------ पन्ना 27 मार्च- मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने विधानसभा क्षेत्र पन्ना के ग्राम सब्दुआ, भापतपुर, बरियारपुर में क्रिकेट किट क्रय करने हेतु 5 हजार 500 रूपये की अनुदान राशि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अजयगढ को स्वीकृत की गई।
जिला सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठक सम्पन्नजिला सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठक सम्पन्न -------------------------- पन्ना 27 मार्च- अत्याचार निवारण नियम 1995 के अंतर्गत जिला सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठक आज अपर कलेक्टर श्री पी0एस0 जाटव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि जिले के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के 64 व्यक्तियों को 11 लाख 60 हजार रूपये की राहत राशि स्वीकृत की गई। जिसमें अनुसूचित जाति के 44 व्यक्तियों हेतु 8 लाख 3 हजार 750 रूपये तथा अनुसूचित जनजाति के 20 व्यक्तियों को 3 लाख 56 हजार 250 रूपये की राहता राशि शामिल है। अपर कलेक्टर श्री जाटव ने बैठक में बताया कि अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्तियों में सामाजिक जागरूकता पैदा करें इसके लिए अत्याचार निवारण समिति के सदस्यगण प्रयासरत रहें। अत्याचार से पीडित प्रत्येक को पुर्नवास किया जाए। आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक श्री श्रीवास्तव ने बताया कि अत्याचार से पीडित जिले के दस व्यक्तियों को वित्तीय वर्ष में विभिन्न संस्थाओं में पुर्नवास किया जा चुका है। शासकीय अधिवक्ता श्री विजय बहादुर पाठक ने बताया कि जनवरी माह में न्यायालय द्वारा 15 प्रकरणों में फैसला किये गए जिसमें 5 प्रकरणों में सजा तथा 10 प्रकरणों में बरी किया गया इसी प्रकार से फरवरी माह में न्यायालय द्वारा 10 प्रकरणों में फैसला किया गया जिसमें 7 प्र्रकरणों में सजा एवं 3 प्रकरणों में बरी किया गया। बैठक में जनपद पंचायत अजयगढ की अध्यक्षता श्रीमती बालाबाई कोंदर, पार्षद कल्लू राम जाटव, पूर्व सरपंच धन सिंह एवं साजन सिंह आदि उपस्थित थे। फोटो खीचने हेतु निविदा एक अप्रेल तक आमंत्रितफोटो खीचने हेतु निविदा एक अप्रेल तक आमंत्रित ------------------------ पन्ना 27 मार्च- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा मतदाता फोटो पहचान पत्र हेतु पासपोर्ट साईज फोटो खीचने के लिए निविदा प्राप्त करने की तिथि बढाकर अब एक अप्रेल 2008 कर दी गई है। इच्छुक व्यक्ति 31 मार्च तक निविदा प्रपत्र प्राप्त कर एक अप्रेल 2008 तक उप जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पन्ना में जमा कर सकते है।
26 marzo 29 मार्च को जन्म मृत्यु पंजीयन व्यवस्था संबंधी सेटकाम प्रशिक्षण29 मार्च को जन्म मृत्यु पंजीयन व्यवस्था संबंधी सेटकाम प्रशिक्षण -------------------------------- पन्ना 25 मार्च- जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य में संलग्न पंचायत सचिव/पंचायत कर्मी एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता, ए0एन0एम0, एम0पी0डब्ल्यू0 तथा नगर पालिका/नगर पंचायतों के ऐसे कर्मचारी जो जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य में सलग्न है। उक्त कर्मचारियों को सेटकाम के माध्यम से 29 मार्च 2008 को दोपहर एक से 5 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र पन्ना, महिला एवं बाल विकास पन्ना ग्रामीण, महिला एव बाल विकास अजयगढ, जनपद पंचायत गुनौर, पवई एवं शाहनगर में दिया जाएगा। जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु एवं जिला योजना अधिकारी ने जानकारी में बताया कि सेटकाम प्रशिक्षण में जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य में संलग्न कर्मचारियों का प्रशिक्षण में भाग लेना आवश्यक है। संबंधित कर्मचारी अनिवार्य रूप से सेटकाम प्रशिक्षण प्राप्त करें।
उपभोक्ता फोरम ने बीमा क्लेम निराकरण करते हुए क्षतिपूर्ति एवं कार्यवाही व्यय अदा करने अवार्ड पारित कियाउपभोक्ता फोरम ने बीमा क्लेम निराकरण करते हुए क्षतिपूर्ति एवं कार्यवाही व्यय अदा करने अवार्ड पारित किया पन्ना 25 मार्च- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम के अध्यक्ष श्री आनन्द मोहन खरे एवं सदस्य श्री उमाकान्त बाजपेयी ने नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड शाखा पीली कोठी रीवा को परिवादी श्री लखनलाल जैन तनय लालचंद जैन किशोरगंज मोहल्ला पन्ना को बीमा क्लेम का निराकरण करते हुए परिवादी को प्राप्त होने वाले लाभांश का भुगतान करने, सेवा में कमी के कारण 1500 रूपये क्षतिपूर्ति तथा कार्यवाही व्यय 500 रूपये अदा करने का अवार्ड पारित किया है। उपभोक्ता फोरम विवादानुसार परिवादी की सेन्ट्रो कार 10 दिसम्बर 2005 तक बीमित थी। बीमित वाहन देवेन्द्रनगर के पास 16 मई 2005 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। परिवादी ने वाहन दुर्घटना की सूचना फैक्स द्वारा प्रतिपक्ष बीमा कंपनी को 18 मई 2005 को भेजा था। इस कार की मरम्मत में 98 हजार 31 रूपये व्यय हुए थे। परिवाद अंतर्गत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में बीमित वाहन के दुर्घटना ग्रस्त होने के परिणाम स्वरूप प्रस्तुत दावे को नकार दिए जाने के कारण जिला उपभोक्ता विवाद परितोषण फोरम पन्ना में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था।
उपभोक्ता फोरम ने बीमा क्लेम निराकरण करते हुए क्षतिपूर्ति एवं कार्यवाही व्यय अदा करने अवार्ड पारित कियाउपभोक्ता फोरम ने बीमा क्लेम निराकरण करते हुए क्षतिपूर्ति एवं कार्यवाही व्यय अदा करने अवार्ड पारित किया पन्ना 25 मार्च- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम के अध्यक्ष श्री आनन्द मोहन खरे एवं सदस्य श्री उमाकान्त बाजपेयी ने नेशनल इन्श्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड शाखा पीली कोठी रीवा को परिवादी श्री लखनलाल जैन तनय लालचंद जैन किशोरगंज मोहल्ला पन्ना को बीमा क्लेम का निराकरण करते हुए परिवादी को प्राप्त होने वाले लाभांश का भुगतान करने, सेवा में कमी के कारण 1500 रूपये क्षतिपूर्ति तथा कार्यवाही व्यय 500 रूपये अदा करने का अवार्ड पारित किया है। उपभोक्ता फोरम विवादानुसार परिवादी की सेन्ट्रो कार 10 दिसम्बर 2005 तक बीमित थी। बीमित वाहन देवेन्द्रनगर के पास 16 मई 2005 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। परिवादी ने वाहन दुर्घटना की सूचना फैक्स द्वारा प्रतिपक्ष बीमा कंपनी को 18 मई 2005 को भेजा था। इस कार की मरम्मत में 98 हजार 31 रूपये व्यय हुए थे। परिवाद अंतर्गत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में बीमित वाहन के दुर्घटना ग्रस्त होने के परिणाम स्वरूप प्रस्तुत दावे को नकार दिए जाने के कारण जिला उपभोक्ता विवाद परितोषण फोरम पन्ना में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था।
बल्देवजी मंदिर अनुरक्षण एवं मरम्मत कार्य हेतु 15.58 लाख रूपये स्वीकृतबल्देवजी मंदिर अनुरक्षण एवं मरम्मत कार्य हेतु 15.58 लाख रूपये स्वीकृत --------------------------------- पन्ना 25 मार्च- कलेक्टर श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने पर्यटन विकास के अंतर्गत पन्ना नगर स्थित बल्देवजी मंदिर के अनुरक्षण एवं मरम्मत कार्य हेतु 15 लाख 58 हजार रूपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकंति दी है।
फर्सी पत्थर खदान निरस्तफर्सी पत्थर खदान निरस्त पन्ना 20 मार्च- कलेक्टर श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने जिले की तहसील गुनौर के ग्राम बीजादह खिलसारी की फर्सी पत्थर खदान तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं। ग्राम कठवरिया निवासी कृष्णमोहन पाण्डेय पिता श्री रामलखन पाण्डेय के नाम ग्राम बीजादह खिलसारी ख0नं0 44 रकवा 2.00 हैक्टेयर पर फर्सी पत्थर खदान 15 फरवरी 2009 तक के लिए स्वीकृत थी। स्वीकृत पट्टेदार द्वारा खदान के मुनारे नष्ट कर म0प्र0 गौण खनिज नियमावली का उल्लंघन करने, स्वीकृत खदान के पत्रक प्रस्तुत न करने, अनिवार्य भाटक का अग्रिम भुगतान न करना आदि अनियमितता पाए जाने पर संबंधित को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, किन्तु नोटिस का जबाब समय सीमा में प्रस्तुत नहीं करने पर अनुबंध की शर्तो का उल्लंघन करने पर उक्त खदान तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए बकाया राशि को भू-राजस्व की भांति वसूल करने के निर्देश कलेक्टर श्रीमती रस्तोगी ने दिए हैं।
म.प्र. में स्कूली शिक्षण सत्र अब एक अप्रैल सेम.प्र. में स्कूली शिक्षण सत्र अब एक अप्रैल से राज्य शासन द्वारा प्रदेश में शिक्षण सत्र का प्रारंभ अब एक जुलाई के स्थान पर एक अप्रैल 2008 से दिया जायेगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिये गये हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुर्वेदवरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुर्वेद 21वीं सदी में जीवन की संभाव्यता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। कुछ दशक पहले विश्वभर में रूग्णता और मौत के खिलाफ संघर्ष में संचारी रोगों के उपचार और रोकथाम पर अधिक ध्यान दिया जा रहा था। किंतु, आज गैर-संचारी रोगों के उन्मूलन पर अधिक जोर दिया जा रहा है। वरिष्ठ नागरकिों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में श्वसन संबंधी समस्याएं, हृदय रोग, कैंसर और पक्षाघात जैसी बीमारियां शामिल हैं। इस आयु-समूह के व्यक्तियों में रूग्णता के प्रमुख कारणों में क्रोनिक इन्फ्लेमेट्टी (पुरानी सूजन) और डीजेनरेटिव (विकृति) स्थितियां शामिल हैं, जैसे अर्थराइटिसद्व, मधुमेह, ऑस्टिओपोरोसिस (अस्थि रोग), अल्जेमर रोग, डिप्रेशन, मनश्चिकित्सीय विकृतियां (साइकिएट्रिक डिस्ऑडर्स), पार्किसन्स और आयु संबंधी मूत्र रोग। जरा-चिकित्सा समस्या के समाधान में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ज्यादातर मामलों में रोग-स्थिति का केवल एक कारण नहीं होता अथवा कुछ न्यूरो-साइकिएट्रिक विकृतियों, जैसे सेनाइल डेमेंटिया, अल्जेमर डिप्रेशन में बुनियादी संरचनागत कारण का पता नहीं चलता। ऐसे मामलों में परंपरागत चिकित्सा (मेडिकल) पध्दति उपचार योजना में विफल रहती है। परंपरागत चिकित्ससा पध्दति के समक्ष एक अन्य चुनौती यह रहती है कि इसमें स्वास्थ्य को प्रोत्साहन देने वाले एजेंटों (तत्तवों) का अभाव रहता है। दूसरी ओर आयुर्वेद में चवनप्रास, त्रिफला जैसी दवाएं हैं, जो शारीरिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देती हैं, जिनसे मेटोबोलिक और रोगप्रतिरक्षण स्थिति पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। ये दवाएं जरा-चिकित्सा के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। रसायन उपचार पध्दति आयुर्वेद के अंतर्गत रसायन उपचार पध्दति एक ऐसा प्रतिबव्ध्द उपाय है, जो रोगप्रतिरक्षण क्षमता को बढ़ाता है तथा विकृतिमूलक और पुन:स्फूर्तिदायक स्वास्थ्य देखभाल में मददगार है। यह पध्दति बढ़ती उम्र के दुष्प्रभावों को रोकने में सक्षम है और साथ ही स्वस्थ एवं रूग्ण, दोनों ही व्यक्ितियों के स्वास्थ्य में सुधार लाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से जीवन शैली संबंधी पुरानी बीमारियों और विकृतिजन्य परिवर्तों के प्रबंधन में रसायन उपचार की भूमिका की प्रभावोत्पादकता प्रमाणित की जा चुकी है। विकृतिजन्य रोग पुरूषों और महिलाओं दोनों में ही 45 वर्ष की आयु से प्रांरभ होते हैं। इसी अवस्था में रसायन के सेवन की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद जैसी समग्र प्रणाली में इस अवस्था में दो-तरफा पध्दतियों से उपचार का प्रयास किया जाता है। पहली पध्दति में अतिवादी दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिसमें कुटिप्रवीशिका रसायन के नाम से विख्यात तीन-चार महीने की कड़ी एवं सुनियोजित प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से विषाक्त तत्वों को निष्कासित करके समूची मैटोबोलिक प्रक्रिया (चयापचय प्रणाली) को पुनर्भरित किया जाता है। इस पध्दति में शारीरिक प्रक्रिया की जटिलताओं को देखते हुए, इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता। इसमें चिकित्सक की कड़ी देख-रेख और उपचार के वातावरण की भी अहम भूमिका होती है। इस तरह कुटिप्रवीशिका आयुर्वेद का सैध्दांतिक रत्न मात्र है और समसामयिक व्यवहारिक प्रक्रिया में वह प्रासंगिक नहीं लगती है। आयुर्वेद की दूसरी पध्दति, जो आज अत्यन्त लोकप्रिय है, वातातपिका रसायन है-जिसका प्रयोग रोजमर्रा के जीवन में किया जा सकता है। इस तरह के रसायन आज के परिदृश्य में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उनके प्रयोग में आसानी रहती है और किसी प्रकार की प्रतिबंधात्मक पूर्व-शर्तें नहीं है। रसायन के प्रभावों का उल्लेख करते हुए, आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रंथों में बताया गया है कि रसायन से व्यक्ति को दीर्धायु, परिष्कृत सामंजस्य और बुध्दि प्राप्त करने, विकृतियों से मुक्ति, यौवन पूर्ण उत्साह, जीजीविषा, रूप-रंग और अवाज, अनुकूलतम शारीरिक और बौध्दिक शक्ति, भाषा पर अधिकार, प्रतिष्ठा एवं उत्कृष्ठत जैसी उपलब्धियां हासिल होती हैं। आयुर्वेद में यह माना गया है कि शरीर की संरचना सात धातुओं से मिलकर हुई है, जिसकी शुरूआत रस (रसादि धातुएं) से हाती है और रसायन वह उपकरण है जो प्रमुख धातुओं (शरीर ऊतकों) का निर्माण करते हैं। रसायन पध्दति की प्रमुख उपयोगिता यह है कि यह कार्यात्मक एवं पुरानी या दीर्धावधि से चली आ रही विकृतियों को दूर करती है। वास्तव में ऐसे मामलों में रसायन किसी भी चिकित्सा पध्दति के प्रभावकारी प्रबंधन के लिए एकमात्रा समाधान है। यदि उपयुक्त पंचकर्म (पवित्रीकरण चिकित्सा पध्दति) अपनाने के बाद रसायन पध्दति अपनायी जाती है तो अधिक उपयोगी और अधिक असरदार सिध्द होती है। इसका कारण यह है कि रसायन के उपयोग के कई मामलों में मिल-जुले नतीजे सामने आते हैं। उनमें पवित्रीकरण पध्दति या तो अपनायी नही जाती अथवा अनुपयुक्त ढंग से अपायी जाती है। पंचकर्म पंचकर्म एक जैनिक-स्वच्छता प्रणाली है, जिसमें पांच प्रमुख प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिन्हें अंजाम देने से औषध-वैज्ञानिक (फार्मा कालॉजिकल) चिकित्सा पध्दतियों की बेहतर जैव-उपलब्धता में मदद मिलती है, बीमारी पैदा करने वाली जटिलताएं शरीर से दूर होती हैं और बीमारी के पुन: जन्म लेने या बढ़ने पर अंकुश लगता है। इस चिकित्सा पध्दति की पांच प्रक्रियाएं इस प्रकार है: वामन (थरपेटिक एमेसिस), विरेचन (थरपेटिक पर्गेशन), अस्थापन वस्ति (थरपेटिक ऑयल एनिमा), नास्य कर्म (नाक से औषधि लेना)। पंचकर्म प्रक्रियाओं से स्नेहाना (थरप्यूटिक ऑलिएशन) और स्वेदाना (सूडेशन) जैसे अनुप्रयोग किए जाते हैं ताकि शरीर प्रणाली को बॉयो-टॉक्सिन (जैविक विषाक्तता) की समाप्ति और सरणियों की सफाई के लिए तैयार किया जा सके। ये अनुप्रयोग स्वत: प्रतिरक्षण, न्यूरोलॉजिकल, साइकिएट्रिक और पुराने तथा मेटाबोलिक मूल के मस्कुलो-स्केलेटल रोग के उपचार में कारगर सिध्द होते हैं। वास्तव में आर्युवेद का उपचार व्यक्तिगत किस्म का है और यह संभव है कि किसी स्थिति में व्यक्ति विशेष के लिए उपयोगी समझी गयी चिकित्सा अन्य व्यक्ति के मामले में उतनी कारगर सिध्द न हो। अत: चुनौती यह है कि किसी एक स्थिति के लिए सामान्यकृत प्रबंधन समाधान विकसित किए जायें, जो सभी के अनुकूल हो। किसी रोग स्थिति के लिए प्रबंधन योजनाएं तैयार करना और उसे बड़े पैमाने पर अमल में लाना अत्यंत कठिन कार्य है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हम परंपरागत चिकित्सा की समग्रता और आधुनिक बॉयोमेडिसन के एकांगीपन दोनों का सम्मान करें क्योंकि वे दोनों ही प्रकृति को देखने के तरीके हैं। प्रयोजन के अनुसार ये दोनों तरीके अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं। इतना ही नहीं सम्पूर्ण और अंश के बीच निश्चित रूप से सम्बन्ध होता है। लेकिन वह आमने-सामने का सम्बन्ध नहीं है। यह समझने के लिए कि सम्बन्ध आमने-सामने का नहीं है और यह अध्ययन करने के लिए कि सम्पूर्ण परिप्रेक्ष्य (यानी आयुर्वेद एवं योग के व्यवस्थित सिध्दांतों) के साथ आंशिक (यानी पश्चिमी बॉयो मेडिसिन के संरचनागत सिध्दांतों) को कैसे जोड़ा जाये, आवश्यकता इस बात की है कि अंतर-विषय अनुसंधान परियोजनाओं को लागू किया जाये। आज शैक्षिक जगत में किसी के पास भी सभी सवालों के उत्तर नहीं है कि किस तरह अंश को सम्पूर्ण के साथ संयुक्त और सम्बध्द बनाया जाये। क्लिनिकल अनुसंधान डिजाइन, क्लिनिकल प्रैक्टिस, आयुर्वेद और योग सम्बन्धी पाठयक्रमों, औषधि विज्ञान में प्रयोगशाला अनुसंधान और उत्पाद विकास जैसे संदर्भों में दोनों पध्दतियों के संयुक्त अध्ययन और समुदाय आधारित स्थानीय स्वास्थ्य पध्दतियों के मूल्यांकन की आवश्यकता है। वर्ष 2050 तक विश्व में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या अधिक होगी। 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति विश्व की आबादी का पांचवा हिस्सा होंगे। भारत में आबादी का 3.8 प्रतिशत हिस्सा 65 वर्ष से अधिक आयु का है। एक अनुमान के अनुसार 2016 तक भारत में वरिष्ठ नागरिक करीब 11 करोड़ 30 लाख के आसपास होंगे। आयुर्वेद के माध्यम से जराचिकित्सा के सम-सामयिक अनुप्रयोग में सबसे बड़ी चुनौती लिखित समझौते तैयार करने, एकीकृत ढांचे की पहचान करने और जराचिकित्सा की ऐसी समस्याओं का समाधान करने की होगी, जिनके लिए अत्याधुनिक अनुसंधान, उपचार और शिक्षण केन्द्रों में महत्वपूर्ण निवेश अपेक्षित होगा। इन संस्थानों में जराचिकित्सा के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह उनिवार्य है कि बहुआयामी उपायों पर विचार किया जाये जो क) अंतरविषयी अनुसंधान, ख) अत्याधुनिक उपचार केन्द्रों और ग) विशेषज्ञतापूर्ण स्नातकोत्तर शिक्षा पर बल दे सकें। देश में ऐसे केन्द्र स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता है जो आयुर्वेद को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने के लिए अंतरविषयी अनुसंधान में संलग्न हों और आयुर्वेद की उपचारात्मक सेवाओं को मुख्य धारा में ला सकें। ऐसे अनुसंधान के लिए उदार वित्त व्यवस्था आवश्यक होगी और साथ ही ऐसे केन्द्र स्थापित करने होंगे जो प्रभावकारी उपचारात्मक सेवाएं प्रदान कर सकें। जराचिकित्सा से सम्बध्द स्नातकोत्तर अध्ययन केन्द्रों में विशेषज्ञतापूर्ण अंतरविषयी स्नातकोत्तर अनुसंधानकर्ताओं को सहायता देने की आवश्यकता होगी। ''' स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार से मिली जानकारी पर आधारित
मध्य प्रदेश की वार्षिक योजना 2008-09 को अंतिम रुप दिया गया (भारत सरकार से प्राप्त समाचार)मध्य प्रदेश की वार्षिक
योजना 2008-09 को
अंतिम रुप दिया गया (भारत सरकार से प्राप्त समाचार) राज्य के प्रदर्शन के बारे में अपनी टिप्पणी में श्री आहलूवालिया ने कहा कि मध्य प्रदेश को मानव संसाधन विकास पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। सामाजिक क्षेत्र को वरीयता दिये जाने की जरुरत है तथा निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए नीतिगत पहल के साथ मानव विकास सूचकांक में सुधार के विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। राज्य सरकार को विभिन्न सामाजिक क्षेत्र स्कीमों के तहत उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र से संबध्द स्कीमों को वरीयता दी जानी चाहिए। श्री चौहान ने आयोग को बताया कि विकास नीति के विशेष क्षेत्र भूख एवं कुपोषण निवारण तथा गरीबी कम करने होंगे। योजना आयोग द्वारा मध्यप्रदेश के लिए 14,182 करोड़ रु. की वार्षिक आयोजना स्वीकृत (म.प्र. सरकार से प्राप्त समाचार) अहलूवालिया द्वारा मध्यप्रदेश की अनेक योजनाओं की सराहना, मुख्यमंत्री द्वारा बुंदेलखंड में सूखे से निपटने केन्द्रीय सहायता की मांग योजना आयोग ने मध्यप्रदेश की वर्ष 2008-09 की 14182 करोड़ रुपये की वार्षिक आयोजना का अनुमोदन किया। यह पिछले वर्ष से 18 प्रतिशत अधिक है। वार्षिक आयोजना में अधोसंरचना क्षेत्र के विकास के लिये 52 प्रतिशत, सामाजिक सेवा क्षेत्र के लिये 32 प्रतिशत तथा अन्य क्षेत्रों के लिये 16 प्रतिशत राशि निर्धारित की गई है। योजना प्रस्ताव में अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के विकास के लिये उनकी जनसंख्या के अनुपात से भी अधिक राशि का प्रावधान किया गया है। योजना आयोग में आज मध्यप्रदेश की वार्षिक योजना 2008-09 पर चर्चा हुई। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, योजना एवं वित्त मंत्री श्री राघव जी, मध्यप्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष डा. सोमपाल शास्त्री और मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी वरिष्ठ अधिकारी चर्चा में सम्मिलित हुए। वार्षिक योजना में 150 करोड़ रूपये एकमुश्त केन्द्रीय सहायता के रूप में प्रदाय की गई। इस राशि में अन्य कार्यों के अलावा ऑंगनवाड़ी भवनों का निर्माण, बायोडायवर्सिटी पार्क की स्थापना, उज्जैन में प्लेनेटोरियम की स्थापना, हायर सैकेण्ड्री स्कूल भवनों के निर्माण, छात्रावास, आश्रमों का सुदृढ़ीकरण आदि कार्य प्राथमिकता के आधार पर लिए जाएंगे। योजना प्रस्ताव में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विकास के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात से भी अधिक राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोन्टेक सिंह अहलूवालिया से आग्रह किया कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण सूखे की स्थिति को देखते हुए केन्द्रीय सहायता दी जाए। मध्यप्रदेश को भी बिहार की तर्ज पर विशेष पैकेज दिया जाए। श्री चौहान ने रेलवे लाइन के निर्माण के लिए शत-प्रतिशत राशि भारत सरकार द्वारा दिये जाने की मांग की। इंदौर और भोपाल हवाई अड़डों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए केन्द्र मदद करे। इंदौर का हवाई अड्डा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानाेंं के लिए केवल केन्द्र सरकार की अनुमति के लिए रुका हुआ है । योजना आयोग इसके लिए पहल करे। ग्वालियर और जबलपुर के हवाई अड्डों को राष्ट्रीय स्तर का बनाये जाने के लिए भी योजना आयोग सहयोग करे। योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोन्टेक सिंह अहलूवालिया ने मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना, दीनदयाल अन्त्योदय उपचार योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत स्थान आरक्षित करने की योजनाओं के संबंध में गहरी रुचि दिखाई और विस्तार से इन योजनाओं के बारे में जानकारी ली तथा सराहना की। सदस्य डा0 सईदा हमीद ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के कन्वर्जन की सराहना की। डा0 हमीद ने बताया कि उन्होंने स्वयं धार और महेश्वर की यात्रा के दौरान चल रहे कार्यों को देखकर प्रशंसा की थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योजना आयोग को बताया कि मध्यप्रदेश में 10वीं योजना में अनुमोदित व्यय के मुकाबले 101.2 प्रतिशत व्यय किया है। मध्यप्रदेश में वित्तीय प्रबंधन बेहतर हुआ है। विगत दो वर्षों में बजट में राजस्व सरप्लस रहा है। वर्ष 2005 में पारित एफआरबीएम एक्ट के सभी लक्ष्यों की प्राप्ति की है। उन्होंने बताया कि जहां एक ओर प्रदेश में बिजली की उत्पादन क्षमता को दो गुना से अधिक किया है, वहीं लगभग 40 हजार किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण और 9 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया है। एनआरईजीएस के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देशभर में लगातार अव्वल रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे देश में सबसे बड़ा वन क्षेत्र हमारे पास है तथा इसको बनाये रखने की भारी कीमत हमें अदा करनी पड़ती है, जबकि हमारी वन सम्पदा का पर्यावरणीय लाभ पूरे देश तथा वैश्विक समुदाय को मिलता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में राष्ट्रीय औसत से ऊपर वनों का क्षेत्र बनाये रखने वाले राज्यों को मुआवजा देने की बात कही गई है। श्री चौहान ने प्रतिवर्ष राज्य को 8,285 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। उन्होंने राज्य को मिलने वाली कोयले पर रायल्टी की दर को पूर्णत: एड वैलोरम के अनुरुप निर्धारित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का औसत राष्ट्रीय स्तर से कम है इसलिए ग्रीन फील्ड प्रोजेक्टस को एआईबीपी के तहत स्वीकृति दी जाये और केन्द्र द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर राज्य को वित्त पोषण किया जाये। उन्होंने जल संरक्षण और सिंचाई और जल बचत को बढ़ावा देने के लिये केन्द्रीय अनुदान सीमा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की मांग की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मांग की कि उच्च शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े जिलों में उत्कृष्ट कालेज की स्थापना के लिये नई प्रस्तावित केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत केन्द्र सरकार कम से कम कैपिटल कास्ट आफ इंफ्रास्ट्रक्चर का 75 प्रतिशत और न्यूनतम दो पंचवर्षीय योजनाओं तक आवर्ती व्यय का 50 प्रतिशत केन्द्र से अनुदान मिलना चाहिए।
जिला सतर्कता समिति की बैठक 27 मार्च कोजिला सतर्कता समिति की बैठक 27 मार्च को ---------------------- पन्ना 24 मार्च- अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारणार्थ गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं मानीटरिंग समिति की बैठक 27 मार्च 2008 को अपरान्ह 12 बजे से कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई है।
आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की अनंतिम सूची जारीआंगनवाडी कार्यकर्ताओं की अनंतिम सूची जारी -------------------------- पन्ना 24 मार्च- परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास योजना (ग्रामीण) पन्ना ने ग्राम सुनहरा पुखरा (दमचुआ) में संचालित आंगनवाडी केन्द्र हेतु चयनित आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की अनंतिम चयन सूची जारी की गई है। इसमें आंगनवाडी केन्द्र सुनहरा हेतु श्रीमती प्रवीणा मिश्रा एवं पुखरा (दमचुआ) हेतु कविता बाडई को चयनित किया गया है। यदि किसी आवेदक को इस संबंध में दावा/आपत्ति प्रस्तुत करना हो तो वे 27 मार्च 2008 तक परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास योजना पन्ना कार्यालय में सायं 5.30 बजे तक प्रस्तुत कर सकते है।
जिला सलाहकार समिति की बैठक 26 मार्च कोजिला सलाहकार समिति की बैठक 26 मार्च को ------------------------- पन्ना 24 मार्च- नेहरू युवा केन्द्र की जिला सलाहकार समिति की बैठक 26 मार्च 2008 को दोपहर 2 बजे से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष पन्ना में आयोजित की गई है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2007-08 में नियमित/समन्वय कार्यक्रमों की जानकारी के साथ उत्कृष्ट कार्य हेतु चयनित युवाओं/युवा मंडल को राशि भी प्रदान की जाएगी।
बस स्टैण्ड 26 मार्च से स्थाई बस स्टैण्ड में संचालित होगाबस स्टैण्ड 26 मार्च से स्थाई बस स्टैण्ड में संचालित होगा ---------------------------- पन्ना 24 मार्च- स्थाई बस स्टैण्ड में सुधार/मरम्मत/अतिक्रमण हटाने संबंधी कार्य कराने के उद्देश्य से केन्द्रीय विद्यालय की भूमि पर अस्थाई बस स्टैण्ड स्थापित किया गया था। केन्द्रीय विद्यालय की भूमि पर भवन का निर्माण्ा कार्य प्रारंभ कराया जाना है। जिसे मद्देनजर रखते हुए कलेक्टर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी पन्ना को निर्देशित किया है कि केन्द्रीय विद्यालय भवन की भूमि पर संचालित अस्थाई बस स्टैण्ड तत्काल समाप्त करते हुए 26 मार्च 2008 से पूर्ववत स्थाई बस स्टैण्ड पन्ना में संचालित करने की पूर्ण व्यवस्था करें।
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