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30 octubre लाउड स्पीकर का प्रयोग कितना उपयोगी कितना घातकलाउड स्पीकर का प्रयोग कितना उपयोगी कितना घातक निर्मल रानी 163011, महावीर नगर, अम्बाला शहर,हरियाणा नि:सन्देह विज्ञान ने अब तक जितने भी आविष्कार किये हैं उन्हें जहां अनेकों क्षेत्रों में 'वरदान' स्वरूप देखा जाता है वहीं इसके नकारात्मक परिणामों का विश्लेषण करने के बाद विशेषक इन्हीं वैज्ञानिक उपलब्धियों को 'अभिशाप' की संज्ञा देने से भी नहीं चूकते। इसी बात को इस पहलू से भी देखा जा सकता है कि जिस मनुष्य ने अपनी किसी वैज्ञानिक खोज द्वारा कुछ ऐसा कर दिखाया जिससे कि मानवता को लाभ हुआ तो इसे एक वरदान के रूप में देखा गया और जब मनुष्य द्वारा की गई इसी खोज का स्वयं मनुष्य द्वारा ही दुरूपयोग किया जाने लगा और यही वरदान रूपी आविष्कार मानवता के लिए हानिकारक नंजर आया तो इसी उपलब्धि को अभिशाप अथवा घातक वैज्ञानिक उपलब्धि स्वीकार किया जाने लगा। विज्ञान की एक ऐसी ही कांफी पुरानी खोज है लाउडस्पीकर अथवा 'ध्वनि विस्तारक यंत्र'। बेशक इसके तमाम लाभ हैं तथा अनेकों स्थानों पर इसका सदुपयोग होते देखा जा सकता है। देश विदेश में आयोजित होने वाले बड़े से बड़े आयोजनों में दूर दराज तक फैले हाट एवं मेला क्षेत्रों में, जलसे जुलुसों में तथा बड़े से बड़े समागम को सम्बोधित करने में, रेलवे, हवाई अड्डों, बन्दरगाहों, बस अड्डों आदि सार्वजनिक स्थलों पर यात्रियों, आम लोगों अथवा अपने विभागीय कर्मचारियों को तांजातरीन सूचना व दिशा निर्देश देने में , स्कूल, कॉलेज, बड़े-बड़े होटलों, पार्कि ग, रेड लाईट चौराहों, धर्म स्थलों, खेल कूद स्टेडियम, रैली आदि ऐसे तमाम स्थान व अवसर होते हैं जहां लाउडस्पीकर के प्रयोग का लाभ आम लोगों द्वारा एक आवश्यकता के रूप में उठाया जाता है। परन्तु जब यही यंत्र परम्परा, रूढ़ीवाद, फैशन, शोरशराबा, दुकानदारी तथा विज्ञापन आदि का माध्यम मात्र बन जाए तो यही लाउडस्पीकर समाज के लिए प्राय: इतना बड़ा सिर दर्द साबित होने लगता है कि 'अभिशाप' जैसा शब्द भी उसके लिए कांफी नहीं कहा जा सकता। लाउडस्पीकर की गणना आज वैज्ञानिक अविष्कार की उस श्रेणी में की जाने लगी है जो आज पूरी मानवता को हर समय नुंकसान पहुंचाने पर तुला है। 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस में हिन्दुत्ववादी नेताओं द्वारा इसी लाउड स्पीकर के बल पर रामभक्तों को उकसाकर भारतीय लोकतंत्र में घटित होने वाली एक शर्मनाक इबारत लिखी गई। बताया जाता है कि 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन पर धावा बोलने के लिये जब असामाजिक तत्वाें की भीड़ को इक्ट्ठा करने का नारा बुलन्द किया गया उस समय गोधरा स्टेशन के समीप एक धर्म स्थान पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र का खुलकर प्रयोग किया गया। आरोप है कि इसी माध्यम से तमाम उत्तेजना पूर्ण बातें लोगों तक पहुंचाकर उन्हें ट्रेन पर धावा बोलने कि लिये उकसाया गया। देश के दंगा ग्रसित क्षेत्रों में तनावपूर्ण क्षणों में यही यंत्र जलती आग में घी डालने का काम उस समय करता है जब इसी के द्वारा एक धर्मस्थल से हर-हर महादेव की आवांजें गूंजने लगती हैं तो दूसरे धार्मिक स्थानों से नार-ए-तकबीर अल्लाह-हो-अकबर की सदाएं बुलंद होनी शुरू हो जाती है। इस प्रकार इस लाउडस्पीकर की 'कृपा' से ही दोनों प्रतिद्वंदी समुदाय के लोग आमने -सामने हो जाते हैं। उपरोक्त उदाहरण कोई कोरी कल्पना या मात्र काल्पनिक उदाहरण नहीं बल्कि ऐसी सच्चाई है जिससे देश का कोई भी नागरिक इंकार नहीं कर सकता। साम्प्रदायिक दंगों की शुरूआत करने तथा उसे हवा देने में तो इसका प्रयोग होता ही है, इसके अलावा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के समय जब किसी भी सम्प्रदाय विशेष का धर्मगुरू अपने विध्वंसक कौशल के साथ दहाड़ रहा होता है। तथा अपने सम्प्रदाय में उत्तेजना का वातावरण पैदा कर रहा होता है। उस समय भी इस यंत्र की ही अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारों आदि धर्मस्थलों में सुबह-शाम और कहीं कहीं तो अधिकांश समय तक लाउडस्पीकर द्वारा ध्वनि प्रदूषण फैलाते रहना तो आम बात है। इस यंत्र के प्रयोग का उद्देश्य केवल एक ही होता है कि व्यक्ति विशेष की आवाज को इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक दूरी तक तथा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके। क्या यह एक सच्चाई नहीं है कि जिन क्षेत्रों में इन यंत्रों का प्रयोग धर्मस्थानों के नाम पर किया जा रहा है उस क्षेत्र में तमाम स्कूल व कॉलेज के ऐसे बच्चे भी रहते हैं जिनकी पढ़ाई लिखाई इस यंत्र के चलते प्रभावित होती है। विशेषकर परीक्षा के दिनों में जबकि परीक्षार्थी प्रात:काल उठकर परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं, उसी समय हमारे धार्मिक पेशवा लाउडस्पीकर पर भजन आदि की धार्मिक कैसेट चला देते हैं। भले ही वे टेप चलाकर स्वयं भी एक नींद क्यों न सो जाते हों। क्या इस प्रकार का निरर्थक शोर शराबा हमारे छात्रों, समाज के बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है? ब्रह्म मुहूर्त का वातावरण सैर करने के लिए इसी वजह से उपयुक्त बताया गया है क्योंकि इस समय का वातावरण हर प्रकार के प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त होता है। अंफसोस की बात है कि धर्मस्थानों द्वारा लाउडस्पीकर के अंधाधुंध उपयोग ने देश के अधिकांश आबादी वाले क्षेत्रों में विशेषकर नगरों में इस ंकद्र ध्वनि प्रदूषण फैला रखा है कि प्रात: काल की सैर से होने वाले स्वास्थ्य लाभ का अर्थ ही समाप्त होता जा रहा है। तमाम धर्म स्थान तो ऐसे भी देखे जा सकते हैं जिनके द्वारा इस यंत्र से नाजायंज एवं हद से ंज्यादा प्रयोग से दु:खी होकर उनके पडाेसियों द्वारा बांकायदा प्रशासन से शिकायतें की जा चुकी हैं। इस मामले से जुड़ी एक और त्रासदी यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति किसी धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर के माध्यम से कथित धर्माधिकारी द्वारा चलाई जा रही इस कष्ट दायक गतिविधि के विरोध में आवांज उठाता है या जनहित में उसे बंद करने को या उसकी आवांज धीमी करने को कहता है तो बिना समय गंवाये हुए वह धर्म का कथित प्रचारक उसी व्यक्ति पर धर्म विरोधी या नास्तिक होने जैसा कोई भी आरोप मढ़ देता है। देश का भविष्य तथा समाज का विकास दरअसल बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है। बच्चों, बुंजुर्गों, बीमार लोगों के स्वास्थ्य, उनकी देखभाल के लिए वातावरण का शांत और शुध्द होना अत्यन्त ंजरूरी है। यदि इस यंत्र के प्रयोग से समाज का एक भी वर्ग दु:खी व प्रभावित है तो ऐसे धर्मप्रचार से आंखिर क्या लाभ? कौन सा धर्म इस बात के लिए प्रोत्साहित करता है कि आप दूसरों की छाती पर मूंग दर कर अपने धर्म के प्रचार की आड़ में अपनी दुकानदारी चलायें तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करें? ंफिल्मी गानों की धुनों पर भजन पढ़े जा रहे हैं, राम राम एक से लेकर राम-राम दो तीन और यह सिलसिला राम-राम 108 तक पहुंचता है। आंखिर लाउडस्पीकर के द्वारा राम नाम की माला जपने, शब्बेदारी करने, मीलाद या उर्स मनाने से दूर दरांज के सुनने वालोंको क्या लाभ? इस सम्बंध में दरअसल राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बनाये जाने की ंजरूरत है। देश के प्राचीन एवं ऐतिहासिक वे धर्मस्थान जहां कि पूरे वर्ष दिन-रात लोगों का आना जाना लगा रहता है, उन्हें इस श्रेणी से अलग कर शेष धर्मस्थलों को विशेषकर गली-मोहल्लों और घनी आबादी के मध्य बने और दिन प्रतिदिन नये बनते जा रहे धर्म स्थानों पर प्रयोग होने वाले लाउडस्पीकर पर पूरी पाबंदी लगाई जाए। जहां -जहां ंजरूरी हो वहां यूनिट हॉर्न या टम्पर हॉर्न के बजाये स्पीकर बाक्स का प्रयोग किये जाने की छूट दी जाये। बाक्स का प्रयोग भी इस प्रकार होना चाहिए कि उसका मुंह उसी धर्म स्थल के भीतरी भाग की ओर हो न कि किसी पड़ोसी के सिर पर रखकर उसका प्रयोग किया जाये। यदि प्रगति की राह पर देश को ले जाना है तो हमें समाज की तरक्ंक़ी के उपाय करने होंगे। इस प्रयास को उन्हीं उपायों में से एक अहम प्रयास के रूप में देखते हुए हमें पूरी तरह जागरूक होना होगा। हमें अंध विश्वास के चंगुल से मुक्ति पानी होगी तथा वास्तविकता में जीते हुए ऐसी घटिया एवं हानिकारक परम्पराओं को ठुकराना होगा। लाउड स्पीकर का निरर्थक प्रयोग करने वाले लोगों को भी यह महसूस करना चाहिए कि उनके द्वारा समाज को लाउड स्पीकर के प्रयोग से जो कुछ दिया जा रहा है वह समाज के लिए उपयोगी कम है, घातक अधिक। अत: इसे एक विडम्बना स्वीकार करना चाहिए तथा जहां तक हो सके, इससे परहेंज किया जाना चहिए। निर्मल रानी
28 octubre बांस का फूल - वनस्पति जगत का रहस्यबांस का फूल - वनस्पति जगत का रहस्य पृष्ठभूमिका संभवत: बांस से परिचित हरेक व्यक्ति ने यह सुना होगा कि जब बांस से फूल निकलता है तो वह मर जाता है। हालांकि कभी-कभार ही ऐसा होता है न कि सदैव। इसके बावजूद भी बांस के पौधे में फूल आने की घटना को अक्सर ही उसकी मौत की भविष्यवाणी से जोड़ेकर देखा जाता है। बांस में फूल आना वनस्पति जगत की एक पहेली है। वे तथ्य जो बांस के पौधे को वनस्पति के सदृश उगने वाले पौधे के स्थान पर फूल देने वाले पौधे के रूप में समझने के लिए प्रेरित करते हैं, पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। बांस की प्राय: सभी प्रजातियों के जीवन संबंधी अपने-अपने इतिहास हैं। भारतीय एशियाई क्षेत्र से बाहर बांस की कुछ प्रजातियां और इस क्षेत्र की गिनी चुनी प्रजातियों के पौधे ऐसे हैं जो वयस्क होकर कई वर्षों तक प्रतिवर्ष फूल और उसके बाद बीज देते हैं। फूल देनेवाला तना फल विकसित होने के बाद अक्सर मर जाता है लेकिन अन्य तने जिंदा रहते है। बांस की भारतीय-एशियाई सामान्य प्रजातियों में से कई प्रजातियां ऐसी हैं जो नियमित रूप से एक ही समय में और एक वर्ष से अधिक के अंतराल में बीज देती हैं। बांस की विभिन्न प्रजातियों का जीवनकाल तीन वर्ष से लेकर 120 वर्ष तक है और एक क्षेत्र की प्रत्येक प्रजाति के लगभग सभी पौधे फूल देते हैं और इस प्रकार काफी संख्या में बीज देकर खुद मर जाते हैं। ये बीच या तो शीघ्र अंकुरित होते हैं अथवा बरसात की शुरूआत में। फूल देने के तरीके के आधार पर बांस के तीन प्रकार हैं। पहले प्रकार का पौधा वार्षिक आधार पर अथवा लगभग उतने ही समय में फूल देता है। भारत में अरूंदीनारिया और थाईलैंड में स्चीजोस्टाचियम ब्राचीक्लैडम इसका उदाहरण है। दूसरे प्रकार के बांस में फूल आने की घटना अनियमित रूप से होती है। एशिया के कटिबंधीय क्षेत्र में बम्बूसा और डेंड्रोकालामस और जापान में फिलोस्टाचिस आदि इसके उदाहरण हैं। तीसरे प्रकार के बांस में वे प्रजातियां हैं जिनमें फूल आने की घटना भिन्न-भिन्न प्रकार से होती हैं, अथवा फूल या तो एक छोटे क्षेत्र में आते हैं अथ्वा कुछेक तनों में। यद्यपि इन पौधों में फूल आने की घटना के अपने चक्र हैं जो एक क्षेत्र में तो समान अवधि के होते हैं किन्तु दूरस्थ स्थानों के लिए उनकी अवधि भिन्न-भिन्न होती हैं। पी.इडुलिस इसका उदाहरण है। बांस की कुछ भारतीय प्रजातियों में फूल आने की घटना निम्नानुसार भिन्न-भिन्न चक्रों में होती हैं। इंडोकैलेमस विटियानस, ओक्लेंड्र स्क्रीप्टोरिया, ओ.रीडी, ओ.स्ट्रीडुला नामक बांस की प्रजातियां एक वर्ष के अंतराल में फूल देती हैं। ओ.ट्रावेंकोरिया प्रजाति के पौधे 7 वर्ष की अवधि में एक बार फूल देते हैं। थामनोकैलेमस स्पैथीपऊलोरस प्रजाति के पौधे 16-17 वर्षों में और डेंड्रोकैलेमस स्ट्रीक्टस 25-65 वर्षों में फूल देते हैं। भारत में बांस की कुछ अन्य प्रजातियां भी हैं जिनमें से थेमेनोकैलेमस फाल्कोनेरी, चिमोनोबम्बूसा फाल्काटा 28-30 वर्षों में, ऑक्सीथेनांतेरा एबीसीनिका, मेलोकान्ना बेसीफोरा, बम्बूसा अरूंदीनेसिया 30 वर्षों के अंतराल में, डेंड्रोकैलेमस हेमिल्टोनी 30-40 वर्षो में, बम्बूसा टूल्डा 30-60 वर्षों में, बम्बूसा पॉलीमोर्फा 35-60 वर्षों में और चिमोनोबम्बूसा जैंसरेंसिस 45-55 वर्षों के अंतराल में फूल देती हैं। थायरोस्टेचिस ओलीवेरी प्रजाति के बांस के पौधे 47-48 वर्ष में, बम्बूसा कोपेलेंडी और स्यूडोस्टेचियम पॉलीमार्फम 48 वर्ष में और फाइलोस्टेचिस बम्बूसोइड्स 60 वर्षों में (जापान में 120 वर्षों) में पुष्पित होते हैं। हालांकि बांसों के पुष्पित होने के बारे में अनेकानेक अनुसंधान और चर्चाएं जारी हैं फिर भी यह विषय वर्णनातीत होने के साथ-साथ रहस्यपूर्ण बना हुआ है। बांस में फूल आने और इसकी मौत होने के बारे में कई सिध्दांत प्रतिपादित किए गए हैं। इसके बार में एक रोग विज्ञान सिध्दांत है जो बताता है कि नीमैटोडों, फफूंदियों, कीटाणुओं और जीवाणुओं जैसे सूक्ष्म जीवों के कारण बांस के विनाश के लिए फूल निकल आते हैं। इसके बारे में सावधिक सिध्दांत के अनुसार अलैंगिक विधि द्वारा बांस के पुनर्जनन हेतु इसकी परिपक्वता होने पर इसका पुष्पित होना शुरू हो जाता है। बांसों के पुष्पित होने के बारे में एक रूपांतरण सिध्दांत है जिसके अनुसार यह घटना अलैंगिक प्रजनन की एक विधि है। इस बारे में पोषण सिध्दांत का कहना है कि बांसों का पुष्पित होना और उसमें फल आना सामान्य रूप से एक प्रकार के शारीरिक व्यवधान के परिणामस्वरूप है जो मुख्य रूप से वानस्पतिक कोशिकाओं के अल्प-विकास के कारण और कार्बन नाइट्रोजन अनुपात में असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है। बांसों के फूल के बारे में एक मानवीय सिध्दांत भी है जो बताता है कि बांसों को काटने और जलाने जैसी मानवीय व्यवहारों के कारण ये पुष्पित होते हैं। सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि बांस के पुष्पित होने की परिणति उसकी मृत्यु के रूप में होती है। पुष्पित हाने के बाद बांस कई प्रकार के मृत्यु संबंधी लक्षण दर्शाते हैं। बांसों के पुष्पित होने से न तो वायु में मौजूद इसके हिस्से और न ही भूमिगत हिस्से की मृत्यु होती है। अरूंदिनारिया, फाइलोस्टाचिस, बम्बूसा एट्रा की कुछ प्रजातियां इसका उदाहरण हैं। इनके पुष्पित होने के परिणामस्वरूप केवल पौधे के वायु वाले हिस्से की ही संपूर्ण मृत्यु होती है। राइजोम जीवित रहता है और पौधों का पुनर्जनन होता है। अरूंदिना एमाबिलिस, ए सिमोनी, फाइलोस्टेचिस निदुलारिया इसके उदाहरण हैं। बांसों के पौधे के पुष्पित होने के परिणास्वरूप पौधे के वायु में मौजूद हिस्से और भूमिगत हिस्से की पूरी तरह मौत हो जाती है और ऐसे में इनका पुनर्जीवन केवल बीजों से ही संभव हो पाता है। ओलीवेरी, बम्बूसा अरूंदिनेसिया, बी टुल्डा प्रजाति के बांस इसके उदाहरण हैं।बांस के अधिकांश पौधे अपनी प्रजाति के एक ही क्लोन से संबंधित होते हैं। हालांकि उनके जीनों में कुछ ऐसी विशेषताएं छुपी हुई हो सकती हैं जो इसक उत्पादकों के लिए उपयोगी हों। बीजों से उत्पन्न इसके नये क्लोन अधिक मजबूत होने के साथ-साथ बीमारियों अथवा कीटाणुओं के प्रति अधिक प्रतिरोधी और संभवत: अधिक सजावटी भी हो सकते हैं। कुछ लोगों के पास बांस की उन्नत किस्मों के निर्माण की जानकारी है। बीजों से नये पौधे तैयार करने का प्रयास भी किया जाना चाहिए। अक्सर ऐसा पाया जाता है कि बीजों के माध्यम से खास विशेषताओं वाले क्लोन नहीं तैयार हो पाते इसलिए वानस्पतिक रुप से ही इसके संरक्षण का प्रयास करना महत्वपूर्ण है।फूल देने वाले बांस के पौधे को पुनर्जीवन प्रदान करने के अनेक तरीके सुझाए गए हैं, जिनमें से कुछ तरीके कुछ मामलों में कारगर पाए गए हैं और ज्यादातर तरीके बेअसर साबित हुए हैं।फूल देने वाले बांस के पौधे हमारे सामने एक अवसर उपस्थित करते हैं। बांस के ऐसे सारे पौधे हमेशा नहीं मरते, किंतु अधिकांश मामले में वे मर ही जाते हैं। ऐसा पौधा जिसने विशेष तौर पर फूल देने के लिए नये तने का विकास करना छोड़ दिया हो उनकी मृत्यु होना अवश्यंभावी है।बांस के कई पौधों में फूल आने आने की घटना होती है, किन्तु यह जरूरी नहीं है कि उस प्रजाति अथवा क्लोन के सारे पौधों में ऐसा हो। कई बार ऐसा देखा जाता है कि एक बड़े क्षेत्र में बांस की एक प्रजाति एक ही समय में फूल देती है। सामान्य तौर पर उगाये जाने वाले बांस के पौधे एक ही क्लोन से संबंधित होते हैं अथवा उसके करीब होते हैं और ऐसे में इस बात का जोखिम होता है कि उस प्रकार के सारे पौधे अथवा अधिकांश पौधे फूल दे सकते हैं और मर भी सकते हैं। कई बांस ऐसे हैं जो फूल नहीं देते और इस कारण वे बीज भी नहीं दे पाते। किन्तु ऐसे बांस जंगल में विकसित होते नहीं पाये जाते और वे उगाए गए पौधे होते हैं। पुष्पित होने के बाद बांस के पौधे के मरने का सबसे अधिक संभावित कारण यह होना चाहिए कि इसे आवश्यकतानुसार जल,पोषक तत्व, स्थान और धूप न हीं मिल पाते हैं। मृतप्राय पौधे का मलबा बांस के नये पौधों को ढक लेता है। बांस के पौधों में फूल आने और उसके मरने की घटना के लिए समय निर्धारण की प्रणाली को समझ पाना अब तक संभव नहीं हो पाया है और यह प्रकृति की एक अनबुझी पहेली के रूप में विद्यमान है।अब प्रश्न यह उठता है कि बांस के किसी पौधे में जब फूल आए तो हमें क्या करना चाहिए। एक विकल्प तो यह है कि हमें इसके लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में पौधे बच सकते हैं। अथवा वे मर जाएंगे। एक दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि हमें बांस के बीजों का संग्रह करके नये सिरे से उसकी पीढी तैयार करने में जुटना चाहिए और मृत अथवा मृतप्राय पौधों को हटा देना चाहिए। यदि कुछ शाखाओं में ही फूल आ रहे हों तो निश्चित तौर पर किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर यदि पूरे पौधे में फूल आ रहे हों तो फूलवाले पौधे को काटकर हटाना चाहिए।बांसों में फूल आने और उनके पुनर्जीवन के बारे में चीन में कई अनुसंधान कार्य किए गए हैं। पी विवेक्स प्रजाति के बांसों में जियांगसू और झेजियांग प्रांतों में वर्ष 1969 से लेकर 1976 तक फूल आने की घटनाएं हुई। सियंग एट अल की रिपोर्ट इनके साथ किए गए प्रयोगों के आधार पर 1981 में प्रकाशित हुई। जिन पौधों में फूल आये थे उनके तीव्र पुनर्जीवन के लिए उनके मूसलों को खोद कर निकाला गया और उनके 30-50 सेंटीमीटर के टुकड़े बनाकर पांच घंटे तक जिबरेलिक अम्ल में डुबाकर रखने के बाद क्यारियों में रोपा गया। जब नये अंकुर आए तो प्रत्येक दो सप्ताह में उनपर छिड़काव किया गया। तीन महीने बाद इस प्राकर उपचारित मूसलों में से 36 प्रतिशत में फूल आए जबकि बिना उपचारित मूसलों में से 64 प्रतिशत में फूल आने की घटनाएं हुईं। एक वर्ष के बाद ऐसा पाया गया कि उपचारित मूसलों से अधिक सामान्य और बिना फूल वाले पौधे तैयार हुए। सियूंग इस बात की चेतावनी देते हैं कि यह आवश्यक नहीं है कि नाइट्रोजन उर्वरक बांसों में फूल आने से रोक सके और कई बार तो यह उनके पुनर्जीवन की गति को धीमी करते हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए ऑनलाइन मीडिया मान्यता शुरूअन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के लिए ऑनलाइन मीडिया मान्यता शुरू सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत पत्र सूचना कार्यालय ने भारत के 39वें अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह 2008 के लिए मीडिया को ऑनलाइन मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह समारोह 22 नवम्बर से 02 दिसम्बर, 2008 तक गोवा में होगा। मीडिया से जुड़े व्यक्ति मीडिया मान्यता के लिए पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट www.pib.nic.in पर जाकर पंजीकरण कराने के लिए मीडिया मान्यता आईएफएफीआई 2008 (इपऊफी) पर क्लिक कर सकते हैं। यह लिंक www.iffi.nic.in पर भी उपलब्ध है। पंजीकरण कराने वाले पत्रकारों के पास फिल्म समारोह का तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए तथा उनके आवेदन संगठन से अनुसंशित होने चाहिए। मान्यता लेने की अन्तिम तिथि 15 नवम्बर, 2008 है।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल ने दिवाली की बधाइयां दीराष्ट्रपति ने दिवाली की बधाइयां दी राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने दिवाली के अवसर पर देशवासियों को बधाइयां दी है। अपने बधाई संदेश में राष्ट्रपति ने कहा दिवाली के इस शुभ अवसर पर मैं अपने देशवासियों को हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं देती हूं। इस वर्ष यह पर्व लोगों में शांति, समृध्दि और सांप्रदायिक सद्भाव लाने के साथ साथ अज्ञानता दूर करे और ज्ञान की ज्योति जलाए। ज्योतिपर्व दिवाली हर मानव में बुराई पर अच्छाई और सच्चाई की जीत का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति ने लोगों को दीपावली की बधाइयां दी उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने दीपावली के शुभअवसर पर देशवासियों को बधाइयां दी हैं। अपने बधाई संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह त्यौहार सभी नागरिकों के जीवन में शांति, समृध्दि और खुशहाली का सूत्रपात करे। उपराष्ट्रपति के संदेश का मूलपाठ इस प्रकार है- न्न मैं दीपावली के शुभअवसर पर अपने देशवासियों को हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं देता हूं। ज्योतिपर्व दीपावली पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है तथा जीवन में उच्चादर्शों का अनुपालन करने के हमारे संकल्प को मजबूत करता है। दीपावली हमेशा हमारे समाज में लोगों को एकजुट रखने वाली सबसे बडी ताकत रही है क्योंकि इसे सभी लोग साथ मिलकर मनाते हैं। हम इस अद्भूत पर्व को उसके सही अर्थों में मनाएं। यह पर्व सभी नागरिकों के जीवन में शांति, समृध्दि और खुशहाली का सूत्रपात करे।
प्रधानमंत्री ने देश को दिवाली की बधाई दी प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह ने दीपावली के पावन अवसर पर लोगों को बधाइयां दी है। अपने बधाई संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्योतिपर्व दीपावली आपसी भाईचारा और समाज के सभी वर्गों में सहृदयता का बढावा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में मनाया जाता है तथा हमारी साझा संस्कृति के सही अर्थों को प्रदर्शित करता है। यह शरद त्रऽतु के आगमन और बुवाई सीजन की शुरुआत की संदेश देता है। उन्होंने कहा, न्नयह ज्योतिपर्व हमारे देशवासियों के लिए उल्लास, खुशहाली, शांति और समृध्दि लाए।
राज्यपाल डा. जाखड़ द्वारा दीपावली की शुभकामनाएं राज्यपाल डा.बलराम जाखड़ ने प्रदेशवासियों को दीपावली की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने अपने शुभकामना संदेश में प्रदेश की तरक्की और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की है। डा. जाखड़ ने शुभकामना संदेश में कहा है कि दीपावली के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को आपसी सद्भाव और भाई-चारे की भावना को मजबूत बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर प्रयास करना चाहिये। कोशिश यह होना चाहिये कि हर गरीब के घर दिया जले, तथा हर घर में खुशहाली, हर खेत में हरियाली और हर चेहरे पर लाली का वातावरण निर्मित हो। राज्यपाल डा. जाखड़ ने दीपावली को धार्मिक आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा है कि इस त्यौहार पर हर इंसान एक- दूसरे के साथ खुशियां बांटे।
25 octubre राष्ट्रीय संकल्प दिवस 31 अक्टूबर कोराष्ट्रीय संकल्प दिवस 31 अक्टूबर को भोपाल : 24 अक्टूबर, 2008 स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि 31 अक्टूबर का दिन इस वर्ष भी राष्ट्रीय संकल्प दिवस के रूप में मनाया जायेगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टरों को भेजे गये पत्र में राजधानी सहित जिला मुख्यालयों और महत्वपूर्ण शहरों में राष्ट्रीय संकल्प दिवस को मनाये जाने के बावत निर्देश जारी किये गये हैं। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान आदर्श आचरण संहिता का विशेष ध्यान रखने की हिदायत भी दी गई है। राष्ट्रीय संकल्प दिवस पर स्थानीय प्रशासन द्वारा रैलियों का आयोजन किया जायेगा। इन रैलियों में राष्ट्रीय भावना और देशभक्तिपूर्ण गीत गाये जायेंगे तथा भाषण और व्याख्यान होंगे। राष्ट्रीय संकल्प दिवस पर आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों में राजनैतिक व्यक्तियों को मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अध्यक्ष नहीं बनाये जाने और इस दौरान किसी भी प्रकार के राजनैतिक भाषण इत्यादि नहीं होने देने के बारे में भी सामान्य प्रशासन विभाग ने हिदायतें दी है।
विधानसभा निर्वाचन : कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी हटाये, मुरैना कलेक्टर गुप्ता भी चम्बल से रूखसतविधानसभा निर्वाचन : कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी हटाये, मुरैना कलेक्टर गुप्ता भी चम्बल से रूखसत भोपाल : 24 अक्टूबर, 2008 राज्य शासन ने आज भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों की नई पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार श्री एम.के. अग्रवाल कम्पनी सेक्रेटरी-सह-वित्तीय नियंत्रक-सह-प्रशासकीय अधिकारी, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्रीय विद्युत वितरण कम्पनी, जबलपुर की सेवाएं ऊर्जा विभाग से वापस लेते हुए उन्हें अब कलेक्टर मुरैना पदस्थ किया गया है। इसी प्रकार आयुक्त नगर पालिक निगम जबलपुर विधानसभा निर्वाचन : पुलिस अधिकारी हटाये भोपाल : 24 अक्टूबर, 2008 राज्य शासन ने आज भारतीय पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों का स्थानांतरण कर उनकी नई पदस्थापना की है। गृह विभाग द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार श्री पवन जैन प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पुलिस गृह निर्माण निगम भोपाल, को पुलिस महानिरीक्षक, उज्जैन रेंज पदस्थ किया गया है। इसी प्रकार श्री संजीव शमी सेनानी, 7वीं वाहिनी, विशेष सशस्त्र बल, भोपाल को स्थानांतरित करते
हुए उनकी नई पदस्थापना अब पुलिस अधीक्षक, इंदौर के पद पर
की गई है।
विधानसभा निर्वाचन : पुलिस अधिकारी हटायेविधानसभा निर्वाचन : पुलिस अधिकारी हटाये भोपाल : 24 अक्टूबर, 2008 राज्य शासन ने आज भारतीय पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों का स्थानांतरण कर उनकी नई पदस्थापना की है। गृह विभाग द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार श्री पवन जैन प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पुलिस गृह निर्माण निगम भोपाल, को पुलिस महानिरीक्षक, उज्जैन रेंज पदस्थ किया गया है। इसी प्रकार श्री संजीव शमी सेनानी, 7वीं वाहिनी, विशेष सशस्त्र बल, भोपाल को स्थानांतरित करते
हुए उनकी नई पदस्थापना अब पुलिस अधीक्षक, इंदौर के पद पर
की गई है।
24 octubre शाबास प्रवेन्द्र नागेन्द्र, पुलिस पर लगे कलंक को धोया, कुल की लाज भी रखी जनता का विश्वास भी पायाशाबास प्रवेन्द्र नागेन्द्र, पुलिस पर लगे कलंक को धोया, कुल की लाज भी रखी जनता का विश्वास भी पाया पुलिस आरक्षकों की जांबाजी और बहादुरी पर विशेष सम्मान आलेख मुरैना की जनता की ओर से -ग्वालियर टाइम्स
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमदभगवदगीता में कहा कि स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह: इसके अलावा धर्मयुक्त युध्द से बढ़कर क्षत्रिय के लिये अन्य कोई कल्याण कारक कर्तव्य नहीं हैं ! क्ल सुबह तड़के मुरैना की दर्जी गली में हुये आधा दर्जन बदमाशों से अंधे मुकाबले में छह सशस्त्र बदमाशों से जब पुलिस के केवल दो आरक्षक जान पर खेलकर भिड़ गये बल्कि सीधे मौत से टकरा गये वह भी तब जब रात का वक्त, अंधेरा कायम, लोग घरों में खुराटर्ें मार कर सो रहे हो और बिना स्ट्रीट लाइटों के गलियाँ स्याह अंधेरे में डूबी हों, चारों ओर श्मशानी सन्नाटा पसरा हो, हाथ को हाथ न सूझता हो और मौत बस चन्द गज की दूरी पर खड़ी कनपटी छूती हुयी निकल जाये ! भारत की सीमा पर निगहबानी करते चम्बल के सपूत फौजी नौजवानों के लिये ऐसे दृश्य रोजमर्रा के आम हैं तो मुरैना पुलिस भी कुछ ऐसे ही हालातों में जनता की वक्त ए रात चौकसी करती है ! बस फर्क ये है कि पुलिस में कुछ या कई गद्दार या कायर घर बनाये बैठे हैं तो वहीं कुछ अपने कुल और अन्नदाता विभाग की इज्जत व मान मर्यादा की रक्षा के लिये और शहर व अंचल के अमनोचैन कायमी के लिये 24 घण्टे मौत हथेली पर ले घूमते हैं ! हमें बहादुर पुलिस आरक्षकों की सम्मान गाथा सुनने से पहले उन परिस्थितियों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा जहाँ सन्नाटे के साये में घनघोर अंधेरे में केवल दो लोग छह हथियार बन्द बदमाशों से जान पर खेल कर भिड़न्त ले लेते हैं ! लेकिन यह भी चिन्ता जनक है कि रात्रि पुलिस गश्ती दल केवल दो लोगों का और वह भी पैदल, उस पर भी इस कायरों और कमजोरों दब्बूओं के शहर में बदमाश के मारे जाने के बाद पुलिस एक घण्टे तक चिल्लाती रही मगर गली का कोई निवासी अपने घर से बाहर नहीं निकला ! उफ शर्म इन मुर्दो की बस्ती में क्या खाक चिराग जलेंगें ! वे जो अपने आप को चम्बलवासी कह कर गौरव से माथा उठा कर चम्बल को शर्मसार करते हैं, पुलिस पर अपराध होने के बाद पुलिस कार्यवाही से अपराधी को बचाने के लिये ऐड़ी चोटी का जोर लगाते हैं, पुलिस पर चढ़ चढ़ बैठते हैं, आखिर क्यों सबेरा होने तक पुलिस द्वारा चिल्ला चिल्ला कर बुलाये जाने दरवाजे पीटने के बाद भी घरों से नहीं निकले ! थू है ऐसे बहादुरी के मुर्दा पुतले शहर वासीयों पर ! इनसे तो वह कुत्ते अच्छे जो पुलिस को चिल्ला चिल्ला कर वारदातियों तक पुकार ले गये ! दर्जी गली वासी तो कुत्तो से भी गये बीते हो गये ! उफ शर्म शर्म शर्म ! यदि हम होते तो पुलिस के साथ मिल कर लड़ते और अपने बहादुर रक्षकों को अकेले नहीं मौत से टकराने देते ! मेरे मुहल्ले में जब भी कोई रात को गश्ती दल मुझे दिखता है तो मैं उसे नजर में रखता हूँ और कभी अगर ऐसा हुआ जैसा दर्जी गली में हुआ तो बदमाश एक नहीं पूरे गिरोह को ही ढेर कर लेंगे ! मेरे मोहल्ले में भी कुछ कायर बसते हैं लेकिन सौ गीदड़ भी मिलकर एक शेर से नहीं टकरा सकते यानि चन्द शेर भी हमारी बस्ती में हैं बस उतने काफी हैं और हम सभी ने आपस में रात में सतत सम्पर्क में रखने की नेटवर्किग भी कर रखी है ताकि कहीं गर कुछ ऐसा हो तो अव्वल तो हम खुद निबटा लेंगे और अगर पुलिस भी मौजूद हुयी तो पुलिस को जंग अकेले नहीं लड़ने देंगे ! फिर एक बार थू है दर्जी गली के कायर वाशिन्दों पर ! प्रवेन्द्र सिंह तोमर और नागेन्द्र सिंह चौहान ये दो नाम हैं उन बहादुर सिपाहीयों के जो जान पर खेल कर सामने खड़ी मौत को ललकार कर टकरा गये ! शाबास प्रवेन्द्र सिंह तोमर शाबास नागेन्द्र सिंह चौहान ! तुमने अपनी जांबाजी और बहादुरी से अपनी माँ के दूध को धन्य कर दिया, कुल की लाज रख ली और पुलिस पर कापुरूष पुलिसियों द्वारा लगाये कलंक को कुछ हद तक धो दिया ! पुलिस पर जनता का विश्वास लौटा दिया और उन पुलिसियों के मुँह पर जोरदार तमाचा जड़ दिया जो पुलिस पर कलंक और बोझ हैं और जो चोर और लुटेरे पाल कर अपने बैंक खाते चलाते हैं ! ऐसे बेशर्म और पुलिस को बदनाम करने वाले पुलिसियों को इन दो आरक्षकों से देशभक्ति और जांबांजी का सबक लेना चाहिये ! विशेष रूप से दाद देनी होगी प्रवेन्द्र सिंह तोमर की जिसने गोलीयों के बदले केवल एक गोली चलाई और अंधेरे से डूबे सन्नाटे में भी अचूक रही और एक ही गोली ने बदमाश का काम तमाम कर डाला ! काश नागेन्द्र सिंह चौहान भी जमीन पर लेट कर जान बचाने के बजाय गोली चलाता तो शायद एक दो बदमाश और भी जमीन्दोज हो जाते ! नागेन्द्र सिंह मौके पर मौजूद था यही काफी है लेकिन काश वह भी फायर करता तो धरती का बोझ कुछ और कम हो जाता ! पर खैर यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि जिसको आसन्न खतरे के वक्त जो भी तरीका उचित समझ आये वह वही करता है ! पर शाबास प्रवेन्द्र ! तुम्हें इस देश का हार्दिक नमन ! हालांकि पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह भी अपराधियों के विरूध्द काफी कठोर दिल हैं और सी.एस.पी. अमृत मीणा व टी.आई सिटी कोतवाली प्रवीण अष्ठाना भी इस समय काफी अच्छा काम कर रहे हैं, और अपराधों को जहाँ का तहाँ लगाम कस कर जिस कदर पुलिस अधीक्षक से लेकर सी.एस.पी. टी.आई और आरक्षकों ने रोक दिया है ! वाकई धन्यवाद और साधुवाद के पात्र हैं ! मैं इस पूरी टीम की वर्तमान कार्यप्रणाली से संतुष्ट व प्रसन्न हैं काश आगे भी इसी प्रकार अपराध मुक्त अंचल के लिये यही जांबाजी और कार्यप्रणाली बरकरार बनी रहे ! मेरे एक पूर्व आई.पी.एस. दोस्त के और एक पुसि आरक्षक मित्र मुझे कहा करते हैं कि चोर असल में चोर नहीं होता, चोर तो असली उस एरिया का थानेदार होता है, अगर वह चाहे तो चोरी डकैती या लूट हो ही नहीं सकती ! अगर होती है तो समझिये कि उस एरिया का थानेदार ही चोर है ! आज लम्बे समय से मैं इसे देख और महसूस कर रहा हूँ ! कि उनका कहना सत्य की अकाटय परिभाषा है ! मुरैना पुलिस को दिल से चम्बलवासीयों विशेषकर मुरैना वासीयों की ओर से धन्यवाद और बहादुरी के लिये नमन करते हुये कहना चाहूंगा कि ! हजारों साल से नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है ! बड़ी मुश्किल से होते हैं चमन में दीदावर पैदा !! वह सर क्या जो झुके अन्यायी की चौखट पर ! सिर तो वह है जो कटे न्याय की खातिर !! नहीं हारते वे कभी जो लड़ कर जीवन पाते हैं ! पराजय के बाद भी राणा की तरह पूजे जाते हैं !! राणा प्रताप और अकबर में फर्क बस इतना है दोस्तो ! नहीं दिखते अकबर के बुत भी कहीं, राणा के घोड़े हर चौराहे पे नजर आते हैं ! 20 octubre परिसीमन का साया : माया तेरे तीन नाम, परसा, परसू, परसराम, ध्वस्त गणित चौंकाने वाले होगें परिणामपरिसीमन का साया : माया तेरे तीन नाम, परसा, परसू, परसराम, ध्वस्त गणित चौंकाने वाले होगें परिणाम श्रंखलाबद्ध आलेख करवट-6 नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द’’ पिछले अंक से जारी ... यूं अब विधानसभा चुपाव काफी नजदीक आ गये हैं और चुनावी सागर की जल तल में जमी काई भी काफी हद तक छंट गयी है । कुछ राजनीतिक दलों की निगाहें (सभी की नहीं) लगे हाथ होली बाद होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी लगी हुयीं हैं । और वे अपनी तैयारी में लोकसभा चुनावों की तैयारी को भी शामिल कर चल रहे हैं । वैसे लोकसभा का चुनाव अभी परिदृश्य से परे है और जनता यानि मतदाता के मनोमस्तिष्क में लोकसभा चुनावों का कोई कीड़ा नहीं रेंग रहा अत: हम अभी इस आलेख में लोकसभा चुनावों को अपने जिक्र व चर्चा से परे रख कर केवल विधानसभा चुनावों के परिदृश्य व आलोक में ही इस आलेख को लिखेंगे व पढ़ेंगे । कतिपय जगह कतिपय राजनीतिक दलों की लोकसभा चुनाव सम्बन्धी बातों का आलेख में कहीं जिक्र आये भी तो उसे महज विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में ही ग्रहण करें । जहॉं राजनीतिक दल इस समय अपने अपने लठ्ठ भांजने में लगे हैं वहीं हवाई तलवारें भी आसमान चूमने लगीं हैं । एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों का दौर शुरू हुये हालांकि अर्सा गुजर गया है । लेकिन अभी पार्टियों के लोकल प्रत्याशी घोषित न होने से आरोपों की यह बौछारें उच्च स्तरीय ही हैं अभी स्थानीय स्तर पर इनका अभ्यास युद्ध प्रारंभ नहीं हुआ है । राजनीतिक दल जिन्होंने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं, उनका चुनाव प्रचार प्रारंभ हो गया है । हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव का ऐलान करके सबको अपनी अपनी पॉंत जमाने का औपचारिक रंग दे दिया है और कई दल और कई नेता अपनी अपनी बिसात बिछाने में लग बठे हैं । वर्तमान परिदृश्य में किसके क्या हाल हें इस पर एक सरसरी नजर डाल ली जाये तो विषय विस्तार को समझना आसान रहेगा । पहले आईये चम्बल घाटी से ही शुरू करते हैं यहॉं बहुजन समाज पार्टी ने अपने सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं वहीं किंचित विवादों के चलते लगे हाथ लोकसभा का प्रत्याशी भी धोषित कर दिया है । भाजशपा ने अभी केवल तीन विधानसभा में ही प्रत्याशीयों का चयन किया है जिसमें अभी तक घोषित केवल दिमनी विधानसभा का प्रत्याशी हुआ है । सपा के प्रत्याशीयों का चयन अंतिम रूप में हैं और शीघ्र ही घोषित कर दिया जायेगा । वहीं लोक जन शक्ति पार्टी के प्रत्याशीयों की सूची भी घोषित की जा चुकी है । अन्य छिटपुट पार्टीयां भी प्रत्याशी चयन की कवायद में जुटी हैं 1 व्यापक व बृहद प्रभावी पार्टीयां कांग्रेस और भाजपा की चयन सूचीयां अभी कॉंट छॉंट और रद्दोबदल के दौर में हैं जो कि दीपावली के बाद क्रमवार घोषित होंगीं जिसमें स्पष्टत: मुरैना व दिमनी विधानसभा अंतिम समय तक रोकीं जायेंगीं । इन विधानसभाओं पर संभवत: सबसे आखिरी सूची में ही कांग्रेस व भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित करेंगें । जहॉं कुछ विश्लेषक अबकी बार दिमनी विधानसभा को सर्वाधिक संवेदन शील सीट मान कर चल रहे हैं वहीं भारी हिंसा व उपद्रव की आशंका भी जता रहे हैं । आईये अब देखते हैं कि वस्तुस्थिति क्या है । वस्तुत: मुरैना विधानसभा सीट अभी कई पेचो खम में फंसी है अव्वल तो बहुजन समाज पार्टी ने अपना पिछला प्रत्याशी दोहरा कर परशुराम मुद्गल को मुरैना सीट पर उतारने की धोषणा की है वहीं पिछली बार परशुराम मुद्गल के मुकाबले ब्राह्मण समाज के अन्य कद्दावर नेता बलवीर सिंह डण्डोतिया को मुरैना लोकसभा का टिकिट का लोभ देकर मौन कर दिया है, यहॉं उल्लेखनीय है कि ब्राह्मण समाज को परशुराम मुदगल की पिछली पराजय का कारण बलवीर डण्डोतिया प्रतीत होते हैं और ब्राह्मणों का तर्क है कि बलवीर डण्डोतिया ने ब्राह्मणों के वोट काट लिये थे वरना परशुराम विजयी होता । उधर भाजपा में वर्तमान विधायक एवं मंत्री रूस्तम सिंह के अलावा जिन अन्य नामों पर मशक्कत हो रही है उनमें नगर पालिका पार्षद अनिल गोयल अल्ली, लक्ष्मीनारायण सिंह हर्षाना, तथा रामस्वरूप गुप्ता, और रामसेवक गुप्ता आदि हैं । अब भाजपा किसे प्रत्याशी बनायेगी ये वक्त बतायेगा । मुरैना सीट पर ही कांग्रेस में राकेश गर्ग, सोवरन सिंह मावई और दिनेश गुर्जर तथा रघुराज सिंह कंसाना पंक्ति में हैं । सपा का मुरैना टिकिट अभी विचाराधीन है । भाजशपा से पंजाब केसरी के पत्रकार गुप्ता, डॉ माहेश्वरी, और मनोरमा जैन स्कूल संचालिका कस्तूरबा स्कूल, उल्लेखनीय हे कि मनोरमा जैन समाजवादी पार्टी से भी टिकिट मांग रहीं हें । दिमनी विधानसभा से सपा द्वारा मोती सिंह गुर्जर, भाजशपा ने शिवचरण उपाध्याय, और बसपा ने रवीन्द्र सिंह तोमर तथा लोक जन शक्ति पार्टी द्वारा प्रेम कुमार जाटव को अपना प्रत्याशी बनाया है कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशी यहॉं अभी घोषित होने बाकी हैं । जौरा और सुमावली के क्षेत्र नये परिसीमन में कुछ बदल कर जातीय गणित यहॉं परिवर्तित हुये हैं । वैसे जातीय गणित तो लगभग हर विधानसभा सीट पर बदल गये हैं । जहॉं मुरैना विधानसभा सीट पर यदि भाजपा वर्तमान रूस्तम सिंह को टिकिट देती है तो भाजपा में एक वजनदारी कायम नजर आती है या फिर किसी एकदम नये व अविवादित चेहरे को लाने पर ही भाजपा का बेड़ा पार संभव नजर आता है । किन्तु वर्तमान में जिन प्रत्याशीयों के नाम भाजपा में उछल रहे हैं मुझे नहीं लगता कि विश्लेषणत्मक तौर पर वे भाजपा को कोई सकारात्मक नतीजा दे पायेंगें । जहॉं रूस्तम सिंह के शहरी वोट अबकी बार कुछ कम होंगे तो ग्रामीण वोट बढ् जायेंगे । रूस्तम सिंह ने ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री रहते भले ही समूचे मध्यप्रदेश और समूचे मुरैना जिला में कोई काम न करवाया हो किन्तु मुरैना विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र विशेषकर गूजर बाहुल्य क्षेत्रों में बहुत काम करवाया है और इन क्षेत्रों को मंत्री ने चकाचक करवा दिया है, वहीं शहर मुरैना के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में भी मंत्री ने खासा काम कराया है । इन क्षेत्रों के मतदाता भाजपा सरकार से भले ही चिढ़े हुये हों लेकिन रूस्तम सिंह पर रीझे और मेहरबान हैं । इस हिसाब से रूस्तम सिंह भाजपा के आज भी वजनदार प्रत्याशी आंके जाते हैं । वहीं दूसरी ओर भाजपा के न्ररपालिका पार्षद अनिल गोयल अल्ली को शहर का वैश्य वर्ग काफी अधिक संख्या में समर्थन देगा वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी वैश्य समुदाय का समर्थन उन्हें मिल जायेगा लेकिन यदि इसी क्रम में यदि भाजशपा यदि पंजाब केसरी के पत्रकार गुप्ता को टिकिट देकर प्रत्याशी बना बैठी तो अनिल गोयल अल्ली को जमानत बचाने के भी लाले पड़ जायेंगे । क्योंकि अल्ली को भाजपा के पारम्परिक वोट के अतिरिक्त अन्य समाज शायद ही वोट दे । जबकि रूस्तम सिंह के मामले में जातीय रूझान केवल मुरैना ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित है और शहरी मतदाता में हर जाति के वोट उन्हें मिलना आसान है । लक्ष्मीनारायण हर्षाना इस सारी दौड़ में अभी काफी पीछे छूट रहे हैं लेकिन उन्हें गुर्जर मतों और कुछ शहरी वैश्य मतों के सहारे अपनी दमदारी नजर आ रही है । भाजपा के ही अन्य नेता रामसेवक गुप्ता पूर्व विधायक एवं रामस्वरूप गुप्ता की स्थिति अभी कमजोर नजर आ रही है, लम्बे समय की निष्क्रियता से उन्हें अभी आउटडेटेड माना जायेगा तो उपयुक्त होगा । बहुजन समाज पार्टी के विवादित नेता परशुराम मुद्गल पिछली बार हुयी गलतियों को अब दोहराने के मूड में नहीं हैं और अबकी बार पूरा जोर जान लगाकर मुरैना विधानसभा के परिणामों को पलटने की कवायद में लगे हैं । हालांकि बसपा नेता मुद्गल पर कई अपराध कराने और उनमें लिप्त होने के आरोप बरकरार हैं साथ ही पुलिस के दलाल के रूप में उनकी छवि बिगड़ी हुयी है लेकिन उनके नजरिये से सारे विश्लेषण और गणित को सामने रखें तो मुरैना विधानसभा के परिणामों में वे करिश्माई बदलाव कर भी सकते हैं । लेकिन यह बदलाव कांग्रेस प्रत्याशी के ऊपर निर्भर करेगा कि कांग्रेस किसे अपना प्रत्याशी बनायेगी । यदि कांग्रेस सोवरन सिंह मावई को पुन: रिपीट करती है और भाजपा भी रूस्तम सिंह को मैदान में रखती है तो यह स्थिति बिल्कुल पिछले वर्ष सन 2003 के विधानसभा चुनाव के मानिन्द होगी । बस फर्क यह होगा कि अबकी बार मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा न होकर त्रिकोणीय संघर्ष होगा और कांग्रेस, बसपा या भाजपा में से कोई भी जीत सकता है किन्तु जीत का अन्तर काफी कम होगा । वैसे सम्भव है कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में रूस्तम सिंह ही विजयी हो जायें क्योंकि जहॉं राजपूत वोटों को अबकी बार बसपा प्रत्याशी परशुराम मुद्गल खींचने की जुगाड़ में हैं तो जाटव समाज के वोट बसपा के विरूद्ध अबकी बार पड़ने की संभावनायें उन्हें कमजोर भी करतीं हैं । ऐसा नहीं कि जाटव वोट केवल मुरैना विधानसभा में ही बसपा के खिलाफ जायेंगे बल्कि समूचे चम्बल क्षेत्र में ही जाटव समाज बसपा क खिलाफ वोटिंग करेगा ऐसा ऐलान जाटव समाज द्वारा किया गया है, इसके पीछे प्रमुख कारण डॉ. पी.पी. चौधरी की हत्या, फूल सिंह बरैया की बगावत और अनीता हितेन्द्र चौधरी की बसपा के खिलाफ खुली ऐलाने जंग है । इस गणित पर बसपा को अबकी बार भरी संख्या में जाटव वोटों के वोट बैंक से हाथ धोकर अन्य वर्ग व जातियों का नया वोट बैंक बनाना होगा । यह एक खास वजह है जिससे बहुजन समाज पार्टी को भारी नुकसान समूची चम्बल घाटी में संभव है । लेकिन यदि बसपा तकनीकी तौर पर अन्य वर्ग जातियों व समाजों का नया वोट बैंक यदि इस दरम्यान उपजा लेती है तो बेशक यह करिश्मा होगा । और वाकई बसपा की दाद देनी पड़ेगी । वैसे यह मुझे मुश्किल जान पड़ता है, कयोंकि किसी भी पार्टी का नया वोट बैंक मुरैना जिला में केवल दिमनी विधानसभा से ही उपज सकता है क्योंकि वर्षो बाद यह सीट आरक्षित से सामान्य हुयी है और पूरी तरह फ्रेश है यहॉं जिस पार्टी की भी फतह होगी भविष्य में समूचे मुरैना जिला पर उसका ही वोट बैंक होगा । क्योंकि दिमनी विधानसभा सीट जहॉं अम्बाह एवं गोहद विधानसभा सीटों पर सीधा सीधा प्रभाव डालेगी (निकटवर्ती एवं तोमर राजपूत बाहुल्य सीटें) वहीं आगामी लोकसभा चुनाव में मुरैना लोकसभा सीट पर भी प्रत्यक्ष पकड़ व प्रभाव रखेगी । लेकिन यह बहुजन समाज पार्टी का दुर्भाग्य कहिये कि फिलवक्त बहुजन समाज पार्टी ने यहॉं उत्तरप्रदेश से आयातित प्रत्याशी दे दिया है सो बहुजन का नया जनाधार व बोट बैंक केवल उसी दशा में संभव होगा जब कांग्रेस और भाजपा किसी कमजोर प्रत्याशी को यहॉं से खड़ा कर इस सीट को थाल में सजा कर बहुजन समाज पार्टी को दें दें ।
क्रमश: जारी अगले अंक में ...... 17 octubre भिण्ड जिला विधानसभा निर्वाचन 2008 राजनैतिक दल आदर्श आचरण संहिता का कड़ाई से पालन करें-कलेक्टर सुहेल अलीभिण्ड जिला विधानसभा निर्वाचन 2008 राजनैतिक दल आदर्श आचरण संहिता का कड़ाई से पालन करें-कलेक्टर सुहेल अली भिण्ड 16 अक्टूबर 2008 विधानसभा निर्वाचन 2008 के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों के लिये आदर्श संहिता जारी कर दी गई है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री सुहेल अली ने राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों से इस आचरण संहिता का पालन करने की अपेक्षा की है। ताकि निष्पक्ष, शांतिपूर्ण निर्विघ्न सम्पन्न हो सके। किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नही करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों और धर्मो या भाषायी समुदायों के बीच मतभेदों को बढाये या घृणा की भावना उत्पन्न करें या तनाव पैदा करे। जब अन्य राजनैतिक दलों की आलोचना की जाय, तब वह उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पुराने आचरण और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिए। यह भी आवश्यक है कि व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नही की जाना चाहिए जिनकी सत्यता प्रमाणित न हुई हो या तोड मरोड़ कर कही गई बातों पर आधारित हो। मत प्राप्त करने के लिए जातीय या साम्प्रदायिक भावनाओं की दुहाई दी जानी चाहिए। मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वाचन प्रचार के लिये मंच के रूप में उपयोग नही किया जाना चाहिए। सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यो से ईमानदारी के साथ बचना चाहिए। जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्ट आचरण और अपराध है जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को अभित्रस्त करना मतदाताओं का प्रतिरूपण, मतदान केन्द्र के 100 मीटर भीतर (चुनाव प्रचार) करना, मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय को खत्म होने वाली 48 घण्टे की अवधि के दौरान सार्वजनिक संभाएें करना और मतदाताओं को सवारी से मतदान केन्द्रों तक ले जाना और वहां से वापस लाना। सभी राजनैतिक विचारों या कार्यो का कितने ही विरोध क्यो न हो, व्यक्तियों के विचारों या कार्यो का विरोध करने के लिये उनके घरों के सामने प्रदर्शन आयोजित करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थिति में नही लेना चाहिए। किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को झण्डा खडा करने, बैनर टांगने, सूचना चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिये किसी व्यक्ति की भूमि, भवन, अहाते, दीवार आदि का उसकी सहमति के बिना उपयोग नही की जानी चाहिए। राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोजित सभाओं, जुलूसों आदि में बाधाएं उत्पन्न न करें या उन्हें भंग न करें। एक राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं या शुभचिंतकों को दूसरे राजनैतिक दल द्वारा आयोजित सार्वजनिक सभाओं में मौखिक रूप से या लिखित रूप से प्रश्न पूछ कर या अपने दल के परचे वितरित करके गडबडी पैदा नही करना चाहिए। किसी दल द्वारा जुलूस उन स्थानों से होकर नही ले जाने चाहिए जिन स्थानों पर दूसरे दल द्वारा संभाएं की जा रही है एक दल द्वारा निकाले गये पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ता द्वारा हटाये नही जाने चाहिए। राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को किसी प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों को उपयुक्त समय पर सूचना दे देनी चाहिए ताकि उनके द्वारा यातायात को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिये आवश्यक व्यवस्था की जा सके। राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को उस दशा में पहले ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस स्थान पर जहां सभा करने का प्रस्ताव है, कोई निर्बाधात्मक या प्रतिबंधात्मक आदेश (निषेधाज्ञा) लागू तो नही है, यदि ऐसे आदेश लागू हो तो, उनका कडाई के साथ पालन किया जाना चाहिए। यदि ऐसे आदेशों से कोई छूट अपेक्षित हो तो उनके लिये समय से आवेदन करना चाहिए और छूट प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि किसी प्रस्तावित सभा के संबंध में लाउडस्पीकरों के उपयोग या किसी अन्य सुविधा के लिये अनुमति या अनुज्ञप्ति (लाईसेन्स) प्राप्त करनी हो तो दल या अभ्यर्थी को संबंधित अधिकारी के पास काफी पहले ही आवेदन करना चाहिए और इसकी अनुमति या अनुज्ञप्ति प्राप्त कर लेनी चाहिए। किसी सभा के आयोजकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे सभा में विध्न डालने वाले या अन्यथा अव्यवस्था फैलाने का प्रयत्न करने वाले व्यक्तियों से निपटने के लिये डयूटी पर तैनात पुलिस की सहायता प्राप्त करें, आयोजकों को चाहिए कि वे स्वयं ऐसे व्यक्तियों के विरूद्व कोई कार्यवाही न करे। जुलूस का आयोजन करने वाले दल या अभ्यर्थी को पहले ही यह बात तय कर लेनी चाहिए कि जुलूस किस समय और किस स्थान से शुरू होगा, किस मार्ग से होकर जायेगा और किस समय और किस स्थान पर समाप्त होगा। सामान्यत: कार्यक्रम में कोई फेरबदल नही होनी चाहिए। आयोजकों को चाहिए कि वे कार्यक्रम के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को अग्रिम सूचना दे दें, ताकि वे आवश्यक व्यवस्था कर सकें। आयोजकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि जिन इलाकों से होकर जुलूस गुजरना है उनमें कोई (निषेधाज्ञा) तो लागू नही है, जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा विशेष रूप से छूट न दी जाए, उन निर्वाधनों का पालन करना चाहिए। यातायात के नियमों और निर्बधनों का भी ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए। आयोजको को चाहिए कि जुलूस ऐसे ढंग से निकाला जाये जिससे कि यातायात में कोई रूकावट या बाधा उत्पन्न किये बिना जुलूस का निकलना संभव हो सके। यदि जुलूस बहुत लम्बा है तो उसे उपयुक्त लम्बाई वाले टुकडों में संगठित किया जाना चाहिए, ताकि सुविधाजनक अंतरालों पर विशेषकर उन स्थानों पर जहां जुलूस को चौराहों से होकर गुजरना है, रूकें हुये यातायात के लिए समय समय पर रास्ता दिया जा सके और इस प्रकार भारी यातायात के जमाव से बचा जा सके। जुलूसों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि जहां तक हो सके उन्हें सड़क की दायी ओर रखा जाए और डयूटी पर तैनात पुलिस के निर्देशों और सलाह का कड़ाई के साथ पालन किया जाना चाहिए। यदि दो या अधिक राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों ने लगभग उसी समय पर उसी रास्ते या उसके भाग से जुलूस निकाले का प्रस्ताव किया है, तो आयोजको को चाहिए कि वे समय से काफी पहले आपस में संपर्क स्थापित कर ले और ऐसी योजना बनाये जिससे कि जुलूसों में टकराव न हो या यातायात को बाधा न पहुंचे। स्थानीय पुलिस की सहायता संतोषजनक इंतजाम करने के लिये सदा उपलब्ध होगी। इस प्रयोजन सहायता संतोषजनक इंतजार करने के लिय सदा उपलब्ध होगी। इस प्रयोजन के लिए दलों को यथाशीघ्र पुलिस से संपर्क स्थापित करना चाहिए। जुलूस में शामिल लोगों द्वारा ऐसी चीजे लेकर चलने के विषय में, जिनका अवांछनीय तत्वों द्वारा, विशेष रूप से उत्तेजना के क्षणों में दुरूपयोग किया जा सकता हो, राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों को अधिक से अधिक नियंत्रण करना चाहिए। किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को अन्य राजनैतिक दलों के सदस्यों या उनके नेताओं के पुतलें लेकर चलने, उनको सार्वजनिक स्थान में जलाने और इसीप्रकार के अन्य प्रदर्शनों का समर्थन नही करना चाहिए। सभी राजनैतिक दलों व अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे यह सुनिश्चत करे कि मतदान शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से हो और मतदाताओं को इस बात की पूरी स्वतंत्रता हो कि वे बिना किसी परेशानी या बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके, निर्वाचन कर्तव्य पर लगे हुये अधिकारियों के साथ सहयोग करें। अपने प्राधिकृत कार्यकर्ताओं को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें। इस बात से सहमत हो कि मतदाताओं की उनके द्वारा दी गई पहचान पर्चियां सादे कागज पर होगी और उन पर कोई चिन्ह अंकित नही होना चाहिए उसके पूर्व के 24 घण्टे के दौरान किसी को शराब पेश या वितरित न करें। राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों द्वारा मतदान केन्द्रों के निकट लगाए गए कैम्पों के नजदीक अनावश्यक भीड़ इकटठी न होने दे जिससे दलों और अभ्यर्थियों के कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में आपस में मुकाबला और तनाव न होने पावे। यह सुनिश्चित करें कि अभ्यर्थियों के कैम्प साधारण हो, उन पर कोई पोस्टर, झण्डे, प्रतीक या कोई अन्य प्रचार सामग्री प्रदर्शित न की जाये, कैम्पों में खाद्य पदार्थ पेश न किये जाएं और भीड़ न लगाई जाए। मतदान के दिन वाहन चलाने पर लगाये जाने वाले निर्बधनों का पालन करने में प्राधिकारियों के साथ सहयोग करें और वाहनों के लिए परिमिट प्राप्त कर ले और उन उन्हें वाहनों पर ऐसे लगा दे जिससे वे साफ साफ दिखाई देते रहे। मतदाताओं के सिवाय कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गये विधिमान्य पास के बिना मतदातन केन्द्रों में प्रवेश नही करेगा। निर्वाचन आयोग प्रेक्षक नियुक्त कर रहा है। यदि निर्वाचनों के संचालन के संबंध में अभ्यर्थियों या उनके अभिकर्ताओं को कोई विशिष्ट शिकायत या समस्या हो तो वे उसकी सूचना प्रेक्षक को दे सकते है। सत्ताधारी दल को, चाहे वह केन्द्र में हो या संबंधित राज्य हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह शिकायत करने का मौका न दिया जाए कि उस दल ने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिये अपने सरकारी पद का प्रयोग किया है, और विशेष रूप से मंत्रियों को अपने शासकीय दौरों को निर्वाचन में निर्वाचन से संबंधित प्रचार कार्य के साथ नही जोडना चाहिए और निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुयें शासकीय मशीनरी अथवा कर्मियों का प्रयोग नही करना चाहिए। सरकारी विमानों, गाड़ियों सहित सरकारी वाहनो, मशीनरी और कर्मियों का सत्ताधारी दल के हित को बड़वा देने के लिये प्रयोग नही किया जाएगा। सत्ताधारी दल को चाहिए कि वह सार्वजनकि स्थान जैसे मैदान इत्यादि पर निर्वाचन सभाएं आयोजित करने और निर्वाचन के संबंध में हवाई उड़ानों के लिए हैलीपेडों के इस्तेमाल करने के लिये अपना एकाधिकार न जमाए, ऐसे स्थानों का प्रयोग दूसरें दलों और अभ्यर्थियों को भी उन्ही शर्तो पर करने दिया जाए जिन शर्तो पर सत्ताधारी दल उनका प्रयोग करता है। सत्ताधारी दल या उसके अभ्यर्थियों का विश्राम गृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकारी आवासों पर एकाधिकार नही होगा और ऐसे आवासों का प्रयोग निष्पक्ष तरीके से करने के लिये अन्य दलों और अभ्यर्थियों को भी अनुमति दी जाएगी। किन्तु कोई भी दल या अभ्यर्थियों ऐसे आवासों का (इनके साथ परिसरों सहित) प्रचार कार्यालय के रूप में या निर्वाचन प्रोपेगण्डा के लिए कोई सार्वजनिक सभा करने की दृष्टि से प्रयोग नही करेगा या उसे प्रयोग करने की अनुमति नही दी जाएगी। निर्वाचन अवधि के दौरान, राजनैतिक समाचारों तथा प्रचार की पक्षपातपूर्ण व्याप्ति के लिये सरकारी खर्चे से समाचार पत्रों में या अन्य माध्यमों से ऐसे विज्ञापनों का जारी किया जाना तथा सरकारी जन माध्यमों का दुरूपयोग कर्तव्यनिष्ठ हो कर बिल्कुल बंद रहना चाहिए जिनमें सत्ताधारी दल के हितों को अग्रसर करने की दृष्टि से उनकी उपलब्धियां दिखाई गई हो। मंत्रियों और अन्य प्राधिकारियों को उस समय से जब से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन घोषित किए जाते है। मंत्री और अन्य प्राधिकारी, उस समय से जब से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन घोषित किए जाते है। किसी भी रूप से कोई भी वित्तीय मंजूरी या बचन देने की घोषणा नही करेगें और (सिवाय लोक सेवको) किसी प्रकार की परियोजनाओं अथवा स्कीमों के लिए आधार पर शिलाएं आदि नही रखेंगे और सड़कों के निर्माण का कोई वचन नही देगें, पीने के पानी की सुविधाये नही देगे आदि और शासन सार्वजनिक उपक्रमों आदि में कोई भी तदर्थ नियुक्ति नही करेगें, यदि जिससे सत्ताधारी दल के हित में मतदाता प्रभावित हो। केन्द्रीय या राज्य सरकार के मंत्री, अथ्यर्थी या मतदाता या प्राधिकृत अभिकर्ता की अपनी हैसियत को छोडकर किसी भी मतदान केन्द्र या गणना स्थल में प्रवेश नही करेगें।
अखिल भारतीय ग्वालियर स्वर्ण कप फुटबॉल प्रतियोगिता शुरू उद्धाटन मैच में कालीकट केरला ने भोपाल इलेबन को हरायाअखिल भारतीय ग्वालियर स्वर्ण कप फुटबॉल प्रतियोगिता शुरू उद्धाटन मैच में कालीकट केरला ने भोपाल इलेबन को हराया ग्वालियर दिनांक 15.10.2008: नगर निगम ग्वालियर द्वारा आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय ग्वालियर स्वर्ण फुटबॉल प्रतियोगिता के उद्धाटन मैच में आज यहां कालीकट केरला ने भोपाल इलेवन को शून्य के मुकाबले चार गोलों से पराजित किया। प्रतियोगिता का उद्धाटन राकेश बंसल अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, म0प्र0 के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता निगमायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने की। जीवाजी विश्वविद्यालय के
महादजी सिंधिया स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स में आज से शुरू हुई प्रतियोगिता का उद्धाटन
मैच कालीकट केरला और भोपाल इलेवन की टीमों के बीच खेला गया। मध्यांतर तक मुकाबला
काफी संघर्षपूण्र्
प्रतियोगिता का उद्धाटन राकेश बंसल अध्यक्ष राजस्व मण्डल, म0प्र0 के मुख्य आतिथ्य और नगर निगम आयुक्त डॉ. पवन शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि ने उद्बोधन में आयोजक नगर निगम को शुभकामनायें देते हुये आयोजन को निरंतर किये जाने की आशा व्यक्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये निगमायुक्त डॉ. शर्मा ने कहा कि यह टूर्नामेंट गत 30 वर्षों से बंद पड़ा था जिसे स्थानीय खिलाड़ियों की खेल भावनाओं को मद्देनजर रखते हुये इसे पुन: विगत वर्ष से शुरू कराया गया और इसे निरंतर आयोजित किया जाता रहेगा। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग ले रहीं सभी टीमों को शुभकामनायें दी। प्रांरभ में अपर आयुक्त सुरेश शर्मा, लेखाधिकारी दिनेश बाथम, खेल अधिकारी सत्यपाल सिंह चौहान, जमील अहमद जिला खेल एवं युवक कल्याण अधिकारी आदि ने अतिथिद्वय का पुष्पाहारों से स्वागत किया, इस अवसर पर वरिष्ठ खिलाड़ी किशन सिंह डोंगरा, नारायण प्रसाद कटारे, ए.टी. निम्बालकर प्रोफेसर सीताराम शर्मा, डॉ. केशव सिंह गुर्जर, के.के. कल्याणकर, के.के. तिवारी, के.एन. कपूर, बावनराव रोमन, रामेश्वर भदौरिया आदि विशेष रूप से उपस्थित थे। अतिथि द्वय में दोनों टीमों के खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर मैच का शुभारम्भ कराया, शुभारम्भ की घोषणा होते हुये सम्पूर्ण वातावरण में धमाकों की आवाज से गूंज पड़ा और आसमान में रंग बिरंगे गुब्बारे हिलोरे लेने लगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने तथा आभार प्रदर्शन आयोजन सहसचिव सत्यपाल सिंह चौहान ने किया। विशेष दर्शकों में निगम के पूर्व महापौर रघुनाथराव पापड़ीकर, चिमनभाई मोदी तथा निगम की खेल प्रभारी श्रीमती हेमलता भदौरिया उपस्थित थीं। आज के मैच 1. अमेटी यूनाईटेड फुटबॉल क्लब गुडगांव विरूद्व सिख रेजीमेंट, झारखण्ड (12 बजे) 2. यंग मैन क्लब नीमच विरूद्व लुधियाना क्लब पंजाब, (2 बजे) 3. एल.एन.आई.पी.ई. विरूद्व सेन्ट्रल रेल्वे नागपुर (3.30)
16 octubre अकाटय तर्क और भीड़, ग्वालियर समाचार और चम्बल की आवाज पर पाठक श्री सुरेश शर्मा की टिप्पणी युक्त रायFrom:
सुरेश कुमार शर्मा ने
आपकी पोस्ट "
मध्यप्रदेश को समृध्द
एवं विकसित राज्य बनाया जावेगा... " पर
एक टिप्पणी छोड़ी है:
Subject: RE: Your blog entry "जनता के दुख सुख में शिवराज उनका सहभागी है-मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रत्येक पॉच किलो मीटर पर हाईस्कूल " Sent: October 15 8:25:40 AM
14 octubre शॉपिंग माल, सिनेमा हॉल, बैंक, होटल तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में 15 दिनों के भीतर डीएफएमडी लगाने के निर्देशशॉपिंग माल, सिनेमा हॉल, बैंक, होटल तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में 15 दिनों के भीतर डीएफएमडी लगाने के निर्देश सुरक्षा उपायों पर प्रभावी अमल के उद्देश्य से कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न ग्वालियर 13 अक्टूबर 08। शॉपिंग माल, सिनेमा हॉल, बैंक, होटल तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से कहा गया है कि वे 15 दिवसों के भीतर समस्त प्रवेश द्वारों पर डी.एफ.एम.डी. (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) आवश्यक रूप से लगवालें, अन्यथा उनके विरूध्द वैधानिक कार्रवाई की जायेगी। बीते दिनों देश के विभिन्न शहरों में हुई आतंकवादी घटनाओं को ध्यान में रखकर नगर में एहतियात बतौर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के मकसद से बुलाई गई बैठक में जिला कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने उक्त प्रतिष्ठानों के संचालकों से कहा कि डी.एफ.एम.डी. नागरिक सुरक्षा के साथ भवनों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। अत: सभी इस काम को गंभीरता से अंजाम दें। यहां राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान में सम्पन्न हुई इस बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री व्ही.के. सूर्यवंशी , नगर निगम आयुक्त डॉ. पवन शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर वर्मा, अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री आदित्य सिंह तोमर , नगर दण्डाधिकारी श्री राजेश बाथम, नगर के विभिन्न शाँपिंग मॉल, होटल व सिनेमा हॉल के संचालक गण, बैंक प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। जिला कलेक्टर श्री आकश त्रिपाठी ने कहा सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित कर बड़े हादसों से बचा जा सकता है। अत: ऐसी कोशिश करें कि शॉपिंग मॉल, होटल, सिनेमा हाल व बैंक आदि में एक ही एण्ट्री पॉइण्ट हो और उसे डी.एफ.एम.डी. लगाकर सुरक्षित कर दिया जाय, जिससे प्रवेश लेने वाले हर व्यक्ति की बारीकी से जांच हो सके। उन्होंने होटल व विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से कहा कि वे होटल में प्रवास करने वाले लोगों व नये कामगारों की सूची हर दिन संबंधित पुलिस थानों को अवश्य दें। उन्होंने मकान मालिकों से भी अपील की कि वे अपने किरायेदारों की सूची आवश्यक रूप से पुलिस थानों में दें। उल्लेखनीय है कि जिला दण्डाधिकारी द्वारा पूर्व में ही धारा 144 के तहत एक आदेश जारी कर शॉपिंग माल, होटल , सिनेमाघर, व बैंक आदि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में डी.एफ.एम.डी. लगाने के निर्देश दिये जा चुके हैं। इसी तरह एक अन्य आदेश के तहत मकान मालिकों से किराये दारों की सूची व होटल मालिको से प्रतिदिन ठहरने वाले रहवासियों की सूची पुलिस थानों में अनिवार्य रूप से भेजने के लिए कहा गया है। पुलिस अधीक्षक श्री व्ही.के. सूर्यवंशी ने कहा डी.एफ.एम.डी. अच्छी गुणवत्ता के होने चाहिए, जिससे कोई भी व्यक्ति अवांछित वस्तु लेकर प्रवेश न कर सके। उन्होने कहा संबंधित प्रतिष्ठान इस संबंध में पुलिस से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है। पुलिस अधीक्षक ने होटल संचालकों से भी कहा कि वे हर ठहरने वाले व्यक्ति से आई.डी. प्रूफ अवश्य लें। साथ ही डिजटल कैमरे के माध्यम से होटल में आने वाले हर आगन्तुक की फोटो लेकर उसे सुरक्षित रखें। उन्होने कहा कि देश के विभिन्न शहरों में बीते दिनों हुई आतंकवादी घटनाओं में यह बात खुलकर सामने आई है कि अराजक तत्व छद्म नाम से होटल व किराये पर मकान लेकर रहने लगते है। यदि समय रहते अर्थात आरंभ में ही पुलिस को आगंन्तुकों व किरायेदारों की सूची मिल जाये तो वह बारीकी से जांच कर अराजक तत्वों का पता लगा सकती है। साथ ही सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ कर कारगर कदम उठाये जा सकते हैं। नर्सिंग होम, धार्मिक स्थल तथा अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के संबंध में भी बैठक में गहन चर्चा हुई। जिला कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त से कहा कि अब नये व्यावसायिक भवनों को तभी अनुमति प्रदान करें जब उनमें डी.एफ.एमडी. का स्पष्ट प्रावधान हो। कलेक्टर ने जन सामान्य से भी अपील की है कि वे सुरक्षा उपायों का पालन कर सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
12 octubre खास खबर: विचाराधीन कैदियों को मिले मताधिकार, ऐहतियातन हिरासत नहीं हो अनिश्चित काल तकखास खबर: विचाराधीन कैदियों को मिले मताधिकार, ऐहतियातन हिरासत नहीं हो अनिश्चित काल तकराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने की सिफारिशेंयाहू हिन्दी से साभारनई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विचाराधीन कैदियों को मतदान करने की अनुमति दिए जाने की वकालत की है। साथ ही कहा है कि एहतियातन हिरासत की अवधि अनिश्चितकाल तक नहीं होनी चाहिए। हिरासत में बंद कैदियों के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है कि विचाराधीन कैदियों को भी मताधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। इससे उनमें एक सम्मान की भावना जागृत होगी और उन्हें समाज के एक हिस्सा के रूप माना जाएगा। मानवाधिकार आयोग ने समाज की भागीदारी के लिए खुले कारागार की भी वकालत की है। आयोग ने यह भी कहा है कि विचाराधीन अथवा गैर जमानती व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है लेकिन उसे मताधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। कैदियों को मतदान का अधिकार दिए जाने से उनके रवैये में बदलाव लाने में मदद मिलेगी। इसमें यह भी कहा गया है कि एहतियातन हिरासत की अवधि अनिश्चितकाल के लिए नहीं हो सकती। इसलिए आयोग ने इसे कम कर एहतियातन हिरासत की न्यूनतम अवधि साठ दिन तथा अधिकतम अवधि 180 दिन तक करने की सिफारिश की है। आयोग ने सरकार को विचाराधीन कैदियों तथा दोषियों के लिए अलग अलग कारागार बनाने की सलाह भी दी है। आयोग ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि प्रदेश सरकारों को हिरासत में कैदियों का खास ख्याल रखना चाहिए तथा उनके मानवाधिकारों को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
दैनिक भास्कर ने भारी एण्टी इंकम्बेन्सी फैक्टर और जन मुद्दों की चेतावनी दीदैनिक भास्कर ने भारी एण्टी इंकम्बेन्सी फैक्टर और जन मुद्दों की चेतावनी दी भास्कर ने अप्रत्यक्ष चेतावनी दी बदल रही हैं राज्यों में सरकार, परिवर्तन की आहट और सत्ता दल की देहरी पर संकट की दस्तक असलियत से दूर रहने का दण्ड भुगतेंगें सत्ता दल बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, विकास और मूलभूत समस्यायें खोपड़ी घुमा रहीं हैं मतदाता की मुरैना 12 अक्टूबर 08, अंचल के लोकप्रिय व सर्वाधिक प्रसार संख्या वाले हिन्दी दैनिक दैनिक भास्कर द्वारा चुनावी मुद्दों पर मतदाताओं के रूझान परीक्षण हेतु आयोजित सर्वे में प्राप्त परिणामों साफिया तौर पर सचेत कर दिया है कि तीन राज्यों में राजस्थान , छत्तीस गढ़ और मध्यप्रदेश में भारी सत्ता विरोधी लहर है । दैनिक भास्कर ने स्पष्ट चेताया है कि बेरोजगारी प्रमुख व स्पष्टत: प्रथम स्मरणीय मुद्दा जनता ने चुना है उसके बाद भ्रष्टाचार और विकास तथा मूलभूत समस्यायें क्रम पर आयीं हैं यानि बिजली पानी और सड़क तथा अन्य । दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित इस खुलासे की रिपोर्ट का विश्लेषण करें तो मध्यप्रदेश में स्थिति अत्यधिक चिन्तनीय है क्योंकि सबसे अधिक एण्टी इंकम्बेन्सी मध्यप्रदेश में ही है । राजस्थान और छत्तीसगढ़ में यह लहर कुछ कम है । लेकिन भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दे तीनों ही राज्यों में खतरनाक स्थिति में तैर रहे हैं । बेरोजगारी तो तीनों ही राज्यों में सुरसा के मुंह की तरह विस्तारित है । जबकि मध्यप्रदेश में सरकार जिस विकास के मुद्दे पर अपना डंका बजाने में लगी है उसका नब्बे फीसदी भाग केन्द्र सरकार की योजनाओं पर आश्रित है यानि केवल दस फीसदी जिस विकास की बात राज्य सरकार करना चाह रही है वह भी अभी तक केवल पत्थर गाड़ कर महज शिलान्यासी पत्थरों यानि प्रदेश को कब्रिस्तान बनाने तक सीमित है । दैनिक भास्कर के सर्वे से एक बात और साफ होती है कि जनता अब समझदार और जागरूक हो चुकी है तथा झुनझुनों और घोषणाओं से उकता चुकी है तथा काम करने वाली सच बोलने और करके दिखाने वाली सरकार में यकीन रखती है । प्रश्न यह नहीं कि कौन जीतेगा या कौन हारेगा और न दैनिक भास्कर ने कोई एक्जिट पोल कराया बस जनता के दिल की बात को जाना और खुल कर जाना । मीडिया परिक्षेत्र द्वारा पहली बार दस प्रकार का अद्भुत सर्वे किया जिसमें जनता को खुल कर अपनी बात अपने ढंग से कहने का मौका दिया गया । और मामला भी साफ हो गया । सर्वे में दैनिक भास्कर के तीनों राज्यों के लाखों पाठकों ने शिरकत की थी । एक्जिट पोल जैसे प्रायोजित और फर्जी सर्वे के बजाय ऐसे स्वस्थ व स्वच्छ सर्वे के लिये दैनिक भास्कर साधुवाद का पात्र है । बिजली ठप्प ठप्पा ठप्प, पूरे दिन भर के साथ शाम भी झेली लागों ने ब्लैक आउट की मारबिजली ठप्प ठप्पा ठप्प, पूरे दिन भर के साथ शाम भी झेली लागों ने ब्लैक आउट की मार मुरैना 12 अक्टूबर 08, लोगों ने नव दुर्गा और दशहरा तो भारी बिजली कटौती के रहते मना भी लिया और गुजार भी लिया लेकिन उसके बाद अभी और ज्यादा फजीहत झेलनी थी यह अंदाजा अंचलवासीयों यानि चम्बलवासीयों को नहीं था । पर्वोत्सव काल के समापन उपरान्त स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो गयी है । हालांकि हमने पर्वोत्सव काल के दरम्यान बिजली कटौती पर खास कवरेज किया है और जल्दी ही रिलीज भी करेंगें । जिसमें बिजली कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारीयों से हमने मजेदार बातें कीं हैं और रिकार्डिग भी की है । जिसे जान सुन कर आप भी हैरत में पड़ जायेंगें । ग्रामवासीयों और शहरवासीयों के साथ ही हमने बिजली कटौती की सजीव वीडियो एवं फोटो रिकार्डिंग भी की है । इसका प्रसारण भी हम करने जा रहे हैं । मगर अब हाल ए शनिवार यानि अमिताभ बच्चन के जन्म दिन को मुरैना शहर और ग्रामीण परिक्षेत्र में सुबह आठ बजे से गुल हुयी बिजली रात आठ बजे बहाल हुयी । यानि चौकस ब्लैक आउट यानि चौकस जय श्री राम यानि चौकस जय हिन्द । हम टाटा की नैनो की तकलीफ और आपकी हिमायत का दर्द समझ रहे हैं लेकिन हम उन लाखों गरीब किसानों का क्या करें जिनके घर चूल्हे नहीं जल रहे, उन शहर वासीयों का क्या करें प्रभु जो न नहा पा रहे हैं न पीने का पानी भर पा रहे हैं न दिन में चैन से रोटी खा पा रहे हैं न रात को । लोग बिलख रहे हैं तड़प रहे हैं कराह रहे हैं फिर भी मौन हैं । इसका अर्थ है कि हमें मौन नहीं रहना चाहिये । सो भईया सच तो बोला जायेगा, जितना दबाओगे उससे अधिक ताकत के साथ बोला जायेगा । जो उखाड़ सको उखाड़ लेना । जय हिन्द ।
पोषण-जीवन का सेहत भरा तरीकापोषण-जीवन का सेहत भरा तरीका डॉ. संतोष जैन पासी पर्याप्त भोजन, कपड़े और आवास जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं हैं जिनमें से भोजन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। भोजन न सिर्फ भूख को संतुष्ट करता है बल्कि विभिन्न गतिविधियों के लिए पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है और हमे स्वस्थ रखता है। खाना ग्रहण करने, हज़म करने और अवशोषण करने के बाद शरीर इसे विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग करता है। यह शरीर के कार्यों को करने और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है। पोषण, भोजन और स्वास्थ्य से उसके संबंध का विज्ञान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की संकल्पना को इस प्रकार परिभाषित किया है- '' न सिर्फ बीमारी या अशक्तता का अभाव बल्कि सम्पूर्ण भौतिक, सामाजिक और मानसिक रूप से अच्छे रहन-सहन की दशा।'' पोषण और स्वास्थ्य पर्यायवाची शब्द हैं, परंतु अच्छे पोषण के बिना स्वास्थ्य बेहतर नहीं हो सकता। पोषण ऐसा विज्ञान है जो प्रकृति एवं भोजन में पौष्टिक तत्वों के वितरण, उनके उपापचयी प्रभाव और अपर्याप्त खाना खाने के परिणामों से संबंधित है। पौष्टिक तत्व भोजन में पाए जाने वाले वे रासायनिक यौगिक हैं जो भोजन में अवशोषित होकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। कुछ ऐसे आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं जिन्हें हमारा शरीर संश्लिष्ट नहीं कर सकता। उनकी आपूर्ति आहार के द्वारा ही की जानी चाहिए। आवश्यक पौष्टिक तत्वों में विटामिन, खनिज पदार्थ, एमिनो अम्ल, वसीय अम्ल और ऊर्जा के स्रोत के रूप में कुछ कार्बोहाइड्रेट शामिल हैं। अनावश्यक पौष्टिक तत्व वे होते हैं जो शरीर अन्य यौगिकों से संश्लिष्ट कर सकता है तथापि वे आहार से भी व्युत्पन्न किए जा सकते हैं। पौष्टिक तत्व आमतौर पर वृहत पौष्टिक तत्वों और सूक्ष्म पौष्टिक तत्वों में विभाजित किए जा सकते हैं। वृहत पौष्टिक तत्व आहार और ऊर्जा की आपूर्ति संगठित करने के साथ-साथ शरीर के विकास और उसके विभिन्न क्रियाकलापों के लिए ज़रूरी पौष्टिक तत्व बनाते हैं। कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, सूक्ष्म खनिज तत्व और पानी वृहत पौष्टिक तत्व हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों में विटामिन (पानी और वसा दोनों में घुलनशील) और आवश्यक सूक्ष्म खनिज तत्व शामिल होते हैं। इन पौष्टिक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति अच्छे स्वास्थ्य, कार्यात्मक दक्षता एवं उत्पादकता के लिए बुनियादी मूलभूत ज़रूरत है। पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन करने से पौषणिक स्थिति बढ़ती है और उसके फलस्वरूप मनुष्यों की सेहत अच्छी रहती है। पौष्टिक और पर्याप्त भोजन वह होता है जो शरीर की ज़रूरतों के अनुसार सभी पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है। संतुलित आहार के जरिए अच्छा पोषण मिलता है जिससे आवश्यक और अनावश्यक पौष्टिक तत्व सही व संतुलित रूप में शरीर को मिलते हैं। उच्च स्तर के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए ऐसा होना बहुत ज़रूरी है। पोषण न सिर्फ समुचित शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह पर्याप्त प्रतिरक्षा क्षमता और ज्ञानात्मक विकास भी सुनिश्चित करता है। शाकाहारी आहार अधिक पौष्टिक होते हैं। पादप उत्पाद जटिल कार्बोहाइड्रेट (आहारीय रेशे), B- कैरोटीन जैसे विटामिन, विटामिन E , एक्रोबिक अम्ल, थियामिन, राइबोफ्लेविन और फोलिक अम्ल तथा अनेक खनिज पदार्थ विशेषरूप से लोहा, कैलशियम, सोडियम, पोटेशियम और आयोडीन का समृध्द स्रोत होते हैं। वे पादप रसायनों और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी समृध्द स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त, पादप मूल के ज्यादातर खाद्य पदार्थों में (तेल और तिलहनों को छोड़कर) वसा की अधिक मात्रा नहीं होती है और इनमें मौजूद वसा अपाश्चुरीकृत वसीय अम्लों- MUFAs और PUFAs में समृध्द होते हैं जो अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी होते हैं। उनमें से कुछ आवश्यक वसीय अम्ल के नाम से जाने जाते हैं। शाकाहारी खाद्य पदार्थों में कोलेस्टेरॉल नहीं होता है। शाकाहार रक्त में कोलेस्टेरॉल के स्तर को सामान्य सीमा में रखता है और हृदय धमनी की बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। जिगर हमारे शरीर में कोलेस्टेरॉल संश्लेषण का प्रमुख स्थान है। जिगर में संश्लिष्ट कोलेस्टेरॉल का कुछ अंश पित्त अम्लों और पित्त लवणों में मिल जाता है। भोजन को पचाने और उसके अवशोषण में मदद करने के लिए आंत में उपस्थित पित्त भोजन को पचाने में मदद करता है । भोजन के पचने के बाद वह जिगर में जाता है जहां उसे फिर से अवशोषित किया जाता है।आहारीय रेशे इस चक्र को बाधित करते हैं ताकि पित्त लवण को फिर से आंत में अवशोषित होने से बचाया जा सके। इसलिए ये बिना पचे भोजन के साथ मलोत्सर्जित हो जाते हैं। रेशे कोलेस्टेरॉल उत्सर्जन को बढ़ाते हैं और जिगर में कोलेस्टेरॉल की उपलब्धता भी कम करते हैं ताकि संचरित रक्त में कोलेस्टेरॉल समृध्द कण (लाइपोप्रोटीन) मिलाएं जा सकें। हाल ही में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि आंत्रिक विषाणु के जरिए रेशों का किण्वन होता है जिसके फलस्वरूप शॉर्ट चेन वसीय अम्ल (SFAcs) बनते हैं जो जिगर में कोलेस्टेरॉल संश्लेषण को बाधित कर सकते हैं। इससे इस तथ्य को बल मिलता है कि साबुत अनाज, दलहन (छिलके सहित) और अनेक फल और सब्जियां आहारीय रेशे का समृध्द स्रोत होते हैं। इसके अतिरिक्त फल और सब्जियां बी- कैरोटीन, विटामिन ई, विटामिन सी, और पादप रसायनों का समृध्द स्रोत होते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं यानी वे रक्त कोलेस्टेरॉल के ऑक्सीकरण को रोकते हैं। यह कोलेस्टेरॉल का मुख्य रूप है जो हमारी धमनियों की भित्तियों में जमा हो जाते हैं। ये कार्डियो प्रोटेक्टिव एजेंट भी मुक्त मूलभूत तत्वों के कारण कोशिका क्षति को रोकते हैं और इसलिए कोशिका का जीवन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। शाकाहारी आहार मधुमेह के उपचार#नियंत्रण में भी मदद कर सकता है। आहारीय रेशे पित्त से ग्लूकोज अवशोषण की दर को नियंत्रित करते हैं और इस प्रकार भोजन के बाद रक्त ग्लूकोज में अत्यधिक वृध्दि नहीं होने देते। भोजन करने के दौरान रक्त ग्लूकोज में तेजी से कमी को भी रोका जा सकता है क्योंकि रेशे गैस को जल्दी नहीं निकलने देते। क्रोमियम और कुछ विशिष्ट विटामिन संशोधित इंसुलिन क्षमता से संबंधित पाए गए हैं। इस प्रकार, शाकाहारी आहार ग्लूकोज सहनशीलता बढ़ाने और विशिष्ट रोगियों में औष्धियों#इंसुलिन की ज़रूरत को कम करने में मदद करते हैं। शाकाहारी आहार कैंसर रोग का जोखिम कम करने में भी मदद कर सकता है क्योंकि आहारीय रेशे अनेक रयायनों और विषैले एजेंट से लिपट जाते हैं और फलस्वरूप उनको मलोत्सर्जन के रास्ते बाहर निकाल देते हैं। अनेक विटामिन और खनिज पदार्थ भी कोशिका भित्ति की अखंडता बनाए रखने में मदद करते हैं। वे डीएनए और आरएनए जैसीे कोशिका के विभिन्न अवयवों को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं जिनसे टयूमर बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पादप खाद्य पदार्थों का उपभोग उच्च रक्त चाप की आशंका को भी कम करता है। पादप खाद्य पदार्थों में मौजूद रेशे आहारीय सोडियम की कुछ मात्रा से लिपट जाते हैं और फलस्वरूप मलोत्सर्जन के जरिए उसे बाहर निकाल देते हैं। पादप खाद्य पदार्थों में पाश्चुरीकृत वसा कम होती है और कोलेस्टेरॉल नहीं होता इसलिए ये रक्त कोलेस्टेरॉल को बढ़ने से रोकते हैं। अतिकोलेस्टेरॉलरक्तता के फलस्वरूप धमनियों में कोलेस्टेरॉल जमा हो जाता है जो अप्रत्यक्ष रूप से रक्त चाप बढ़ने का कारण बनता है। शाकाहारी भोजन संतृप्ति का पूरा अहसास देता है और यह वजन काबू में रखने में भी मददगार है। शोध अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि चार सप्ताह की अवधि तक आहार में रोजाना 15 ग्राम ग्वार गम ( क्लस्टर बीन्स के बीज से प्राप्त) जैसे घुलनशील रेशे शामिल करने से कुल कोलेस्टेरॉल को 13 प्रतिशत कम करने तथा भोजनोत्तर रक्त ग्लूकोज को 21 प्रतिशत कम करने में मदद मिल सकती है। गेंहू के आटे के बदले साबुत बंगाली चने के 50 ग्राम बेसन के उपभोग से कुल कोलेस्टेरॉल को 6.2 प्रतिशत कम करने में सहायता मिल सकती है। सोया आटे और जई के चोकर के अनुपूरकों के मामले में भी ऐसे ही सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि विशुध्द रूप से शाकाहारी आहार ( जिसमें दूध और दूध उत्पाद शामिल न हों ) में प्रोटीन कम होती है। पादप खाद्य पदार्थों में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत दलहन और गिरीदार फल हैं। मोटे अनाज सामान्य स्रोत हैं जबकि फल और सब्जियों में बहुत कम प्रोटीन होता है। इसके इसलिए आहार में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 2-3 सर्विंग साबुत दलहन और कुछ गिरी (बादाम) जरूर खानी चाहिए। साबुत दलहनों को अंकुरित करके, मोटे अनाजों और दलहनों को मिलाकर लेने तथा मोटे अनाजों और दलहनों को खमीर उठा कर उपयोग में लाने से प्रोटीन की जैव-उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है और इस प्रकार आहार को संतुलित बनाने में सहायता मिल सकती है। शाकाहारवाद सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। मौजूदा रहन सहन और आहार संबंधित त्रुटियों के मद्देनजर अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए शाकाहार को अपनाना अच्छा विकल्प है। · स्वतंत्र लेखक इस लेख में व्यक्त विचार पूरी तरह से लेखक के निजी हैं और जरूरी नहीं कि ये पसूका के विचारों से मेल खाते हों।
बेटे के प्यार व बुलन्द हौसले से मिली जीवन की राहबेटे के प्यार व बुलन्द हौसले से मिली जीवन की राह -रामेश्वर लाल मीणा* मिटा दे खाक में खुद को अगर कुछ मर्तबा चाहे कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार होता है। उदयपुर जिले की मावली पंचायत समिति के थामला गांव की निवासी मंजू जोशी को जिन्दगी ने तो ऐसे अंधेरे मोड़ पर ला खड़ा किया था जहां से उम्मीदों के द्वार बंद और मायूसी के साये गहरे नजर आ रहे थे। मंजू पर 3 अगस्त, 2002 को दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ा, वक्त ने ऐसा सितम किया कि उसके दोनों हाथ छिन गए। जन्म जन्मांतर का साथ ही उसका बैरी बन गया। पति और सौतन ने मिलकर उसके हाथ काट दिये। वक्त ने करवट ली और उसने विकलांग होने के बावजूद अपने पैरों पर खड़ा होने का फैसला किया। मंजू ने विकलांगता को हराकर तदबीरें उलट दी। बुलंद हौसला, दृढ निश्चय और पक्के संकल्प से उसके जीवन की दिशा बदल गई। बेटे से प्यार और जीवन की चाहत ने उसे अब सेवा और सम्मान का आधार दे दिया है। मंजू जोशी अब समाजसेवा, महिलाओं में जागरूकता व शिक्षा के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में ''साथिन'' के रूप में काम कर रही है। वह अपने पैरों की अंगुलियों से हस्ताक्षर आदि कर लेती है। मंजू ने बताया कि उसका विवाह 22 अप्रैल, 1996 को साकरोदा गांव में रोशन लाल के साथ हुआ था। विवाह के बाद ससुराल पक्ष के लोग उसके साथ मारपीट करते थे। फिर 2 मई, 1998 को उसे पुत्र की प्राप्ति हुई। उसने बताया कि प्रताड़ना से परेशान होकर वह पीहर चली गई। मंजू चाहती है कि उसके ससुराल पक्ष के दोषी लोगों को सख्त सजा मिले। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने हाल ही में उदयपुर में आयोजित आदिवासी महिलाओं के कार्यक्रम में मंजू को 10 हजार रूपये की सहायता प्रदान की है। मंजू ने बताया कि पुत्र ही अब उसका जीवन है। मंजू अपने पुत्र को पढ़ा लिखाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। साथिन के काम से प्रतिमाह मिलने वाले एक हजार रूपये से वह अपने पुत्र को थामला के एक निजी स्कूल में पढ़ा रही है। पति बना बैरी, मिलकर सौतन के साथ छीन लिए हाथ, पर बेटे के प्यार व बुलंद हौसले से मिली जीवन को राह। & क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, डूंगरपुर
11 octubre शिवराज सरकार के खिलाफ बगावत, प्रचार विभाग गुस्साया छुट्टियों में काम नहीं करेंगे जनसम्पर्क अधिकारी और कर्मचारीशिवराज सरकार के खिलाफ बगावत, प्रचार विभाग गुस्साया छुट्टियों में काम नहीं करेंगे जनसम्पर्क अधिकारी और कर्मचारी
ग्वालियर 10 अक्टूबर ।जनसंपर्क विभाग के मध्यप्रदेश भर के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने प्रस्तावित विभागीय सेटअप लागू कराने में विभागाध्यक्ष के रूचि नहीं लेने के विरोध में वर्क-टू-रूल के तहत अवकाश के दिनों में कोई भी विभागीय कार्य संपादन नहीं करेंगे । यह पहला मौका होगा जब छुट्टियों के दिनों में जनसंपर्क संचालनालय सहित प्रदेश में स्थित सभी जनसंपर्क कार्यालय, सूचना केन्द्र और प्रेस प्रकोष्ठ बंद रहेंगे । अपनी मांगों के लिये मध्यप्रदेश जनसंपर्क अधिकारी संघ, विभागीय तृतीय वर्गीय कर्मचारी संघ, वाहन चालक यांत्रिकी कर्मचारी संघ एवं लघु वेतन कर्मचारी संघ ने एक संयुक्त समन्वय समिति बनाकर विभाग में वर्क-टू-रूल लागू किया है । जिसके तहत अब जनसंपर्क के सभी कार्यालयों, सूचना केन्द्र और प्रेस प्रकोष्ठों में शासकीय कार्य दिवसों में केवल सुबह साढ़े दस बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक काम होगा । छुट्टी के दिनों में काम नहीं होगा। समन्वय समिति की प्रमुख मागों में विभागीय सेटअप की मंजूरी, विभागीय संचालक की पदस्थापना, राज्य सूचना सेवा का गठन, विभाग के कर्मचारी, अधिकारियों को समयमान वेतन की मंजूरी तथा सहायक जनसंपर्क अधिकारी के रिक्त पदों को एक बार पूरी तरह से विभागीय पदोन्नति से भरने की छूट देना शामिल है । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, मुख्य सचिव से संघ के पदाधिकारियों ने तीन बार मुलाकात की इन सभी का रूख सकारात्मक था और इस संबंध में आयुक्त जनसंपर्क को निर्देश दिये थे । लेकिन आयुक्त जनसंपर्क ने इस बारे में सार्थक एवं सक्षम पहल नहीं की, जिसकी बजह से कर्मचारी और अधिकारियों में गंभीर असंतोष व्याप्त है । इसी के परिणाम स्वरूप पहली बार जनसंपर्क में वर्क-टू-रूल लागू किया गया है ।
10 octubre ग्वालियर टाइम्स का इण्टरनेट टी.वी. प्रारंभ, अब घर बैठे ग्वालियर टाइम्स के इण्टरनेट टी.वी. का लुत्फ उठाया जा सकेगाग्वालियर टाइम्स का इण्टरनेट टी.वी. प्रारंभ, अब घर बैठे ग्वालियर टाइम्स के इण्टरनेट टी.वी. का लुत्फ उठाया जा सकेगा मुरैना 8 अक्टूबर 08 । पिछले कई दिनों के गहन परीक्षण के उपरान्त ग्वालियर टाइम्स ने अपने इण्टरनेट टी.वी. ब्राडकास्टिंग के सभी चरण सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिये । उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग एक महीने से ग्वालियर टाइम्स की टीम इण्टरनेट टी.वी. के प्रसारण के प्रायोगिक तकनीकी व व्यावहारिक परीक्षण में जुटी थी । इण्टरनेट टी.वी. के प्रसारण का बेसिक स्ट्रक्चर से लेकर अंतिम सफल प्रसारण योग्य परियोजना को ग्वालियर टाइम्स के टीम लीडर नरेन्द्र सिंह तोमर आनन्द ने तैयार किया है । और इसमें ग्वालियर टाइम्स को उम्मीद से कई गुना अधिक सफलता प्राप्त हो गयी । इण्टरनेट टी.वी. के सफल प्रसारण के साथ ही चम्बल घाटी में जन्मी वेबसाइट ग्वालियर टाइम्स अब विश्व की उन गिनी चुनी चुनिन्दा उच्च प्रौद्योगिकी से सुसज्जित वेबसाइटों में शामिल हो गयी है जो इस अति विशिष्ट व अति उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर, इण्टरनेट को लोकोपयोगी व जन सेवीय बनाने में विश्व के मील के पत्थर साबित हुये हैं । अब टी.वी. प्रसारण के जरिये ग्वालियर टाइम्स के प्रसारण व प्रकाशन में न केवल निखार आ जायेगा बल्कि अब सदृश्य व सजीव प्रसारण तथा लाइव टेलीकास्ट एवं लाइव ब्राडकास्ट इण्टरनेट से सम्भव हो जायेगा । और ग्वालियर टाइम्स का इण्टरनेट टी.वी. विश्व का पहला हिन्दी भाषी इण्टरनेट टी.वी. होगा । अभी तक अन्य भाषाओं में यह चुनिन्दा सेवा उपलब्ध थी । अब समूचे विश्व में चम्बल से सीधे इण्टरनेट टी.वी. का प्रसारण सम्भव होगा । इसकी खास बात होगी कि सीधे केवल मोबाइल फोन से सीधा प्रसारण हो सकेगा । यदि किसी के पास इण्टरनेट सक्षम मोबाइल फोन होगा तो वह कहीं से कभी भी इण्टरनेट टी.वी. पर अपना सीधा प्रसारण कर सकेगा । यह वायरलैस इण्टरनेट से सम्भव हो गया है । इसके कारण जंगल में, या किसी प्राकृतिक आपदा में फंसे व्यक्ति या अन्य मुसीबत में फंसे व्यक्ति को अपना सजीव हाल इण्टरनेट पर समूचे विश्व में प्रसारित करने की सुविधा होगी और वह सहायता पा सकेगा । अति शीघ्र ही इसके चन्द अंतिम प्रसारण कदम पूरे करते ही वेबसाइट पर इसका प्रसारण प्रारंभ कर दिया जायेगा । अभी इसका प्रसारण कुछ तैयारीयां पूरी करने और समाचार वाचकों व अन्य कलाकारों के चयन के लिये तक के समय तक लंबित रखा गया है, प्रारंभ में समाचार वाचन से इसको शुरू किया जायेगा ।
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