Perfil de PROMADHYAPRADESH KI AWAZ म...FotosBlogListasMás ![]() | Ayuda |
|
30 noviembre गौशाला में गाय गोबर के कण्डों तथा गौमूत्र का उत्पादन शुरूगौशाला में गाय गोबर के कण्डों तथा गौमूत्र का उत्पादन शुरू ग्वालियर दिनांक 29 नवम्बर 2008: नगर निगम गौशाला द्वारा शुध्द गायों से गोबर से बने कण्डों तथा गौमूत्र का व्यवसायिक उत्पादन प्रांरभ कर दिया है। निगम गौशाला द्वारा धार्मिक संस्थाओं तथा आयुर्वेद फार्मेसियों को पत्र लिखकर गौशाला में उत्पादित गौमूत्र एवं गोबर कण्डों के उत्पादन की जानकारी उपलब्ध करायी है। उक्ताशय की जानकारी उपायुक्त गौशाला सुरेन्द्र सिंह भदौरिया द्वारा जनसम्पर्क के माध्यम से प्रेस को जारी विज्ञप्ति में दी गई। उन्होंने बताया है कि निगम गौशाला लाल टिपारा से गोबर के कण्डे 175/- रू. प्रति क्विटल तथा गौमूत्र 2 रू. लीटर विक्रय किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि गाय के गोबर के कण्डों की मांग शहर की विभिन्न धार्मिक संस्थाओं में हवन हेतु तथा आयुर्वेदिक फार्मेसियों में दवाओं के शोधन हेतु की जाती है तथा गाय का गौमूत्र विभिन्न बीमारियों के इलाज के साथ-साथ कीटनाशक एवं छिपकली चूहे इत्यादि भगाने के लिये मच्छरों से मुक्ति पाने के लिये किया जाता है। नगर निगम ग्वालियर द्वारा हाल ही में प्रांरभ किये गये कण्डा उत्पादन में लगभग 50 क्विंटल गाय गोबर का कण्डा तैयार किया है तथा क्रेताओं की मांग पर 15 दिवस में भाग अनुसार कण्डा उपलब्ध कराये जाने हेतु निगम तैयार है। निगम गौशाला में उक्त उत्पादों के फुटकर एवं थोक क्रय हेतु गौशाला के सुपरवाईजर लक्ष्मीनारायण ऊंचिया के मोबाईल क्र. 98262-54604 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
भारतीय गंगा-जमुनी संस्कृति का परिचायक है - तानसेन समारोहभारतीय गंगा-जमुनी संस्कृति का परिचायक है - तानसेन समारोह भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति का परिचायक तानसेन समारोह कलाकारों के लिए श्रध्दा का स्थान है । संगीतज्ञ इस समारोह में भाग लेकर तथा तानसेन की मजार पर श्रध्दासुमन और स्वरांजलि अर्पित कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं । संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति में ग्वालियर में मनाये जाने वाले राष्ट्रीय तानसेन संगीत समारोह ने अपनी 83 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है । भारतीय संगीत के साक्ष्य बने इस समारोह की शुरूआत ग्वालियर के तत्कालीन महाराज माधव राव सिंधिया ने फरवरी 1924 में उर्स तानसेन के रूप में की थी। समारोह के प्रारंभिक वर्षों में इसमें मशहूर नृत्यांगनाएं भी भाग लेती थीं और नृत्य तथा गायन का क्रम अलग अलग छोल दरियों में रात भर चला करता था । संगीत सम्राट तानसेन की याद को ताजा रखने तथा संगीत विधा की तरक्की और प्रोत्साहन हेतु तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया की पहल पर पहले उर्स तानसेन 7, 8 और 9 फरवरी 1924 को मनाया गया था । इसके लिए एक इन्तजामिया कमेटी थी, जो आज भी अस्तित्व में है । उस समय इस कमेटी को इस उर्स के लिए 600 रूपये दिए जाते थे । तब से ही इस त्रिदिवसीय समारोह का शुभारंभ हरिकथा तथा चादर चढ़ाने के साथ होता आया है । स्वाधीनता के पश्चात इस समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी राज्य शासन तथा आकाशवाणी ने संयुक्त रूप से ली । बाद में यह समारोह जनसम्पर्क विभाग के माध्यम से आयोजित होता रहा और अब यह समारोह संस्कृति परिषद के अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत कला अकादमी (मध्यप्रदेश कला परिषद) के द्वारा आयोजित किया जाता है। इस समारोह को नया रूप प्रदान करने में तत्कालीन केन्द्रीय सूचना मंत्री डा. बालकृष्ण केसकर और आकाशवाणी में हिन्दुस्तानी संगीत के सलाहकार ठाकुर जयदेव सिंह ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई । राज्य शासन द्वारा इस समारोह को नई दिशा और गति देने के प्रयास निरंतर जारी हैं । सुर संगीत का यह अनोखा उत्सव तानसेन समाधि हजीरा पर आयोजित हो रहा है ।समारोह की अंतिम प्रात: कालीन संगीत सभा ग्वालियर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तानसेन की जन्मस्थली बेहट में आयोजित होती है, जहां श्रेष्ठ कलाकार स्थानीय संगीत विद्यालयों के विद्यार्थियो के साथ जाकर संगीत सम्राट तानसेन को अपने श्रध्दा सुमन और स्वरांजलि अर्पित करते है । फरवरी 1924 से अब तक देश के लगभग सभी ख्यातिनाम संगीतज्ञों और कलाकारों ने इस आयोजन में कभी न कभी अपनी प्रस्तुति दी है और सभी ने इस स्थान की महत्ता को स्वीकारा है । भारत रत्न पंडित रविशंकर ने वर्ष 1989 के तानसेन समारोह में शामिल होने के बाद कहा था कि यहां एक जादू सा होता है, जिसमें प्रस्तुति देते समय एक सुखद रोमांच की अनुभूति होती है । उर्स के रूप में प्रारंभ हुआ यह समारोह वट वृक्ष की तरह संगीत प्रेमियों के हृदय में बस गया है।
ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायक पद्म भूषण स्व पंडित कृष्णराव शंकर पंडित के शब्दों में तानसेन समारोह के प्रारंभिक वर्षों में दूर दूर से कलाकार खुद ब खुद संगीत सम्राट तानसेन को श्रध्दांजलि देने आते थे और बिना कोई पारिश्रमिक लिए अपनी स्वरांजलि अर्पित करते थे । कभी कभी तो कलाकार अपना सम्मान लेकर पैदल तानसेन समाधि तक पहुंचते थे । मशहूर शहनाई नवाज उस्ताद बिस्मिल्लिहाखां भी एक बार निजी यात्रा पर ग्वालियर आये और दिन भर की व्यस्तता के बाद उन्होनें रात दो बजे तानसेन की मजार पर पहुंचकर शहनाई वादन कर तानसेन को श्रध्दासुमन अर्पित किये । एक बार मशहूर पखावज वादक पागलदास भी तानसेन के उर्स के मौके पर श्रध्दांजलि देने यहां आये, लेकिन रेडियो के ग्रेडेड आर्टिस्ट नहीं होने के कारण उर्स में भाग नहीं ले सके । उन्होनें तानसेन की मजार पर ही बैठकर पखावज का ऐसा अद्भुत वादन किया, कि संगीत प्रेमी जन समारोह से उठकर उनके समक्ष जाकर बैठ गये । संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिध्द है कि यहां बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुड़कते है तो ताल में । इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढकर एक संगीत प्रतिभायें संगीत संसार को दी हैं और संगीत सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपारि हैं। ग्वालियर से लगभग 45 कि.मी. दूर ग्राम बेहट में श्री मकरंद पांडे के यहां तानसेन का जन्म ग्वालियर के तत्कालीन प्रसिध्द फकीर हजरत मुहम्मद गौस के वरदान स्वरूप हुआ था । कहते है कि श्री मकरंद पांडे के कई संताने हुई, लेकिन एक पर एक अकाल ही काल कवलित होती चली गई । इससे निराश और व्यथित श्री मकरंद पांडे सूफी संत मुहम्मद गौस की शरण में गये और उनकी दुआ से सन् 1486 में तन्ना उर्फ तनसुख उर्फ त्रिलोचन का जन्म हुआ, जो आगे चलकर तानसेन के नाम से विख्यात हुआ । तानसेन के आरंभिक काल में ग्वालियर पर कलाप्रिय राजा मानसिंह तोमर का शासन था । उनके प्रोत्साहन से ग्वालियर संगीत कला का विख्यात केन्द्र था, जहां पर बैजू बावरा, कर्ण और महमूद जैसे महान संगीताचार्य और गायक गण एकत्र थे, और इन्हीं के सहयोग से राजा मानसिंह तोमर ने संगीत की ध्रुपद गायकी का आविष्कार और प्रचार किया था । तानसेन की संगीत शिक्षा भी इसी वातावरण में हुई । राजा मानसिंह तोमर की मृत्यु होने और विक्रमाजीत से ग्वालियर का राज्याधिकार छिन जाने के कारण यहां के संगीतज्ञों की मंडली बिखरने लगी । तब तानसेन भी वृंदावन चले गये और वहां उन्होनें स्वामी हरिदास जी से संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त की । संगीत शिक्षा में पारंगत होने के उपरांत तानसेन शेरशाह सूरी के पुत्र दौलत खां के आश्रय में रहे और फिर बांधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र के दरबारी गायक नियुक्त हुए । मुगल सम्राट अकबर ने उनके गायन की प्रशंसा सुनकर उन्हें अपने दरबार में बुला लिया और अपने नवरत्नों में स्थान दिया । अकबर की कश्मीर यात्रा के समय सन् 1589 में लाहौर में इस महान संगीत मनीषी ने अपनी इह लीला समाप्त की और उनकी इच्छानुसार उनका शव ग्वालियर लाया गया और यहां प्रसिध्द सूफी संत मोहम्मद गौस की मजार के पास ही इस संगीत सम्राट को समाधिस्थ कर दिया गया । इस महान संगीतकार की समाधि पर सन् 1924 से प्रति वर्ष संगीतज्ञों का मेला लगता है, जहां देश के चोटी के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर संगीत सम्राट तानसेन को अपनी श्रध्दांजलि अर्पित करते हैं। संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा हिन्दुस्तानी संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले कलाकारों को सम्मानित करने के लिए सन् 1980 में राष्ट्रीय तानसेन सम्मान की स्थापना की गई ।
मतगणना और तकनीकी अधिकारी प्रशिक्षण एक दिसंबर को भोपाल में आयोग से आएंगे अफसरमतगणना और तकनीकी अधिकारी प्रशिक्षण एक दिसंबर को भोपाल में आयोग से आएंगे अफसर भोपाल : 29 नवंबर, 2008 मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 27 नवंबर को हुए मतदान के बाद मतों की गणना तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 8 दिसंबर को होगी। मतगणना का डाटा चुनाव आयोग की वेबसाईट के लिए तैयार किया जाएगा। इस सिलसिले में प्रदेश के प्रत्येक जिले के एक तकनीकी अधिकारी और एक मतगणना अधिकारी का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। एक दिसंबर को पूर्वान्ह 11 बजे यह प्रशिक्षण मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय भोपाल में होगा। चुनाव आयोग के सचिव श्री रितविक पाण्डे और प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र) श्री राजीव मोहन यह प्रशिक्षण देने आ रहे हैं।
29 noviembre गुरु-शुक्र व चंद्र का मिलन एक कोगुरु-शुक्र व चंद्र का मिलन एक कोदैनिक भास्कर से साभारविनोद त्रिपाठी. Saturday, November 29, 2008 11:50 [IST]
मुरैना. आकाशगंगा में बड़े ग्रहों गुरु, शुक्र और चंद्र का मिलन इसी एक दिसंबर की शाम को होने जा रहा है। यह अद्भुत मिलन करीब 500 वर्ष बाद होना बताया जा रहा है। यह नजारा करीब 20 मिनट तक आकाश के पश्चिम में दिखाई देगा। इसका आकर्षण इतना तीव्र होगा कि अरब सागर में तूफान आ सकता है। इसके अलावा राजनीति में भी अकल्पनीय परिवर्तन का दावा ज्योतिष मर्मज्ञों व आकाशगंगा के जानकारों ने किया है। 12 राशियों में बंटा है
ब्रम्हांड किसने
देखी ग्रहों की चाल अन्य
ज्योतिषि भी कर रहे हैं दावा कैसे, कब होता है मिलन मिलन
के समय सूर्य अस्त होगा बदलेगी
राजनीति क्या
क्या होंगे असर
हवा बनाते विज्ञापनों की हवा खराब, निर्वाचन आयोग ने तलब की प्रचार विज्ञापनों और समाचारों की कतरन, प्रत्याशीयों में हड़कम्पहवा बनाते विज्ञापनों की हवा खराब, निर्वाचन आयोग ने तलब की प्रचार विज्ञापनों और समाचारों की कतरन, प्रत्याशीयों में हड़कम्प मुरैना 29 नवम्बर 08, जिले की विभिन्न 6 विधानसभाओं में प्रत्याशीयों द्वारा चलाये गये प्रचार अभियान की विस्तृत रिपोर्ट मय कतरनों और सी.डी. के निर्वाचन आयोग ने तलब की है । जिला निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्वाचन आयोग ने मुरैना जिला की सभी छ: विधान सभा क्षेत्रों के प्रत्याशीयों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान चलाये गये प्रचार अभियान और छपवाये गये विज्ञापनों व समाचारों का विस्तृत ब्यौरा मय कतरनों और सी.डी. के रूप में तलब किया है । जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा सारी कतरन और सी.डी. तैयार कर निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है । उल्लेखनीय है कि प्रत्याशीयों द्वारा हवा बनाने और दूसरे प्रत्याशीयों की हवा खराब करने एवं कई आपत्तिजनक व आचार संहिता विरूद्ध कथन व तथ्य उल्लेख अपने विज्ञापनों व समाचारों में किये गये थे । आयोग की रिकार्ड तलबी के बाद सारे प्रत्याशीयों में हड़कम्प मच गया है ।
मंत्री के खिलाफ चॉंटा मारने, और मावई के खिलाफ डराने धमकाने का मामला दर्जमंत्री के खिलाफ चॉंटा मारने, और मावई के खिलाफ डराने धमकाने का मामला दर्ज मुरैना 29 नवम्बर 08, मुरैना पुलिस ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री रुस्तम
सिंह एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सोबरन सिंह मावई के खिलाफ
मतदान के दौरान पीठासीन अधिकारियों से कथित तौर पर मारपीट करने
एवं धमकाने का मामला दर्ज किया है। सिंह और मावई मुरैना विधानसभा क्षेत्र से क्रमश: बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।
मतदान जागरूकता अभियानमतदान जागरूकता अभियान जे. वेकटेशन हमारे जैसे लोकतांत्रिक देश में मतदान ही एक ऐसा महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे सरकारी निर्णयों में व्यक्तिगत रूप से प्रभाव डाला जा सकता है । मतदान किसी विधानसभा अथवा लोक सभा चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक प्रत्याशी को वरीयता देने का एक औपचारिक माध्यम है । हालांकि लोकतांत्रिक शासन के लिए आज व्यापक मताधिकार को अनिवार्य माना जाता है, पर क्या सभी मतदाता अपना मतदान करते हैं । राज्यों में मतदान का प्रतिशत अलग-अलग होता है लेकिन औसतन यह 60 प्रतिशत है । हालॉकि चुनाव में मतदान एक मौलिक अधिकार न होकर सांविधिक है लेकिन कितने लोग इस अधिकार का प्रयोग करते हैं । अनुपस्थित रहना यानि मतदान में भाग नहीं लेना है, लेकिन मतदान नहीं करने को अब संतुष्टि या उदासीनता कहकर खारिज नहीं किया जा सकता है । हमारे राजनेताओं के व्यवहार के बारे में आम जनता में असंतोष बढ रहा है लेकिन मतदान न करना इस समस्या का हल नहीं कहा जा सकता । भारत के उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने नामांकन पत्रों के साथ हलफनामे दाखिल करते हुए अपने खिलाफ लंबित अपराधिक मामलों, यदि कोई है तो, अपना, अपने बच्चों की सम्पत्ति, देनदारियों और शैक्षिक जानकारी दें । हलफनामे को मतदान केन्द्रों के बाहर स्पष्ट रूप से दिखाया जाए । ये सब लोगों की जागरूकता के कारण ही संभव हुआ । लेकिन यह संदेश मतदाताओं तक कितना पहुंचा यह मुख्य बिन्दु है । यहीं से जागरूकता अभियान सफल होगा । सफल अभियान अधिक मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया में भाग लेने के लिए निश्चित रूप से प्रोत्साहित करेगा । अभियान 18 वर्ष और उससे अधिक आयु समूह के मतदाताओं पर लक्षित होना चाहिए जो उन्हें अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित करे ताकि उनका अपना भविष्य तय करने में उनकी भी सुनी जाए । मतदाता जागरूकता अभियान इश्तहारों के द्वारा, सिनेमाघरों में स्लाइड दिखा कर और एसएमएस द्वारा चलाया जा सकता है ताकि सभी मतदाताओं तक न्न कृपया वोट डालें न्न का संदेश पहुंच सके ।मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए कम्प्युटर एवं टच स्क्रीन के जरिए छद्म चुनाव भी कराए जा सकते हैं । मतदान के प्रति उदासीन रहने वाले ऐसे मतदाता भी होते हैं जो हालांकि नागरिक सुविधाओं का इस्तेमाल तो करते हैं पर वे वोट डालने की अपनी जिम्मेदारी निभाते नहीं । उनमें से कुछ को आमतौर पर तटस्थ मतदाता की श्रेणी में रखा जा सकता है । वे पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने जैसे उद्देश्यों के लिए फोटो पहचानपत्र बना तो लेते हैं लेकिन वोट नहीं डालते । छद्म मतदान के दौरान ऐसे मतदाताओं को भी लक्षित किया जाना चाहिए और उनसे अपना वोट डालने का अनुरोध किया जाना चाहिए ताकि उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने की याद दिलाई जा सके । 1948 का संयुक्त राष्ट्र महासभा का मानवाधिकार संबंधी सार्वभौमिक घोषणापत्र ऐसी अभिन्न भूमिका पर बल देता है, जिसमें पारदर्शी और खुले चुनाव लोकतांत्रिक सरकार से मौलिक अधिकार को सुनिश्चित कराते हैं । मानवाधिकारों का सार्वभौम घोषणापत्र अनुच्छेद 21 में कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपने देश की सरकार के गठन में भाग लेने का अधिकार है फिर चाहे यह प्रत्यक्ष रूप से हो या स्वतंत्र से चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा हो । स्वतंत्र चुनाव किस तरह राजनैतिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करते हैं, उसका भी अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार प्रतिपत्र में जिक्र है । किसी जागरूकता अभियान का उद्देश्य अल्पसंख्यकों, बेघर लोगों, विकलांगों और उन सब को वोट डालने के अधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो किन्ही कारणों से वोट नहीं डाल पाते । इन कारणों में गरीबी, निरक्षरता, डराना, धमकाना या अनुचित चुनाव प्रक्रिया शामिल हैं । भारतीय निर्वाचन आयोग ने शेष विश्व को दिखा दिया है कि कैसे किसी प्रकार के हस्तक्षेप के बिना चुनाव स्वतंत्र रूप से कराये जा सकते हैं । आयोग प्रत्याशियों और प्रत्येक स्तर पर चुनावों पर नजर रखने के लिए सामान्य, व्यय और लघु स्तर पर पर्यवेक्षक करता है । यह बात करीब-करीब सभी जानते हैं कि राजनीतिक दल चुनावों में अपने प्रत्याशियों को जीतने की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए धन बल और बाहु बल का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं । सड़कों के किनारे, चौराहों, गलियों के नुक्कड़ों पर राजनीतिक नेताओं के बड़े-बड़े कट-आउट लगाने और प्रमुख स्थलों पर होर्डिंग लगाना आदि कुछ ऐसे उपाय हैं जिनके जरिये राजनीतिक दल धन बल प्रदर्शित करते हैं। बहुत से मामलों में राजनीतिक दल समाचारपत्रों में बड़े पैमाने पर विज्ञापन भी देते हैं । आयोग ने धन बल और बाहु बल दोनों के इस्तेमाल को खत्म करने के लिए कई कदम उठाये हैं । चुनावों के समय राज्यों को निर्देश दिये जाते हैं कि आदतन अपराधियों को बंद कर दिया जाए और अन्य अपराधियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंटों को अमल में लाया जाए । आयोग ने चुनाव में वोट डालने के लिए मतदाताओं की पहचान अनिवार्य बना दी है । हालांकि फोटो पहचान पत्र काफी हद तक बना दिये गए हैं लेकिन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर इस क्षेत्र में शत-प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त नहीं हो पाई है तथापि चुनावों में सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने और जाली मतदान रोकने के लिए कई निर्वाचन क्षेत्र में इस समय सचित्र मतदाता सूचियां भी उपलब्ध कराई जाती है । पहचान के अन्य स्रोत जैसे राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट आदि भी प्रयोग में लाये जा सकते हैं । लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि मतदान इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों से होता है । इसलिए मतदान में कोई झंझट नहीं होता । लेकिन यह बात सब लोगों को पता होनी चाहिए । इससे वे लोग भी वोट डालने के लिए आने को तैयार हो जाएंगे जिनके पास फोटो पहचान पत्र नहीं है । जागरूकता अभियान में इस पहलू को भी शामिल किया जाना चाहिए । अन्य मुद्दा जिस पर काफी चर्चा हो रही है वह चुनावों में वोट डालने को अनिवार्य बना देने के बारे में है । कुछ देशों,जैसे आस्ट्रोलिया, वेलजियम और लक्षजमबर्ग में जहां दीघ्रकालिक लोकतंत्र हैं, में चुनावों में मतदान करना अनिवार्य है । लेकिन क्या यह भारत में भी संभव है । इसका उत्तर निश्चित रूप से नहीं में है । हमारे जैसे सामाजिक-आर्थिंक, धार्मिक और बहु-संस्कृति वाले समाज में इस को लागू नहीं किया जा सकता । यदि मतदान अनिवार्य कर दिया जाए तो निस्संदेह बड़ी संख्या में मतदान होगा लेकिन उस सूरत में अवैध वोटों की संख्या बढ जाने की संभावना है । विकल्प के तौर पर मतदाताओं को निर्वाचन के बारे में अपनी राय व्यक्त करने की छूट दी जा सकती है, जिसमें एक राजनीतक संदेश होगा कि खड़े हुए प्रत्याशियों में से किसी के लिए वोट नहीं ताकि यदि वे प्रत्याशियों में से किसी को पसंद नहीं करें तब भी वे अपनी राय व्यक्त कर सकें । इस व्यवस्था को कार्यान्वित करने के लिए इलेक्ट्रानिक मतदान मशीन में एक अतिरिक्त बटन लगाना होगा । अनुपस्थित रहने की बजाए इस सुझाव को लागू करना, निश्चित रूप से अधिक आसान होगा क्योंकि इसमें सार्थ किया है । निर्वाचन आयोग ने पहले ही केन्द्र सरकार के सम्मुख यह मामला उठाया है लेकिन अभी कोई सफलता नहीं मिली है क्योंकि मुख्यधारा के अधिकांश राजनीतिक दल इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है । यदि भारतीय लोकतंत्र इन सब त्रुटियों के बावजूद इन सब वर्षों में बचा रहा है तो इस का मुख्य कारण मतदाताओं में जागरूकता का होना है । इसलिए कोई भी अभियान मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने और उसे किसी चुनाव में प्रत्येक वोट के महत्व के समझने की धारणा पैदा करने का होना चाहिए । # लेखक दैनिक हिन्दू के विधि संवाददाता हैं।
उच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की तनख्वाह बढीउच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की तनख्वाह बढी केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कल की अपनी बैठक में उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन बढाने का फैसला किया है । छठे केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतन बढाये जाने को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीशों की भी तनख्वाह बढायी गयी । भारत के प्रधान न्यायाधीश को अब प्रतिमाह एक लाख रुपये और महंगाई भत्ता मिलेगा। उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के प्रमुख न्यायाधीशों को अब 90000 रुपये प्रतिमाह वेतन और महंगाई भत्ता मिलेगा । उच्च न्यायालयों के अन्य न्यायाधीशों को अब प्रतिमाह 80000 रुपये तथा महंगाई भत्ते मिलेंगे । यह वेतनमान 0101.2006 से लागू माना जाएगा । वेतन का 40 प्रतिशत बकाया मौजूदा वित्त वर्ष में, जबकि 60 प्रतिशत बकाया अगले वित्त वर्ष में दिया जाएगा । इस संबंध में संबंधित कानून में संशोधन के बाद आवश्यक सरकारी आदेश जारी किया जाएगा ।
29 केन्द्रों पर होगा पुनर्मतदान भिण्ड के सर्वाधिक 12 केन्द्र 30 नवंबर को होगा पुनर्मतदान सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी29 केन्द्रों पर होगा पुनर्मतदान भिण्ड के सर्वाधिक 12 केन्द्र 30 नवंबर को होगा पुनर्मतदान सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी भोपाल : 28 नवंबर, 2008 मध्यप्रदेश की 13वीं विधानसभा के चुनाव के लिए 27 नवंबर को हुए मतदान के दौरान प्रदेश में अधिकांश जगहों पर शांतिपूर्ण और निर्विघ्न मतदान हुआ लेकिन 30 ऐसे मतदान केन्द्रों की पहचान की गई जहाँ मतदान के दौरान विभिन्न कारणों से पुनर्मतदान की जरूरत समझी गई। इस सिलसिले में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी है। इन जगहों पर 30 नवंबर को प्रात: 8.00 से शाम 5.00 बजे तक मतदान होगा। इन मतदान केन्द्रों पर सुरक्षा और व्यापक तथा कड़े इंतजाम किये जा रहे हैं। ज्ञात हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में 73 जगहों पर पुनर्मतदान हुआ था। सर्वाधिक 12 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान भिण्ड जिले में होगा इनमें से 10 केन्द्रों के प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा भेजे गये थे जबकि दो और केन्द्रों पर आयोग ने पुनर्मतदान के निर्देश दिये हैं। तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक मुरैना जिले के सुमावली विधान क्षेत्र में दो केन्द्रों बागचीनी 30 और घूघस 81, मुरैना विधानसभा क्षेत्र के एक केन्द्र बस्तरपुर 185 और दिमनी विधानसभा क्षेत्र के तीन केन्द्रों मुडियाखेड़ा 55, मुडियाखेड़ा 56 तथा सुरजनपुर 72, सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र में एक केन्द्र धुलतरा 146, टीकमगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र टीकमगढ़ में एक केन्द्र गणेशगंज 14, खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में दो केन्द्रों टीला 69 और बछौड़ा 73, शाजापुर जिले के सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में एक केन्द्र नाहर खेड़ा 110, इंदौर जिले के इन्दौर (एक) विधानसभा क्षेत्र में एक केन्द्र यादवनंद नगर 32 और इन्दौर (चार) के एक केन्द्र लोधीपुरा 33, भिण्ड जिले के सर्वाधिक 12 मतदान केन्द्रों के तहत लहार विधानसभा क्षेत्र में बसंतपुरा (एक) 25, बसंतपुरा (दो) 26, डिमोल की मढैया 38, देवजूकापुरा 42, लहार 107, लहार 111, लहार 112, लहार 113, जैतपुरा 143, करियावली 158 और मतदान केन्द्र क्रमांक 53 और 97 तथा मेहगांव विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केन्द्र मानपुरा 82, शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा क्षेत्र में देवरीखुर्द 101, जबलपुर जिले के जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक केन्द्र लालकुऑ 166 और राजगढ़ जिले के ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र में एक केन्द्र नलखेड़ा 200 पर पुनर्मतदान होगा।
28 noviembre ग्वालियर चम्बल संभाग में शांतिपूर्ण मतदान सम्पन्नग्वालियर चम्बल संभाग में शांतिपूर्ण मतदान सम्पन्न ग्वालियर 27 नवम्बर 08। ग्वालियर चम्बल संभाग के 34 विधानसभा क्षेत्रों में आज छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांन्तिपूर्ण मतदान सम्पन्न हुआ। मतदान सम्बन्धी प्राप्त प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक मतदान होने का अनुमान है। चंबंल संभाग के श्योपुर जिले में 64 प्रतिशत मतदान, भिण्ड जिले में लगभग 55 प्रतिशत तथा दोनों संभाग के अन्य जिलों में लगभग 55 से 60 प्रतिशत मतदान होने की जानकारी प्राप्त हुई है। दतिया जिले की विधानसभा क्षेत्र के ग्राम महादुबा, अशोक नगर के जिले के ग्राम गन्नीयारी में मतदाताओं ने मताधिकार का उपयोग नहीं किया। इसी प्रकार गुना जिले के ग्राम करोद के एक मतदान केन्द्र पर मात्र 2 मतदाताओं ने ही मताधिकार का उपयोग किया।
27 noviembre घूमी सारी रात, शहर में चोरों की बारातघूमी सारी रात, शहर में चोरों की बारात नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’ मुरैना 27 नवम्बर 08, आज सारी रात जहॉं प्रत्याशीयों के लिये उनके समर्थक घर घर जाकर वोट की दरख्वास्त करते रहे वहीं प्रत्याशीयों द्वारा बुलाये गये चोर बदमाश भी अपना जौहर दिखाने से बाज नहीं आये । समाचार लिखे जाने से तकरीबन आधा घण्टे पहले गांधी कालोनी मुरैना में तकरीबन चार बदमाशों की टोली कालोनी के सूने ताले टटोलते और घरों की कूदा फांदी करते नजर आयी । जिसे हमने अपनी ऑंखों से भागते देखा । मैं समाचार सम्पादन में व्यस्त था तभी अचानक छत के ऊपर से आयी धड़ाम भड़ाम की आवाजों से चौंक पड़ा, आवाज ज्यादा जोर की होने से घर के सभी लोग जाग गये और जैसे ही घर में जगार हुयी, चारों बदमाश भाग निकले । अब चूंकि मेरे घर में पिछले पॉंच साल के दरम्यां दो दफे चोरी हो चुकी है सो घर में रात के वक्त सभी पर्याप्त एहतियात बरतते हैं साथ ही कुछ टैक्नीकल सिस्टम भी घर में फिट कर दिये हैं कि ऊपर से आओ या आसमान से टपकों अपने आप ही धड़ाम भड़ाम के सायरन बजने लगते हैं । हैरत अंगेज और मजे की बात यह है कि जहॉं पुलिस दोनों ही बार न चोर पकड़ सकी और न माल बरामद कर सकी अबकी बार आज रात को इधर घड़ाम भड़ाम हुयी वही बगल की सड़क पर पुलिस की गाड़ी का सायरन भी बजता हुआ सुनाई दिया । वाह प्रभु क्या लीला है । अब इतना तो मालुम था कि नेता चोरी कराते है, अब पता चला कि वे खुद भी चोरी करते हैं और पुलिस की गाड़ी के साथ ही आते हैं । 26 noviembre नगर निगम द्वारा मतदान केन्द्रों की व्यवस्थायें सम्पन्ननगर निगम द्वारा मतदान केन्द्रों की व्यवस्थायें सम्पन्न
ग्वालियर दिनांक 25.11.08- नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि नगर निगम द्वारा जिन राजनैतिक पार्टियों को प्रचार-प्रसार करने हेतु होर्डिंग लगाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी उन पार्टी एवं एजेंसियों द्वारा अपने-अपने होर्डिंग एवं प्रचार से संबंधित अन्य सामग्री हटा ली गई है। नगर निगम के मदाखलत दस्ता द्वारा महानगर के समस्त गली-मौहल्लों का निरीक्षण कर प्रचार से संबंधित जो सामग्री पाई गई उसे भी हटा दिया गया है। एम.एल.बी. कॉलेज पर मतगणना सामग्री वितरण के अवसर पर नगर निगम द्वारा जलप्रदाय की व्यवस्था कराई जा चुकी है इसी क्रम में 26 नवम्बर को सभी मतदान केन्द्रों पर 4.00 बजे तक पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध करा दिया जावेगा। सभी क्षेत्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे पुन: मतदान केन्द्रों का अवलोकन कर पानी, बिजली आदि की व्यवस्था पूर्ण करावें। सभी क्षेत्राधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि उनके द्वारा सभी पोलिंग मतदान केन्द्रों पर पोलिंग बूथ तथा विद्युत व्यवस्था के साथ-साथ पीने हेतु पानी के लिये मटके, गिलास एवं मग्गा की व्यवस्था की जा चुकी है। मतदान के अवसर पर सभी मतदान केन्द्रों पर नगर निगम द्वारा पानी पिलाने हेतु कर्मचारियों की तैनाती की जा चुकी है इस बार महापौर के जनसम्पर्क विभाग के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी प्रथम बार पानी पिलाने हेतु क्षेत्रीय कार्यालय क्र. 19 के अंतर्गत आने वाले मतदान केन्द्रों पर तैनात किये गये हैं। मतदान दलों की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने के लिये नगर निगम ने सभी मतदान केन्द्रों पर अपने विभिन्न विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 26 नवम्बर से डयूटी पर पहुंचा दिया है। निगम के महापौर कार्यालय सहित विभिन्न कार्यालयों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस कार्य हेतु तैनात किये गये हैं ।
मतदान के दौरान सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त 262 कंपनियाँ तैनात चाकचौबंद इंतजाम हालात पर रहेगी सतत नज़रमतदान के दौरान सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त 262 कंपनियाँ तैनात चाकचौबंद इंतजाम हालात पर रहेगी सतत नज़र भोपाल : 25 नवम्बर, 2008
चुनाव उपायुक्त श्री आर. बालाकृष्णन ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए पुख्ता बंदोबस्त पर संतोष जताया है। उन्होंने यह भी कहा है कि प्रदेश में मतदान के दिन सुरक्षा के चुस्त इंतजाम के मद्देनज़र केन्द्र और राज्यों की कुलजमा 262 कंपनियाँ तैनात की जा रही हैं और ये सब मोर्चा संभाल चुकी है। इस सबके बावजूद हालात की हर हलचल पर चुनाव आयोग की सतत नज़र रहेगी। चुनाव उपायुक्त श्री आर. बालाकृष्णन ने कहा कि प्रदेश में चुनाव संबंधी प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा के लिए पिछले 15 दिनों में उन्होंने सघन दौरा कर 40 जिला कलेक्टरों से सीधा संवाद किया। इस मौके पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री जे.एस. माथुर के साथ किए गए इन दौरों में जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अफसरों और आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षकों से संवाद कर उन्हें आयोग द्वारा तय की गई गाइड लाइन, निर्देशों और आदेशों से अवगत करा कर उनकी दिक्कतें भी जानी गई। विभिन्न दिक्कतों का मौके पर निदान कर मैदानी अफसरों को मुस्तैदी से अपनेर् कत्तव्य निर्वहन की हिदायत दी गई है। उन्होंने प्रदेश में चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया। चुनाव उपायुक्त श्री बालाकृष्णन ने कहा कि इस बार ऐपिक (आयोग द्वारा दिया गया मतदाता फोटो परिचय पत्र) के साथ और इसके बगैर मतदान करने वालों के लिए दो पृथक लाईनें लगाई जाएंगी। ऐपिक वाले मतदाताओं को मतदान में प्राथमिकता दी जाएगी। बगैर ऐपिक वाले मतदाता आयोग द्वारा तय 13 वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर मतदान कर सकेंगे। इन 13 दस्तावेजों में से भी 12 दस्तावेज छायाचित्र प्रधान हैं इसलिए पहचान को लेकर दिक्कत नहीं आएगी। शेष एक दस्तावेज (बगैर फोटो वाला ) का इस्तेमाल करने वालों की पहचान उसी निर्वाचन क्षेत्र के ऐपिक रखने वाले अन्य मतदाता से तस्दीक कराके की जाएगी। चुनाव उपायुक्त ने साफ कहा कि आयोग किसी भी वास्तविक मतदाता के मतदान अधिकार को सुनिश्चित करने का पक्षधर है और इसीलिए उसने 13 वैकल्पिक दस्तावेज भी तय किए हैं। लेकिन बगैर ऐपिक वाले मतदाता की आड़ लेकर किसी को भी फर्जी मतदान हरगिज नहीं करने दिया जाएगा। इसी नज़र से क्रिटिकल और वल्नरेबल इलाकों की पहचान भी कराई गई है और अन्य अनेक बिन्दुओं पर व्यापक छानबीन की जा चुकी है। किसी भी अप्रिय स्थिति पर नज़र रखने और इसके मुताबिक तत्काल कार्रवाई अंजाम देने के लिए सुदृढ़ कम्यूनिकेशन प्लान तैयार किया गया है। मॉक पोल की अनिवार्यता तय की गई है जिससे कई तरह के हालात पर नज़र और कार्रवाई सुनिनिश्चित की जाएगी। डमी प्रत्याशियों पर कड़ी निकरानी रखी जा रही है और प्रदेश में आधा दर्जन से ज्यादा मामले अब तक इनके खिलाफ पंजीबध्द किए जा चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐपिक रखने वाले मतदाताओं को प्राथमिकता पर मतदान करने दिया जाएगा और शेष को निर्धारित अंतराल के साथ बारी-बारी से मतदान की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने प्रदेश में मतदाता फोटो परिचय पत्र वितरण में भी 95 प्रतिशत से ज्यादा कार्रवाई पूरी होने और 98 प्रतिशत मतदाताओं के मतदाता सूची में फोटो उपलब्ध होने पर कहा कि यह प्रगति अभी कई अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है लिहाजा प्रदेश ने अच्छी कार्रवाई की है। चुनाव उपायुक्त श्री बालाकृष्णन ने कहा कि चुनाव डयूटी में तैनात सरकारी अमले से साफ कह दिया गया है कि उनका आचरण निष्पक्ष होना चाहिए और इसके खिलाफ जाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भोपाल जिले की समीक्षा उप निर्वाचन उपायुक्त श्री आर. बालाकृष्णन ने अपने तीन दिनी सघन दौरे के अंतिम पड़ाव पर भोपाल जिले के अफसरों से चुनावी तैयारियों को लेकर बातचीत की। उन्होंने अफसरों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों का इस मौके पर समाधान किया और उन्हें जरूरी दिशा निर्देश भी दिए। इस मौके पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री जे.एस. माथुर, संभाग आयुक्त श्री पुखराज मारू, पुलिस महानिरीक्षक श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री अशोक अवस्थी, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री आशीष श्रीवास्तव, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा, जिला कलेक्टर श्री मनीष रस्तोगी और पुलिस अधीक्षक श्री जयदीप प्रसाद सहित अन्य संबधित अफसर भी मौजूद थे।
मतदाता पहचान पर्चियां हों सादी पार्टी के चिन्ह, फोटो न हों उन पर आयोग ने उल्लंघन पर जताया ऐतराजमतदाता पहचान पर्चियां हों सादी पार्टी के चिन्ह, फोटो न हों उन पर आयोग ने उल्लंघन पर जताया ऐतराज भोपाल : 25 नवम्बर, 2008
चुनाव आयोग ने इस जानकारी के तहत कड़ा ऐतराज जताया है कि कतिपय राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों ने मतदाताओं को बाँटी जा रही पहचान पर्चियों पर पार्टी के चिन्ह और फोटो छपवा डाले हैं। आयोग ने इस कृत्य को चुनाव नियमों का उल्लंघन माना है। उसने जिला कलेक्टरों को ताकीद की है कि पर्चियों पर से ऐसे चिन्ह या फोटो तत्काल हटा लिए जाएं। इसे चुनाव कायदों का उल्लंघन मानकर कार्रवाई करने को कहा गया है। आयोग का साफ कहना है कि मतदाता किसी चिन्ह या फोटो छपी पहचान पर्चियां यदि मतदान केन्द्रों में ले जाते हैं तो यह कृत्य मतदान केन्द्र के भीतर चुनाव संयाचना (मत माँगना) की श्रेणी में आएगा और इसकी कानून के मुताबिक आज्ञा नहीं है। कलेक्टरों से कहा गया है कि जिन किसी उम्मीदवारों ने ऐसी पर्चियाँ छपवाई हैं उनमें से तत्काल चिन्ह, उनके नाम या फोटो हटवाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस सिलसिले में बताया गया है कि मतदाता पहचान की पर्चियाँ सफेद कागज पर सादी होनी चाहिए। इन पर उम्मीदवार का या उसके दल का नाम न हो और न ही उनके चुनाव चिन्ह छापे गए हों। इसी तरह इन पर्चियों में कोई सांकेतिक वाक्य या नारे भी नहीं लिखे जा सकेंगे। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि मतदान केन्द्रों के 100 मीटर के दायरे में इन पर्चियों का बाँटा जाना भी कानूनन उल्लंघन माना जाएगा। इन अशासकीय पर्चियों पर केवल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता का नाम, क्रम संख्या, मतदान की तारीख, भाग नंबर, मतदाता नंबर, पिता अथवा पति का नाम, आयु, पता मतदान केन्द्र नंबर, महिलाओं का नंबर का उल्लेख ही सादे कागज पर किया जा सकता है।
सरकारी अमले के लिए चुनौती की घड़ी मतदान की गोपनीयता न हो भंगसरकारी अमले के लिए चुनौती की घड़ी मतदान की गोपनीयता न हो भंग तीन महीनों की कैद और जुर्माना सेवा नियमों के तहत कार्रवाई अलग भोपाल : 25 नवम्बर, 2008
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 27 नवंबर को होने जा रहे मतदान में बड़ी तादाद में सरकारी अफसर और कर्मचारियों का अमला तैनात हो रहा है। यह इन कर्मचारियों कीर् कत्तव्य निष्ठा और निष्पक्षता को लेकर चुनौतीपूर्ण तथा निर्णायक घड़ी होगी। मतदान की जरूरी गोपनीयता को भंग करना इनके लिए खतरनाक हो सकता है। इस अपराध के लिए तीन महीने जेल में बिताने पड़ सकते हैं और जुर्माना भी अदा करना होगा। बात यहीं तक नहीं रहेगी, सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत उन पर कार्रवाई अलग से होगी जो नौकरी से जुड़ा मामला है। चुनाव आयोग का रूख बेहद सख्त है और उसे इन कर्मचारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई का हक लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत इसलिए मिला हुआ है कि चुनाव से जुड़े कर्मचारी-अधिकारी इस अवधि में उसके नियंत्रण और निगरानी में हैं। आयोग ने प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक लगभग 400 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस कार्रवाई के घेरे में 24 आएएएस और आएपीएस जैसे आला अफसर भी आ चुके हैं। मतदान की डयूटी में हर अफसर, लिपिक, एजेंट या अन्य व्यक्ति जो चुनाव में मतों को अभिलिखित करने या उनकी गणना के काम से जुड़ा हुआ है, उसे मतदान की गोपनीयता बनाये रखनी होगी। यही नहीं, उसे इस गोपनीयता को कायम रखने में सहायता भी करना है और किसी भी सूरत में उसे इसके बारे में किसी भी व्यक्ति को सूचना नहीं देनी है। इसमें सूचना का संप्रेषण सिर्फ उन्हीं लोगों को हो जो कानूनी तौर पर किसी मकसद से इसे जानने के लिए अधिकृत हैं। अब फिर भी इनमें से कोई कर्मचारी यह कृत्य कर बैठता है तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 128 के तहत तीन महीनों तक के कारावास और जुर्माने की सजा के लिए भी तैयार रहना होगा।
सरकारी अमले को चेताया किसी उम्मीदवार के लिए काम करना पड़ेगा महंगासरकारी अमले को चेताया किसी उम्मीदवार के लिए काम करना पड़ेगा महंगा जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अफसर भी ज़द में 6 महीनों की कैद और जुर्माना अपराध संज्ञेय होगा भोपाल : 25 नवम्बर, 2008
चुनाव डयूटी में तैनात सरकारी अफसर या कर्मचारियों से कहा गया है कि वे किसी भी सूरत में किसी उम्मीदवार के हित में कोई काम न कर बैठें। उनका कोई भी ऐसा कदम उन्हें छह महीनों तक की कैद और जुर्माने की सजा का पात्र बना देगा। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत होने वाली इस कार्रवाई की ज़द में सारे जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अफसरों और सहायक रिटर्निंग अफसरों के साथ ही पीठासीन अधिकारी, पुलिस अफसर, मतदान अधिकारी और वह लिपिक या अन्य कर्मचारी जो इस काम के लिए तैनात किए गए हैं, शामिल रहेंगे। चुनाव आयोग निर्वाचन कानूनों और आदर्श आचरण संहिता पर अमल को लेकर पूरी तरह सख्त और चौकस है। चुनाव डयूटी के अफसरों से कहा गया है कि वे चुनावी प्रक्रिया में मतदाता के बतौर सिर्फ अपने मताधिकार के प्रयोग तक ही खुद को सीमित रखें। जहाँ तक इस प्रक्रिया के संचालन और प्रबंध में उनकी डयूटी का सवाल है उन्हें पूरी दृढ़ता से अपनी निष्पक्षता सिध्द करनी होगी। किसी उम्मीदवार के हित में उन्हें कोई काम नहीं करना है और न ही किसी मतदाता पर मतदान करने में अपना असर दिखाना है। उन्हें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना है जो किसी उम्मीदवार के पक्ष में संभावना को बढ़ाने वाला हो। इन अफसर और कर्मचारियों को चुनाव में वोट डालने या न डालने के लिए किसी को मनाना नहीं है। ये किसी भी तरह का ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे किसी मतदाता के मतदान करने में असर डल रहा हो। यदि वे ऐसा कर बैठते हैं तो उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन को लेकर 6 महीनों तक की कैद और जुर्माने की सजा भुगतना पड़ेगी। एक और बड़ी बात यह है कि यह दंडनीय अपराध संज्ञेय होगा।
आयोग के शिकंजे में आए 389 अफसर भाप्रसे और भापुसे के 24 गाईड लाइंस पर हुई कार्रवाईआयोग के शिकंजे में आए 389 अफसर भाप्रसे और भापुसे के 24 गाईड लाइंस पर हुई कार्रवाई भोपाल : 25 नवम्बर, 2008
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में 14 अक्टूबर से लागू हुई आचार संहिता के बाद विभिन्न श्रेणियों के 389 अफसर अब तक आयोग के शिकंजे में आ चुके हैं। इनमें भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के 24 अफसर शामिल हैं। इन सभी अफसरों की आयोग की गाईड लाइन और निर्देश पर पदस्थापना बदली गई थी तथा इनकी जगह दूसरे अफसरों की तैनाती की गई। चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को आदर्श आचरण संहिता के मुताबिक अपनेर् कत्तव्य निर्वहन करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद कई स्थानों पर इन अफसरों के रवैये को लेकर आयोग के समक्ष शिकायतें दर्ज हुईं। आयोग के मार्गदर्शी आदेशों और आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन को लेकर इन मामलों में तत्काल कार्रवाई की गई। ऐसे अफसरों को उनके पदस्थापना स्थानों से फौरन हटाने के निर्देश दिए गए और उनकी जगह दूसरों को पदस्थ किया गया। चुनाव आयोग का रूख इस सिलसिले में लगातार कड़ा रहा है और उसका साफ कहना है कि स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव के मद्देनज़र सरकारी अमले के कदाचरण को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग की कार्रवाई से प्रभावित होने वाले अफसरों की फेहरिस्त में भारतीय प्रशासनिक सेवा के 7, भारतीय पुलिस सेवा के 17, राज्य प्रशासनिक सेवा के 28, सहायक और उप पुलिस अधीक्षक स्तर के 27, निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के 60, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों समेत 250 तथा अन्य विभागों के पाँच अफसर शामिल हैं।
25 noviembre राहुल गांधी अपने पिता के अंतिम सभा स्थल पर आज चम्बल को देंगें कांग्रेस का पैगाम, राहुल और मोदी आज चम्बल में, लोग बेताब हैं सुनने के लियेराहुल गांधी अपने पिता के अंतिम सभा स्थल पर आज चम्बल को देंगें कांग्रेस का पैगाम, राहुल और मोदी आज चम्बल में, लोग बेताब हैं सुनने के लिये मुरैना 25 नवम्बर 08, विधान सभा चुनाव प्रचार के तीसरे चरण के आज अन्तिम दिन राजनीति के दो सुपर स्टार एक साथ चम्बल की धरती पर पदार्पण करेंगें । गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को मंजा हुआ और पका हुआ राजनीतिज्ञ माना जाता है और उनकी जादुई मनमोहक भाषणावली सुनने को लोग बेताब रहते हैं वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के स्टार प्रचारक श्री राहुल गांधी का चुम्बकीय व सम्मोहक व्यक्तित्व के साथ बेहद चुम्बकीय आवाज और बोलने का शालीन व प्रखर ढंग लोगों को उन्हें सुनने पर बाध्य कर देता है । श्री राहुल गांधी को लोगों ने टी.वी. पर केन्द्र सरकार के विश्वास मत के दौरान साक्षात सुनाओ था तभी से लोग श्री राहुल गांधी की शैली के कायल हैं । श्री मोदी को लोगों ने टी.वी. पर कई बार बोलते देखा है और उनकी भाषण शैली व धारा प्रवाहिकता के लोग कायल हैं । आज चुनाव प्रचार के खुले दौर के अंतिम दिन दोनों हस्तियां मुरैना शहर में शिरकत करेंगीं । जहॉं श्री राहुल गांधी पुलिस परेड ग्राउण्ड मुरैना में ठीक वहीं अपने प्रत्याशीयों के समर्थन में सभा संम्बोधित करेंगें जहॉं उनकी मॉं श्रीमती सोनिया गांधी पूर्व में सभायें सम्बोधित कर चुकीं हैं, और उनके स्वर्गीय पिता राजीव गांधी ने अपनी अंतिम सभा भी इसी पुलिस ग्राउण्ड में सम्बोधित की थी । इस सभा को सम्बोधित करने के बाद स्वर्गीय राजीव गांधी दक्षिण भारत में सभा सम्बोधित करने गये जहॉं उनकी हत्या कर दी गयी थी । राहुल गांधी के लिये यह स्थान उनके पिता की अंतिम बेहतर सभा का पूज्य स्थान भी है । यह संयोग है कि उस समय स्व. राजीव गांधी के साथ स्व. श्रीमन्त माधवराव सिंधिया थे और आज उनके पुत्र के साथ उसी स्थान पर स्व. माधवराव सिंधिया के पुत्र श्रीमन्त ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूद होंगें ।
इम्पैक्ट फीचर आदि के प्रकाशन व्यय को प्रत्याशी के खर्चे में शामिल करने की कार्रवाई शुरू आयोग के निर्देशों पर कड़ाई से अमलइम्पैक्ट फीचर आदि के प्रकाशन व्यय को प्रत्याशी के खर्चे में शामिल करने की कार्रवाई शुरू आयोग के निर्देशों पर कड़ाई से अमल
ग्वालियर, 24 नवम्बर 08/ इम्पेक्ट फीचर व रिस्पोंस फीचर आदि के रूप में समाचार पत्रों में विधान सभा उम्मीदवारों के प्रकाशित किये जा रहे विज्ञापनों को निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया है । इस परिपालन में ग्वालियर के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री आकाश त्रिपाठी ने जिले के सभी विधान सभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों द्वारा विभिन्न अखबारों में प्रकाशित कराये गये इंपेक्ट फीचर एवं रिस्पोसं फीचर आदि के प्रकाशन में हुए व्यय को प्रत्याशी के चुनावी खर्च में शामिल करने की कार्रवाई शुरू कर दी है । कलेक्टर ने बताया कि विभिन्न अखबारों में प्रकाशित उक्त आशय के विज्ञापनों की प्रत्याशीवार सीड़ी तैयार कर निर्वाचन आयोग को भेजी जायेगी । गौरतलब है कि बीते रोज यहाँ निर्वाचन आयुक्त श्री नवीन बी.चावला ने भी ग्वालियर चंबल संभाग के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों की बैठक में इस प्रकार के इंपेक्ट फीचर व रिस्पोंस फीचर प्रकाशित करने में हुये व्यय को प्रत्याशी के चुनावी खर्च में शामिल करने के निर्देश दिये थे । निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में स्पष्ट तौर पर यह भी कहा गया था कि सीमा से अधिक चुनावी खर्च इलेक्शन ओफेन्स (चुनावी अपराध) की श्रेणी में आता है । अत: चुनावी खर्च की सीमा के उल्लंघन पर सख्ती से कार्रवाई की जायेगी।
भुगतान नहीं होने वाले चेक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक मैजीस्टेरियल अदालतों की स्थापना की सिफारिशभुगतान नहीं होने वाले चेक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक मैजीस्टेरियल अदालतों की स्थापना की सिफारिश
भारतीय विधि आयोग ने भुगतान नहीं होने वाले चेकों के लिए फास्ट ट्रैक मैजीस्टेरियल अदालतों पर अपनी 213वीं रिपोर्ट भारत सरकार को सौंप दी है । आयोग के अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ0 जस्टिस ए.आर. लक्ष्मणन ने यह रिपोर्ट आज केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री डॉ0 हंसराज भारद्वाज को भेजी । बड़ी संख्या में (38 लाख से अधिक) भुगतान नहीं होने वाले चैकों के मामलों के लंबित होने के कारण देश और देश के बाहर कारोबार की पूरी विश्वसनीयता को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है । एक बैंक द्वारा चेक का भुगतान नहीं किए जाने से भुगतान करने वालों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है तथा बड़ी संख्या में चेक नष्ट भी हो जाते हैं । इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए भुगतान नहीं किए गए चेकों के शीध्र निस्तारण के लिए कानून में उपयुक्त संशोधन किए जाने की आवश्यकता है । ऐसे में विधि आयोग ने बड़ी मात्रा में भुगतान नहीं होने वाले चेकों के लंबित मामलों के निबटारे के लिए मजिस्ट्रेट स्तर के फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की सिफारिश की है ।
|
|
|