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    December 31

    शोलापुर में ऊर्जा प्रशिक्षण संस्थान

    शोलापुर में ऊर्जा प्रशिक्षण संस्थान

     

    एनटीपीसी लिमिटेड  नेशनल पावर ट्रेनिंग इंस्टीटयूट (एनपीटीआई) के साथ मिलकर शोलापुर ऊर्जा प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना करेगी। इस संस्थान की स्थापना से एनटीपीसी-शोलापुर थरमल पावर स्टेशन के समीप ही युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल सकेगा।

           केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने शोलापुर महाराष्ट्र के  होटगी गांव में 27 दिसम्बर, 2008 को इस संस्थान का शिलान्यास किया। इस समारोह की अध्यक्षता श्री अनिल राजदान, सचिव (ऊर्जा) ने की।

           इस अवसर पर एनटीपीसी के अध्यक्ष श्री राकेश नाथ,, मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री आर.एस. शर्मा तथा एनटीपीआई के महानिदेशक डॉ0 एनएस सक्सेना तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

     

    दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (डीपीएल)

    दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (डीपीएल)

    पृष्ठ भूमि

           दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है, जिसका संचालन दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा होता है तथा इसका वित्तीय पोषण भारत सरकार करती है।  1951 में दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (डीपीएल) को भारत सरकार द्वारा यूनेस्को की एक परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्धाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। इसकी शुरूआत पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने, पुरानी दिल्ली में एक छोटी लाइब्रेरी के रूप में हुई थी। इसके बाद से ये दिल्ली जैसे मेट्रो शहर में एक प्रमुख सार्वजनिक पुस्तकालय के रूप में विकसित हुई।

           दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी का समस्त दिल्ली में फैले क्षेत्रीय पुस्तकालयों, शाखाओं तथा उपशाखाओं, आरसी पुस्तकालयों, सामुदायिक पुस्तकालयों, संग्रह स्टेशनों, खेल पुस्तकालयों, चलते-फिरते पुस्तकालयों, ब्रेल लाइब्रेरी इत्यादि  का नेटवर्क है। पुस्तकालय के पास हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में लगभग सभी विषयों पर, 14 लाख से ज्यादा पुस्तकों का बहुत ही अच्छा संग्रह है। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी 1954 अधिनियम के तहत पुस्तक एवं समाचार पत्र (सार्वजनिक पुस्तकालय) प्रदान  प्रावधानों का चौथा प्राप्ति पुस्तकालय है। यह पुस्तकालय दिल्ली वासियों को निशुल्क पुस्तकालय सुविधा प्रदान करता है। पुस्तकों का हस्तांतरण यहां की प्रमुख गतिविधियां हैं। यह पुस्तकालय बच्चों को भी अपनी सेवा देता है। तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे व्याख्यान, वाद-विवाद, प्रदर्शनी इत्यादि का भी आयोजन करता है। इस  लाइब्रेरी की प्रमुख विशेषता नेत्रहीन, कैदियों को अपनी सेवा देना तथा चलते-फिरते पुस्तकालय की सुविधा प्रदान करना है। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी भारत में सबसे बड़ी सार्वजनिक पुस्तकालय प्रणाली है तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे व्यस्त सार्वजनिक पुस्तकालय है।

    उपलब्धियां तथा मुख्य बिन्दु

           डीपीएल तथा इसकी शाखाएं सप्ताह में छह दिन खुलती थी। अब यह सदस्यों के लिए सातों दिन खुली रहती हैं (रविवार सहित राजपत्रित अवकाश छोड़कर)। डीपीएल के सदस्य अब सप्ताह अंत (रविवार) को भी पुस्तक ले और लौटा सकते हैं।

    निशुल्क इंटरनेट सेवा

                  दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (डीपीएल) सरोजनी नगर, केन्द्रीय लाइब्रेरी (एसपीमुखर्जी मार्ग) तथा पटेल नगर शाखाओं की लाइब्रेरी में उच्च गति की इंटरनेट सेवा सुविधा मुहैया करा रही हैं। इन शाखाओं की लाइब्रेरी में प्रत्येक में दस कम्प्यूटर टर्मिनल सदस्यों के इंटरनेट उपयोग के लिए रखे गये हैं। लाइब्रेरी के लिए ये बहुत सफल रहा है,  सभी टर्मिनल हमेशा व्यस्त रहते हैं। इसके अच्छे नतीजे को देखते हुए हमने शीघ्र ही इन शाखाओं में 10 टर्मिनल और लगाने का प्रस्ताव रखा है।

    निशुल्क सीडी डीवीडी सदस्यों को उधार देना

           डीपीएल ने केन्द्रीय लाइब्रेरी (एसपीमुखर्जी मार्ग, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने) में 24 अक्तूबर, 2008 से तथा 28 नवम्बर, 2008 से दक्षिण क्षेत्रीय लाइब्रेरी, सरोजनी नगर में सीडी डीवीडी निशुल्क उधार देना शुरू किया है। इस सेवा का विस्तार अब शीघ्र ही पटेल नगर शाखा तक किया जायेगा। इसमें अंग्रेजी, हिन्दी सिनेमा, शिक्षण, मनोरंजनात्मक तथा बच्चों के सीडी डीवीडी का संग्रह है।

    डीपीएल का सूची पत्र आन लाइन

           डीपीएल ने अपना सूचीपत्र (ओपीएसी) कोहा ओपन सोर्स लाइब्रेरी आटोमेशन सापऊटवेयर के साथ आन लाइन पर उपलब्ध कराया।  लाइब्रेरी कंप्यूटराइजेशन के लिए कोहा 3.0 का नया रूपान्तर इस्तेमाल करने  का गौरव प्राप्त करने वाला डीपीएल भारत का पहला पुस्तकालय है। पूरे विश्व में तथा डीपीएल के 45,000 सदस्य अब डीपीएल के चालू सूची पत्र शीर्षक, विषय तथा लेखक के नाम से इंटरनेट पर हमारी वेबसाइट   .ड्डद्रथ्.ढ़दृध्.त्द  या   http://delhpubiclibrary.in   पर देख सकते हैं।

    बाल इकाई का मरम्मत

           डीपीएल ने सरोजनी नगर, पटेल नगर तथा केन्द्रीय लाइब्रेरी शाखाओं  में अपनी बाल इकाई का मरम्मत किया है। इन शाखाओं में पुस्तकों, सीडी डीवीडी, फर्निचरों तथा बाल क्रीड़ाओं की पूरी नई संग्रह को जोड़ा गया है। डीपीएल के आधुनिकीकरण का कार्यक्रम इस वर्ष के शुरू में आरंभ किया गया तथा लोगों ने इस नई सेवा को उत्साहवर्धक रूप से सराहा है। बारी-बारी से इसे अब अन्य पुस्तकालयों में भी अपनाया जायेगा।

           लोगों को स्मरण दिला दें कि डीपीएल द्वारा दी जा रही सभी सेवाएं लाइब्रेरी के सदस्यों के लिए निशुल्क है। सदस्य के रूप में नामांकन की प्रक्रिया बहुत ही सरल है। नामांकन तथा अन्य जानकारियों के लिए आप हामरी वेबसाइट या   http://www.dpl.gov.in   देख सकते हैं। या अपने नजदीक के पुस्तकालय में जा सकते हैं।

     

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय, सचिव ने राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता पुरस्कार प्रदान किए

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय, सचिव ने राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता पुरस्कार प्रदान किए

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सचिव, श्रीमती सुषमा सिंह ने आज अपने मंत्रालय द्वारा आयोजित फोटो प्रभाग की 21वीं राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। त्रिवेन्द्रम के श्री किशोर कुमार और इंदौर के गिरीश जे.किंगर को रंगीन और श्वेत श्याम वर्ग में क्रमश: प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  पुरस्कार राशि के तौर पर 25 हजार रूपए नकद, एक प्रशस्ति पत्र और पटटिका प्रदान की गई।

           रंगीन फोटो वर्ग में द्वितीय पुरस्कार इंदौर के अमित और श्वेत और श्याम वर्ग में कोलकाता के संदीपन मजूमदार को प्रदान किया गया।  तृतीय पुरस्कार रंगीन में दिल्ली के रंजन बासू और श्वेत और श्याम में कोलकाता के अविजित दत्ता का प्रदान किया गया।

            श्रीमती सिंह ने कलाओं के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय केन्द्र की कलादीर्घा

    की प्रतियोगिता की पुरस्कृत और चुनींदा फोटो की प्रदर्शनी का भी उदघाटन किया।  यह प्रदर्शनी 6 जनवरी, 2009 तक सुबह 11 बजे से सांय 6 बजे तक चलेगी। इस अवसर पर श्रीमती सुषमा सिंह ने फोटो प्रभाग द्वारा हमारे देश के इतिहास के यादगार क्षणों को फोटो रूप में सहेजने और संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना की।

     

    2008 के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहल

    2008 के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहल

     

    सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

    वर्षांत समीक्षा : 2008

    सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस वर्ष के दौरान जनता तक सूचना के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर विषय की गुणवत्ताा और प्रसारण सिग्नलों के अभिग्रहण को भी सुनिश्चित करने के लिए अनेक नीतिगत पहल एवं कारगर उपाय किए हैं। प्रमुख पहलों में शामिल हैं :

    इंटरनेट प्रोटोकॉल टीवी पर नीति

    सरकार द्वारा इस वर्ष 8 सितंबर को इंटरनेट प्रोटोकॉल टीवी (आई पी टीवी) पर नीति की घोषणा की गयी थी। इसने दूरसंचार नेटवर्कों के माध्यम से लगभग 400 स्वीकृत सेटेलाइट टीवी चैनलों के सिग्नलों के वितरण के दूसरे स्वरूप के लिए दरवाजों को खोल दिया। यह ग्राहकों की नयी एवं पारस्परिक सेवाओं (सहभागी सेवाओं) की मांग को पूरा करने के लिए संवर्धित मूल्यों के साथ भारतीय दर्शक को एक नया डिजिटल दृश्य अनुभव प्रदान करती है। यह ब्रॉडकास्टरों और प्लेटफॉर्म सर्विस प्रोवाइडरों (सेवा प्रदानकत्तर्ााओं) दोनों के लिए विभिन्न व्यापारिक मॉडलों के निर्माण के लिए बढ़ते अवसरों को भी लेकर आयी है। आई पी टी वी पर नीति संबंधित मामलों पर ज्यादा स्पष्ट है। टेलीकॉम ऑपरेटर और केबल ऑपरेटर दोनों ही आई पी टी वी सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं जिसे उनके संबंधित लाइसेंसिंग शत्तर्ाों के आधार पर विनियमित किया जाएगा। इस नीति के तहत विषय को केबुल अधिनियम में निर्दिष्ट कार्यक्रम एवं विज्ञापन कोडों के आधार पर किया जाएगा, जो अश्लील विषय समेत अनेक आशंकाओं को दूर करेगा। यह विषय कोडों के उल्लंघन की जिम्मेदारी को परिभाषित करती है और यह बताती है कि उल्लंघन करने वालों से कैसे निपटा जाएगा और यह राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताओं का भी ख्याल रखती है। यह नीति आई पी टी वी सेवा प्रदान करने वाले लाइसेंस प्राप्त टेलीकॉम ऑपरेटरों को विषय सामग्री प्रदान करने के लिए ब्राडकास्टरों के साथ-साथ बहु प्रणाली संचालकों (मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों) और केबल ऑपरेटरों को भी सक्षम बनाती है। यही नीति समाचार एवं समसामयिकी को छोड़कर आई पी टी वी सेवा प्रदानकत्तर्ााओं को अपना विषय तैयार करने की भी शक्ति प्रदान करती है। ब्रॉडबैंड की सघनता के विस्तार के लिए सरकार की प्रतिबध्दता के साथ आई पी टी वी  विषय सामग्री के वितरण में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।

    केबुल सेवाओं का डिजिटलीकरण

    केबुल सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए एक उपयुक्त नियामक ढांचा तैयार करने के लिए सरकार कार्य कर रही है। ग्राहकों की संख्या को कम करके बताने और केबुल ऑपरेटरों द्वारा खास तौर पर टी आर पी शहरों में परिसंचरण शुल्क लगाने जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने में यह एक मुख्य घटक है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टी आर ए आई) का आकलन है कि वर्तमान में लगभग 6000 समरूप केबुल के एकतरफा समरूप केबल नेटवर्क से एकतरफा डिजिटल केबुल नेटवर्क में परिवर्तन की लागत 15,000 करोड़ रुपये होगी। अगर केबल नेटवर्कों को दो तरफा 750-850 मेगाहर्ट्ज ब्रॉडबैंड डिजिटल केबुल नेटवर्कों में परिवर्तित करना हो तो इस उन्नयन प्रक्रिया की लागत लगभग 64,000 करोड़ रुपये होगी। हेड इंड इन द स्काई (एच आई टी एस) की शुरुआत एक ऐसा नीतिगत पहल है जो निवेश को आवश्यक 15000 करोड़ रुपये से नीचे लाकर कुछ आवर्ती लागत के साथ लगभग 1200 करोड़ रुपये तक ला सकता है।

    एक दूसरी पहल जिस पर विचार किया जा रहा है वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की केबुल सेवाओ ंकी पुनर्संरचना पर हाल में की गयी सिफारिशों पर आधारित है। 5 वर्षों की समय अवधि की सिफारिश का प्रस्ताव किया गया है जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाओं को प्रदान करने के लिए दो तरफा केबुल नेटवर्कों को स्थापित करने के लिए लाइसेंस फीस से और यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लीगेशन फंड के सहयोग से मौजूदा और नये मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों और लोकल केबुल ऑपरेटरों को डिजीटलीकरण करना होगा। पांच वर्षों की अवधि के बाद समरूप सेवाओं के लिए केबुल संचालन के लिए कोई नया लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। ट्राई ग्रूप की सलाह पर मंत्रालय कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (सी ए एस) क्षेत्र का पहले दिल्ली, मुम्बई और कोलकता के शेष हिस्सों में विस्तार के लिए भी कार्य कर रहा है। कर और शुल्क संरचना के पुनर्गठन के द्वारा सेट टॉप बॉक्स की लागत को नीचे लाने के लिए उपायों पर विचार किया जा रहा है।

    हेड इंड इन द स्काई (एच आई टी एस)

    अल्प समय के केबुल ऑपरेटरों के डिजिटल मोड की सेवा में परिवर्तन में मुख्य घटक वह निवेश है जो डिजिटल हेड इंड, कंडीशनल एक्सेस सिस्टम और शॉर्ट मैसेजिंग सर्विस (एस एम एस) की स्थापना के लिए आवश्यक होती है। हेड इंड इन द स्काई मोड की सेवा अल्प समय के केबुल ऑपरेटरों के लिए इन लागतों को नीचे ला सकता है और इस प्रकार परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। एक नीति की शुरुआत के लिए हेड इंड इन द स्काई पर ट्राई की सिफारिशों पर मंत्रालय में विचार किया जा रहा है। हेड इंड इन द स्काई नीति का विस्तृत खांका पहले ही सार्वजनिक क्षेत्र में विचाराधीन है जिसका लक्ष्य है ग्रामीण क्षेत्रों में केबुल बाजार का और विस्तार करना क्योंकि सेट टॉप बॉक्सों की घटी कीमत की अव्यवहार्यता के कारण इन क्षेत्रों में केबुल की सुविधा नहीं है। इससे केबुल बाजार और मजबूत होगा और निवेशों पर वापसी में सुधार लाकर और निवेशों को आकर्षित किया जा सकेगा।

    मोबाइल टीवी

    मोबाइल टीवी की अपार क्षमता और उद्योग जगत द्वारा दिखायी गयी रुचि के कारण सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने ट्राई से हित धारकों के साथ उचित परामर्श के बाद अपनी सिफारिशों को भेजने का अनुरोध किया था। उस वक्त से ट्राई ने अपनी सिफारिशें  भेजी हैं जो सरकार के परीक्षण के अंतर्गत हैं। मंत्रालय मोबाइल टीवी ट्रांसमिशन के लिए विभिन्न ब्रॉडकास्टिंग प्रौद्योगिकी के लिए फील्ड ट्रायलों को अनुमति देने पर भी विचार कर रहा है।

    डी टी एच सेवा

    डायरेक्ट टू होम (डी टी एच) सेवा ग्राहकों के भवनों में सीधे टीवी सिग्नलों को प्रदान करने के लिए एक उपग्रह प्रणाली का प्रयोग करते हुए के यू बैंड में बहु चैनल कार्यक्रमों के वितरण के लिए भेजता है। डायरेक्ट टू होम ग्राहकों को भौगोलिक सचलता का लाभ प्रदान करता है यानि कि अगर एक ग्राहक डी टी एच हार्डवेयर एक बार खरीदने के बाद उसका प्रयोग भारत में कहीं भी कर सकता है। प्रसार भारती के द्वारा प्रस्तुत डी डी डायरेक्ट प्लस भारत का पहला और एकमात्र एफ टी ए डायरेक्ट टू होम सेवा है। इसके अलावा मेसर्स डिश टीवी, टाटा स्काई, सन डायरेक्ट टीवी, रिलायंस बिग टीवी, भारती टेलीमीडिया और भारत बिजनेस चैनल अन्य निजी व्यावसायिक डी टी एच सेवा संचालक है।

    सेटेलाइट रेडियो सर्विस

    मंत्रालय में सेटेलाइट रेडियो पर ट्राई की सिफारिशों पर विचार किया गया और एक प्रारूप नीति तैयार की गयी और उसे सिफारिशों के लिए ट्राई के पास भेजा गया। प्रारूप नीति पर ट्राई की सिफारिशों को प्राप्त कर लिया गया है और सरकार इन पर अपने विचार बनाने की प्रक्रिया में हैं।

    वर्तमान कार्यक्रम की समीक्षा के लिए सूचना व प्रसारण सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा एक प्रारूप विषय कोड बनाया गया और विज्ञापन कोडों को मंत्रालय की वेबसाइट पर लगाया गया। ब्रॉडकास्टिंग संगठनों, सिविल सोसायटी ग्रूपों और उपभोक्ता फोरमों इत्यादि की प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद इस समिति ने 05.03.2008 को सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी।

    टीवी न्यूज चैनलों के लिए एक प्रतिनिधि संगठन, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसियेशन (एन बी ए) ने विवाद निपटारा प्राधिकरण के लिए नियमावलियों और आचरण संहिता को मंत्रालय को सौंप दिया जिसने स्व विनियमन आधार पर 2 अक्टूबर, 2008 से कार्य करना शुरू कर दिया। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसियेशन का मूल रूप से निर्माण इसलिए किया गया था क्योंकि न्यूज ब्रॉडकॉस्टर्स सरकार द्वारा तैयार किए गए किसी भी प्रकार के विनियमन या विषय संहिता के खिलाफ थे। समरूप तरीके से केबुल टीवी नेटवर्कों के नियमों के उल्लंघन को देखने के लिए राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय निगरानी समितियों के लिए विस्तृत नियमावलियों को तैयार किया गया। इन समितियों में इनके अलावा महिलाओं के लिए काम करने वाले शीर्ष गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों को शामिल किया जाएगा।

    निजी टीवी चैनलों को जिन कार्यक्रम और विज्ञापन कोडों के प्रावधानों को भारत में टीवी चैनलों के संचालन के लिए दी गई अनुमति के अनुसार चलने के लिए और खासतौर पर अभद्र विषय के अवयस्कों पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखने के सामान्य परामर्श#चेतावनी दी जाती है।

    एक विशेष सुविधा इलेक्ट्रिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर की स्थापना की गयी जो
    09.06.2008 से प्रभाव में है ताकि भारत में प्राप्त किए जाने वाले ब्रॉडकास्ट सिग्नलों को लगातार रिकार्ड किया जा सके। शुरुआत में 100 टीवी चैनलों की निगरानी की जाती है और वर्तमान वित्ताीय वर्ष के दौरान 300 टीवी चैनलों की निगरानी की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।

    अभी तक अनुमति प्राप्त टीवी चैनलों की संख्या का सारांश इस प्रकार है :

    निजी टीवी चैनलों की कुल संख्या          :     417

    निजी चैनल (अपलिंक्ड)                 :     357 (197 न्यूज चैनल # 160 गैर न्यूज व करंट अफेयर्स चैनल)

    डाउनलिंक्ड टीवी चैनलों की संख्या          :     60 (13 न्यूज चैनल #47 गैर न्यूज व करंट अफेयर्स चैनल)

    दूरदर्शन व संसदीय चैनल                :     33

    कश्मीर चैनल के विषय में सुधार के लिए जम्मू एवं कश्मीर के लिए 300 करोड़ रुपये तक के एक विशेष पैकेज को मंजूर किया गया है।

    महत्वपूर्ण घटनाओं का कवरेज

    आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति ने कामनवेल्थ यूथ गेम्स पुणे 2008 और कामनवेल्थ गेम्स दिल्ली 2010 के कवरेज के लिए मेजवान ब्रॉडकास्टर के रूप में प्रसार भारती और प्रेस अंग के रूप में पत्र सूचना कार्यालय के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया। कामनवेल्थ यूथ गेम्स, पुणे 2008 का प्रसार भारती द्वारा उसके आंतरिक संसाधनों द्वारा विस्तार से कवरेज किया गया जिसे काफी सराहना मिली।

    एफ एम रेडियो

    इस वर्ष के दौरान मंत्रिमंडल ने निजी एजेंसियों (चरण - क्ष्क्ष्) के माध्यम से एफ एम रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज के विस्तार पर नीति के आंशिक सुधार में शेयरों के स्थानांतरण द्वारा कंपनियों के विलय#विसम्बध्दन#एकीकरण और सहायकों के निर्माण के लिए एफ एम ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों को अनुमति के अनुदान को मंजूरी दे दी। देश के 83 शहरों में कुल 241 निजी एफ एम चैनल चल रहे हैं। वर्तमान वर्ष के दौरान
    40.5 करोड़ रुपये समेत निजी एफ एम चैनलों से लाइसेंस फीस के द्वारा 1609 करोड़ रुपये की कुल राशि प्राप्त की गयी। सरकार ने ट्राई को एफ एम चरण - क्ष्क्ष्क्ष् की नीति पर अपने विचारों के बारे में बता दिया है और इसकी सिफारिश मांगी है।

    कम्यूनिटी रेडियो

    इस वर्ष के दौरान कम्यूनिटी रेडियो पर नीति को उदारीकृत किया गया ताकि जन समाज और उन स्वैच्छिक संगठनों को भी इसके दायरे में लाया जा सके जो लाभ के लिए नहीं काम करते हैं। पहले सिर्फ शैक्षिक संस्थानों को कम्युनिटी रेडियो स्थापित करने की अनुमति दी गयी थी। विकास एवं सामाजिक परिवर्तन के मुद्दे पर जन समाज की ज्यादा भागीदारी को अनुमति देने के दृष्टिकोण से सरकार द्वारा इस नीति का उदारीकरण किया गया।

    54वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

    वर्ष 2006 के लिए 54वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारत की राष्ट्रपति द्वारा सितंबर,2008 में प्रस्तुत किया गया। सर्वोत्ताम फिल्म का पुरस्कार मलयाली फिल्म 'पुलीजनम' को मिला। सर्वोत्ताम अभिनेता का पुरस्कार श्री सौमित्र चटर्जी और सर्वोत्ताम अभिनेत्री का पुरस्कार सुश्री प्रियामणि को मिला। बाल कलाकार दिव्या चाफडकर को सर्वोत्ताम बाल कलाकार का पुरस्कार मिला। वर्ष 2007 के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार फिल्म निर्देशक श्री तपन सिन्हा को दिया गया। भारत की आजादी की 60वीं वर्षगांठ की यादगारी में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड (जीवन पर्यंत उपलब्धि पुरस्कार) दिलीप कुमार, लता मंगेशकर, तपन सिन्हा ओर बी. सरोजा देवी को दिया गया।

    भारत का 39वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह

    भारत का 39वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा में 22.11.2008 से 02.12.2008 तक आयोजित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के साथ ही राष्ट्रीय फिल्म-विकास निगम (एन एफ डी सी) ने फिल्म उद्योग के लिए एक व्यापारिक प्लेटफॉर्म फिल्म बाजार आयोजित किया गया।

    आजादी एक्सप्रेस

    1857 के 150 वर्ष, आजादी के 60 वर्ष और शहीद भगत सिंह की जन्म शताब्दी के स्मरण में मोबाइल ट्रेन प्रदर्शनी की यात्रा 28 सितंबर, 2007 को शुरू हुई थी जो 70 स्थानों से होकर मई, 2008 में अपने अंतिम गंतव्य स्थल पर पहुँच कर संपन्न हुई। विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय एवं संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से मंत्रालय द्वारा इस प्रतिष्ठित परियोजना का क्रियान्वयन किया गया। ग्यारह कोचों वाली प्रदर्शनी ने तस्वीरों, चित्रों, कट आउटों, स्क्रॉलरों व ऑडियो-वीडियो के माध्यम से हमारे इतिहास के 150 वर्षों का चित्रण किया।

    सार्वजनिक सूचना अभियान

    पत्र सूचना कार्यालय सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों के बारे में ज्यादा जागरुकता पैदा करने के लिए समस्त भारत में सार्वजनिक सूचना अभियान आयोजित कर रहा है। इन अभियानों में सरकार की विकास स्कीमों पर प्रकाश डाला जाता है। सूचना एवं प्रसारण की अन्य मीडिया इकाइयों के माध्यम से प्रचार प्रयासों को पूरा किया जाता है। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक देश भर में कुल 234 सार्वजनिक सूचना अभियान आयोजित किए गए हैं।

    प्रिंट मीडिया नीति

    विदेशी निवेश के साथ या उसके बिना भारतीय प्रकाशकों द्वारा समाचार एवं समसामयिकी श्रेणी में पड़ने वाली रिपोर्टों यानि कि सार्वजनिक समाचारों और सार्वजनिक समाचारों पर टिप्पणियों को प्रकाशित करने वाले विदेशी पत्रिकाओं के भारतीय संस्करण को अनुमति देने का भी निर्णय लिया। ऐसे संस्करणों के प्रकाशक 26 प्रतिशत तक विदेशी निवेश प्राप्त कर सकते हैं। कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (जिसमें प्रवासी भारतीयों, भारतीय मूल के लोग के विदेशी प्रत्यक्ष निवेशों और मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थागत निवेशों द्वारा विभागीय निवेशों को साथ शामिल किया गया है) सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए विदेशी प्रत्यक्ष निवेशो ंकी रूपरेखा के प्रावधानों के अनुसार 26 प्रतिशत तक है।

    इन नियमों के उद्देश्य से निकाली गयी पत्रिका को 'सार्वजनिक समाचारों पर टिप्पणियों और सार्वजनिक समाचारों को गैर-प्रतिदिन आधार पर निकाली गयी पत्रिका के प्रकाशन' के रूप में परिभाषित किया जाता है।

    विज्ञापनों के लिए विदृप्रनि (डी ए वी पी) दरों का संशोधन

    मंत्रालय ने इस वर्ष के दौरान वि दृ प्र नि (डी ए वी पी) विज्ञापनों की मौजूदा दरों में 24 प्रतिशत की वृध्दि की है जो 1 सितंबर, 2008 को या उसके बाद जारी किए गए विज्ञापनों पर लागू होगा। वि दृ प्र नि के पैनल पर सभी समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं को संशोधित दरों के अंतर्गत शामिल किया गया है।

    इस निर्णय से 4000 से अधिक समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ लाभान्वित होंगी। लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को सबसे अधिक लाभ पहुँचेगा क्योंकि इन श्रेणियों के समाचार पत्रों के लिए जारी किए जाने वाले विज्ञापनों का प्रतिशत पहले बढ़ा दिया गया था।

    वि दृ प्र नि की विज्ञापन नीति का संशोधन

    लघु एवं क्षेत्रीय समाचार पत्र उद्योग की मदद के लिए सरकार प्रेस विज्ञापन नीति में पहले ही परिवर्तन ला चुकी है। मौद्रिक रूप में छोटे समाचार पत्रों के लिए विज्ञापनों की मात्रा को बढ़ाकर 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत कर दिया गया और मध्यम समाचार पत्रों के लिए इसे 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया।

    बोडो, डोगरी, गढ़वाली, खासी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, मिजो, नेपाली, राजस्थानी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, उर्दू और जनजातीय भाषाओं में क्षेत्रीय भाषा समाचार पत्रों के लिए न्यूनतम प्रकाशन अवधि की आवश्यकता को 36 महीने से घटाकर सिर्फ 6 महीने कर दी गयी। पिछड़े, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों और सीमा क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर, अंडमान निकोबार और 8 पूर्वोत्तार राज्यों से प्रकाशित सभी भाषाओं के सभी समाचार पत्रों को ऐसी ही छूट दी गयी। जो समाचार पत्र अपने प्रकाशन के एक वर्ष के भीतर ही एक लाख प्रति की बड़ी संख्या प्राप्त कर लेते हैं, अब उन पर ही एक वर्ष के प्रकाशन के बाद पैनल में शामिल करने के लिए विचार किया जाता है ताकि सरकार अपने संदेशों के लिए पाठकों की इस विशाल संख्या को न खो दे। उर्दू समाचार पत्रों को बढ़ाये गए समर्थन को प्रिंट विज्ञापन के लिए कुल आबंटन का 3.54 प्रतिशत निर्धारित करके सुनिश्चित कर दिया गया है।

     

    चुनाव अफसरों के लिए हैंडबुक और मैन्यूअल ,आयोग द्वारा अंतिम रूप, मिलेंगे जल्द

    चुनाव अफसरों के लिए हैंडबुक और मैन्यूअल ,आयोग द्वारा अंतिम रूप, मिलेंगे जल्द

    ईवीएम की मांग भी बुलाई

    भोपाल : 29 दिसम्बर, 2008

    कानून, कायदों के मुताबिक चुनाव कराने वाले अफसरों के लिये भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हैंडबुक और मैन्युअल (निर्देशिका) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही इनका प्रदाय इन अफसरों को कर दिया जायेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जरूरी मांग भी बुलाई गई है।

    प्रिजाइडिंग अफसरों और रिटर्निंग अफसरों की हैंडबुक को हाल ही में संशोधित कर दिया गया है। आयोग अब उम्मीदवारों की हैंडबुक, निर्देशों और प्रेक्षक मार्गदर्शिका की सारांश पुस्तक को एकीकृत कर जल्द अंतिम रूप देने जा रहा है। इसकी सभी संबंधितों को पर्याप्त प्रतियों का प्रदाय सुनिश्चित किया जायेगा।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की मौजूदा उपलब्धता, अनुमानित जरूरत और कमी यदि है तो इसका भी ब्यौरा बुला लिया है। ईवीएम रेण्डमाइजेशन के सिलसिले में दिये गये ताजा निर्देशों से सीईओ को खुद भी अच्छे से वाकिफ होने के लिये कहा गया है। इसके मद्देनजर उन्हें एक साफ्टवेयर तैयार कर इसे अनुमोदित भी करना है।

     

    लंबित प्रकरणों का निपटारा दो माह के अंदर करें

    लंबित प्रकरणों का निपटारा दो माह के अंदर करें

    राजस्व राज्यमंत्री श्री करनसिंह वर्मा के निर्देश

     

    राजस्व विभाग में बंटवारा, नामांकन, सीमांकन आदि से संबंधित सभी लंबित प्रकरणों का निपटारा दो माह के भीतर हो जाना चाहिए। राजस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री करणसिंह वर्मा ने ये निर्देश आज यहां आयोजित राजस्व विभाग की राज्य स्तरीय बैठक में भाग ले रहे सभी 50 जिलों के भूअभिलेख अधीक्षकों, डिप्टी कलेक्टरों और तहसीलदारों को दिए। श्री वर्मा ने पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए 15 दिनों में डीपीसी कराने के निर्देश भी दिए। प्रमुख सचिव, राजस्व श्री मदनमोहन उपाध्याय और आयुक्त, भू-अभिलेख श्री विनोद कुमार भी बैठक में उपस्थित थे।

    श्रम, राजस्व एवं पुनर्वास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग किसानों से जुड़ा हुआ विभाग है। किसानों को राजस्व प्रकरणों के निपटारे में कभी कोई कठिनाई नहीं आनी चाहिए और समय-सीमा में सभी प्रकरणों का निपटारा किया जाए। श्री वर्मा ने कहा कि देखने में आया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को दी जाने वाली जमीन भू-माफिया खरीद लेते हैं। ऐसे मामलों को तत्काल प्रभाव से रोका जाकर दोषियों के विरुध्द कठोर कार्यवाई की जाए।

    राजस्व राज्यमंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाने की है। राजस्व विभाग की भूमिका इस दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हमारे प्रदेश में कुल निवासियों में 70 प्रतिशत किसान और 110 लाख भू-धारी खातेदार हैं। बैठक में निर्धारित समय पर भूमि बंटवारा, सीमांकन, नामांतरण, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका वितरण, शासकीय - नजूल तथा निस्तार भूमि का अनुरक्षण, अतिक्रमण, सीमा चिन्हों, चांदे मुनारों का अनुरक्षण तथा नष्ट सीमा चिन्हों के पुननिर्माण, नक्शों का अद्यतीकरण, राजस्व एवं वनभूमि का सीमांकन, डायवर्सन आदि मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

     

    बैठक में राजस्व मंत्री के निर्देश

    ·                     दो माह के भीतर हो सभी लंबित प्रकरणों का निपटारा

    ·                     प्रमाण पत्रों के लिए किसानों को चक्कर न लगाना पड़े

    ·                     अजा, जजा को आवंटित भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा न हो

    ·                     म.प्र. को विकसित राज्य बनाने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका राजस्व अधिकारियों की

    ·                     पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद के लिए डीपीसी 15 दिन के भीतर हो

    ·                     बिचौलियों की भूमिका पूर्णत: समाप्त हो

    ·                     नियमों का सरलीकरण हो

    ·                     नामांतरण प्रकरणों में विलम्ब न हो

    ·                     अविवादित प्रकरण 31 जनवरी तक निराकृत हों

    ·                     रजिस्ट्री की एक कापी तहसीलदार को तुरंत भेजी जाए

     

    December 30

    दो दिवसीय केरियर मार्गदर्शन शिविर 27 जनवरी से सभी ब्लॉकों में

    दो दिवसीय केरियर मार्गदर्शन शिविर 27 जनवरी से सभी ब्लॉकों में

    सेमेस्टर पध्दति के प्रति सकारात्मक वातावरण बने - श्रीमती अर्चना चिटनीस

    स्कूलों में पढ़ने वाले दसवीं व बारहवीं कक्षा के छात्रों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुरूप उपयुक्त केरियर चुनने के लिए राज्य सरकार आगामी 27 जनवरी से पांच फरवरी तक सभी ब्लॉकों में केरियर मार्गदर्शन शिविर लगायेगी। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आज मंत्रालय में आयोजित स्वामी विवेकानंद केरियर मार्गदर्शन योजना की समीक्षा बैठक में दी। बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री सेवाराम, आयुक्त लोक शिक्षण श्री बी.आर. नायडू और आयुक्त उच्च शिक्षा श्री आशीष उपाध्याय भी उपस्थित थे।

    श्रीमती अर्चना चिटनीस ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर आयोजित इन शिविरों में दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र भाग लेंगे। शिविर में छात्रों के परिवहन एवं भोजन की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जायेगी। -इसके पूर्व भोपाल में 17-18 जनवरी को केरियर काउंसलर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा, जिसमें विभिन्न विषयों के लगभग एक हजार मास्टर ट्रेनर्स भाग लेंगे। श्रीमती चिटनीस ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और स्कूल शिक्षा के काउंसलर्स को शामिल किया जायेगा। शिविरों में छात्र-छात्राओं को यह बताया जायेगा कि वे किस प्रकार अपना केरियर बेहतर बना सकते हैं। रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुरूप कौन से व्यावसायिक और रोजगारमूलक पाठयक्रमों में जा सकते हैं।

    इस अवसर पर बताया गया कि स्वामी विवेकानंद केरियर मार्गदर्शन योजना वर्ष 2005-06 के दौरान स्वीकृत की गई थी। योजना के तहत प्रदेश के 1479 हायर सेकेंडरी स्कूल, 308 शासकीय कॉलेज, 512 आदिम जाति कल्याण विभाग के स्कूल, 48-48 पॉलीटेक्निक एवं आई.टी.आई. में विवेकानंद केरियर प्रकोष्ठ स्थापित किये गये हैं। योजना के प्रारंभ में वर्ष 2007-08 तक कुल एक लाख 87 हजार 304 छात्र लाभान्वित हुए हैं। जिनमें उच्च शिक्षा के 56 हजार 409 तथा 1,30,896 स्कूल शिक्षा के हैं। चालू साल के दौरान कुल दो लाख 13 हजार छात्रों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में उच्च शिक्षा व स्कूल शिक्षा के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

    सेमेस्टर सिस्टम

    उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने विभागीय प्रमुख सचिव श्री सेवाराम और आयुक्त श्री आशीष उपाध्याय के साथ कॉलेजों में लागू सेमेस्टर पध्दति की समीक्षा की। श्रीमती चिटनीस ने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम के प्रति कॉलेजों में सकारात्मक वातावरण निर्मित होना चाहिए। प्राध्यापकों में सेमेस्टर सिस्टम के प्रति रुचि एवं भावनात्मक लगाव हो, इस पर विचार किया जाए। उन्होंने आयुक्त से सेमेस्टर पध्दति के तहत की जा रही गतिविधियों की जानकारी ली तथा उसमें और आवश्यक सुधार के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वातावरण स्वस्थ और उत्कृष्ट होना चाहिये। शिक्षा के प्रति शिक्षकों, प्राध्यापकों में नैतिक उत्तरदायित्व हो। इस अवसर पर उच्च शिक्षा संचालनालय के अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

     

    December 29

    शनिचरी अमावस्या पर प्राचीन सिध्द शनि मन्दिर में लाखों श्रध्दालुओं ने दर्शन किये

    शनिचरी अमावस्या पर प्राचीन सिध्द शनि मन्दिर में लाखों श्रध्दालुओं ने दर्शन किये

     

    ग्वालियर, 27 दिसम्बर 08/ ग्वालियर जिला मुख्यालय से लगभग 17 किलोमीटर दूर चंबल संभाग के मुरैना जिले के ग्राम एेंती में स्थित शनिचरा पर्वत पर देश के प्राचीन शनि मन्दिर में आज शनिचरी अमावस्या के दिन लाखों लोगों ने सिद्व शनिदेव प्रतिमा के दर्शन किये। शनिचरा पर्वत पर आने वाले श्रद्वालुओं ने यहाँ शनि देव की स्थापित प्रतिमा की प्रतिकृति पर तेल चढ़ाया । समूचा शनिचरा पर्वत सिध्दस्थल होने के कारण श्रध्दालुगण मुण्डन करवा रहे थे। शरीर पर सरसों का तेल मल रहे थे और स्नान कर शनिदेव का दर्शन लाभ लें स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रहे थे। शनिदेव के दर्शन उपरान्त श्रध्दालुगण अपने पुराने जूते, मौजे,वस्त्र आदि का भी वहाँ त्याग कर रहे थे । शनिचरा पर्वत पर यत्र तत्र श्रध्दालुओं के बाल तथा त्यागे हुए चप्पल जूते एवं वस्त्र आदि बिखरे पड़े थे । शनिदेव की प्रतिमा पर चढ़ावे के तेल के भी कई ड्रम भर चुके थे । कल रात्रि से ही श्रृद्वालुओं के मन्दिर पहुँचकर पूजा अर्चना का जो सिलसिला प्रारम्भ हुआ वो आज देर शाम तक भी निरन्तर चलता रहा ।

          जनश्रुति के अनुसार देश के इस अति प्राचीन शनि मन्दिर की स्थापना विक्रमादित्य द्वारा की गई थी । वीरान वन क्षेत्र में स्थापित यह मन्दिर कभी तन्त्र साधना का भी महत्वपूर्ण केन्द्र रहा था । कई राजवंशों ने यहां शनिदेव की अराधना की। एक जानकारी के अनुसार कुशवाह, चन्देल, जाट तथा सिंधिया राजघराने ने समय समय पर इस मन्दिर में पूजा अर्चना की व इसकी देखभाल पर भी ध्यान दिया। वर्तमान में इस मन्दिर की व्यवस्था राज्य शासन के औकाफ विभाग द्वारा की जा रही है। मुरैना जिला प्रशासन ने पूरी रूचि लेकर शनिचरी अमावस्या के मेले की व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया है। अब यहां शनि दर्शन को आने वाले लाखों श्रध्दालुगण सुगमता से देव प्रतिमा का दर्शन लाभ ले रहे हैं। साथ ही अब तेल चढ़ाना भी आसान हो गया है। और दर्शन पूर्व पवित्र कुण्ड के जल का स्नान भी फुव्वारों के माध्यम से सरल हो सका है। पहले कांच की शीशियों के उपयोग के दौरान टूट जाने से बिखरने वाले कांच से बहुत से लोग जख्मी होते थे और तेल फिसलन का कारण बनता था। मेले में विगत तीन वर्षों से नाइयों का भी पंजीयन कराया जा रहा है तथा उन्हें ब्लेड भी दिये जा रहे हैं। उन्हें हर व्यक्ति के लिये नया ब्लेड इस्तेमाल करने की भी हिदायत दी गई है।

          मेला स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के शासकीय चिकित्सक डॉ. एल आर. किसानिया के मार्ग दर्शन में चिकित्सा दल श्रध्दालुओं के उपचार के लिये सेवारत है। चिकित्सा दल के पास ओ आर एस. , मलेरिया रोधक दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, ऐन्टी बॉयोटिक, पेट दर्द, उल्टी, बुखार, अस्थमा सहित विविध रोगों के उपचार, मरहम पट्टी और ड्रिप सैट आदि लगाने की पूरी व्यवस्थाएं सुलभ हैं। देर शाम तक लगभग दो सौ श्रध्दालु रोगी उनकी सेवाओं का लाभ उठा चुके थे। समाज सेवी संस्थाएं भी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। ग्वालियर की गोल्डन ऑर्गेनाइजेशन समिति वैद्यराज डॉ. पुष्पराज जैन की देखरेख में श्रध्दालुओं को आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा सुलभ करवा रही है। डॉ. पुष्पराज जैन का कहना है कि वह  वर्षों से हर शनिचरी अमावस्या पर आकर श्रध्दालुओं की मुफ्त सेवा करते हैं। ग्वालियर की कई आयुर्वेदिक दवा कम्पनियां भी उन्हें इस अवसर पर मुफ्त वितरण हेतु दवाएं सुलभ कराती हैं। उनके इस कार्य में श्री विशिष्ठ राम एवं श्री बृजमोहन अग्रवाल भी पूरा सहयोग कर रहे थे।

          मेला क्षेत्र में कानून व्यवस्था की दृष्टि से चौकस बन्दोबस्त किये गये हैं। स्थान-स्थान पर कार्यकारी मैजिस्ट्रैट तथा पुलिस अधिकारी तैनात हैं। जिला कलेक्टर मुरैना श्री एम के. अग्रवाल तथा पुलिस अधीक्षक श्री सन्तोष कुमार सिंह भी निरन्तर सुबह से ही मन्दिर परिसर में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। साथ ही यातायात की दृष्टि से भी पूर्व वर्षों की तुलना में बेहतर इन्तजाम किये गये हैं।

     

    श्री शनिदेव मंदिर एेंती, जिला मुरैना

    ग्राम एेंती, तहसील व जिला मुरैना में शनि पर्वत क्षेत्र में विश्व प्रसिध्द श्री शनिदेव महाराज का मंदिर अति-प्राचीनकाल से स्थापित है । मंदिर के निर्माण का निश्चित समय यद्यपि ज्ञात नहीं है , किन्तु किवदंतियों के अनुसार इसकी स्थापना त्रेताकालीन मानी जाती है। मुगलकाल में अनेक हिन्दू देवस्थानों की भांति इस प्राचीन मंदिर को भी ध्वस्त करने का प्रयत्न किया गया था । ग्वालियर राज्य के सिंधिया शासकों ने मंदिर का नवनिर्माण कराया तथा मंदिर की देखरेख के लिये आराजी एवं नगदी नेमणूक कायम किया । शनि पर्वत पर स्थित पांच मंदिरों की देखरेख मंहत श्री लक्ष्मण दास करते थे, जिनकी भक्ति से प्रभावित होकर तत्कालीन शासक दौलतराव सिंधिया द्वारा सम्वत् 1865 सन् 1808 में ग्राम एेंती की जागीर प्रदान की गई। बाद में मंहत बालकदास के अयोग्य हो जाने से सन् 1945 में जागीर जब्त कर मंदिर औकाफ के प्रबंधन को सौंप दिये गये तथा इनकी स्थानीय निगरानी का दायित्व तहसील मुरैना को सौंपा गया ।

     

    खगोलविदों के अनुसार...

    खगोलविदों के अनुसार शनि सौर मण्डल का सबसे सुन्दर और मनोरम पिण्ड है। शनि के चारों तरफ नीले वलय घूमते रहते हैं। पृथ्वी से 700 गुना विशाल गृह व 75 गुना भारी शनि मन्दगति से सूर्य की परिक्रमा करता है। एक शनि वर्ष पृथ्वी के 25 हजार दिन जितना लम्बा होता है।

     

    ज्योतिष एवं धर्मग्रन्थों के अनुसार ....

    शनिदेव सूर्य की द्वितीय पत्नी छाया के पुत्र हैं । ज्योतिष की अवधारणा के अनुसार शनि एक राशि पर तीस माह तक भ्रमण करते हैं । शनि भगवान शंकर के शिष्य हैं । भैंसा शनि का वाहन है । कहते हैं कि हनुमान जी ने घायल शनि के जख्मों पर तिल्ली तथा सरसों के तेल के फोहे रखे जिससे उन्हें आराम मिला । तभी से शनिवार को शनिदेव के तैलाभिषेक की परम्परा प्रारंभ हुई ।

           ज्योतिषविद्ों का मानना है कि शनि न तो पीड़ादायक ग्रह और न ही भयभीत करने वाला। शनि वस्तुत: भक्तों को सौम्यता, शालीनता , न्याय प्रियता और अध्यात्मपरक मानसिकता का दाता है । शनि मकर और कुम्भ राशि का स्वामी है । मिथुन , कन्या, तुला और वृष राशियां इसकी मित्र हैं । गृहों में बुध और शुक्र शनि के मित्र गृह माने जाते हैं । शनि को नीलम, लोहा, काली उड़द, काले तिल, नमक, शीशम , काले रंग की वस्तुएं, तेल, नाग व भैंस आदि का स्वामी भी माना जाता है । शनि कल कारखानों व मशीनरी आदि सहित रहस्य विद्या और सफलता का द्योतक भी माना जाता है। 

     

     

    शनिचरी अमावस्या पर प्राचीन सिध्द शनि मन्दिर में लाखों श्रध्दालुओं ने दर्शन किये

    शनिचरी अमावस्या पर प्राचीन सिध्द शनि मन्दिर में लाखों श्रध्दालुओं ने दर्शन किये

     

    ग्वालियर, 27 दिसम्बर 08/ ग्वालियर जिला मुख्यालय से लगभग 17 किलोमीटर दूर चंबल संभाग के मुरैना जिले के ग्राम एेंती में स्थित शनिचरा पर्वत पर देश के प्राचीन शनि मन्दिर में आज शनिचरी अमावस्या के दिन लाखों लोगों ने सिद्व शनिदेव प्रतिमा के दर्शन किये। शनिचरा पर्वत पर आने वाले श्रद्वालुओं ने यहाँ शनि देव की स्थापित प्रतिमा की प्रतिकृति पर तेल चढ़ाया । समूचा शनिचरा पर्वत सिध्दस्थल होने के कारण श्रध्दालुगण मुण्डन करवा रहे थे। शरीर पर सरसों का तेल मल रहे थे और स्नान कर शनिदेव का दर्शन लाभ लें स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रहे थे। शनिदेव के दर्शन उपरान्त श्रध्दालुगण अपने पुराने जूते, मौजे,वस्त्र आदि का भी वहाँ त्याग कर रहे थे । शनिचरा पर्वत पर यत्र तत्र श्रध्दालुओं के बाल तथा त्यागे हुए चप्पल जूते एवं वस्त्र आदि बिखरे पड़े थे । शनिदेव की प्रतिमा पर चढ़ावे के तेल के भी कई ड्रम भर चुके थे । कल रात्रि से ही श्रृद्वालुओं के मन्दिर पहुँचकर पूजा अर्चना का जो सिलसिला प्रारम्भ हुआ वो आज देर शाम तक भी निरन्तर चलता रहा ।

          जनश्रुति के अनुसार देश के इस अति प्राचीन शनि मन्दिर की स्थापना विक्रमादित्य द्वारा की गई थी । वीरान वन क्षेत्र में स्थापित यह मन्दिर कभी तन्त्र साधना का भी महत्वपूर्ण केन्द्र रहा था । कई राजवंशों ने यहां शनिदेव की अराधना की। एक जानकारी के अनुसार कुशवाह, चन्देल, जाट तथा सिंधिया राजघराने ने समय समय पर इस मन्दिर में पूजा अर्चना की व इसकी देखभाल पर भी ध्यान दिया। वर्तमान में इस मन्दिर की व्यवस्था राज्य शासन के औकाफ विभाग द्वारा की जा रही है। मुरैना जिला प्रशासन ने पूरी रूचि लेकर शनिचरी अमावस्या के मेले की व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया है। अब यहां शनि दर्शन को आने वाले लाखों श्रध्दालुगण सुगमता से देव प्रतिमा का दर्शन लाभ ले रहे हैं। साथ ही अब तेल चढ़ाना भी आसान हो गया है। और दर्शन पूर्व पवित्र कुण्ड के जल का स्नान भी फुव्वारों के माध्यम से सरल हो सका है। पहले कांच की शीशियों के उपयोग के दौरान टूट जाने से बिखरने वाले कांच से बहुत से लोग जख्मी होते थे और तेल फिसलन का कारण बनता था। मेले में विगत तीन वर्षों से नाइयों का भी पंजीयन कराया जा रहा है तथा उन्हें ब्लेड भी दिये जा रहे हैं। उन्हें हर व्यक्ति के लिये नया ब्लेड इस्तेमाल करने की भी हिदायत दी गई है।

          मेला स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के शासकीय चिकित्सक डॉ. एल आर. किसानिया के मार्ग दर्शन में चिकित्सा दल श्रध्दालुओं के उपचार के लिये सेवारत है। चिकित्सा दल के पास ओ आर एस. , मलेरिया रोधक दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, ऐन्टी बॉयोटिक, पेट दर्द, उल्टी, बुखार, अस्थमा सहित विविध रोगों के उपचार, मरहम पट्टी और ड्रिप सैट आदि लगाने की पूरी व्यवस्थाएं सुलभ हैं। देर शाम तक लगभग दो सौ श्रध्दालु रोगी उनकी सेवाओं का लाभ उठा चुके थे। समाज सेवी संस्थाएं भी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। ग्वालियर की गोल्डन ऑर्गेनाइजेशन समिति वैद्यराज डॉ. पुष्पराज जैन की देखरेख में श्रध्दालुओं को आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा सुलभ करवा रही है। डॉ. पुष्पराज जैन का कहना है कि वह  वर्षों से हर शनिचरी अमावस्या पर आकर श्रध्दालुओं की मुफ्त सेवा करते हैं। ग्वालियर की कई आयुर्वेदिक दवा कम्पनियां भी उन्हें इस अवसर पर मुफ्त वितरण हेतु दवाएं सुलभ कराती हैं। उनके इस कार्य में श्री विशिष्ठ राम एवं श्री बृजमोहन अग्रवाल भी पूरा सहयोग कर रहे थे।

          मेला क्षेत्र में कानून व्यवस्था की दृष्टि से चौकस बन्दोबस्त किये गये हैं। स्थान-स्थान पर कार्यकारी मैजिस्ट्रैट तथा पुलिस अधिकारी तैनात हैं। जिला कलेक्टर मुरैना श्री एम के. अग्रवाल तथा पुलिस अधीक्षक श्री सन्तोष कुमार सिंह भी निरन्तर सुबह से ही मन्दिर परिसर में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। साथ ही यातायात की दृष्टि से भी पूर्व वर्षों की तुलना में बेहतर इन्तजाम किये गये हैं।

     

    श्री शनिदेव मंदिर एेंती, जिला मुरैना

    ग्राम एेंती, तहसील व जिला मुरैना में शनि पर्वत क्षेत्र में विश्व प्रसिध्द श्री शनिदेव महाराज का मंदिर अति-प्राचीनकाल से स्थापित है । मंदिर के निर्माण का निश्चित समय यद्यपि ज्ञात नहीं है , किन्तु किवदंतियों के अनुसार इसकी स्थापना त्रेताकालीन मानी जाती है। मुगलकाल में अनेक हिन्दू देवस्थानों की भांति इस प्राचीन मंदिर को भी ध्वस्त करने का प्रयत्न किया गया था । ग्वालियर राज्य के सिंधिया शासकों ने मंदिर का नवनिर्माण कराया तथा मंदिर की देखरेख के लिये आराजी एवं नगदी नेमणूक कायम किया । शनि पर्वत पर स्थित पांच मंदिरों की देखरेख मंहत श्री लक्ष्मण दास करते थे, जिनकी भक्ति से प्रभावित होकर तत्कालीन शासक दौलतराव सिंधिया द्वारा सम्वत् 1865 सन् 1808 में ग्राम एेंती की जागीर प्रदान की गई। बाद में मंहत बालकदास के अयोग्य हो जाने से सन् 1945 में जागीर जब्त कर मंदिर औकाफ के प्रबंधन को सौंप दिये गये तथा इनकी स्थानीय निगरानी का दायित्व तहसील मुरैना को सौंपा गया ।

     

    खगोलविदों के अनुसार...

    खगोलविदों के अनुसार शनि सौर मण्डल का सबसे सुन्दर और मनोरम पिण्ड है। शनि के चारों तरफ नीले वलय घूमते रहते हैं। पृथ्वी से 700 गुना विशाल गृह व 75 गुना भारी शनि मन्दगति से सूर्य की परिक्रमा करता है। एक शनि वर्ष पृथ्वी के 25 हजार दिन जितना लम्बा होता है।

     

    ज्योतिष एवं धर्मग्रन्थों के अनुसार ....

    शनिदेव सूर्य की द्वितीय पत्नी छाया के पुत्र हैं । ज्योतिष की अवधारणा के अनुसार शनि एक राशि पर तीस माह तक भ्रमण करते हैं । शनि भगवान शंकर के शिष्य हैं । भैंसा शनि का वाहन है । कहते हैं कि हनुमान जी ने घायल शनि के जख्मों पर तिल्ली तथा सरसों के तेल के फोहे रखे जिससे उन्हें आराम मिला । तभी से शनिवार को शनिदेव के तैलाभिषेक की परम्परा प्रारंभ हुई ।

           ज्योतिषविद्ों का मानना है कि शनि न तो पीड़ादायक ग्रह और न ही भयभीत करने वाला। शनि वस्तुत: भक्तों को सौम्यता, शालीनता , न्याय प्रियता और अध्यात्मपरक मानसिकता का दाता है । शनि मकर और कुम्भ राशि का स्वामी है । मिथुन , कन्या, तुला और वृष राशियां इसकी मित्र हैं । गृहों में बुध और शुक्र शनि के मित्र गृह माने जाते हैं । शनि को नीलम, लोहा, काली उड़द, काले तिल, नमक, शीशम , काले रंग की वस्तुएं, तेल, नाग व भैंस आदि का स्वामी भी माना जाता है । शनि कल कारखानों व मशीनरी आदि सहित रहस्य विद्या और सफलता का द्योतक भी माना जाता है। 

     

     

    राशन दुकानों की पड़ताल शुरू

    राशन दुकानों की पड़ताल शुरू

    राज्यमंत्री श्री जैन ने दी चार दुकानों पर दबिश, शाजापुर और शुजालपुर में थमाए नोटिस, स्टॉक रजिस्टर में अफसर करेंगे दस्तखत

    Bhopal:Sunday, December 28, 2008

     

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बंटने वाले राशन और अन्य जरूरी सामग्री की उपभोक्ता भण्डारों पर दशा देखने की कार्रवाई अब तेज हो गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारस चंद्र जैन इस सिलसिले आज अपने दौरे के मौके पर शाजापुर और शुजालपुर के चार उपभोक्ता भण्डारों पर अचानक पहुंचे। खामियों को लेकर इन्हें शो-काज नोटिस तत्काल थमाए गए हैं और जिला खाद्य नियंत्रक को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। श्री जैन ने आज अपने निर्देश में प्रदेश की सभी ऐसी राशन दुकानों का हर महीने अनिवार्य निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान इनके स्टॉक रजिस्टर में अफसरों को अपने दस्तखत करने को भी कहा गया है।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न और अन्य चीजों की आम उपभोक्ताओं को उपलब्धता और इसकी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद प्रदेश में तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आम उपभोक्ता के हितों को लेकर सजग हैं और उन्होंने इसी मकसद से अपने राज्यमंत्री से मुस्तैद कार्रवाई की अपेक्षा की है। केन्द्र से प्रदेश की मौजूदा मांग के मुताबिक खाद्यान्न का कोटा बढ़ाने की कार्रवाई भी तेज की जा रही है, फिलहाल यह 20 लाख मैट्रिक टन कम आंकी गई है। सारे इंतजाम को लेकर एक पुख्ता खाका तैयार किया जा रहा है।

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पारस चंद्र जैन आज शाजापुर जिले के अपने दौरे पर थे। रास्ते में अचानक रुककर उन्होंने शाजापुर जिला मुख्यालय के महाराणा प्रताप महिला उपभोक्ता भण्डार और गायत्री उपभोक्ता भण्डार पर छापा डाला। इन दोनो ही दुकानों पर पाई गई स्टॉक संबंधी खामियों को लेकर तत्काल उन्होंने शो-काज नोटिस जारी किये और जिला नियंत्रक को जांच करने का निर्देश दिया।

    शुजालपुर तहसील मुख्यालय पर भी उन्हें हालात अच्छे नहीं दिखे थे जबकि वहां आदर्श उपभोक्ता भण्डार नाम की दुकान बंद पड़ी हुई थी। भनक लगते ही दुकानदार भागा-भागा वहां पहुंचा जरूर लेकिन दुकान बंद होने का कोई संतोषप्रद जवाब उसके पास नहीं था। शुजालपुर में ही मार्केटिंग उपभोक्ता भण्डार की भी राज्यमंत्री ने पड़ताल की। अनियमितताओं को लेकर इन्हें शो-काज नोटिस देने और जांच की कार्रवाई के निर्देश तत्काल दिये गये।

    राज्यमंत्री श्री जैन ने प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों के किसी भी मौके पर किये जा सकने वाले आकस्मिक निरीक्षण के प्रति इन्हें आगाह कर दिया है। स्टॉक और वितरण की किसी भी हेराफेरी और खामी पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई का मन बना लिया गया है।

    राशन दुकानों की पड़ताल शुरू

    राज्यमंत्री श्री जैन ने दी चार दुकानों पर दबिश, शाजापुर और शुजालपुर में थमाए नोटिस, स्टॉक रजिस्टर में अफसर करेंगे दस्तखत

    Bhopal:Sunday, December 28, 2008

     

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बंटने वाले राशन और अन्य जरूरी सामग्री की उपभोक्ता भण्डारों पर दशा देखने की कार्रवाई अब तेज हो गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारस चंद्र जैन इस सिलसिले आज अपने दौरे के मौके पर शाजापुर और शुजालपुर के चार उपभोक्ता भण्डारों पर अचानक पहुंचे। खामियों को लेकर इन्हें शो-काज नोटिस तत्काल थमाए गए हैं और जिला खाद्य नियंत्रक को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। श्री जैन ने आज अपने निर्देश में प्रदेश की सभी ऐसी राशन दुकानों का हर महीने अनिवार्य निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान इनके स्टॉक रजिस्टर में अफसरों को अपने दस्तखत करने को भी कहा गया है।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न और अन्य चीजों की आम उपभोक्ताओं को उपलब्धता और इसकी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद प्रदेश में तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आम उपभोक्ता के हितों को लेकर सजग हैं और उन्होंने इसी मकसद से अपने राज्यमंत्री से मुस्तैद कार्रवाई की अपेक्षा की है। केन्द्र से प्रदेश की मौजूदा मांग के मुताबिक खाद्यान्न का कोटा बढ़ाने की कार्रवाई भी तेज की जा रही है, फिलहाल यह 20 लाख मैट्रिक टन कम आंकी गई है। सारे इंतजाम को लेकर एक पुख्ता खाका तैयार किया जा रहा है।

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पारस चंद्र जैन आज शाजापुर जिले के अपने दौरे पर थे। रास्ते में अचानक रुककर उन्होंने शाजापुर जिला मुख्यालय के महाराणा प्रताप महिला उपभोक्ता भण्डार और गायत्री उपभोक्ता भण्डार पर छापा डाला। इन दोनो ही दुकानों पर पाई गई स्टॉक संबंधी खामियों को लेकर तत्काल उन्होंने शो-काज नोटिस जारी किये और जिला नियंत्रक को जांच करने का निर्देश दिया।

    शुजालपुर तहसील मुख्यालय पर भी उन्हें हालात अच्छे नहीं दिखे थे जबकि वहां आदर्श उपभोक्ता भण्डार नाम की दुकान बंद पड़ी हुई थी। भनक लगते ही दुकानदार भागा-भागा वहां पहुंचा जरूर लेकिन दुकान बंद होने का कोई संतोषप्रद जवाब उसके पास नहीं था। शुजालपुर में ही मार्केटिंग उपभोक्ता भण्डार की भी राज्यमंत्री ने पड़ताल की। अनियमितताओं को लेकर इन्हें शो-काज नोटिस देने और जांच की कार्रवाई के निर्देश तत्काल दिये गये।

    राज्यमंत्री श्री जैन ने प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों के किसी भी मौके पर किये जा सकने वाले आकस्मिक निरीक्षण के प्रति इन्हें आगाह कर दिया है। स्टॉक और वितरण की किसी भी हेराफेरी और खामी पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई का मन बना लिया गया है।

     

    सामाजिक सुधार के लिए समाज को संगठित और शक्तिमान बनायेंसामाजिक सुधार के लिए समाज को संगठित और शक्तिमान बनायें

    सामाजिक सुधार के लिए समाज को संगठित और शक्तिमान बनायें

    पवार क्षत्रीय समाज के सम्मेलन में सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन

    Bhopal:Sunday, December 28, 2008

    सामाजिक सुधार के लिये समाज को संगठित एवं शाक्तिमान बनाना जरूरी है। साथ ही सामूहिक विवाह एक ऐसा माध्यम है जिससे हम लोगों में जागरूकता लाते हैं और कुरूतियों को भी समाप्त करते हैं। यह उद्गार सहकारिता एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने पवार क्षत्रीय समाज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं युवक-युवती परिचय सम्मेलन में व्यक्त किये।

    सहकारिता मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि सामाजिक एकता आज सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा जहां संगठन होता है वहीं शक्ति होती है। श्री बिसेन ने कहा कि जब तक हम शक्तिमान नहीं होंगे तब तक कोई भी कार्य सक्षमतापूर्वक नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित कर और उसे सामाजिक कुरूतियों से मुक्त कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये। इसके साथ ही समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार हो इस पर भी हमें ध्यान देना होगा।

    श्री बिसेन ने एक प्रगतिशील विकसित समाज के लिए सामूहिक विवाह की परंपरा को निरंतर रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इससे हम दहेज जैसी बुराईयों को समाप्त करने में योगदान देते हैं साथ ही ऐसे परिवारों की मदद करते हैं जो दहेज देने में असमर्थ होते हैं। श्री बिसेन ने कहा समाज को सशक्त बनाने के लिए उन्होंने सदैव तन, मन, धन से सहयोग प्रदान की। जब भी जैसी भी जरूरत आई मैंने अपनी सांसद निधि का उपयोग समाज के लिये किया। वे आगे भी समाज को पूरा सहयोग समर्थन देंगे।

    श्री बिसेन ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश के एक बड़े तबके जो किसान हैं उसे 3 प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण प्रदान कर ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कन्यादान एवं लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई। समाज के हर कमजोर वर्ग की मदद के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबध्द है।

    प्रारम्भ में श्री बिसेन ने समाज के कैलेंडर का विमोचन किया। उन्होंने समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं जैसे कक्षा बारहवीं में कु. अंजली बारगे, कक्षा दसवीं के शशांक देशमुख, कक्षा आठवीं कु. रुचि डिगरसे, कक्षा पांचवी में कु. प्रीती को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर रांगोली, सामान्य ज्ञान एवं बुध्दि परीक्षा भी आयोजित की गई। सम्मेलन में सात जिलों के 2500 लोगों ने भाग लिया।

    समाज के अध्यक्ष श्री बी.डी. ट्रोकल, उपाध्यक्ष श्री व्ही.डी. भादे, सचिव श्री एस.आर. कोर्डे ने सहकारिता मंत्री श्री बिसेन का स्वागत किया। संचालन श्री पी.आर. देशमुख ने किया। इस अवसर पर 200 युवक-युवतियों ने आपस में अपना परिचय दिया।

     

    December 28

    महिला कल्याण के लिए नई पहलें आई सी डी एस का विस्तार

    वर्षांत समीक्षा

    महिला कल्याण के लिए नई पहलें आई सी डी एस का विस्तार

    अनुपूरक पोषाहार के लिए वित्तीय सहयोग दोगुना

    देश मे महिला एवं बाल विकास को 2008 के दौरान और प्रोत्साहन मिला तथा इस क्षेत्र के लिए सरकार की प्रतिबध्दता वर्तमान वित्त वर्ष के लिए बजट में बढ़ोतरी में दिखी, जो पिछले वित्त वर्ष के 5793 करोड रूपये से बढ़कर 7200 करोड़ रू0 हो गया। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास के लिए प्रतिबध्द कोष को सुनिश्चित करने हेतु लिंग आधारित बजट प्रावधानों के साथ वार्षिक बजट में बाल बजट के विचार को भी प्रस्तुत किया। वर्ष के दौरान चालू योजनाओं को और अधिक मजबूती  तथा उन्हें विस्तार मिला और कई नई योजनाओं की शुरूआत की गई। आई सी डी एस का विस्तार हुआ तथा योजना के तहत अनुपूरक आहार हेतु वित्तीय प्रावधानों मे उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी की गई।

    महिला कल्याण

    वर्ष की शुरूआत धनलक्ष्मी योजना के प्रारंभ के साथ हुई, जिसके अंतर्गत कुछ राज्यों के चुने हुए जिलों में मुख्य परियोजना के रूप में बालिकाओं के कल्याण और सुधार को प्रोत्साहित करने के विकल्प के साथ बालिकाओं के लिए शर्त के साथ नकदी के हस्तांतरण का प्रावधान किया गया है। योजना में जन्म पंजीकरण, टीकाकरण, विद्यालयों में प्रतिधारण तथा 18 साल की उम्र तक अविवाहिता के रूप में बालिकाओं के लिए राशि में वृध्दि के साथ नकदी हस्तातरण पर विचार किया गया । मार्च में इस योजना को और विस्तार दिया गया ।

    जनवरी में भी एक नई विस्तृत योजना उज्जवला की शुरूआत बालिकाओं के अनैतिक खरीद फरोख्त निवारण, पुनर्वास तथा खरीद फरोख्त की शिकारों हेतु पुनर्युग्मन तथा व्यावसायिक यौन शोषण से बचाव की दिशा में की गई। योजना के द्वारा सामुदायिक जागरूकता समूहों के गठन तथा जागरूकता तथा मुख्य कार्यों की सूक्ष्मग्राहिता, बचाव तथा शोषण वाले स्थान से पीड़ित की सुरक्षित निकासी के माध्यम से निवारण उपलब्ध कराया जाता हेै। पुनर्वास के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जिसमें पीड़ितों के लिए खाद्य, कपड़ा, काउंसेलिंग तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण के साथ सुरक्षित आश्रय शामिल हैं। इस साल खरीद फरोख्त से बचाई गई या वेश्यावृति से बाहर निकाली गई महिलाओं के रहने के लिए स्वाधार एवं अल्प विराम घरों की संख्या भी बढाकर क्रमश: 240 और 380 की गई है।

           महिलाओं एवं बच्चों के खरीद फरोख्त की रोकथाम के लिए लघु, मध्यम और दीर्घावघि रणनीति विकसित करने हेतु मंत्रालय द्वारा इस साल मई में निजी सार्वजनिक -सहभागिता पर एक विचार केन्द्र का भी गठन किया गया। यह विचार केन्द्र पीड़ित क्षेत्रों में महिला स्व-सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण एवं दक्षता निर्माण कार्यक्रम का विकास करते हैं। समूह के सदस्यों में गृह,श्रम एवं वाणिज्य जैसे विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी तथा सी आई आई एसोचेम तथा फिक्की जैसे औद्योगिक निकाय शामिल होते हैं।

           मंत्रालय ने भी स्व-सहायता समूहों के निर्माण के माध्यम से इस साल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रियदर्शिनी योजना का खाका तैयार किया है। जिसे देश के चुनिंदा जिलों में शीध्र ही लागू किया जाएंगा।

    स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए एक समन्वित योजना स्वयंसिध्द को देश के सभी प्रखंडों तक विस्तार दिया जाएगा। गैर- सरकारी संगठनों, विशेषकर खरीद फरोख्त की पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम करने वाले संगठना,ें के लिए सिलाई का काम तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की शुरूआत योजना के अंतर्गत की जाएगी।

     

    वर्ष के दौरान महिलाओं और बालिकाओ के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। उसमें दुराचार पीड़ितों की सहायता एवं पुनर्वास तथा अल्पसंख्यक महिलाओं में नेतृत्व विकास, अल्पाहार की समस्या से निपटने के लिए किशोरियों हेतु पोषाहार कार्यक्रम को और मजबूती तथा इसमें शामिल किये जाने वालों की संख्या में विस्तार शामिल है।

    नए कानून

    मंत्रालय ने अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून की सीमाओं के विस्तार तथा खरीद फरोख्त करने वालों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए संशोधन, पीड़ितों की दुबारा प्रताड़ना से बचाव के उपाय तथा इसके कार्यान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव किया है। कार्य स्थलों पर महिलाओं को यौन- शोषण से बचाने के लिए एक विधेयक का खाका तैयार किया गया है ंतथा महिलाओं के अश्लील प्रदर्शन (निषेध) कानून को कानून के प्रावधान में संशोधन हेतु अंतिम रूप दिया गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाह पर विवाहों के अनिवार्य पंजीकरण को जरूरी बनाने हेतु एक विधेयक का प्रारूप तैयार है।

    लिंग आधारित बजट

    नीति, योजना, कार्यक्रमों में लिंगीय आवश्यकताओं के समावेशन प्रोत्साहन को बनाए रखने के लिए ने लिंग आधारित बजट हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विस्तृत दिशा- निर्देश तैयार किए हैं। मंत्रालय ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकार में लिंग आधारित बजट के समाकलन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अघिकारियों हेतु प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम का भी आयोजन किया । इन प्रयासों के परिणाम स्वरूप साल के दौरान 56 मंत्रालयों# विभागों में लिंग बजट प्रकोष्ठ की स्थापना हुई है।

    बाल कल्याण

    इस साल मंत्रालय ने एक प्रमुख बाल कल्याण योजना समेकित बाल सुरक्षा योजना का प्रतिपादन बच्चों के समग्र विकास हेतु सुरक्षित एचं विश्वस्त वातावरण उपलब्ध कराने की बात को ध्यान में रखकर किया। योजना का लक्ष्य बाल सुरक्षा सेवा की गुणवत्ता में सुधार है। चालू वित्त वर्ष के लिए 200 करोड़ रू0 का आवंटन इस हेतु किया गया है।

           बच्चों को सभी प्रकार के शोषण तथा दर्ुव्यवहार से बचाव को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने बच्चों के विरूध्द दर्ुव्यवहार (बचाव) प्रावधान का प्रारूप भी तैयार कर लिया है।    बच्चों के अवैध कारोबार तथा उनका उपयोग भीख मांगने के लिए कराने वाले, बच्चो से क्रूरता करने वालों, शारीरिक दंड देनेवालों, डराने वालाें, बच्चों को नशीला पदार्थ देनवालों तथा गलत तरीके से उन्हें बंदी बनाने वालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

    आई सी डी एस का विस्तार

    अक्टूबर में सरकार ने समेकित बाल विकास योजना को व्यापक बनाकर एक महत्वपूर्ण पहल की। इसके अंतर्गत आंगनबाडियों की संख्या 10 लाख से बढ़ाकर 14 लाख कर दी गई। योजना को विस्तार देते हुए अल्पसख्ंयक# एस सी# एस टी की बहुलता वाले क्षेत्रों के साथ देश के अब तक छूटे हुए निवासों तथा दूरवर्ती इलाकों को शामिल किया गया ।

    गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा बच्चों के बीच कुपोषण की दर कम करने के लिए योजना के तहत उपलब्घ वित्तीय प्रावधान तथा अनुपूरक पोषाहार को बढाकर दोगुना तथा दोगुने से अधिक कर दिया गया । अब 6-72 महीने की उम्र समूह के  सभी बच्चों को प्रति दिन 2 रू0 की जगह 4 रू0 के अनुपूरक पोषाहार मिलेंगे। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे के मामले में यह राशि 2.70 रू0 की जगह 6 रू0 तथा गर्भवती एवं स्तनपान करानेवाली माताओं के मामले में 2.06 रू0 से बढाकर 4.21 रू0 कर दी गयी है।

           योजना के लिए इस वित्तीय वर्ष के दौन 6300 करोड़ रू0 निर्धारित किए गए हैं। योजना के अंतर्गत पोषाहार हासिल करने वाले लाभार्थियों की संख्या लगभग 7 करोड़ से बढाक़र 8.43 करोड़ कर दी गई है। इसी तरह साल के दौरान प्री-स्कूल शिक्षा के लांभार्थियों की संख्या भी लगभग 3 करोड़ से बढ़ाकर 3.4 करोड़ कर दी गई है।

     

    चुनावी ट्रेनिंग अहम मुद्दा अभी से दी जाएगी सीख

    चुनावी ट्रेनिंग अहम मुद्दा अभी से दी जाएगी सीख

    आला दर्जे का होगा तरीका सीईओ उठाएंगे जिम्मा

    भोपाल : 27 दिसम्बर, 2008

    चुनाव आयोग ने निर्वाचन के काम में जुड़ने वाले अमले की ट्रेनिंग को इस क्षेत्र के प्रशासनिक प्रबंधन का अहम मुद्दा माना है। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी राज्यों में इस डयूटी में लगाए जाने वाले स्टॉफ को इस कामकाज की अभी से आला दर्जे की ट्रेनिंग दिए जाने का इंतजाम करने को कहा गया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को यह जिम्मा सौंपा गया है।

    विभिन्न राज्यों में चुनाव के दौरान ऐसे कई ताजा मामले आयोग की जानकारी में आए हैं जबकि अधिकाशं जगहों पर मतदान अमले में समझ की कमी और इसके चलते हुई गल्तियों की वजह से पुनर्मतदान की नौबत आई। यहाँ तक कि रिटर्निंग अफसरों से इस तरह के अनाड़ीपन की गल्तियाँ हुईं। आयोग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। चुनाव के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर उभरे इस मुद्दे पर उसका रूख कड़ा हो गया है। आयोग ने इस सिलसिले में ट्रेनिंग के स्तर में इजाफा करने और सीख की जरूरी सामग्री का बंदोबस्त किए जाने की जरूरत बताई है। इस पर बहुत ज्यादा ध्यान दिए जाने के उसने निर्देश दिए हैं।

    चुनाव आयोग निर्वाचन के काम में पूरी तरह दक्षता, चुस्ती ओर कसावट चाहता है। उसने कहा है कि ट्रेनिंग का सिलसिला अभी से जल्द शुरू हो जाना चाहिए। इस बारे में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि रिटर्निंग अफसरों, सहायक रिटर्निंग अफसरों और मतदान कर्मियों को यह काम अच्छे से समझा दिया जाए। इस बारे में ताजा अनुभवों के मुताबिक यह भी पुख्ता किया जाएगा कि जो गल्तियाँ होने से टाली जा सकती हैं उन्हें रिटर्निंग अफसर खासकर नामजदगी के पर्चों की जाँच, चुनाव चिन्हों के आवंटन आदि मौके पर हरगिज न कर सकें। ईवीएम से लेकर पूरी चुनावी प्रक्रिया के ठोस प्रशिक्षण को भी जरूरी बताया गया है।

    चुनाव आयोग ने इस सिलसिले में खुद अपनी तरफ से चुनावी कामकाज में कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग और सीखाए जाने वाले तौर-तरीके इजाद किए हैं। इसमें खास कामकाज संबंधी साहित्य सामग्री भी शामिल है। सभी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे अनिवार्य तौर पर खुद भी अपने स्तर पर स्थानीय भाषा में ट्रेनिंग संबंधी जरूरी इंतजाम करें।

     

     

    लोकसभा चुनाव में अफसरों की तैनाती अंतरिम सूची की तैयारी

    लोकसभा चुनाव में अफसरों की तैनाती अंतरिम सूची की तैयारी

    दागदार कर्मचारियों का अलग चिट्ठा कार्रवाई शुरू

    भोपाल : 26 दिसम्बर, 2008

    आगामी लोकसभा चुनाव में अफसर और कर्मचारियों की डयूटी लगाए जाने के लिए उनकी पहचान का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोग ने इनकी अंतरिम सूची तैयार करने को कहा है, लेकिन उसने यह भी साफ कर दिया है कि दाग़दार ऐसे अफसर जिनके खिलाफ खुद उसने पहले कार्रवाई की है उनका चिट्ठा अलग से तैयार कर लिया जाए। भिन्न स्तरों पर इस कार्य की शुरूआत हो चुकी है।

    चुनाव आयोग वक्त रहते लोकसभा चुनाव की तैयारियों का पक्षधर है। उसका कहना है कि तबादले को लेकर आयोग के मानदण्डों के तहत आने वाले अफसरों की फिलहाल अंतरिम सूची तैयार कर ली जाए। यह सूची आयोग द्वारा घोषित किए जाने वाले मानदण्डों पर आधारित होगी। हालांकि आयोग ने यह भी साफ किया है कि बाद में इनमें कुछ परिवर्तन किया जा सकता है तो भी अभी से ऐसी सूची बना लेना सुविधाजनक होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) ये सूचियाँ तैयार कर इनके सटीक होने की पुष्टि भी करेंगे।

    इसी तरह आयोग ने उन अफसरों और कर्मचारियों के नामों की अलग से सूची बनाने को कहा है जिन्हें पहले उसके ही आदेश पर हटाया गया था या जिनका तबादला किया गया था। इनके अलावा वे अफसर और कर्मचारी भी जिनके खिलाफ आयोग के निर्देश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इन अफसरों में से भारतीय प्रशासनिक और पुलिस अफसरों तथा रिटर्निंग अफसरों की सूची तैयार करने का जिम्मा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के दफ्तर को सौंपा गया है। इसी तरह कनिष्ठ अफसरों और स्टॉफ की सूची जिला निर्वाचन अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बनाएंगे। इस तरह इकट्ठा किए गए नामों की सूची एकीकृत रूप से आयोग को भेजी जाएगी। ऐसे अफसरों और कर्मचारियों की पहचान का काम प्रदेश में शुरू कर दिया गया है।

    प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से कहा गया है कि आयोग के आदेश से होने वाले सभी तबादलों और अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले चूँकि उनके दफ्तर के माध्यम से ही अमल में लाए जाते हैं, लिहाजा इस संबंध में उन्हें इनका रिकार्ड पंजी में दर्ज करना है।

     

    भ्रष्टाचार के खिलाफ गौर ने सेल बनाया

    भ्रष्टाचार के खिलाफ गौर ने सेल बनाया

    Bhopal:Friday, December 26, 2008:

     

    नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने अपने निवास पर नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए एक सेल बनाया हैं। यह सेल नगरीय निकायों में होने वाले कथित भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्राप्त शिकायतों का परीक्षण कर सख्त कार्यवाही करेगा। इसकी निगरानी श्री गौर स्वयं करेंगे। सेल को प्राप्त होने वाली शिकायतों को एक समय सीमा में निबटा कर दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्यवाही की जायेगी।

    उक्त जानकारी आज यहां श्री गौर ने भोपाल एवं होशंगाबाद संभाग के नगरीय निकायों के अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए दी। उन्होंनें कहा कि नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने को मिलती हैं। इसे जरा भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पहले सफाई गंगोत्री की की जाएगी, गंगा अपने आप प्रदूषण से मुक्त हो जायेगी। उन्होंने अतिक्रमण कारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर उन्हें धारा 223 के तहत नोटिस देने और अतिक्रामकों को सिविल जेल भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बस स्टेण्ड बागीचों, पार्कों और नदी तथा तालाबों के घाटों की नियमित सफाई कराना नगरीय निकायों का काम है। अधिकारी कर्मचारी आराम तलबी छोड़कर फील्ड में काम कर

     

    जैव-चिकित्सा मानक

    जैव-चिकित्सा मानक

    पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अधीन अधिसूचित जैव-चिकित्सा कचरा (प्रबंधन और प्रचालन) नियमावली 1998 की धारा-7 के अधीन इन नियमों के प्रावधानों को लागू करने के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) और संघ शासित क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण समितियों  (पीसीसी) को अधिकृत किया गया है। केन्द्र सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के  अधीन अपनी निहित शक्तियां केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अध्यक्ष सहित सभी एसपीसीबी और संघ शासित क्षेत्रों में पीसीसी के अध्यक्षों को प्रदान किया है, ताकि जैव-चिकित्सा कचरा (प्रबंधन और प्रचालन) नियमावली, 1998 के उल्लंघन के लिए वैधानिक कार्रवाई की जा सके।

           इस नियमावली के नियम-10 के अधीन प्रत्येक कब्जाधारक  संचालक के लिए प्रत्येक वर्ष की 31 जनवरी तक  संबंधित अधिकारी के पास वार्षिक रिपोर्ट दाखिल करना आवश्यक है, ताकि विगत वर्ष के दौरान प्रचालित जैव-चिकित्सा कचरे की श्रेणी और मात्रा के बारे में जानकारी शामिल की जा सके। इसके बाद उस अधिकारी द्वारा  प्रत्येक वर्ष की 31 मार्च तक केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास यह जानकारी समायोजित रूप में भेजना जरूरी होता है। उल्लंघन से संबंधित मामले में  'कारण बताओ' नोटिस जारी  किया जाता है और सभी राज्यों में उल्लंघनकर्ता इकाइयों के विरुध्द मुकदमे दाखिल किए जाते हैं।

           जैव-चिकित्सा कचरा नियमावली के अधीन जैव-चिकित्सा कचरे को 10 श्रेणियों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक श्रेणी के कचरे के लिए उपचार की भिन्न प्रणालियां निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के समुचित क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित श्रमशक्ति के साथ ही कर्मचारियों की जागरूकता भी जरूरी है। जहां एक ओर कई बड़े अस्पतालों ने जैव-चिकित्सा कचरे के उपचार के लिए खुद अपनी सुविधाएं स्थापित की हैं, तो वहीं दूसरी ओर, छोटे क्लीनकों, नर्सिंग होमों और डिस्पेंसरियों के लिए इन नियमों के पालन हेतु उपचार शुल्क के भुगतान पर साझा उपचार सुविधाओं में अपने कचरे को उपचारित कराने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। पिछले कई वर्षों के दौरान इन नियमों के प्रति जागरूकता बढने अौर विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप उपचारित जैव-चिकित्सा कचरे की मात्रा में भी वृध्दि हुई है।

     

    प्रधानमंत्री सेना प्रमुखों से मिले

    प्रधानमंत्री सेना प्रमुखों से मिले

    26 दिसम्बर, 2008

    तीनों सेना के प्रमुखों ने आज दोपहर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह से मुलाकात की । यह बैठक लगभग एक घंटे चली ।

     

           बैठक के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों सहित सेना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई तथा प्रधानमंत्री को सुरक्षा की वर्तमान स्थिति का विवरण दिया गया ।

     

    December 27

    खुदरा प्रबंधन में रोजगार की संभावनाएं

    खुदरा प्रबंधन में रोजगार की संभावनाएं

    Employment News Govt. of India

    खुदरा उस वितरण प्रक्रिया को कहते हैं जो किसी उत्पाद को उसके निर्माता से उसके अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने के लिए की जाती है। यह कार्य छोटे और आसान माध्यमों अर्थात्‌ खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से किया जाता है। इससे उत्पाद पर ली जाने वाली राशि तो कम होती ही है, साथ ही साथ एक निश्चित स्थान पर ढेर सारे उत्पाद उपभोक्ताओं को आसानी से प्राप्त भी हो जाते हैं। भारत में कुछ प्रसिद्ध खुदरा-विक्रेता निम्नलिखित हैं : पैंटालून, वालमार्ट, सुभिक्षा,शॉपर्स स्टॉप, पिरामिड्स, भारती, रिलायन्स फ्रैश आदि। आज महानगरों में तो शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल और मल्टीप्लेक्सेस फैल ही रहे हैं, नए विकासशील शहरों में भी इनकी पहुंच हो गई है। इसलिए जरुरी हो गया है कि खुदरा विक्रय की विपणन नीति को बनाए रखने के लिए बिक्री-केंद्रों में प्रबंधन का कार्य करने वाले व्यवसायी पूरी तरह प्रशिक्षित हों. खुदरा में रोजगार के अवसर :
    आज विश्व की उभरती हुई १० शीर्षस्थ मंडियो में भारत का भी एक स्थान है। हमारे पूरे देश म लगभग ४३ लाख खुदरा केंद्र  फैले हुए हैं। भारतीय खुदरा व्यापार एसोसिएशन के अनुसार इन केंद्रों में लगभग १२ लाख ५० हजार (१.५ मिलियन) कार्मिकों की आवश्यकता है, जो २००८-०९ में बढ़ कर ३२ लाख ५० हजार तक हो जाएगी। अनुमान है कि वर्ष २००२ से २०१२ के बीच खुदरा व्यापार उद्योग में लगभग २१ लाख (२.१ मिलियन) नए रोजगार उपलब्ध होंगे, जो १४० वृद्धि का द्योतक है (यू.एस. ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिस्टिकल्स)।
    खुदरा व्यापार एक नया, तीव्र गति से पनप रहा क्षेत्र है, जिसमें हर तरह के उत्कृष्ट रोजगार हैं, जो प्रबंधन, मर्केन्डाइजिंग आदि जैसे आकर्षक, अच्छे वेतन वाले रोजगार के अवसर का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यद्यपि खुदरा उद्योग वित्त, सूचना प्रौद्योगिकी तथा मानव संसाधन प्रबंधन जैसे अन्य सभी प्रबंध कार्यों में व्यावसायिक रोजगार के अवसर प्रदान करता है, किंतु दो बड़े क्षेत्रों अर्थात्‌ इन्वेंटरी प्लानिंग और क्रय में केवल यही उद्योग रोजगार के मार्ग दिखाता है। अपनी विपणन तथा विक्रय
    नीतियों के कार्यान्वयन के लिए खुदरा उद्योग को अच्छी कोटि के प्रबंधकों की अत्यधिक आवश्यकता है। इस उद्योग को ऐसे कार्मिकों की आवश्यकता होती है जो अच्छा समय प्रबंध कौशल,नेतृत्व के गुण, अच्छा संचार कौशल, निर्णय लेने की क्षमता,बेहतर टीम प्रयास तथा विपणन की अत्यधिक जानकारी रखते हैं। नियोक्ताओं को ऐसे व्यक्तियों की तलाश होती है जिन्हें दूसरों के साथ कार्य करने में मजा आता है और विशेष प्रकार के ग्राहकों से कुशलता एवं धैर्यपूर्वक व्यवहार कार्य कर सकते हैं। विक्रय कार्य में रुचि, आकर्षक व्यक्तित्व तथा स्पष्ट एवं प्रभावी रूप से बोलने की क्षमता इस उद्योग की कुछ अन्य वांछनीय विशेषताएं हैं। अनेक भाषाओं का ज्ञान उन स्थानों में रोजगार प्राप्त करने म सहायक होता है जहां विभिन्न संस्कृतियों/ देशों के व्यक्ति दुकानों पर आते हैं। विपणन तथा विक्रय खुदरा उद्योग
    के आधार हैं। यह उद्योग खुदरा प्रबंधक, क्रय प्रबंधक, भंडार प्रबंधक, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि, डॉटा प्रोसेसिंग कार्यपालक, फ्लोर पर्यवेक्षक, खुदरा विक्रय कार्मिक तथा अन्य पदों पर रोजगार के अवसर देता है। इस उद्योग में कार्पोरेट योजना, ट्रेंड पूर्वानुमान,परियोजना प्रबंधन-भंडार निर्माण तथा ग्राहक संबंध प्रबंधन (सी.आर.एम.) जैसे कार्यों में भी रोज्+ागार के अवसर बड़ी संख्या में उभर रहे हैं। खुदरा प्रबंधन में पाठ्यक्रम चलाने वाले स्थान/विश्वविद्यालय खुदरा उद्योग में हो रही वृद्धि ने शिक्षा संस्थानों को खुदरा प्रबंधन में कार्यक्रम संचालित करन पर विवश कर दिया है। खुदरा प्रबंधन एक ऐसा व्यवसाय है जो एक स्नातक को खुदरा व्यापार में आने के लिए तैयार करता है। खुदरा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनेक संस्थाएं भारत में डिग्री तथा डिप्लोमा स्तर के अनेक कार्यक्रम संचालित करती हैं। एम.बी.ए. (खुदरा प्रबंधन), खुदरा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम (पी.जी.पीआर.एम.), खुदरा संचार प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पी.जी.आर.सी.एम.), खुदरा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पी.जी.डी.आर.एम.), खुदरा व्यापार में स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पी.जी.पी.आर.) तथा खुदरा प्रबंधन में डिप्लोमा (डी.आर.एम) आदि कुछ अच्छे विकल्प हैं। यह न केवल खुदरा केंद्रों और सहायक कार्यों में, बल्कि अर्थव्यवस्था के व्यापक संदर्भ में खुदरा व्यापार क्षेत्र में भी खुदरा प्रबंधन के सभी पहलुओं की व्यापक तथा गहरी समझ का विकास करता है।
    पाठ्यक्रम विषय-वस्तु :
    भारतीय खुदरा व्यापार वातावरण, इलेक्ट्रॉनिक खुदरा-व्यापार, विपणन अनुसंधान, खुदरा विक्रय, मॉल प्रबंधन, मर्केन्डाइजिंग प्रबंधन, खुदरा क्रय, खुदरा मूल्यानिर्धारण, खुदरा संगठन, खुदरा
    प्रबंधन, उपभोक्ता आचरण, प्रबंधन सूचना प्रणाली, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (एस.सी.एम.) आदि ।
    विश्वविद्यालयों/संस्थानों की सूची :
    क्र. विश्वविद्यालय/ पाठ्यक्रम संपर्क-सूचना
    सं. संस्थान का नाम का नाम
    १. आंध्र विश्वविद्यालय एम.बी.ए. आंध्र विश्वविद्यालय
    (आर.एम.) विशाखापटट्नम-५३०००३
    आंध्र प्रदेश, भारत,

    २. अन्ना विश्वविद्यालय एम.बी.ए. अन्ना विश्वविद्यालय,
    (आर.एम.) चेन्नै-६०००२५,
    टेलीफोन : ०४४-२२२०३३३१,
    फैक्स : ०४४-२२३५४४५०्
    ३. नरसी मोनजी प्रबंधन एम.बी.ए. एस.वी.के.एम्स
    एवं उच्च अध्ययन (आर.एम.) एन.एम.आई.एम.एस.
    संस्थान (मान्य यूनिवर्सिटी , वी.एल. मेहता रोड, विल
    विद्यालय) पार्ल प.), मुंबई-४०००५६,
    भारत
    टेलीफोन : ०२२-२६१३४५७७/२६१८३६८८,
    ४. बिरला प्रबंधन एवं पीजीडीएम बिरला प्रबंधन प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रौद्योगिकी संस्थान, (आर.एम.) प्लॉट नं. ५, नोलेज पार्क प्प्,
    ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा-२०१३०६, उ.प्र
    टेलीफोन : ०१२०-२३२३००१/२/.../१०,
    फैक्स : ०१२०-२३२३०२२/२५,

    ५. भारतीय चार्टर्ड पीजीडी आई.सी.एफ.ए.आई, १०४ निर्मल टावर्स,
    वित्तीय विश्लेषण आरएम द्वारकापुरी कॉलोनी, पंजागुट्टा, संस्थान, हैदराबाद-५०००८२,
    टेलीफोन-०४०-५५१०५७६२,
    फैक्स-०४०-५५२५५७६१

    ६. आईएम.टी. दूरस्थ पीजीडी आई.एम.टी. दूरस्थ एवं मुक्त अध्ययन संस्थान,एवं मुक्त आरएम ए-१६, साइट-३, यू.पी.एस.आई.डी.सी
    अध्ययन संस्थान, औद्योगिक क्षेत्र, मेरठ रोड, गाजियाबाद- २०१००३ टेलीफोन : ०१२०-२७०५६२१/२२/२३/२४

    ७. इंडियन स्कूल ऑफ पीजीडी इमेजेज पर्ल रिटेल सोलुशन्स प्राइवेट रिटेल, दिल्ली आरएम लिमि., साइट-२, पॉकेट-ओ.सी.एफ., सैक्टर-सी, वसंत कुंज, नेल्सन मंडेला रोड, दिल्ली-११००७०
    टेलीफोन-०११-२६१२५९८१/८२/८३,

    ८. एकीकृत प्रबंधन पीजीपीआर आई.आई.एल.एम. उच्च शिक्षा संस्थान
    अध्ययन संस्थान, गुडगांव, नई दिल्ली दिल्ली, मोबाइल-९३५०८६०१३२, ९३५०८२१४३८.



    ९. के.जे. सोमैया प्रबंधन पीजीडीएम के.जे. सोमैया प्रबंधन अध्ययन एवं अनुसंधान अध्ययन (रिटेल) संस्थान, विद्यानगर, विद्याविहार (पू.),
    एवं अनुसंधान मुंबई- ४०००७७.
    संस्थान, मुंबई फोन : ०२२-६६४४९३००,
    फैक्स : ०२२-२५१५७२१९,

    १०. वेलिंगकर प्रबंधन डीआरएम/ वेलिंगकर प्रबंधन विकास एवं अनुसंधान
    संस्थान, मुंबई पीजीपी संस्थान, एल. नापू रोड, मटुरा (मध्य आरएम रेलवे) के पास, मुंबई-४०००१९,
    फोन-०२२-२४१७८३००
    फैक्स : ०२२-२४०९७८२४

    ११. लाला लाजपत राय पीजीडी लाला लाजपत राय प्रबंधन संस्थान, प्रबंधन अकादमी, आरएम लाला लाजपत राय मार्ग, महालक्ष्मी, मुंबई मुंबई-४०००३४
    टेलीफोन : ०२२-२४९२२८९८/२४९८०८७४, फैक्स : ०२२-२४९८०८७७.
    १२. मुद्रा संचार संस्थान पीजीआर एम.आई.सी.ए., शेला, अहमदाबाद सीएम अहमदाबाद-३८००५८,
    गुजरात, भारत,
    टेलीफोन :९१२७१७३०८२५०,
    फैक्स : ९१२७१७३०८३४९,

    १३. राष्ट्रीय व्यवसाय खुदरा संचार राष्ट्रीय व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, प्रबंधन संस्थान, में स्नातकोत्तर ए.जी., आनंदराज विल्ला
    अड्यार (चेन्नै) प्रमाणपत्र (ए.एच.), ७ सेकेण्ड कनाल
    कार्यक्रम क्रॉस रोड, गांधी नगर, अड्यार चेन्नै-६०००२०
    फैक्स : ०४४-२४४२२४३८
    १४. राष्ट्रीय डिजाइन पीजीडीपीडी राष्ट्रीय डिजाइन अनुसंधान एवं संस्थान, बंगलौर विकास कैम्पस्‌ संस्थान, १२
    लिंक रोड, ऑफ-तुम्कूर रोड,
    बंगलौर-५६००२२,
    टेलीफोन : ०८०-२३३७३००६/
    २३५७९०५४,
    फैक्स-०८०-२३३७३०८६,

    १५. सिम्बियोसिस सेंटर पीजीडीआर सिम्बियोसिस भवन, १०६५ बी, प+फॉर डिस्टेन्स लर्निंग, एम गोखले क्रास रोड, मॉडल कॉलोनी,
    पुणे-४११०१६, महाराष्ट्र टेलीफोन : ०२०-६६२११००,
    फैक्स : ०२०-६६२११०४०.

     

     

    December 26

    सर्विस वोटरों का मतदाता सूची में जुड़ेगा नाम चलेगा विशेष अभियान कलेक्टरों को इत्तेला

    सर्विस वोटरों का मतदाता सूची में जुड़ेगा नाम चलेगा विशेष अभियान कलेक्टरों को इत्तेला

    भोपाल : 25 दिसम्बर, 2008

    आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश में निर्वाचन काम से जुड़े अफसरों का ध्यान अब वोटर लिस्टों की तैयारी और दुरुस्ती पर केन्द्रित हो गया है। चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि इन लिस्टों में किसी तरह की खामी, मतदाता फोटो परिचय पत्र तैयारी और वितरण के काम में किसी कोताही और इसके चलते एक्शन की गुंजाइश न रह जाए। इसी कड़ी में सर्विस वोटरों (सेवा निर्वाचकों) के भी सूची में नाम दर्ज कराने को तरजीह दी गई है। इसके लिए सभी जिलों में बाकायदा अभियान छेड़े जाने की इत्तेला मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री जे.एम. माथुर ने कलेक्टरों को कर दी है।

    यह अभियान चुनाव आयोग के निर्देश पर ही चलेगा और कहा यह गया है कि किसी सर्विस वोटर का नाम सूची में चढ़ने से छूट न जाए। इस काम में ऐसे वोटरों की सहूलियत को देखते हुए उनके डाटास (जानकारी) वेबसाईट पर प्रदर्शित करवाने को भी कहा गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी इस मकसद से सर्विस वोटरों की स्थानीय आर्मी यूनिट से तालमेल करके इनके नाम मतदाता सूचियों में दर्ज करायेंगे।

    29 दिसम्बर तक बंटना है ईपिक

    चुनाव आयोग की प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को हिदायत है कि शेष रहे वोटरों को हर हालत में ईपिक (आयोग द्वारा जारी मतदाता फोटो पहचान पत्र) 29 दिसम्बर तक बंट जाए। इसमें किसी शक या इसको लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना को खत्म करने के लिए मुस्तैदी की सलाह इन अफसरों को दे दी गई है। आयोग लोकसभा चुनाव में हर मतदाता द्वारा ईपिक के आधार पर ही वोट डाले जाने का पक्षधर है।

     

    वोटर लिस्टों में संशोधन फोटोग्राफी के लिए खास मुहिम

    वोटर लिस्टों में संशोधन फोटोग्राफी के लिए खास मुहिम

    अफसरों की तैनाती वीडियो कान्फ्रेंसिंग से दिए निर्देश

    भोपाल : 24 दिसम्बर, 2008

    लोकसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में प्रदेश में मतदाता सूचियों में संशोधन पर अमल शुरू हो चुका है। पाँच से 30 जनवरी तक इस मक़सद से एक खास मुहिम छोड़ी जा रही है। इस काम में विभिन्न स्तरों पर अफसरों की तैनाती को पुख्ता करने के निर्देश दिए गए है। आज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों श्री जे.एस.माथुर ने काम में तेजी के मद्देनजर वीडियो कान्फ्रेंसिंग करके जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए।

    लोकसभा चुनाव की शुरूआती तैयारियों में वोटर लिस्टों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (सुधार) को खासी अहमियत के साथ शुमार किया गया है। इसी कड़ी में मतदाता फोटो परिचय पत्र की तैयारी का बीड़ा भी उठाया गया है। इस सुधार में तीन तरह के मतदाताओं को शामिल किया गया है। इनमें एक जनवरी 2009 की स्थिति में जरूरी पात्रता (अर्हता) रखने वाले नए मतदाता, मतदाता परिचय पत्र होने के बावजूद परिचय सूची में नाम दर्ज नहीं होने वाले मतदाता और ऐसे मतदाता जिन्हें परिचय पत्र उपलब्ध नहीं है, शामिल किए गए हैं। इस सिलसिले में नाम जोड़े जाने और परिचय पत्र उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। मतदाताओं को इसकी व्यापक जानकारी देने को कब गया है।

    जीर्ण-शीर्ण मतदान केन्द्रों के नए भवन

    कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जीर्ण-शीर्ण हालत वाले मतदान केन्द्रों या जहाँ इनके लिए जगह की कमी है वहाँ करीब के नए भवनों की तलाश कर इन्हें कायम करने का मसौदा तैयार कर लें। एक और अहम फैसला यह किया गया है कि हाल ही के विधानसभा चुनाव के लिए बनाए गए सहायक मतदान केन्द्रों को भी मुख्य मतदान केन्द्र में तब्दील किया जा रहा है ताकि इनकी तादाद कम न रहे। इसका भी प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।

    सौ फीसद होगी फोटो तैयारी

    ज़िला कलेक्टरों से कहा गया है कि मतदाताओं के शत प्रतिशत फोटो खींच जाएं। यह काम अभिहित फोटोग्राफी स्थल पर होगा यह वो जगह होंगी जहाँ फोटो पहचान पत्र प्राप्त करने के लिए ज्यादा वोटर शेष हैं। इसके लिए पर्याप्त तौर पर फोटोग्राफर और डिजिटल कैमरों का इंतजाम किया जा रहा है।

    वोटर लिस्टों की जाँच वोटर लिस्टें तैयार करने और इनकी जाँच करने का जिम्मा बूथ स्तरीय अफसरों (बीएलओ), नोडर अफसरों और पर्यवक्षकों को सौंपा जा रहा है। इसके लिए अन्य सहयोगी अमले का इंतजाम भी होगा। ये अफसर प्रारूप प्रकाशन के बाद बहुस्तरीय और विभिन्न किस्म की जाँच करेंगे। इनकी गुणवत्ता और शुध्दता जाँची जाएगी इसके लिए बाकायदा इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी।