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24 febrero

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में पेशेवर संस्थाओं को शामिल किया जाना

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में पेशेवर संस्थाओं को शामिल किया जाना

 

लोकसभा

       ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि एनआरईजी अधिनियम, 2005 की धारा 13 के अनुसार, जिला मध्यवर्ती तथा ग्राम स्तर पर पंचायतें अधिनियम के तहत बनाई गई योजनाओं के नियोजन तथा कार्यान्वयन के लिए प्रमुख प्राधिकरण है। अधिनियम की धारा 16()5 में आगे यह व्यवस्था है कि ग्राम पंचायतें परियोजनाओं की लागत के मामले में कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों का निष्पादन करने के लिए जिम्मेदार है। मध्यवर्ती तथा जिला पंचायतें, सरकार के लाईन विभाग, केन्द्र तथा राज्य सरकारों के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, केन्द्र तथा राज्य सरकारों की सर्वाधिक हिस्सेदारी वाली सहकारी समितियां तथा बेहतर कार्य निष्पादन का रिकार्ड वाले प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन अन्य कार्यान्वयन एजेंसियां हो सकती हैं। स्व-सहायता समूहों को भी संभव कार्यन्वयन एजेंसियां माना जा सकता है।

       व्यावसायिक संस्थानों जैसे भारतीय प्रबंधन संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा अन्य व्यावसायिक संस्थानों को एनआरईजीए के तहत विशेष अध्ययनों के लिए शामिल किया गया है। प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं तथा 4 भारतीय प्रबंधन संस्थानों, 3 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, 4 कृषि विश्वविद्यालयों तथा 3 अन्य व्यावसायिक संस्थानों में अध्ययन शुरू कर दिया गया है।

 

राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क योजना (स्वान) के लिए 1788 करोड़ रुपए का अनुमोदन

राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क योजना (स्वान) के लिए 1788 करोड़ रुपए का अनुमोदन

सभी 'स्वान' परियोजनाएं  सितम्बर, 2009 तक पूरी करने का संकल्प

       सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क योजना (स्वान) के अंतर्गत 32 राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के 1787.58 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और चंडीगढ ने अपने-अपने प्रशासनिक क्षेत्रों में अमल का कार्य पूरा कर लिया है।

       देश में कुल 29 राज्यों और छ: केन्द्रशासित प्रदेशों में इस परियोजना पर अमल किया जा रहा है। चौदह राज्यों में यह कार्यक्रम विभिन्न चरणों में चल रहा है, जबकि अन्य राज्यों में बोली लगाने की प्रक्रिया पर अमल हो रहा है। आशा है कि  ये सभी परियोजनाएं सितम्बर 2009 तक पूरी हो जाएंगी।

       सरकार ने राष्ट्रीय ई-प्रशासन योजना के तहत मार्च 2005 में 3334 करोड़ रुपए के अनुमानित परिव्यय के लिए स्वीकृति दे दी है। पांच वर्षों की अवधि में इस कार्यक्रम का पूरे देश में प्रसार कर दिया जाएगा। एक अधिकार प्राप्त समिति व्यक्तिगत, राज्यवार  केन्द्रशासित प्रस्तावों पर विचार और अनुमोदन करती है। अधिकार प्राप्त समिति की स्वीकृति के बाद राज्य  केन्द्रशासित प्रदेश स्तर पर कार्यान्वयन समिति इन कार्यक्रमों को सशक्तिकरण के लिए स्वीकृति देती है।

       इस नेटवर्क के कार्य-संचालन के लिए प्रमुख चुनौतियां हैं- नेटवर्क संचालनों का स्थलों की पहचान करके उनका हस्तान्तरण करना कुछ राज्यों, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में उपयुक्त स्तरों पर विश्वसनीय सम्पर्कों की कमी पाई जाती है।

 

 

आम लोगों के लिए ई-प्रशासन की सुविधा, अगले महीने तक 35000 सूचना प्रौद्योगिकी से युक्त केन्द्रों का संचालन

आम लोगों के लिए ई-प्रशासन की सुविधा, अगले महीने तक 35000 सूचना प्रौद्योगिकी से युक्त केन्द्रों का संचालन

सरकार द्वारा मार्च 2010 तक सूचना प्रौद्योगिकी युक्त  एक लाख सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना

       सरकार द्वारा मार्च 2010 तक 25,195 सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना का संकल्प है, जबकि ऐसे 10,000 केन्द्र निर्माण के विभिन्न स्तरो पर कार्यरत हैं। इस वर्ष मार्च तक इन सभी केन्द्रों की स्थापना कर लिए जाने की आशा है। देश के छ: लाख गांवों में इन केन्द्रों की स्थापना का विचार है। इसके निर्माण पर 5742 करोड़ रु0 की लागत आने का अनुमान है और इनका संचालन सार्वजनिक-निजी एवं साझेदारी के तरीके से किया जाएगा।

       वर्ष 2008 के अंत तक 1,06,275 सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना एवं सेवा समझौतों के लिए 25 राज्यों द्वारा प्रस्तावों के अनुरोध जारी किये जा चुके हैं और 23 राज्यों में 1,02,851 केन्द्रों के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं। हरियाणा, झारखंड और सिक्किम ने शत-प्रतिशत कार्य पूरे भी कर लिए हैं।

       सामान्य सेवा केन्द्र(सीएससी) का डिजाइन इस तरीके से तैयार किया जा रहा है कि उसमें पीसी, प्रिंटर, स्कैनर, यूपीएस तथा वायरलैस आदि सभी उपकरणों को लगाया जा सके।

       इस स्कीम पर अमल करने के लिए 4 वर्षों के वास्ते कुल 5742 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है, जिसमें भारत सरकार का योगदान 856 करोड़ रु0 तथा राज्य सरकारों का योगदान 793 करोड़ रु0 होने का अनुमान है।

       भारत सरकार का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ग्रामीण तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में भी नागरिकों के लाभ के लिए सभी जगह हर समय नेटवर्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा और 10,000 सीएससीएस उपकरणों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा सुविधाएं भी उपलब्ध करायेगा।

 

मीडिया को सशक्त बनाने के लिए परामर्श समिति

मीडिया को सशक्त बनाने के लिए परामर्श समिति

       सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में मीडिया को सशक्त बनाने के लिए मीडिया परामर्श समिति का गठन किया है।

       इस समिति में शामिल सदस्य इस प्रकार हैं - अपर सचिव (प्रसारण); अपर सचिव (नीति एवं प्रशासन); सदस्य सचिव, संयुक्त सचिव (प्रसारण); प्रमुख कार्यकारी अधिकारी, प्रसार भारती; प्रधान महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) पत्र सूचना कार्यालय; महानिदेशक - दृष्य एवं श्रव्य प्रचार निदेशालय; सदस्य सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली; सचिव, भारतीय प्रेस परिषद; अध्यक्ष, भारतीय समाचार पत्र समिति (आईएनएस;) अध्यक्ष, समाचार प्रसारक संघ (एनबीए); अध्यक्ष, भारतीय प्रसारण फाउंडेशन (आईबीएफ); अध्यक्ष, भारतीय मीडिया संघ (आईएमजी); अध्यक्ष, भारतीय महिला समाचार पत्र संघ, नई दिल्ली; अध्यक्ष, अखिल भारतीय समाचार पत्र सम्पादक परामर्श संघ (एआईएनईसी); अध्यक्ष, अखिल भारतीय लघु एवं मध्यम समाचार पत्र संघ (एआईएसएमएनएफ); अध्यक्ष, भारतीय भाषा समाचार पत्र संघ (आईएलएनए); श्रीमती सन्ध्या मूलचंदानी, पत्रकार; श्रीमती ज्योति बोस, मुख्याध्यापिका, स्प्रिंगडेल्स स्कूल, नई दिल्ली और श्रीमती मेरी बरूआ, निदेशक, एक्शन फॉर ऑटिस्म।

समिति निम्न विषयों पर कार्य करेगी -

1. सरकार और विभिन्न व्यावसायिक मीडिया संगठनों के बीच नियमित परामर्श हेतु एक मंच के रूप में कार्य करना

2. समाज से जुड़े मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना

3. विभिन्न विनियामकनीतिप्रक्रियात्मक मामलों पर मीडिया संगठनों से संबंधित मामलों पर बातचीत करना

4. समिति की बैठक वर्ष में दो बार अथवा जब आवश्यक हो तब होगी।

 

19 febrero

मैसर्स भारती टेलीमीडिया लि. को पृथक एफआईपीबी अनुमोदन प्राप्त करने का सुझाव

मैसर्स भारती टेलीमीडिया लि. को पृथक एफआईपीबी अनुमोदन प्राप्त करने का सुझाव

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने लाइसेंसधारी कंपनी में आने वाले अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए मैसर्स भारती टेली-मीडिया को पृथक एफआईपीबी अनुमोदन प्राप्त करने का सुझाव दिया है । एफआईपीबी ने 9 जनवरी, 2009 को आयोजित अपनी बैठक में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अधीन कार्यान्वयन और उसके उल्लंघन के लिए आर्थिक हर्जाने की पूर्ति पर इस प्रस्ताव की सिफारिश की है । यह जानकारी विदेश और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री श्री आनन्द शर्मा ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी ।

       उत्तर में आगे यह कहा गया है कि मैसर्स भारती टेलीमीडिया लिमिटेड द्वारा अपनाये गये शेयरधारक पैटर्न से यह खुलासा हुआ है कि निवेशकर्ता कंपनियों के माध्यम से आने वाले विदेशी निवेश के लिए डीटीएच लाइसेंसधारक ने कोई एफआईपीबी अनुमोदन प्राप्त नहीं किया था जो कि वर्तमान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति के अनुरूप नहीं था । इसलिए लाइसेंसधारक से पूछा गया था कि डीटीएच लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन के लिए क्यों न उसके खिलाफ कार्यवाही की जाए ।

       डीटीएच के दिशा-निर्देशों में प्रावधान है कि आवेदक कंपनी में एफडीआईएनआरआईओसीबीएफआईआई की कुल विदेशी इक्विटी धारिता 49 प्रतिशत से अधिक न हो, और विदेशी इक्विटी के भीतर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का घटक 20 प्रतिशत से अधिक न हो । प्रदत्त इक्विटी अंश पूंजी और एफडीआईएनआरआईओसीबी निवेशों के जरिये विदेशी निवेशों की धारिता या नियंत्रित भारतीय संवर्धक कंपनी की कुल जारी इक्विटी पूंजी के समानुपात की प्रतिनिधिक प्रमात्रा 20 प्रतिशत की उपयुक्त एफडीआई सीमा का भाग होगी । सरकार की एफडीआई नीति के अनुसार किसी डीटीएच कंपनी में विदेशी निवेश के लिए एफआईपीबी के अनुमोदन की आवश्यकता होती है 

 

पंचायतों में ई शासन के ज्ञान केन्द्र परियोजना

पंचायतों में ई शासन के ज्ञान केन्द्र परियोजना

सरकार का पंचायती राज संस्थाओं में ई-प्रशासन (ई-पीआरआई) की प्रस्तावित केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के माध्यम से देश की ग्रामीण जनसंख्या के सभी वर्गों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के लाभों को पहुंचाने का प्रस्ताव है । प्रस्तावित स्कीम पंचायतों के जरिए बेहतर शासन व बेहतर सेवा सुपुर्दगी लाएगी एवं समुदाय व अन्य प्राधिकरणों के लिए पंचायती राज संस्थाओं की बृहत्तर जवाबदेही को सुलभ बनाएगी । इस परियोजना से कार्यक्रमों का बेहतर कार्यान्वयन और निगरानी हो सकेगी, निधियों का प्रभावी व पारदर्शी उपयोग होगा तथा उससे ग्रामीण लोग बाहर दुनियां की जानकारी और बाजार तक की पहुंच से जुड़ने में समर्थ होंगे । पंचायत स्तर पर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को इतने बड़े पैमाने पर शामिल किए जाने से अंतत: आम जनता में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की संस्कृति का विकास होगा । इस प्रकार सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी समावेशी शासन  के माध्यम से समावेशी विकास  में अपना अवदान करेगी ।

       प्रस्तावित कार्यक्रम में सभी ग्राम और प्रखंड पंचायतों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की आधारभूत सुविधाएं (कम्प्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस एवं वेब कैमरा) तथा ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी । उपयुक्त सॉपऊटवेयर अनुप्रयोगों को भी लगाया जाएगा, जिससे कि पंचायतें विभिन्न हितधारकों जैसे नागरिकों, राज्योंसंघ शासित क्षेत्रों व केन्द्र सरकार की सेवा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में समर्थ हो सकें ।

       परियोजना के पूर्ण रूप से प्रसार के लिए तीन वर्षों की समय सीमा  प्रस्तावित है।

        पंचायती राज मंत्री, श्री मणिशंकर अय्यर ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को यह जानकारी दी ।

 

न्याय पंचायत विधेयक

न्याय पंचायत विधेयक

सरकार ने न्याय पंचायत विधेयक को अंतिम रूप नहीं दिया है । न्याय पंचायत बिल पर मसौदा समिति द्वारा तैयार किए गए प्रारूप बिल को राज्य सरकारोंसंघ शासित क्षेत्रों व संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों को उनकी टिप्पणियों के लिए अग्रसारित किया गया था । विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त टिप्पणियों के आधार पर प्रारूप बिल को नया रूप दिया गया तथा उसे संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों एवं राज्य सरकारोंसंघ शासित क्षेत्रों को भेजा  गया था । प्राप्त टिप्पणियां विचाराधीन हैं ।

       प्रस्तावित न्याय पंचायत बिल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सामुदायिक संलिप्तता द्वारा मध्यस्थता एवं सुलह के माध्यम से विवादों का वैकल्पिक हल निकालने के लिए एक बढिया सांस्थानिक मंच उपलब्ध कराना है । न्याय पंचायतों का लक्ष्य औपचारिक न्याय प्रणाली तक पहुंचने से पहले विवादों का समाधान करना होगा, लेकिन इससे विवाद से जुड़ा कोई भी पक्ष यदि वैकल्पिक विवाद निपटान के परिणामों से संतुष्ट नहीं हो तो उसके न्यायिक फोरम में जाने का अधिकार समाप्त नहीं होगा ।

       प्रारूप न्याय पंचायत बिल प्रत्येक ग्राम पंचायत अथवा ग्राम पंचायतों के समूह के स्तर पर न्याय पंचायतों की स्थापना का प्रावधान करता है । न्याय पंचायतों का गठन न्याय पंचायतों के क्षेत्राधिकार में रहने वाले लोगों द्वारा न्याय पंचों के चुनाव के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है । न्याय पंचायतों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के प्रावधानों को भी प्रस्तावित किया गया है । प्रारूप बिल न्याय पंचायतों के दीवानी, फौजदारी तथा अतिरिक्त क्षेत्राधिकार को परिभाषित करता है ।

        पंचायती राज मंत्री, श्री मणिशंकर अय्यर ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को यह जानकारी दी ।

 

विदेशी अंशदान पाने वाले संगठन 1655

विदेशी अंशदान पाने वाले संगठन 1655

वर्ष 2006-07 के दौरान कुल 1655 एसोसिएशनों को 1 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी योगदान मिला है, जिनमें से 155 एसोसिएशनों ने भारत आधारित डोनर से विदेशी योगदान प्राप्त किया है । वर्ष 2007-08 के अब तक संग्रहित किए गए अनंतिम आंकड़ों के अनुसार 1435 एसोसिएशनों ने 1 करोड़ रपये से अधिक का विदेश योगदान प्राप्त किया है, जिनमें से 122 एसोसिएशनों ने भारत आधारित डोनर से विदेशी योगदान प्राप्त किया है ।

       यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी ।

 

18 febrero

ई गवर्नेन्स और वेब पत्रकारिता पर एडवांस इण्टरनेट प्रशिक्षण मुरैना में होगा

ई गवर्नेन्स और वेब पत्रकारिता पर एडवांस इण्टरनेट प्रशिक्षण मुरैना में होगा

मुरैना 17 फरवरी 09/ सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्था नेशनल नोबल यूथ अकादमी द्वारा मुरैना में आगामी अप्रेल माह से एडवांस्ड इण्टरनेट प्रौद्योगिकी और ई गवर्नेन्स तथा ई व्यवसाय व ई रोजगार पर आधारित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है ।

       वेब सेवाओं की विशिष्ट उपलब्धियों और अनुभवों को प्रख्यात इण्टर नेट विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थीयों के साथ शेयर किया जायेगा । प्रशिक्षण उपरान्त कुछ पाठयक्रमों के लिए भारत सरकार द्वारा आयोजित परीक्षा देकर भारत सरकार का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकेगा । प्रशिक्षण में विद्यार्थी , बेरोजगार, सरकारी कर्मचारी और पत्रकार साहित्यकार तथा इण्टरनेट व्यावसायी शामिल हो सकेंगे । संचालित होने जा रहे कायर्क्रम में एडवांस इण्टरनेट , वेब पत्रकारिता और साहित्यकारिता, वेब डिजाइनिंग तथा कामन सर्विस सेण्टर व ई गुमटी संचालन, इण्टरनेट आपरेशन्स ई गवर्नेन्स एवं सामुदायिक सेवायें आदि प्रमुख है । प्रशिक्षण के इच्छुक युवा 28 फरवरी तक तथा विलम्ब शुल्क सहित 15 मार्च तक नेशनल नोबल यूथ अकादमी के गांधी कालोनी स्थिति कार्यालय पर संपर्क कर सकते है ।

       यह प्रशिक्षण अपने प्रकार का पहला प्रशिक्षण होगा जिसमें वेब सर्वर के संचालक और वेब डिजायनर सीधे ही प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण देंगे ।

 

17 febrero

संविदा शाला शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए समय सारणी जारी

संविदा शाला शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए समय सारणी जारी

सौ दिन की कार्ययोजना के तहत संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 के रिक्त पदों पर नियोजन की कार्यवाही 10 फरवरी से प्रारंभ हो चुकी है। आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा रिक्त पदों के नियोजन के लिए सभी कलेक्टरों, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और आदिवासी विकास के सहायक आयुक्तों को समय सारणी भेज दी गई है। नौ चरणों में संपन्न होने वाली यह कार्यवाई 16 अप्रैल 2009 को पूर्ण हो जाएगी। पदों की पूर्ति के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी 'संविदा शाला शिक्षक भर्ती प्रक्रिया संबंधी आदेश परिपत्र तथा नियम' सभी जिला कलेक्टरों को भेजे जा चुके हैं।

 

निकाय स्तर से विज्ञापन का प्रकाशन

20 फरवरी, 09 तक

 

आवेदन पत्र प्राप्त करना

 

7 मार्च, 09 तक

 

आवेदन पत्रों से डाटाबेस एवं मेरिट सूची तैयार करना

 

12 मार्च, 09 तक

 

अनंतिम चयन सूची एवं चयन नहीं होने वाले अभ्यार्थियों की सूची का प्रदर्शन

 

18 मार्च, 09 तक

 

अनंतिम चयन सूची पर आपत्तियां प्राप्त करना

 

30 मार्च, 09 तक

 

आपत्तियों का निराकरण

 

2 अप्रैल तक

 

अंतिम सूची का प्रकाशन

 

6 अप्रैल तक

 

जिला स्तर पर एकीकृत काउन्सिलिंग के माध्यम से नियुक्ति एवं संविदा

 

16 अप्रैल 2009 तक

 

संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 की भर्ती प्रक्रिया के लिए जारी समय सारणी के अनुसार 20 फरवरी 2009 तक निकाय स्तर से विज्ञापनों का प्रकाशन किया जायेगा । सात मार्च तक नियोजनकर्ता प्राधिकारी द्वारा आवेदन पत्र प्राप्त किए जाएंगे और 12 मार्च तक इन आवेदन पत्रों के आधार पर डाटाबेस एवं मेरिट सूचियां तैयार कर ली जाएंगी। अनंतिम चयन सूची एवं चयन नहीं होने वाले अभ्यार्थियों की सूची का प्रदर्शन 18 मार्च तक कर दिया जायेगा।

संबंधित कलेक्टर द्वारा 30 मार्च तक अनंतिम चयन सूची पर आपत्तियां प्राप्त की जायेंगी। आपत्तियों के निराकरण के लिए गठित समिति द्वारा दो अप्रैल तक आपत्तियों का निराकरण कर लिया जाएगा। इसके उपरान्त नियोजनकर्ता प्राधिकारी द्वारा छ: अप्रैल तक अंतिम चयन सूची का प्रकाशन कर दिया जायेगा। कलेक्टर अथवा नियोजनकर्ता प्राधिकारी द्वारा 16 अप्रैल तक जिला स्तर पर एकीकृत काउंसिलिंग के माध्यम से नियुक्ति एवं संविदा की कार्यवाही पूर्ण कर ली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि संविदा शाला शिक्षकों के नियोजन की कार्यवाही को शासन द्वारा सौ दिवसीय कार्य योजना के अन्तर्गत अल्पावधि योजना की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है एवं इसकी समय-समय पर शासन स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

 

लाड़ली लक्ष्मी योजना की वेबसाइट एवं ब्रोशर का विमोचन

लाड़ली लक्ष्मी योजना की वेबसाइट एवं ब्रोशर का विमोचन

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विकसित वेबसाइट www.ladlilaxmi.com का आज मंत्रालय में लोकार्पण किया। इस वेबसाइट पर लाड़ली लक्ष्मी योजना का विवरण एवं हितग्राही की जानकारी मिल सकेगी। योजना के आवेदन-पत्र भी ऑनलाईन प्राप्त किये जा सकेंगे। योजना के तहत बालिका के नाम के समक्ष क्लिक करने पर बालिका के विद्यालय एवं परिवार की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। राष्ट्रीय बचत पत्र से संबंधित विवरण भी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।

प्रारंभ करने के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने योजना के ब्रोशर का विमोचन भी किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री अनूप मिश्रा, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती रंजना बघेल, मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी, प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्रीमती टीनू जोशी और महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव उपस्थित थीं।

 

अंतरिम बजट-2009-10 का सारांश

अंतरिम बजट-2009-10 का सारांश

अंतरिम बजट-2009-10

       आज लोकसभा में पेश किए गए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन संरकार का  अंतरिम बजट 2009-10 वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने प्रस्तुत किया। इस बजट में वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था की रपऊतार तेज करने और समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से कई महत्त्वपूर्ण उपायों की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जो भी वायदे किये थे, उन्हें पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

        आम आदमी की कल्याण की वचनबध्दता को न भूलते हुए वित्त वर्ष 2009-10 के लिए उन्होंने 9,53,231 करोड़ रुपये के कुल व्यय का प्रस्ताव रखा है। इसमें 2,85,149 करोड़ रुपये के आयोजना व्यय और 6,68,082 करोड़ रुपये के आयोजना भिन्न व्यय का प्रावधान है।

       वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग विभाग, रेल मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए वर्ष 2009-10 की आयोजना में बजट अनुमान 2008-09 की तुलना में, बजटीय सहायता बढा दी गई है ताकि आर्थिक मंदी के समाधान के लिए राजकोषीय गति को बनाए रखा जा सके तथा ग्रामीण एवं अवसंरचना विकास की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। इसके अतिरिक्त युवा कार्य और खेल मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के लिए वर्धित आयोजना आबंटनों का प्रावधान किया गया है। ताकि अगले वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के संबंध में तैयारी हेतु पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें। उन्होंने पऊलैगशिप कार्यक्रमों के लिए किए गए आबंटनों का ब्यौरा देते हुए बताया कि फरवरी 2006 में आरंभ की गई राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना  देश के सभी जिलों में क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2009-10 में इस योजना के लिए 30,100 करोड़ रुपये के आबंटन का प्रस्ताव रखा गया है। प्रारंभिक शिक्षा सुलभ कराने और इसके अवसंरचना विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत 2009-10 के लिए 13,100 करोड़ रुपये के आबंटन का प्रस्ताव रखा गया है। स्कूलों में मध्याह्न भोजन के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए वर्ष 2009-10 में 8,000 करोड़ रुपये के आबंटन का प्रस्ताव है।

       वित्त मंत्री ने बताया कि ग्रामीण और अवसंरचना परियोजना के लिए निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करने के लिए 14,000 करोड़ रुपये आधारभूत निधि से आरआईडीएफ -न्ध् का, तथा 4,000 करोड़ रुपये की आधारभूत निधि से ग्रामीण सड़कों के लिए पृथक विंडो जारी करने का प्रावधान रखा गया है।

       वैश्विक वित्तीय संकट के कारण निर्यात पर त्रऽणात्मक प्रभाव का सामना करने के लिए वित्त मंत्री ने रोजगार परक क्षेत्रों जैसे- वस्त्र उद्योग, कालीन, चर्म, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद और लघु और मध्यम उद्यमों के लिए 31 मार्च, 2009 से 30 सितम्बर 2009 तक लदान-पूर्व तथा लदान-पश्च त्रऽण पर 2 प्रतिशत ब्याज सहायता देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि 2009-10 के लिए आयोजना व्यय को सामान्य बजट प्रस्तुत करते समय पर्याप्त रूप से बढाया जा सकता है।

       वित्त मंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को और भी चाक चौबंद बनाने के लिए उन्होंने रक्षा के लिए आबंटन बढाने के लिए प्रस्ताव किया है। यह 1,41,703 करोड़ रुपये के आयोजना-भिन्न व्यय का भाग है। इसमें पूंजी व्यय के लिए 54,824 करोड़ रुपये शामिल होंगे। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य, उर्वरक तथ पेट्रोलियम सहित मुख्य सब्सिडियों के लिए 95,579 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।

       वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2009-10 के लिए, सकल कर राजस्व प्राप्तियां मौजूदा कराधान दरों पर 6,71,293 करोड़ रुपये और केन्द्र का निवल कर राजस्व 5,00,096 करोड़ रुपये अनुमानित हैं। राजस्व व्यय 8,48,085 करोड़ रुपये अनुमानित है जबकि राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.0 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा 3,32,835 करोड़ रुपये अनुमानित है जो सकल घरेलू उत्पाद का 5.5 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि अर्थव्यवस्था के पुन: विकास की पटरी पर आ जाने पर हम एफआरबीएम में निर्दिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकेंगे।

       अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि हमारी जनता अगली सरकार को चुनने के लिए शीघ्र ही अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करेगी। भारत के लोगों ने बराबर यह प्रदर्शित किया है कि वे राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखने हेतु अपनाये जाने वाले ठोस निर्णयों पर भरोसा कर सकते हैं। विगत वर्षों में उन्होंने यह भी देखा है कि किस प्रकार एक 'आम आदमी' हमारी विकास प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु बन गया है। सरकार ने अक्सर कठिन परिस्थितियों में देश का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब समय आएगा तब हमारे लोग उस हाथ की पहचान कर लेंगे जिसकी वजह से यह संभव हुआ है। केवल यही हाथ हमारे राष्ट्र को शांति और समृध्दि के मार्ग पर ले जाने में सहायक हो सकता है।

 

सामाजिक क्षेत्र में दो नई योजनाओं की शुरुआत

सामाजिक क्षेत्र में दो नई योजनाओं की शुरुआत

अंतरिम आम बजट 2009-10

       अंतरिम बजट के अंतर्गत सामाजिक क्षेत्र में दो नई योजनाओं की शुरुआत की जा रही है। पहली योजना है इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेन्शन योजना जिसके अधीन 40-64 आयुवर्ग की विधवाओं को प्रति माह 200 रुपए की पेन्शन दी जाएगी। दूसरी योजना है इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विकलांगता पेन्शन योजना जिसके अधीन गंभीर रूप से विकलांग व्यक्तियों को पेन्शन दी जाएगी।

 

अंतरिम बजट में तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर

अंतरिम बजट में तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर

अंतरिम बजट 2009-10

       वित्त मंत्री ने आज लोकसभा में पेश अंतरिम बजट में तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं -

·       भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में 114.50 करोड़ रूपये सहित कुल 800 करोड़ रुपये का योजनागत और 919.57 करोड़ रुपये का योजनेत्तर प्रावधान ।

·       औद्योगिक स्थापनाओंसंगठनों में स्नातकोत्तर इंजीनियरों, डिप्लोमा धारकों और बारहवीं स्तर के छात्रों के लिए

·       भारतीय प्रबंध संस्थान के लिए 98 करोड़ रुपये का योजनागत आबंटन ।

·       भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरू के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       विकलांगों के लिए पालिटैक्निक खोलना ।

·       भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी तथा प्रबंधन संस्थान ग्वालियर के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधा 

·       भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन तथा उत्पाद संस्थान, जबलपुर का एमपी सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1973 के तहत पंजीकरण

·       राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरी संस्थान, मुम्बई के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       राष्ट्रीय गढार्ऌ एवं ढलाई प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची के लिए 6 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       योजना और वास्तुकला विद्यालय, नई दिल्ली को मानद विश्वद्यालय का दर्जा और 4 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       संत लोंगोवाल इंजीनयरी तथा प्रौद्योगिकी संस्थान, लोंगोवाल के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       भारतीय खनन विद्यालय, धनबाद के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       विश्व बैंक से वित्त पोषित भारत सरकार के तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के तहत 3 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

·       केन्द्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कोकराझार के लिए 10 करोड़ रुपये का आबंटन ।

·       अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान।

·       राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए 775 करोड़ रुपये का प्रावधान ।

 

 

अंतरिम आम बजट 2009-10 की झलकियॉं

अंतरिम आम बजट 2009-10 की झलकियॉं

       अंतरिम आम बजट 2009-10 की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

·        वर्ष 2009-10 के वित्त वर्ष के दौरान कुल खर्च 9,53,231 करोड़ रुपए का अनुमान है। योजना खर्च का आकलन 2,85,149 करोड़ रुपए और गैर योजना खर्च का आकलन 6,68,082 करोड़ रुपए है।

·        राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए इस दौरान 30,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2008-09 में 138.76 करोड़ श्रम दिवस का रोजगार सृजित किया गया था और इसके दायरे में 3.51 घर थे।

·        सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत लगभग 98 प्रतिशत बस्तियों को प्राथमिक स्कूलों के दायरे में लाया गया। इस कार्यक्रम के लिए प्रावधान में वर्ष 2003-04 और 2008-09 के बीच 571 प्रतिशत का इजाफा किया गया।

·        वर्ष 2009-10 के लिए मध्याह्न भोजन योजना के लिए 8,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

·        वर्ष 2009-10 में एकीकृत बाल विकास योजना के लिए 6,705 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है। योजना के अंतर्गत बच्चों की बढत क़ी निगरानी करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए बाल विकास मानकों को अपनाया गया है।

·        जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन के अंतर्गत 39,000 करोड़ रुपए की लागत वाली 386 परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया है। वर्ष 2009-10 के लिए 11,842 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

·        राजीव गाँधी ग्रामीण पेयजल मिशन के लिए 7,400 करोड़ रुपए, ग्रामीण स्वच्छता योजना के लिए 1,200 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 12,070 करोड़ रुपए और भारत निर्माण के लिए 40,900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

·        भोजन, उवर्रक और पेट्रोलियम सहित प्रमुख सब्सीडी का आकलन 95,579 करोड़ रुपए का है।

·        रक्षा प्रावधान को 1,41,703 करोड़ रुपए तक किया गया है जिसमें 54,824 रुपए का पूँजी खर्च शामिल है।

·        वित्त वर्ष 2009-10 के लिए केन्द्र का कुल कर राजस्व का आकलन 5,00,096 करोड़ किया गया है। इसके साथ राजस्व खर्च 8,48,085 करोड़ रुपए का आकलन किया गया है। राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद का चार प्रतिशत और वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.5 प्रतिशत का अनुमान किया गया है।

 

15 febrero

दीपा बनेगी दुल्‍हन, अभ्‍युदय आश्रम पर आयेगी बारात, विदा होगी ऑसूओं और यादों के साथ

दीपा बनेगी दुल्‍हन, अभ्‍युदय आश्रम पर आयेगी बारात, विदा होगी ऑसूओं और यादों के साथ

विमुक्‍त जाति की महिलाओं की मुक्ति की बगिया में उपलब्धि का एक और पुष्‍प खिला

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

मुरैना 15 फरवरी 09, मुरैना का प्रसिद्ध अभ्‍युदय आश्रम उसका मायका है, रामसनेही धर्म पिता । वह बचपन में अबोध बालिका के रूप में महज चार पॉंच साल की उम्र में इस आश्रम में तब आयी जब उसका मॉं अंगूरी बाई को उसके पिता ने छोड़ कर दूसरी शादी कर ली, उसकी मॉं बेसहारा हो गयी और पारम्‍परिक पेशा वैश्‍यावृत्ति करने के सिवा कोई चारा शेष न बचा, लेकिन अगर ऊपर बैठी उस जगत्‍माता जगदम्‍बा की इच्‍छा कुछ और ही हो तो वह तकदीर की कहानी भी कुछ अलग ही ढंग से लिख देती है । ऐसा ही हुआ अँगूरी बाई के साथ और मुरैना में वर्ष 1992 में जाबालि परियोजना के तहत वैश्‍यावृत्ति उन्‍मूलन के लिये चलाये गये अभियान में खोले गये अभ्‍युदय आश्रम में उसे खाना बनाने वाली की नौकरी मिल गयी, ओर फिर उसे रहने का ठिकाना भी मिला और बेटी दीपा के सुनहरे भविष्‍य का ख्‍वाब और उसकी ताबीर भी ।

चार पॉंच साल की दीपा तब अबोध ही थी जब वह यहॉं अभ्‍युदय आश्रम में आयी । वह यहीं रही, पली पढी लिखी और आगे बढ़ी यहीं रहकर उसने शास.कन्‍या विद्यालय मुरैना से प्रथम श्रेणी में इण्‍टरमीडियेट परीक्षा उत्‍तीर्ण किया और यहीं रहते ही उसने शास.कन्‍या महाविद्यालय मुरैना से इतिहास विषय के साथ बी.ए. किया । अब आजकल वह मुरैना के ही टी.एस.एस. महाविद्यालय से समाजशास्‍त्र में एम.ए. कर रही है । साथ ही वह म.प्र. शासन के खेल एवं युवक कल्‍याण विभाग में जिला समन्‍वयक के पद पर बिजावर जिला छतरपुर में पदस्‍थ है । उसने कम्‍प्‍यूटर में भी डिप्‍लोमा पाठयक्रम उत्‍तीर्ण किया है ।

यह दीपा एक ऐसे समाज और पारिवारिक पृष्‍ठभूमि से ताल्‍लुक रखती है जिसमें वैश्‍यावृत्ति करना न केवल पारम्‍परिक व्‍यवसाय है बल्कि गौरव की बात समझी जाती है । अन्‍य समाज के लोग जहॉं पुत्री के जन्‍म पर कुपित होकर कन्‍या भ्रूणों को गर्भ में ही या गर्भ से बाहर आने के बाद मारते आये हैं वहीं दीपा के समाज में इसके ठीक उलट कहानी चलती आयी है । वहॉं पुत्री के जन्‍म पर खुशियां मनायीं जाती हैं और एक बेटी की कीमत पर एक कुटुम्‍ब का रोजगार या धन्‍धा मुकम्‍मल हुआ ऐसा माना जाता रहा है ।

दीपा को हालांकि शुरू से ही अभ्‍युदय आश्रम की छॉव तले एक सुरक्षित आसरा मिल गया और वह ऐसे सभी कुरीतियों और परम्‍परागत दुर्व्‍यवसायों से परे स्‍वत: ही हो गयी । और पढ़ लिख कर एक सभ्‍य और प्रतिष्ठित जीवन जीने के काबिल होकर खुद के पैरों पर खड़ी हो गयी ।

अब दीपा अभ्‍युदय आश्रम से 19 फरवरी को विदा होने जा रही है, उसका विधिवत विवाह होने जा रहा है, और दाम्‍पत्‍य जीवन में प्रवेश करने जा रही हैं । आने वली 19 फरवरी को दीपा का विवाह अम्‍बाह के अभिषेक टुटु के साथ होने जा रहा है और 20 फरवरी को उसकी डोली अपने पति के घर जाने के साथ वह अभ्‍युदय आश्रम से विदा हो जायेगी । हमने दीपा से और अभ्‍युदय आश्रम के प्रसिद्ध संस्‍थापक और समाजसेवी रामसनेही से इस सम्‍बन्‍ध में बातचीत की ।

दीपा ने अपने जीवन के इस काया कल्‍प के लिये सबसे पहले रामसनेही को और अपनी मॉं अंगूरी बाई को पूरा श्रेय देते हुये तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा किया ।

दीपा से जब हमने पूछा कि भई दीपा कैसा फील कर ही हो तो वह कुछ शर्माते सकुचाते हुये जमीन पर अपना पॉंव के अँगूठे का नाखून चलाते हुये शर्म से लाल चेहरे और झुकी नजरों से जमीन ताकती सी रह गयी । हमने उसकी कठिनाई भांपते हुये सवाल को घुमा कर पूछा कि अगर इतने वर्ष अपने मायके में (अभ्‍युदय आश्रम ) रहकर एकदम से जाओगी तो कैसा लगेगा । वह बोल कि बहुत बुरा लगेगा सर, बहुत दुख होगा सबकी याद आयेगी, हमने अपनी बात बढ़ाते हुये कहा लेकिन कुछ खुशी भी तो होगी आखिर अब नया घर मिलेगा अपने पति का घर तो दीपा बोली हॉं सर होगी । हमने कहा होगी या है । तो वह मुस्‍करा कर रह गयी ।

हमने पूछा कि कभी कभार अपने मायके आश्रम में आओगी कि नहीं, वह उलट कर सवाल पूछते बोली कि क्‍या कृष्‍ण जी ने यशोदा मैया को या गोकुल को भुलाया क्‍या, मेरा तो लालन पालन शिक्षा दीक्षा सब कुछ यही हुयी है मेरा इस आश्रम से नाता कभी नहीं टूट सकता । मैं यहॉं बार बार आऊंगी ।

मैं चाहती हूँ कि मेरे समाज में भी सभी लड़कियां सिर उठा कर सम्‍मान से जीना सीखें । गलत रास्‍ते की ओर गलत धन्‍धे की ओर न जायें । मैं ऐसी सब लड़कियों की हमेशा मदद करूंगी । उन्‍हें अपने पैरों पर खड़ा होने और सम्‍मानजनक जीवन जीने के लिये सदा प्रेरित करूंगी ।

दीपा ने बताया कि उसने अब तक खेलों में भी कई करिश्‍माई प्रदर्शन किये हैं और राज्‍य स्‍तरीय 60 से अधिक, राष्‍ट्रीय 4, तथा 3 विश्‍वविद्यालयीन प्रमाणपत्र व पुरूस्‍कार खेलों के लिये प्राप्‍त किये हैं । दीपा की गौरव गाथा वर्णित करते करते रामसनेही की बूढ़ी ऑंखों में बरबस ही चमक आ जाती है । उल्‍लेखनीय है कि रामसनेही काफी वृद्ध हो चुके हैं उनकी उम्र 76 वर्ष से ऊपर होकर स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक नहीं चल रहा है । रामसनेही को स्‍वयं को भी कई पुरूस्‍कार व सम्‍मान समाजसेवा के लिये मिल चुके हैं ।

मुरैना में बी.एस.एन.एल. की वायरलेस इण्‍टरनेट सेवायें प्रारंभ

मुरैना में बी.एस.एन.एल की वायरलेस इण्‍टरनेट सेवायें प्रारंभ

मुरैना 15 फरवरी 09, विगत शुक्रवार को बी.एस.एन.एल की वायरलेस इण्‍टरनेट सेवायें मुरैना प्रारंभ हो गयीं । इसमें फिलहाल केवल ई.वी.डी.ओं. कार्ड लॉंच किया गया है ।  

बताया गया है कि इस पर 512 केबीपीएस की डाटा गति प्राप्‍त होगी  एवं इसका मूल्‍य 4202 रू. है । इस पर 550 रू. प्रतिमाह में अनलिमिटेड इण्‍टरनेट का एकमात्र प्‍लान उपलब्‍ध है । 

 

10 febrero

हास्‍य/ व्‍यंग्‍य// सपना 85 का, आस कम्‍प्‍यूटर की, कहर बिजली का, चैलेन्‍ज मामा का

हास्‍य/ व्‍यंग्‍य

सपना 85 का, आस कम्‍प्‍यूटर की, कहर बिजली का, चैलेन्‍ज मामा का

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’

जगत मामू यानि जग मामा भनजों से बोले चलो बच्‍चो एक खेल खेलते हैं । जो जीतेगा वो एक क्‍म्‍प्‍यूटर पावेगा 500 रू. वाला इनाम में । हारा तो ठेंगा ।

बच्‍चे बोले वाह मामू क्‍या धांसू आइडिया है, हर्र लगे न फिटकरी रंग चोख आ जायेगा, केन्‍द्र सरकार नये नये आइटम निकाले है, ओर मामू अपनी सील उसी पे ठोक के मेड इन मामूज फैक्‍ट्री ठोक देवे है । खैर अब दान की बछिया के दॉंत तो नहीं देखे जावें हैं । फोकट में मिले तो 500 वाला भी चलेगा । मामू कौन कम उस्‍ताद थे, अपने पावर की मेन चाबी नीचे डाली और उड़ा दी बिजली, ससुरी रात गोल पूरी दिन भर गोल देखें भानजे कैसे अब लाओगे 85 परसेण्‍ट, नहीं लाये तो ठेंगा ।

बच्‍चों को टेंशन, सारी रात टेंशन सारा दिन टेंशन । अब मामू ने इनाम भी रख दी बत्‍ती भी गोल कर दी । अब पचासी तो का पास होइवे के लाले पड़ रहे हैं । आखिर एक भानजा तैश में आ ही गया उसने टी.वी पर एडवर्टाइज देखा, अमिताभ बच्‍चन चाचू बोल कि टेंशन गया पेंशन लेने, भानजा चाचू के डायलॉग पे प्ररित हो गया । और एक अखबार में छपी खबर के मामू को चिठ्ठी लिखो तो मामू बुला लेता है सो लिख डाली फटाफट एक पत्री मामा के नाम । बच्‍चे ने जो लिखा

प्‍यारे मामू जान, तुम पर बिजली कुर्बान ।

बड़े दिनों से कोई नई इनामो इकराम नहीं आ रही थी न कोई पंचायत फंचायत नहीं हो रही थी सो लग ही नहीं रहा था कि मामू की सरकार लौट आयी है । न पत्‍थर गाड़ कर कब्रिस्‍तान बनाये जा रहे थे और न साइकिल से पेट्रोल बचाने मामू दफ्तर जा रहे थे, न कहीं भुक्‍खड़ सम्‍मेलन करा कर अनाज बांटे जा रहे थे, न कोई यात्रा फात्रा का टोटका हो रहा था । हमें लग रहा था मामू गद्दी पे जाके हमें भूल गये, बिसरा गये ।

पर मामू कमाल कर दिया अपने बिजी टैम में से थोड़ा बखत भानजों के लिये निकाल कर उन्‍हें 500 रू वाला ही सही कम्‍प्‍यूटर दे डालने का खेल खेलने का हम भानजों के साथ बढि़या फनी गेम शो चालू कर डाला और ठेले रिक्‍शे वालों को भी सरकारी हलवा का जलवा खिला दिया, हॉं अब कुछ कुछ यकीन हुआ कि मामू जान ही हैं, लौट कर सत्‍ता में आये हैं, जमूड़े बनाने और तमाशा दिखाना चालू कर दिये हैं । थैंक्‍यू मामा जी ।

मामा आपकी शर्त 85 परसेण्‍ट से ऊपर लाने की थी, पर मामू मैं और मेरे सारे दोस्‍त आपकी क्राइटिरिया एल.ओ.सी. से आउट हो गये हैं, अब हम 85 तो क्‍या पास ही हो लें तो आपकी दया से बहुत होगा । हमारे यहॉं सारी रात बिजली नहीं रहवे है, सारे दिन भी अँधेरा छाया है, मोमबत्तियां खरीद खरीद कर पागल हो गये हैं, मम्‍मी पापा की जेब भी जवाब दे गयी है, एक मोमबत्‍ती आधा पौन घण्‍टे संग देती है और बिजली सारी रात गुल रहती है, सारा दिन गुल रहती है, अबकी बार गणित में ऐसे ही सवाल पूछोगे तो शायद हम पास भी हो जायें जैसे एक मोमबत्‍ती 40 मिनिट तक जलती है जिसका दाम 2 रू है और बिजली 23 घण्‍टे गुल रहती है तो बताओ कि एक दिन में कितनी मोमबत्तियां लगेंगीं और एक दिन का खर्च कितना आयेगा । मामू जान ऐसे सवाल हमें अब खूब रट गये हैं, हम फटाक से सवाल का उत्‍तर दे देंगें, कोर्स के सवाल तो मामू अब पढ़ नही पाते सो मामू ऐसे सवाल पूछ कर ही हमारा बेड़ा पार करा देना नहीं तो मामू हम सारे के सारे ही फेल हो जायेंगें ।

मामू अब कम्‍प्‍यूटर तो हमारी पकड़ से निकल गया आपका चैलेन्‍ज कि बेटा बिना बिजली के लाओ 85 परसेण्‍ट और पाओ कम्‍प्‍यूटर, ये हमारे बूते का नहीं है । आपका चैलेन्‍ज हम वापस करते हैं, अब तो पास ही हो लें तो साल बच जायेगा वरना मामू आपका ये गेम शो हम गॉंव शहर के गरीब बच्‍चों की कूबत से बाहर है ।

मामू थोड़ा लिखा, बहुत समझना । आपका प्‍यारा भानजा अपने कई साथियों के साथ ।

मामू को चिठ्ठी मिली तो मामू ने भानजे को बुलवा भेजा और भानजे से कहा कि देखो बेटा, बिजली ने गरीब मोमबत्तियां बनाने वालों की रोजी रोटी छीन ली, हमने उन्‍हें रोजगार मुहैया कराया, गरीब इन्‍वर्टर और बैट्री वालों को धन्‍धा दिलाया । ऊर्जा की खपत और बचत पर अब तुम्‍हें निबन्‍ध नहीं रटने पड़ेंगें । भ्रष्‍टाचार खतम करने आ रहे कम्‍प्‍यूटर और आई.टी. तथा ई गवर्नेन्‍स हमने एक ही वार से बिजली काट कर मामला ही जड़ मेख से मिटा दिया ससुरी न बिजली न आई.टी. न कम्‍प्‍यूटर न पचासी परसेण्‍ट हमने एक झटके में सबके टेंशन दूर कर दिये । भ्रष्‍टाचार खतम हुआ तो देश में ग्‍लोबल मन्‍दी छा जायेगी, सरकार की और सरकारी कारिन्‍दों की कमाई ही ठप्‍प हो जायेगी । सब टेंशनों की जड़ ये बिजली थी । हमने बिजली काट दी सारे टेंशन खतम कर दिये । तुमने कहावत तो सुनी ही होगी कि न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी सो प्रिय भानजे न बिजली होगी न भ्रष्‍टाचार खतम होगा, न आई.टी. आवेगी न कम्‍प्‍यूटर, हमने भयमुक्‍त म.प्र. का वायदा किया था हमारे सरकारी कर्मचारी सबसे ज्‍यादा भयभीत पारदर्शिता लागू होने और भ्रष्‍टाचार के खात्‍में से थे हमने उन्‍हें बिजली काट कर भयमुक्‍त कर दिया । रहा बेटा तुम्‍हारे पास और फेल होने की बात । सो चुनाव परिणामों की तरह हमने परीक्षा परिणाम भी सैटल कर लिये हैं । कहॉं कौन पास होगा और कौन फेल, कौन पच्‍चासी लायेगा कौन ज्‍यादा लायेगा कौन कम्‍प्‍यूटर पावेगा कौन इस गेम शो में हारेगा और किसको ठेंगा मिलेगा सब कुछ सैटल्‍ड है बेटा जा अब घर जा और चद्दर तान कर टॉंग पसार कर सो तेरे 85 से ऊपर आ जायेंगें तू चिन्‍ता मत कर । तुझे कम्‍प्‍यूटर मिल जावेगा । अब ज्‍यादा भभ्‍भर मचा कर हमारी गेम शो की ऐसी तैसी मत कर ।

भनजा बोला कि पर क्‍या मामू ये गलत नहं होगा । मामू बाले कि बेटा देश में ये रोज ही हो रहा है । हर गेम शो में हो रहा था लो जमूड़े बन रहे हैं, मदारी जमूड़े बना रहे हैं, मैं तो केवल उनके चरण चिह्नों की धूलमात्र ही ले रहा हूँ ।

भानजा खुशी खुशी बिना पढ़े लिखे ही कम्‍प्‍यूटर मिलने के सपने लेकर अपने घर लौट आया ।        

 

 

चौ0 रणवीर सिंह हुड्डा को श्रद्धांजलि बुझ गया संविधान सभा का अंतिम चिरांग

चौ0 रणवीर सिंह हुड्डा को श्रद्धांजलि

                     बुझ गया संविधान सभा का अंतिम चिरांग

निर्मल रानी  163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा। फोन-09729229728 

अपनी खुशी से आए, न अपनी खुशी चले। लाई हयात आए, कजा ले चली, चले॥

       बेशक उपरोक्त पंक्तियों में शायर ने सही ंफरमाया है कि इस संसार में किसी प्राणी का आना और जाना उसके अपने ऊपर निर्भर नहीं करता बल्कि जीवनदाता ईश्वर जब किसी आत्मा को जीवात्मा में प्रविष्ट कर देता है तो उसे जीवन मिल जाता है तथा जब वही ईश्वर उसके नाम मौत का परवाना जारी कर देता है, तब वही व्यक्ति अपनी संसारिक यात्रा पूरी कर ईश्वर अल्लाह या गॉड की आंगोश में वापस चला जाता है। बेशक जीवन तथा मृत्यु की इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति की अपनी इच्छा या ंखुशी का कोई सरोकार नहीं होता। हां इतना ंजरूर है कि जीवन तथा मृत्यु के बीच के इस पड़ाव के दौरान यदि मनुष्य चाहे तो अपने सद्कर्मों के द्वारा संसार में वह स्थान बनाने में अवश्य सफल हो जाता है जिससे कि मरणोंपरान्त भी उस व्यक्ति विशेष का नाम अमर रहे। भारत मां ने ऐसे तमाम सपूत दिए हैं जिन्हें आज देश का बच्चा-बच्चा गौरवान्वित होकर न केवल याद करता है बल्कि उन्हें अपना सर्वोच्च आदर्श भी स्वीकार करता है। कहा जा सकता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ऐसे ही महान व्यक्तित्व में एक थे।

              चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा भी हरियाणा की धरती पर जन्मे उस महान गांधीवादी व्यक्तित्व का नाम था जोकि गत् 1 ंफरवरी को इस संसार की यात्रा पूरी कर ईश्वर की शरण में जा बसे। 94 वर्ष की आयु में इस संसार को अलविदा कहने वाले चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा का जन्म 26 नवम्बर 1914 को रोहतक ंजिले के सांघी गांव के एक सुप्रसिद्ध आर्य समाजी चौधरी मातुराम के परिवार में हुआ था। इनका परिवार शुरु से ही आर्य समाजी होने के नाते अंधविश्वास से दूर तथा समाज व मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर रहता था। चौधरी रणवीर हुड्डा की प्रारम्भिक शिक्षा इनके गांव मे ही हुई। सर्वप्रथम इन्हें 1920 में गांव की ही एक पाठशाला में भर्ती कराया गया। उसके पश्चात आपने वरिष्ठ आर्य समाजी कार्यकर्ता तथा समाज सुधारक भगत फूल सिंह द्वारा सोनीपत में गोहाना के निकट स्थापित गुरुकुल भैंसवाल कलां में दांखिला लेकर अपनी आगे की शिक्षा ग्रहण की। गुरुकुल की शिक्षा पूरी करने के बाद आपने रोहतक में वैश्य हाई स्कूल में दांखिला लिया तथा 1933 में मैट्रिकुलेशन परीक्षा पास की। अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए हुड्डा जी ने गवर्नमेंट कॉलेज रोहतक में दांखिला लिया तथा 1935 में एंफ ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात आप दिल्ली चले गए तथा 1937 में रामजस कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद श्री हुड्डा के भीतर देश के लिए कुछ कर दिखाने की प्रबल इच्छा जागृत हुई। आर्य समाजी विचारधारा होने के नाते चूंकि आप महात्मा गांधी की शांति व अहिंसा की नीति से बहुत प्रभावित थे अत: आप में भी स्वतंत्रता संग्राम में कूदने का जंज्बा जगा और इस प्रकार आप गांधीजी की सेना में शामिल हो गए। इस प्रकार चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा ने कांग्रेस की सदस्यता भी ग्रहण कर ली। महात्मा गांधी के हरियाणा (तत्कालीन पंजाब) आगमन के अवसर पर चौधरी साहब प्राय: गांधीजी के साथ रहने लगे। गांधीजी ने जब रोहतक व गुड़गांव में अपना शांति मार्च किया उस समय चौ0 हुड्डा कंधे से कंधा मिलाकर गांधीजी के साथ चले।

              स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आपने अनेकों बार जेल यात्राएं कीं तथा अंग्रेंजों के ंजुल्म सहे। एक शिक्षित, ज्ञानी तथा संविधान की भरपूर समझ रखने वाले नेता के रूप में आपने अपना स्थान कांग्रेस पार्टी में बनाया। यही वजह थी कि 1947 में कांग्रेस पार्टी ने श्री रणवीर सिंह हुड्डा को भारतीय संविधान सभा का सदस्य मनोनीत किया। भारतीय संविधान सभा का सदस्य होने के दौरान आपने भारतीय संविधान की भरपूर सेवा की तथा इसके सुगमतापूर्ण लागू होने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हुड्डा जी अपने समय के प्रथम श्रेणी के राजनेताओं में गिने जाते थे। हालांकि वे स्वयं किसी पद या कुर्सी के लिए कभी न तो लालायित रहते थे और न ही उसके पीछे भागते थे। जबकि ठीक इसके विपरीत उनमें विद्यमान गुण, उनकी योग्यता, एक कुशल प्रशासक व राजनेता के रूप में स्थापित होती जा रही उनकी पहचान ने उन्हें उनके सक्रिय राजनैतिक   जीवनकाल में प्राय: कभी बिना किसी पद व ंजिम्मेदारी के नहीं रखा। 1947 में संविधान सभा के सदस्य बनने के पश्चात 1950 से 1952 तक आप प्रांतीय संसद के सम्मानित सदस्य रहे। इसके पश्चात अपने राजनैतिक जीवन के सफर को और आगे बढ़ाते हुए पहली बार 1952 में हुड्डा जी ने रोहतक की लोकसभा सीट पर भारी मतों से विजय हासिल की। 1957 में दूसरी बार वे रोहतक लोकसभा से विजयी हुए। इस दौरान उनकी योग्यता को देखते हुए उन्हें पंजाब प्रांत के उर्जा व कृषि मंत्रालय जैसे अति महत्वपूर्ण विभाग का केबिनेट मंत्री बनाया गया। यही वह दौर था जबकि देश की उर्जा का गौरव समझा जाने वाला भाखड़ा नंगल डैम निर्माणाधीन था। पंजाब के एक संबंधित मंत्री के नाते हुड्डा साहब ने भी आंजाद देश के सबसे पहले इस अति विशाल डैम के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि भारत का प्रत्येक विद्युत उर्जा उपभोक्ता चाहे वह कोई साधारण सा व्यक्ति हो अथवा बड़ा उद्योगपति, सभी रणवीर सिंह हुड्डा जैसे उन महापुरुषों के सदैव ऋणी रहेंगे जिन्होंने स्वतंत्र भारत को पहले विशाल विद्युत उत्पादन केंद्र के रूप में भाखड़ा नंगल डैम जैसी बेशंकीमती सौगात पेश की।

              1 नवम्बर 1966 को हरियाणा राज्य देश के एक नए प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया। मूल रूप से हरियाणा के ही निवासी होने के कारण आपने भी हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहना उचित समझा। जब पंडित भगवत दयाल शर्मा के नेतृत्व में हरियाणा का पहला मंत्रिमंडल गठित हुआ, उस समय श्री हुड्डा उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ केबिनेट मंत्री बने। इसके पश्चात हरियाणा में हुए मध्यावधि विधानसभा चुनावों में आपने किलोई विधानसभा सीट से 1968 में चुनाव लड़ा तथा विजयी हुए। अभी आपने हरियाणा की राजनीति में एक मंत्री के रूप में दिलचस्पी लेनी शुरु ही की थी कि कांग्रेस पार्टी ने एक बार पुन: केंद्रीय राजनीति में आपकी सेवाओं की ंजरूरत महसूस की। इस प्रकार 1972 में एक बार फिर आपने केंद्रीय राजनीति का रुंख किया तथा राज्यसभा के सदस्य चुने गए। लगभग 5 वर्षों तक केंद्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के बाद पार्टी ने उन्हें हरियाणा की राजनीति में वापस भेज दिया। 1977 से 1980 तक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के पद पर रहते हुए हुड्डा जी ने हरियाणा के एक-एक गांव तक कांग्रेस का झंडा फहरा दिया। कहा जा सकता है कि आज हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का जो भी जनाधार है, उसे सींचने, बनाने तथा स्थापित करने में चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान है। उनके बुलन्द राजनैतिक रुतबे को यूं भी समझा जा सकता है कि जब अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला पहली बार भारत आए तो वरिष्ठ गांधीवादी नेता के रूप में उनका स्वागत करने वाले श्री रणवीर सिंह हुड्डा एक विशिष्ट भारतीय नेता थे।

              रणवीर सिंह हुड्डा के रूप में भारत माता के इस सपूत ने एक लंबी, अनुभवी एवं समर्पित राजनैतिक पारी खेलने के बाद आंखिरकार गत् 1 ंफरवरी को इस संसार से अपना नाता तोड़ते हुए अपनी वास्तविक ईश्वरीय यात्रा का रुंख कर लिया। कितने गौरव की बात है कि उनके नक्शेंकदम पर चलते हुए उनके योग्य पुत्र भुपेन्द्र सिंह हुड्डा ने भी न केवल राजनीति में स्वयं को पूरी सफलता से स्थापित किया बल्कि अपने पिता द्वारा दो बार जीती गई लोकसभा सीट को भी लगातार तीन बार जीतकर अपने पिता के राजनैतिक उत्कर्ष को बरंकरार रखा। इतना ही नहीं बल्कि भुपेन्द्र सिंह हुड्डा अपने पिता ही की तरह हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। यहां तक कि वर्तमान समय में हरियाणा के सफल मुख्यमंत्री के रूप में हुड्डा जी राज्य को जिन बुलंदियों पर जिस कौशल व निपुणता के साथ ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, इसमें भी हो न हो उनके पिता स्व0 चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा के वे संस्कार अवश्य शामिल हैं जोकि उन्हें बाल्यकाल से ही प्राप्त हुए हैं।

              चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा के मरणोपरांत जिस प्रकार लाखों लोगों का जनसमूह रोहतक स्थित उनके निवास से लेकर आई एम टी स्थित शमशान घाट पर बनाए गए संविधान स्थल तक पटा पड़ा था तथा जिस तरह से देश के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं ने उनकी अंतिम शव यात्रा में उपस्थित होकर भारतीय संविधान सभा के इस अकेले बचे अन्तिम सदस्य को अपनी ओर से अलविदा कहा, उससे यह प्रमाणित हो गया कि चौधरी रणवीर सिंह हुड्डा वास्तव में समाज के हर वर्ग में लोकप्रिय थे तथा राजनैतिक विद्वेष तथा व्यक्तिगत् राजनैतिक प्रतिद्वन्द्विता से स्वयं को वे कितना दूर रखते थे। देश व प्रदेश के अनेकों नेताओं के अतिरिक्त भारतीय थल सेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने भारतीय सेना की ओर से अंतिम बिदाई देकर भारतीय संविधान सभा के इस अंतिम सदस्य के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त की। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी, योग्य प्रशासक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, महान समाजसेवी तथा भारतीय समाज में शालीनता एवं मृदुभाषी होने का अपना अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करने वाले इस महान आर्य समाजी व्यक्तित्व को मेरा भी शत्-शत् प्रणाम तथा शत्-शत् नमन।       निर्मल रानी

 

08 febrero

पंजाबी परिचय सम्मेलन में सैकड़ों युवक-युवतियों का हुआ परिचय

युवक-युवती परिचय सम्मेलन वर-वधु चयन प्रक्रिया को सरल बनाते हैं -श्री आदर्श कटियार

पंजाबी परिचय सम्मेलन में सैकड़ों युवक-युवतियों का हुआ परिचय

ग्वालियर 7 फरवरी । युवक युवतियों के परिचय सम्मेलन  से वर-वधु चयन प्रक्रिया सरल, समय बचाने वाला , कम खर्चीला और दाम्पत्य जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है । उक्त आशय के विचार पुलिस उप महानिरीक्षक      श्री आदर्श कटियार ने आज यहां दसवें पंजाबी युवक-युवती परिचय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुये व्यक्त किये । उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज पढ़ा लिखा प्रगतिशील समाज है । पंजाबियों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिये तथा सही वर-वधु चयन कर अच्छे परिवार का निर्माण करना चाहिये ।

       राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कृष्णकांता तोमर ने इस अवसर पर प्राचीन भारतीय स्वयंवर परम्परा का स्मरण कराते हुये कहा कि कन्या को नि:संकोच होकर अपना परिचय देना चाहिये और सूझ-बूझ पूर्वक वर का चयन करना चाहिये। उन्होंने सीता स्वयंवर  का भी उदाहरण दिया तथा कहा कि सीताजी ने स्वयं श्री रामजी का वर माला पहनायी थी । श्रीमती तोमर ने कहा कि अब समाज में महिलाओं को आगे आना चाहिये ।

       पंजाबी युवक-युवती परिचय सम्मेलन के उद्धाटन समारोह की अध्यक्षता पंजाबी परिषद ग्वालियर-चंबल संभाग के अध्यक्ष श्री सतपाल सडाना ने की । पंजाबी परिषद ग्वालियर के अध्यक्ष श्री अशोक मारवाह, संयुक्त अध्यक्ष श्री लख्मीचंद ठक्कर, महिला अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा रैली भी इस अवसर पर मंचासीन थी । उद्धाटन सत्र का संचालन श्री विनोद सूरी ने किया ।

       सम्मेलन के उद्धाटन सत्र के उपरांत सैकड़ों युवक-युवतियों का परिचय कराया गया । बहुत सी कन्याओं ने मंच पर आकर अपना परिचय दिया व अपनी रूचि आदि से भी अवगत कराया । सम्मेलन में ग्वालियर-चंबल संभाग के अलावा कटनी, जबलपुर, झांसी, दिल्ली एवं एनआरआई युवकों ने भी शिरकत की। सम्मेलन रविवार 8 फरवरी को भी सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा । पंजाबी परिषद के अध्यक्ष ने सभी पंजाबियों से सम्मेलन में शिरकत कर इसे कामयाब बनाने की अपील की । सम्मेलन स्थल पर कुण्डली मिलान की भी सुविधा सुलभ करायी गई है तथा वर-वधु पक्षों की आपसी मुलाकात हेतु भी पृथक से टेंट लगाये गये हैं ।

 

नाइजीरिया के अनुराग को तलाश है घरेलू पत्नी की

पंजाबी परिषद ग्वालियर द्वारा आयोजित युवक-युवति परिचय सम्मेलन में नाइजीरिया से आये 29 वर्षीय अनुराग खुल्लर से बातचीत की तो परिषद की व्यवस्थाओं से प्रसन्नता व्यक्त की  । दरअसर अनुराग को तलाश है घरेलू पत्नी की। चर्चा के समय उनके पिता श्री आनंद खुल्लर भी अनुराग के साथ थे । आनंद खुल्लर ने कहा कि हमें बहू तो चाहिये परन्तु वह बेटी की भांति परिवार में रह सके । ऐसी बच्ची चाहिये हालांकि परिचय सम्मेलन में उन्होंने 2-3 बच्चियों को देखा है । अनुराग खुल्लर मूलत: बटाला गुरूदासपुर पंजाब के निवासी है और वर्तमान में नाइजीरिया में जॉस कम्पनी में कार्यरत हैं । उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.काम व 3 वर्षीय कम्प्यूटर में डिग्री हासिल की है । अनुराग को भरोसेमंद खानदानी जीवनसाथी की तलाश है वे इसी तलाश के लिये ग्वालियर पंजाबी परिषद द्वारा आयोजित युवक-युवती परिचय सम्मेलन में भाग लेने आये हैं। अनुराग के पिता आनंद खुल्लर दिल्ली में एक प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी में कार्यरत हैं ।